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  • चीता प्रोजेक्ट के बाद कूनो नेशनल पार्क में बड़ा बदलाव: सूखे इलाके हुए आबाद, बढ़ी वन्यजीवों की हलचल

    चीता प्रोजेक्ट के बाद कूनो नेशनल पार्क में बड़ा बदलाव: सूखे इलाके हुए आबाद, बढ़ी वन्यजीवों की हलचल


    भोपाल। चीता प्रोजेक्ट के बाद कूनो नेशनल पार्क अब तेजी से बदलते इकोसिस्टम की मिसाल बनता जा रहा है। जिन पहाड़ी और सूखे क्षेत्रों में पहले पानी की भारी कमी रहती थी और गर्मियों में वन्यजीव पलायन कर जाते थे, वहां अब हालात बदल गए हैं। सौर ऊर्जा आधारित सोलर लिफ्ट पंप सिस्टम की मदद से कूनो नदी का पानी अब दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे कई तालाब सालभर भरे रहने लगे हैं।

    वन विभाग ने इस दिशा में दो बड़े सोलर पंप सिस्टम स्थापित किए हैं। ओछापुरा रेंज में 42.5 हॉर्स पावर क्षमता वाला पंप कूनो नदी से पानी उठाकर करीब 15 किलोमीटर दूर और 200 मीटर ऊंचाई पर स्थित तालाबों तक पहुंचा रहा है। वहीं वेस्ट पालपुर रेंज में 22.5 हॉर्स पावर का दूसरा सिस्टम 8 किलोमीटर दूर जलाशयों को भर रहा है। इन प्रयासों के कारण पहले जो तालाब गर्मियों में सूख जाते थे, वे अब लगातार जल से भरे रहते हैं।

    वन विभाग के अनुसार यह बदलाव केवल जल प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर वन्यजीवों के आवास और व्यवहार पर भी दिख रहा है। जिन क्षेत्रों से भेड़िया गर्मियों में पलायन कर जाते थे, वे अब पूरे साल स्थायी रूप से देखे जा रहे हैं। चीतल, सांभर और नीलगाय जैसे शाकाहारी वन्यजीवों को अब पानी की तलाश में भटकना नहीं पड़ता।

    कूनो से एक और बड़ी उपलब्धि सामने आई है। लंबे समय से विलुप्त माने जा रहे दुर्लभ फॉरेस्ट आउलेट (वन उल्लू) की 113 साल बाद वापसी दर्ज की गई है। यह 2025 से यहां देखा जा रहा है, जिसे विशेषज्ञ पारिस्थितिकी तंत्र के मजबूत होने का संकेत मान रहे हैं।

    इतना ही नहीं, कूनो के इतिहास में पहली बार जंगली कुत्तों (ढोल) की मौजूदगी भी दर्ज की गई है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव क्षेत्र में बढ़ते जैव विविधता संतुलन को दर्शाता है।

    पर्यटन के क्षेत्र में भी सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। कूनो में बढ़ती वन्यजीव गतिविधियों के चलते पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है, जिससे स्थानीय स्तर पर नेचर गाइड, पर्यटन सेवाओं और छोटे व्यवसायों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।

    वन विभाग का मानना है कि कूनो अब केवल चीता पुनर्वास परियोजना का केंद्र नहीं, बल्कि एक विकसित होते समृद्ध इकोसिस्टम का उदाहरण बन चुका है, जहां संरक्षण और विकास साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं।

  • कूनो नेशनल पार्क में चीतों की नई शुरुआत, CM मोहन यादव ने दो चीतों को खुले जंगल में छोड़ा

    कूनो नेशनल पार्क में चीतों की नई शुरुआत, CM मोहन यादव ने दो चीतों को खुले जंगल में छोड़ा

    श्योपुर। श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में सोमवार को उस समय महत्वपूर्ण क्षण देखने को मिला जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दो मादा चीतों को खुले जंगल में रिलीज किया। ये दोनों चीते अफ्रीकी देश बोत्सवाना से हाल ही में भारत लाए गए थे। मुख्यमंत्री रविवार शाम कूनो पहुंचे थे और वहीं रात्रि विश्राम के बाद सोमवार सुबह कूनो नदी किनारे स्थित रिलीज साइट पर पहुंचे। जैसे ही चीतों को जंगल में छोड़ा गया, वे तेजी से प्राकृतिक वातावरण की ओर दौड़ पड़े, जिसे देखकर वन विभाग के अधिकारी और उपस्थित अमला उत्साहित नजर आया।

    चीता प्रोजेक्ट और पुनर्स्थापन की प्रक्रिया

    भारत में चीता पुनर्स्थापन परियोजना की शुरुआत लगभग साढ़े तीन साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर की गई थी। इसके तहत अफ्रीकी देशों से चीतों को लाकर कूनो नेशनल पार्क में बसाया जा रहा है। हाल ही में बोत्सवाना से कुल 9 चीते भारत लाए गए थे, जिनमें 5 मादा और 4 नर शामिल हैं। सभी चीतों को पहले क्वारंटीन और फिर सॉफ्ट बाड़ों में रखा गया था। एक महीने की निगरानी के बाद इनमें से दो चीतों को पहली बार खुले जंगल में छोड़ा गया है, जबकि बाकी चीतों को चरणबद्ध तरीके से रिलीज किया जाएगा।

    प्रदेश में चीता स्टेट की पहचान और भविष्य की योजना

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश अब चीता स्टेट के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है और यह परियोजना लगातार सफल हो रही है। वर्तमान में कूनो और गांधी सागर क्षेत्र में कुल 57 चीते मौजूद हैं, जिनमें से अधिकांश कूनो नेशनल पार्क में हैं। अधिकारियों के अनुसार सभी चीते पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें सुरक्षित वातावरण में धीरे-धीरे प्राकृतिक जीवन के लिए तैयार किया जा रहा है। इस अवसर पर कई मंत्री, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और वन विभाग के विशेषज्ञ भी मौजूद रहे। सरकार का मानना है कि यह परियोजना देश में जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगी।

  • कूनो से आयी खुशखबरी: मादा चीता ‘गामिनी’ ने दिया 4 शावकों को जन्‍म, देश में चीतों की संख्या बढ़कर 57 हुई

    कूनो से आयी खुशखबरी: मादा चीता ‘गामिनी’ ने दिया 4 शावकों को जन्‍म, देश में चीतों की संख्या बढ़कर 57 हुई


    श्योपुर। मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान से वन्यजीव संरक्षण को लेकर बड़ी खुशखबरी सामने आई है। यहां मादा चीता गामिनी ने चार शावकों को जन्म दिया है जिससे देश में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 57 हो गई है।

    सीएम ने दी जानकारी जताई खुशी

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया के जरिए इस उपलब्धि की जानकारी साझा की। मुख्‍यमंत्री ने लिखा है कि मध्‍य प्रदेश अब चीतों के पुनरुद्धार के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। कूनो के खुले जंगलों में गामिनी चीते से जन्मी 25 महीने की भारतीय मूल की मादा चीते द्वारा चार शावकों का जन्म इस बात का प्रमाण है कि मध्य प्रदेश की भूमि चीतों के वंश विस्तार के लिए पूरी तरह से अनुकूल है। प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता सफल हो रही है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए कूनो के प्रबंधकों और वन्यजीव पशु चिकित्सकों को बधाई दी है।

    केंद्र ने भी बताया बड़ी सफलता

    केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि 2022 में शुरू हुए चीता पुनर्स्थापन कार्यक्रम के बाद यह एक महत्वपूर्ण सफलता है जब प्राकृतिक जंगल में शावकों का जन्म हुआ है।

    प्राकृतिक वातावरण में सफल प्रजनन


    वन विभाग के अनुसार मादा चीता गामिनी पिछले एक साल से खुले जंगल में रह रही थी और वहां की परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल चुकी थी। जंगल में शावकों का जन्म इस बात का संकेत है कि कूनो का इकोसिस्टम चीतों के लिए सुरक्षित और अनुकूल बन चुका है।

    परियोजना के लक्ष्य की ओर बड़ा कदम

    मुख्य वन संरक्षक उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि यह घटना चीता परियोजना के उद्देश्य को आगे बढ़ाने वाला अहम पड़ाव है। गामिनी खुद भी एक शावक के रूप में यहां लाई गई थी और अब उसका सफल प्रजनन दीर्घकालिक सफलता का संकेत है।

    मां और शावक सभी स्वस्थ निगरानी जारी
    अधिकारियों के अनुसार गामिनी और उसके चारों शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं। उनकी लगातार निगरानी की जा रही है ताकि किसी तरह की परेशानी न हो। इन चार नए शावकों के जन्म के बाद कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों की संख्या और बढ़ गई है। वर्तमान में देश के अधिकांश चीते यहीं मौजूद हैं जबकि कुछ चीतों को मंदसौर के गांधी सागर अभयारण्य में भी बसाया गया है।

  • MP Morning News: सीएम ग्वालियर-श्योपुर दौरे पर, बसों की हड़ताल रद्द, कूनो पहुंचे 9 नए चीते और मार्च में खुलेंगे सभी बिजली बिल केंद्र

    MP Morning News: सीएम ग्वालियर-श्योपुर दौरे पर, बसों की हड़ताल रद्द, कूनो पहुंचे 9 नए चीते और मार्च में खुलेंगे सभी बिजली बिल केंद्र


    भोपाल। मध्य प्रदेश की सुबह की ताज़ा खबरों में रविवार को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के दौरे से लेकर बसों की हड़ताल रद्द होने और कूनो नेशनल पार्क में नए चीते के आगमन तक की जानकारी शामिल है। साथ ही मार्च में सभी छुट्टियों में बिजली बिल भुगतान केंद्र खुले रहेंगे।

    सीएम डॉ मोहन यादव का दौरा

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव आज रविवार को कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे। वे सुबह 11:00 बजे भोपाल से ग्वालियर के लिए रवाना होंगे। ग्वालियर में स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होने के बाद दोपहर 12:50 बजे श्योपुर के लिए प्रस्थान करेंगे। श्योपुर में घड़ियाल और कछुओं का रिलीज कार्यक्रम होगा। इसके बाद दोपहर 2:40 बजे अशोकनगर में स्थानीय कार्यक्रम में भाग लेंगे और शाम 4:25 बजे मुख्यमंत्री निवास लौटेंगे।

    2 मार्च को बसों की हड़ताल रद्द
    मध्य प्रदेश में 2 मार्च को बसों की हड़ताल नहीं होगी। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की बैठक के बाद बस ऑपरेटरों ने हड़ताल रद्द करने का फैसला लिया। परिवहन विभाग से जुड़े विवादित राजपत्र फिलहाल होल्ड पर रहेंगे। इस फैसले के बाद राज्य में बसों का संचालन सामान्य रूप से जारी रहेगा और यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।

    चार साल में 56,128 आत्महत्या के मामले

    मध्य प्रदेश में 1 जनवरी 2022 से अब तक 56,128 लोगों ने खुदकुशी की है। डिप्रेशन से जुड़े मामलों में 7,000 से अधिक मौतें हुई हैं। पारिवारिक कलह, नशे की लत, आर्थिक तंगी और कर्ज जैसे कारणों से यह संख्या बढ़ी है। आंकड़े इस प्रकार हैं:

    14% डिप्रेशन से

    11% लंबी बीमारियों से

    9% नशे की लत से

    7% कर्ज/आर्थिक तंगी से

    5% अकेलेपन के कारण

    4% प्रेम प्रसंग में असफलता

    कूनो नेशनल पार्क में 9 नए चीते

    बोत्सवाना से 6 मादा और 3 नर चीते शनिवार को मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क पहुंचे। अब देश में चीतों की कुल संख्या 48 हो गई है, जिसमें 45 कूनो में और 3 गांधीसागर में हैं।

    मार्च में सभी छुट्टियों में खुलेंगे बिजली बिल केंद्र

    मार्च में राज्य के सभी अवकाशों पर भी बिजली बिल भुगतान केंद्र खुले रहेंगे। इसमें शनिवार, रविवार और त्योहार जैसे होली 3 मार्च गुड़ी पड़वां 19 मार्च जमात उल विदा ईद उल-फितर 20 मार्च रानी अवंती बाई का बलिदान दिवस, रामनवमीं 27 मार्च और महावीर जयंती 31 मार्च शामिल हैं।मध्य प्रदेश में ये फैसले और कार्यक्रम नागरिकों के लिए राहत और सुविधा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिए गए हैं।

  • कूनो राष्ट्रीय उद्यान में पहली बार दिखा दुर्लभ प्रजाति का फॉरेस्ट आउलेट

    कूनो राष्ट्रीय उद्यान में पहली बार दिखा दुर्लभ प्रजाति का फॉरेस्ट आउलेट


    भोपाल।
    जैव विविधता संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा की दिशा में सतत एवं सुनियोजित प्रयास कर रही मध्य प्रदेश सरकार को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। श्योपुर जिले में स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में पहली बार दुर्लभ प्रजाति का फॉरेस्ट ऑउलेट(एथिन ब्लेविटी) को देखा गया है।

    पक्षी विज्ञान के क्षेत्र में यह एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। स्थानिक और लुप्त प्राय फॉरेस्ट ऑउलेट(एथिन ब्लेविटी) को पहली बार कूनो राष्ट्रीय उद्यान में देखा गया है, जो इस प्रजाति के ज्ञात वितरण क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार का संकेत है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान में फॉरेस्ट ऑउलेट की खोज भारत में जैव विविधता संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पक्षी विश्व के सबसे दुर्लभ शिकारी पक्षियों में से एक है और चीता परियोजना से जुड़े पर्यावास प्रबंधन के साथ इसके संभावित पारिस्थितिक संबंध हैं।

    फॉरेस्ट आउलेट मध्य भारत का एक स्थानिक (endemic) पक्षी है, जिसे 1872 में पहली बार खोजा गया था, लेकिन 1884 के बाद इसे विलुप्त मान लिया गया था। लगभग 113 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, 1997 में इसे महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में फिर से खोजा गया, जिसने पक्षी विज्ञान की दुनिया में सनसनी फैला दी थी। वर्तमान में यह मध्य भारत के खंडित वन क्षेत्रों में पाया जाता है, जिसमें मध्य प्रदेश (खकनार, पीपलोद), महाराष्ट्र (तोरणमाल, मेलघाट) और गुजरात (डांग, पूर्णा वन्य जीव अभयारण्य) के हिस्से शामिल हैं।

    मध्य प्रदेश में फॉरेस्ट ऑउलेट पहले केवल पूर्वी खंडवा, बुरहानपुर और बैतूल जिलों में ही पाया जाता था। इस दुर्लभ पक्षी को सबसे पहले कूनो में स्थानीय पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लाभ यादव ने पारोंद बीट में क्षेत्र भ्रमण के दौरान देखा था, जिससे प्रजाति के अत्यधिक सीमित वितरण और संरक्षण स्थिति के कारण वन विभाग का ध्यान तुरंत आकर्षित हुआ। प्रमुख पहचान लक्षणों के आधार पर,वाइल्ड लाइफ रिसर्च एण्ड कंजर्वेशन सोसायटी, पुणे के विवेक पटेल ने मौके पर ही इसकी पुष्टि की, जिससे यह कूनो राष्ट्रीय उद्यान से प्रजाति का पहला प्रामाणिक रिकॉर्ड बन गया।

    अधिकांश उल्लुओं के व्यवहार के विपरीत, फॉरेस्ट ऑउलेट मुख्य रूप से दिन में सक्रिय रहने वाला पक्षी है। यह सुबह 6:00 से 10:00 बजे के बीच सबसे अधिक सक्रिय रहता है और कड़ी धूप में भी ऊंचे पेड़ों की टहनियों पर बैठा देखा जा सकता है। फॉरेस्ट ऑउलेट को वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ द्वारा ‘लुप्त प्राय’ श्रेणी में रखा गया है। इसकी कुल वैश्विक वयस्क संख्या 250 से 999 के बीच होने का अनुमान है।

    मध्य प्रदेश में इसके वितरण को समझने के लिए और सर्वेक्षण किए जाने की आवश्यकता है। फॉरेस्ट ऑउलेट, जिसे कभी विलुप्त माना जाता था और 1997 में पुनः खोजा गया था, वर्तमान में मध्य भारत के सीमित क्षेत्रों में पाया जाता है और पर्यावास के क्षरण और विखंडन से लगातार खतरे का सामना कर रहा है। यह नया रिकॉर्ड कूनो राष्ट्रीय उद्यान के जंगलों के पारिस्थितिक महत्व को उजागर करता है।

    फॉरेस्ट आउलेट का दिखाई देना संकेत दे रहा है कि चीता के लिये किये जा रहे संरक्षण प्रयासों से पारिस्थितिकीय तंत्र में सुधार होने से अन्य लुप्तप्राय प्रजातियों की भी वापसी हो रही है। मध्य प्रदेश के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में इस प्रजाति के मिलने से पक्षी संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों में उत्साह की लहर है।

  • मप्र के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मादा चीता वीरा के शावक की मौत

    मप्र के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मादा चीता वीरा के शावक की मौत


    – एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री ने वीरा और उसके दो शावकों को बाड़े से खुले जंगल में किया था रिलीज

    श्योपुर। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में दक्षिण अफ्रीकी मादा चीता वीरा के 10 महीने के शावक की मौत हो गई। उसे मादा चीता वीरा और दूसरे शावक के साथ एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बाड़े से कूनो के पारोंद क्षेत्र में खुले जंगल में रिलीज किया था। शुक्रवार शाम पारोंद के जंगल में शावक का शव मिला है।

    चीता प्रोजेक्ट के फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि शावक की मौत का वास्तविक कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। प्रारंभिक जांच में किसी तरह की चोट या संघर्ष के निशान नहीं मिले हैं। उन्होंने बताया कि वीरा और उसका दूसरा शावक पूरी तरह सुरक्षित हैं। उनकी लगातार निगरानी की जा रही है। कूनो में चीतों की गतिविधियों और स्वास्थ्य पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है।

    गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को श्योपुर जिले के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस पर तीन चीतों को स्वछंद विचरण के लिये बाड़े से अभयारण्य में छोड़ा था। इनमें मादा चीता वीरा और उसके दो शावक शामिल हैं। बताया गया है कि गुरुवार देर रात ही ये शावक अपनी मां से अलग हो गया था। शुक्रवार को इसकी खोज की गई। शाम को पारोंद के जंगल में उसका शव मिला है।

    फील्ड डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने बताया कि इस शावक की मौत के बाद कूनो नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या अब 28 रह गई है। इनमें 8 वयस्क चीते (5 मादा और 3 नर) और भारत में जन्मे 20 शावक शामिल हैं। पार्क के अन्य सभी चीते स्वस्थ बताए गए हैं। चीता प्रोजेक्ट के अधिकारी इस घटना की बारीकी से जांच कर रहे हैं। इसमें शावकों के प्राकृतिक व्यवहार, क्षेत्र में मौजूद खतरों और निगरानी प्रणाली की समीक्षा भी शामिल है।