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  • MP: कूनो में 19 माह के चीते की गोली लगने से हुई मौत….. जांच के लिए केंद्र ने भेजी उच्च स्तरीय टीम

    MP: कूनो में 19 माह के चीते की गोली लगने से हुई मौत….. जांच के लिए केंद्र ने भेजी उच्च स्तरीय टीम


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के जंगलों में क्या दुनिया के सबसे तेज दौड़ने वाले जानवर भी सुरक्षित नहीं हैं. कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) से जुड़े 19 महीने के नर चीते KNG22 की मौत ने इस सवाल को गंभीर बना दिया है. चीते के शरीर से एक-दो नहीं, बल्कि पांच गोली के छर्रे निकाले गए. उसे बचाने के लिए इलाज किया गया, विशेषज्ञों की मदद ली गई और सर्जरी भी हुई, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद 27 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई. अब इस घटना की जांच के लिए मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने विशेष कार्यबल यानी एसटीएफ गठित की है. वहीं केंद्र सरकार ने भी उच्चस्तरीय टीम को जांच के लिए मध्य प्रदेश भेजा है.

    यह घटना सिर्फ एक चीते की मौत तक सीमित नहीं है. इसने भारत में चीतों को फिर से बसाने के लिए शुरू किए गए प्रोजेक्ट चीता की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. सवाल यह है कि जिस परियोजना के तहत चीतों की निगरानी के लिए टीमें और आधुनिक तकनीक इस्तेमाल की जा रही है, वहां एक चीता गोली के छर्रों से गंभीर रूप से घायल कैसे हो गया. हालांकि, घटना के पीछे किसका हाथ है और चीते को गोली किन परिस्थितियों में लगी, इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।


    25 अक्टूबर को घायल मिला था KNG22

    कूनो नेशनल पार्क की मादा चीता निरवा का 19 महीने का नर शावक KNG22, 25 अक्टूबर को घायल हालत में मिला था. वह कूनो के संरक्षित क्षेत्र से बाहर एमपी के मुरैना इलाके के जंगल में था. उसे रेस्क्यू कर इलाज के लिए कूनो लाया गया. शुरुआती जांच के बाद उसकी हालत को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए जबलपुर स्थित पशु चिकित्सा सुविधा में भेजा गया.

    डॉक्टरों ने चीते की चोटों की गंभीरता का पता लगाने के लिए एक्स-रे और सीटी स्कैन किया. जांच में उसके शरीर के अलग-अलग हिस्सों में बाहरी वस्तुएं दिखाई दीं. इसके बाद इलाज के दौरान सर्जरी की गई. सर्जरी में उसके शरीर से पांच फायरआर्म पेलेट्स यानी गोली के छर्रे निकाले गए. इन छर्रों के कारण उसके आंतरिक अंगों, मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा था.

    डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि 27 अक्टूबर की सुबह KNG22 ने दम तोड़ दिया. इसके बाद साफ हो गया कि यह मामला सामान्य चोट या किसी जानवर के हमले तक सीमित नहीं था. चीते के शरीर से मिले छर्रों ने गोली लगने की आशंका को सामने ला दिया और मामले की गंभीरता बढ़ गई.


    निगरानी के बावजूद कैसे घायल हुआ चीता

    KNG22 की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल निगरानी व्यवस्था को लेकर उठ रहा है. प्रोजेक्ट चीता के तहत चीतों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए निगरानी टीमें तैनात हैं. रेडियो या सैटेलाइट कॉलर जैसी तकनीक से उनकी लोकेशन का पता लगाने में मदद मिलती है. इसके बावजूद चीता संरक्षित क्षेत्र से बाहर घायल हालत में मिला और उसकी जान नहीं बचाई जा सकी.

    ऐसे में सवाल उठता है कि क्या चीते की गतिविधियों पर नजर रखने में कोई चूक हुई. क्या उसके घायल होने के बाद समय रहते मदद पहुंच पाई. क्या संरक्षित क्षेत्र के आसपास वन्यजीवों के लिए खतरा बन सकने वाली गतिविधियों पर पर्याप्त निगरानी थी. इन सवालों के जवाब फिलहाल जांच के दायरे में हैं.

    यह भी समझना जरूरी है कि किसी जानवर की लोकेशन का पता चलना और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना दो अलग-अलग बातें हैं. कॉलर या दूसरी तकनीक से जानवर की मौजूदगी का संकेत मिल सकता है, लेकिन खतरे की स्थिति में समय पर मौके पर पहुंचना और उसे सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है. KNG22 की मौत के बाद निगरानी से लेकर मैदानी कार्रवाई तक की व्यवस्था की जांच महत्वपूर्ण हो गई है.


    राज्य सरकार ने बनाई एसटीएफ, केंद्र ने भेजी टीम

    घटना की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने वन और पुलिस अधिकारियों को शामिल करते हुए विशेष कार्यबल यानी एसटीएफ का गठन किया है. यह टीम चीते के घायल होने और उसकी मौत के कारणों की जांच करेगी. जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि चीते को गोली कैसे लगी और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

    केंद्र सरकार ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए 28 अक्टूबर को उच्चस्तरीय टीम मध्य प्रदेश भेजी. इस टीम में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी एनटीसीए के वन महानिरीक्षक, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो यानी डब्ल्यूसीसीबी के अतिरिक्त निदेशक और डब्ल्यूसीसीबी के क्षेत्रीय उपनिदेशक शामिल हैं.

    केंद्रीय टीम घटना से जुड़े सबूतों की जांच करेगी और मध्य प्रदेश वन विभाग के साथ मिलकर काम करेगी. उसे यह भी देखना है कि चीतों की सुरक्षा के लिए बनाए गए नियमों, निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा उपायों को किस तरह लागू किया जा रहा है. जांच के बाद टीम अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगी. इसके आधार पर आगे की कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम तय किए जा सकते हैं।

    फिर भी इस घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि जंगलों में वन्यजीवों को गोली लगने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं. अगर संरक्षित क्षेत्र से बाहर जाने वाले चीतों को खतरा है, तो उनकी निगरानी के साथ आसपास के इलाकों में सुरक्षा और वन्यजीव अपराधों पर रोक लगाने की व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी।


    विशेषज्ञों ने उठाए सवाल, कांग्रेस ने सरकार को घेरा

    चीते की मौत के बाद वन्यजीव विशेषज्ञों ने सुरक्षा व्यवस्था और घटना की जांच को लेकर सवाल उठाए हैं. वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट अजय दुबे ने इस मामले पर चिंता जताई है. वहीं, मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी चीते की मौत के बाद प्रोजेक्ट चीता और बीजेपी सरकार पर सवाल उठाए हैं।

    इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ जांच के निष्कर्ष भी महत्वपूर्ण होंगे. सबसे जरूरी यह पता लगाना है कि चीते को गोली कैसे लगी, घटना के समय उसकी निगरानी किस तरह की जा रही थी और क्या सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी रही. जांच से यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या बदलाव जरूरी हैं।

    सितंबर 2022 में भारत में चीतों की वापसी के साथ प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत हुई थी. इस परियोजना का उद्देश्य देश में चीतों को फिर से बसाना और उनके लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करना है. अब तक इस परियोजना को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. चीतों की मौतों के अलग-अलग कारण रहे हैं, लेकिन KNG22 की मौत इस वजह से अलग है कि उसके शरीर से पांच गोली के छर्रे निकाले गए।

  • रणथंभौर से कूनो तक बनेगा वाइल्डलाइफ टूरिज्म सर्किट… बाघ के साथ चीतों के दीदार कर सकेंगे पर्यटक

    रणथंभौर से कूनो तक बनेगा वाइल्डलाइफ टूरिज्म सर्किट… बाघ के साथ चीतों के दीदार कर सकेंगे पर्यटक


    जयपुर।
    राजस्थान (Rajasthan) के रणथंभौर टाइगर रिजर्व (Ranthambore Tiger Reserve) घूमने आने वाले पर्यटक जल्द ही मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) और माधव टाइगर रिजर्व (Madhav Tiger Reserve) तक भी वन्यजीव पर्यटन का सफर कर सकेंगे। तीनों संरक्षित क्षेत्रों को जोड़कर एक वाइल्डलाइफ टूरिज्म सर्किट (Wildlife Tourism Circuit) विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसका मकसद राजस्थान और मध्य प्रदेश में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ पर्यटकों को सफारी और प्रकृति से जुड़ी गतिविधियों के ज्यादा विकल्प देना है।

    मध्य प्रदेश के वन विभाग ने रणथंभौर को कूनो नेशनल पार्क और शिवपुरी स्थित माधव टाइगर रिजर्व से जोड़ने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस सर्किट से घरेलू और विदेशी पर्यटकों को एक ही यात्रा में अलग-अलग वन्यजीवों और प्राकृतिक स्थलों को देखने का मौका मिल सकेगा। फिलहाल कूनो में करीब 55 चीते, माधव टाइगर रिजर्व में चार बाघ और रणथंभौर में 75 से अधिक बाघ होने की जानकारी दी गई है।


    रणथंभौर-कूनो-माधव के बीच वन्यजीव कॉरिडोर पर भी जोर

    तीनों क्षेत्रों को जोड़ने की पहल केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) भी रणथंभौर, कूनो और माधव के बीच वन्यजीव कॉरिडोर की पहचान करने में रुचि दिखा चुका है। संस्थान के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, देशभर में ऐतिहासिक रिकॉर्ड, वन्यजीवों की आवाजाही और उनके प्राकृतिक आवासों के बीच संपर्क के आधार पर कॉरिडोर चिह्नित किए जा रहे हैं। इन्हें विकसित करने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की होगी।


    राजस्थान में चीतों की आवाजाही से बढ़ी संरक्षण की मांग

    मध्य प्रदेश के कूनो से चीतों के बार-बार राजस्थान की सीमा में आने के कारण राज्य को प्रोजेक्ट चीता से औपचारिक रूप से जोड़ने की मांग भी तेज हुई है। हाड़ौती क्षेत्र के वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि बारां, चित्तौड़गढ़ और राजस्थान के अन्य हिस्सों में चीतों की आवाजाही को चुनौती के बजाय संरक्षण के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।

    हाल ही में मादा चीता वीरा ने बारां में काफी समय बिताया था। बाद में उसे बेहोश कर वापस कूनो ले जाया गया। भारत में जन्मे चीते केपी-2 और केपी-3 भी राजस्थान के इलाकों में पहुंच चुके हैं। इन घटनाओं के बाद दोनों राज्यों के बीच समन्वित संरक्षण रणनीति की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने 17,000 वर्ग किलोमीटर के कूनो-गांधी सागर लैंडस्केप को अंतरराज्यीय संरक्षण कॉरिडोर के रूप में चिह्नित किया है।

  • कूनो नेशनल पार्क में नामीबियाई चीता आशा के आठ महीने के शावक की मौत, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चलेगा कारण

    कूनो नेशनल पार्क में नामीबियाई चीता आशा के आठ महीने के शावक की मौत, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चलेगा कारण

    मध्य प्रदेश । के कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाई गई मादा चीता आशा के आठ महीने के एक शावक की मौत हो गई है। सोमवार को नियमित निगरानी के दौरान वन विभाग की टीम को आशा के साथ पांच के बजाय चार शावक दिखाई दिए। एक शावक के गायब होने की जानकारी मिलने के बाद उसकी तलाश शुरू की गई। कुछ समय बाद तलाशी अभियान के दौरान उसका शव बरामद कर लिया गया। फिलहाल शावक की मौत की वजह स्पष्ट नहीं हुई है और अधिकारी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

    वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, शावक के दिखाई नहीं देने पर पार्क में उसकी तलाश के लिए अभियान चलाया गया। इसके तहत वन कर्मियों ने पार्क के बड़े हिस्से में खोजबीन की। तलाशी के दौरान शावक का शव मिलने के बाद उसकी मौत के कारणों का पता लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई। पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    मादा चीता आशा भारत में चीता पुनर्वास कार्यक्रम के तहत नामीबिया से लाए गए चीतों में शामिल है। उसे विशेष विमान के जरिए कूनो नेशनल पार्क पहुंचाया गया था। इस साल की शुरुआत में आशा ने पांच शावकों को जन्म दिया था। इन शावकों के जन्म को देश में चीता पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा गया था। अब उसके एक शावक की मौत के बाद वन विभाग उसके कारणों की जांच कर रहा है।

    कूनो नेशनल पार्क के निदेशक उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि शावक की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि शव का पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत की वजह के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। फिलहाल किसी निश्चित कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि शावक की मौत किन परिस्थितियों में हुई।

    यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब कूनो नेशनल पार्क में चीतों के प्रजनन से जुड़ी सकारात्मक खबरें भी सामने आती रही हैं। पार्क में शावकों के जन्म से भारत में चीते की आबादी को स्थापित करने और उसे स्थायी बनाने की उम्मीदों को बल मिला है। हालांकि, आशा के आठ महीने के शावक की मौत के बाद इस मामले में वन विभाग की जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण हो गई है।

    उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कूनो नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या 59 बताई गई है। इनमें 40 शावक भारत में जन्मे हैं। वहीं, 15 चीते खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। शावक की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए वन विभाग रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।

  • कूनो में मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया, भारत में चीतों की संख्या बढ़कर 60 हुई

    कूनो में मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया, भारत में चीतों की संख्या बढ़कर 60 हुई

    मध्य प्रदेश। के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में प्रोजेक्ट चीता के तहत एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई है। भारतीय धरती पर जन्मी 32 महीने की मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। इन शावकों के जन्म के साथ भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 60 हो गई है। इनमें 41 चीते ऐसे हैं, जिनका जन्म भारतीय धरती पर हुआ है। कूनो में चीतों की नई पीढ़ी का यह विस्तार देश में चीता संरक्षण और पुनर्स्थापना अभियान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

    KJP21, मुखी और KGP12 के बाद भारतीय धरती पर जन्मी तीसरी मादा चीता है, जिसने देश में शावकों को जन्म दिया है। इस तरह कूनो में अब भारतीय धरती पर जन्मे चीतों की अगली पीढ़ी के विस्तार की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ा है। पांचों शावकों को स्वस्थ बताया गया है। शावकों का जन्म प्रोजेक्ट चीता के तहत चलाए जा रहे संरक्षण और निगरानी प्रयासों के बीच हुआ है।

    इन पांच शावकों का जन्म एक अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धि भी लेकर आया है। इनके पिता बोत्सवाना से भारत लाए गए नर चीता हैं। शावकों के जन्म के साथ भारत में बोत्सवाना वंशावली की शुरुआत हुई है। इससे देश में बढ़ती चीता आबादी में एक नई आनुवंशिक वंशावली शामिल हुई है। इस घटनाक्रम को चीता पुनर्स्थापना अभियान के विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    भारतीय धरती पर चीतों की एक और पीढ़ी का जन्म प्रोजेक्ट चीता की यात्रा में एक नया अध्याय है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीता संरक्षण के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन, लगातार निगरानी और संरक्षण संबंधी प्रयास किए जा रहे हैं। KJP21 से जन्मे पांच शावकों का स्वस्थ होना इन प्रयासों के बीच एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया है। इससे कूनो में चीता आबादी के विस्तार की दिशा में चल रहे अभियान को भी आगे बढ़ने का अवसर मिला है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रोजेक्ट चीता से जुड़े पशु चिकित्सकों, वन अधिकारियों, मैदानी अमले, प्रबंधन टीम और सभी सहयोगियों को बधाई दी। उन्होंने चीता पुनर्स्थापना के प्रयासों में शामिल लोगों के समर्पण और प्रतिबद्धता की सराहना की। कूनो में पांच नए शावकों के जन्म के साथ भारत में चीतों की संख्या 60 तक पहुंच गई है। इनमें भारतीय धरती पर जन्मे 41 चीते शामिल हैं। शावकों के आगमन को देश में चीता संरक्षण और पुनर्स्थापना के प्रयासों के क्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

  • MP: बोत्सवाना से आई मादा चीता CCB2 कूनो से पहुंची गांधी सागर… आज CM करेंगे जंगल में रिलीज

    MP: बोत्सवाना से आई मादा चीता CCB2 कूनो से पहुंची गांधी सागर… आज CM करेंगे जंगल में रिलीज


    मंदसौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में ‘प्रोजेक्ट चीता’ (‘Project Cheetah’) के तहत एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है. बोत्सवाना से भारत लाई गई मादा चीता CCB2 (Female cheetah CCB2) अब कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) से गांधीसागर अभयारण्य (Gandhi Sagar Sanctuary) पहुंच चुकी है. मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) रविवार को उसे गांधीसागर के जंगलों में छोडेंगे. इसके बाद अभयारण्य में 2 नर और 2 मादा समेत कुल 4 चीते हो जाएंगे।

    दरअसल, मध्यप्रदेश में प्रोजेक्ट चीता के तहत चीतों के संरक्षण और पुनर्स्थापना का दायरा बढ़ाया जा रहा है. इसी क्रम में बोत्सवाना से भारत लाई गई मादा चीता CCB2 को कूनो नेशनल पार्क से गांधीसागर अभयारण्य में स्थानांतरित किया जा रहा है।


    बोत्सवाना से कूनो और अब गांधीसागर तक का सफर

    CCB2 को 28 फरवरी 2026 को बोत्सवाना के घांजी से भारत लाया गया था. इसके बाद उसे श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में रखा गया. क्वारंटीन अवधि पूरी करने के बाद मई 2026 में उसे कूनो के जंगल में विमुक्त किया गया।

    कूनो में रहने के दौरान CCB2 ने भारतीय परिस्थितियों को तेजी से अपनाया. उसने यहां के वन परिदृश्य और पर्यावरण के साथ खुद को ढाल लिया. अब उसे कूनो से गांधीसागर अभयारण्य में स्थानांतरित किया जा रहा है।


    गांधीसागर में अब 4 चीते होंगे

    CCB2 के पहुंचने के बाद गांधीसागर अभयारण्य में चीतों की संख्या बढ़कर चार हो जाएगी. इनमें दो नर और दो मादा चीते होंगे। गांधीसागर में पहले से मौजूद चीते प्रभाष, पावक और धीरा CCB2 के साथ रहेंगे. नई मादा चीते के आने से गांधीसागर में चीता संरक्षण और पुनर्स्थापना के प्रयासों को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।


    कूनो के बाद गांधीसागर में नया अध्याय

    CCB2 का सफर बोत्सवाना से भारत, फिर कूनो और अब गांधीसागर तक पहुंचा है. कूनो की परिस्थितियों में सफलतापूर्वक ढलने के बाद अब उसे एक अलग वन्य पारिस्थितिकी में स्थानांतरित किया जा रहा है।

    मध्यप्रदेश में कूनो और गांधीसागर को चीता संरक्षण एवं पुनर्स्थापना के महत्वपूर्ण केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है. CCB2 का गांधीसागर पहुंचना इसी अभियान के अगले चरण के तौर पर देखा जा रहा है।

  • चीता माताओं के संघर्ष कहानी…. विदेशी धरती से आकर कूनो में बढाया वंश…. मदर्स डे पर शॉर्ट फिल्म रिलीज

    चीता माताओं के संघर्ष कहानी…. विदेशी धरती से आकर कूनो में बढाया वंश…. मदर्स डे पर शॉर्ट फिल्म रिलीज


    श्योपुर।
    मदर्स-डे (Mother’s Day) के मौके पर कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन (Kuno National Park Management) ने चीता माताओं (Cheetah Mothers) के संघर्ष और मातृत्व को समर्पित एक शॉर्ट फिल्म जारी की, जो भारतीय जंगलों में चीतों की नई पीढ़ी को बसाने में उनकी भूमिका को दर्शाती है. इसमें बताया गया कि प्रोजेक्ट चीता के तहत पिछले साढ़े तीन सालों में भारत में चीतों का कुनबा बढ़कर अब 57 हो गया है. इस प्रोजेक्ट की सफलता में मादा चीतों का योगदान सबसे अहम रहा है।

    नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से आईं 6 मादा चीतों में से 5 ने शावकों को जन्म दिया है. भारत में जन्मी 2 मादा चीतों ने भी सफलतापूर्वक प्रजनन कर शावकों को जन्म दिया है. पिछले साढ़े तीन वर्षों में कुल 49 शावकों का जन्म हुआ, जिनमें से 37 पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित हैं।

    कूनो पार्क की इन माताओं ने न सिर्फ खुद को भारत के माहौल में ढाला, बल्कि अपने शावकों को भी शिकार और सुरक्षा के उपाय सिखाए. वर्तमान में चीते कूनो और उसके आसपास के करीब 5 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं।


    फिल्म में चीता मदर्स और उनके शावकों के संघर्ष की दिखी झलक.

    अलग-अलग देशों से लाए गए चीतों के कारण आनुवंशिक विविधता मजबूत हुई है, जिससे इनब्रीडिंग का खतरा टल गया है. दूसरी पीढ़ी (एफ-2 जेनरेशन) के शावकों का आना इस बात का सबूत है कि भारत में चीतों की आबादी अब धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बन रही है।

    कूनो प्रबंधन अब नए क्षेत्रों में भी चीतों को बसाने की तैयारी कर रहा है,जहां दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया और भारत में जन्मे चीतों का एक मिला-जुला समूह रखा जाएगा. इस विशेष मौके पर कूनो के फील्ड स्टाफ, डॉक्टरों और वन अधिकारियों की मेहनत को भी सराहा गया, जिनकी दिन-रात की निगरानी की वजह से यह अभियान आज इस मुकाम पर पहुंचा है।

    प्रोजेक्ट चीता के डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि कूनो पार्क में चीता प्रोजेक्ट सफलता के नए आयाम गढ़ रहा है. विदेशी धरती से चीते लाकर बसाए गए जिन्होंने यहां नई पीढ़ी को जन्म देकर चीता प्रोजेक्ट को सफल बनाया है. 10 मई को मदर्स-डे है, लिहाजा हमने मां के रूप में मादा चीताओं और उनके शावकों की ममत्वमयी तस्वीर पेश करने का प्रयास किया है।