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  • UP: कुशीनगर में गंडक नदी में मिले 4 और शव, नेपाल बाढ़ के बाद अब तक 13 शव बरामद

    UP: कुशीनगर में गंडक नदी में मिले 4 और शव, नेपाल बाढ़ के बाद अब तक 13 शव बरामद


    नई दिल्ली।
    नेपाल (Nepal) में आई भीषण बाढ़ (Devastating floods) की तबाही का असर अब सीमा पार उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में भी दिखने लगा है. कुशीनगर (Kushinagar) में गंडक नदी (Gandak River) से रविवार को चार और शव बरामद किए गए. पिछले चार दिनों में नदी से अब तक कुल 13 शव निकाले जा चुके हैं, जिनके नेपाल से बहकर आने की आशंका जताई जा रही है।

    रविवार को SDRF की टीम छितौनी बांध के भेड़ियारी ठोकर नंबर-3 के पास नदी की निगरानी कर रही थी. इसी दौरान जवानों को पानी में चार शव दिखाई दिए. टीम नदी में उतरी और सभी को बाहर निकाल लिया. इनमें दो महिलाएं और दो पुरुष हैं. इससे एक दिन पहले भी इसी इलाके में तीन शव मिले थे. बरामद शवों की जानकारी नेपाल के पड़ोसी जिले के अधिकारियों को दे दी गई है. हालांकि, अभी तक किसी की पहचान नहीं हो पाई है।

    खड्डा थाने के पुलिस अधिकारी संदीप कुमार सिंह के मुताबिक, जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद चारों शवों को मोर्चरी भेज दिया गया. कुशीनगर की मोर्चरी में जगह भर जाने के कारण बाकी शवों को गोरखपुर भेजा गया है. पुलिस शवों की पहचान कराने की कोशिश कर रही है, ताकि पता चल सके कि इनमें नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोग कौन हैं.


    नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही

    नेपाल में 26 अगस्त को तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद भारी बाढ़ आई थी. बर्फ, चट्टानों और मलबे के तेज बहाव ने कई गांवों को अपनी चपेट में ले लिया. बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा, जबकि कई हाइड्रोपावर स्टेशन भी तबाह हो गए. भोटेकोशी नदी के रास्ते आगे बढ़े बाढ़ के पानी ने उत्तरी और मध्य नेपाल में भारी तबाही मचाई. नेपाल में रविवार तक बाढ़ से मरने वालों की संख्या 788 पहुंच गई थी. वहीं, 2,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए गए हैं।

    विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में 275 से ज्यादा भारतीय नागरिक संपर्क से बाहर हैं. इनके अलावा 128 भारतीय मूल के लोगों से भी संपर्क नहीं हो पाया है. रविवार को मंत्रालय ने 149 लोगों के सुरक्षित बचाए जाने की सूची जारी की. कुशीनगर में मिले शवों की पहचान होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि इनमें नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोग शामिल हैं या नहीं।

  • कुशीनगर में CM योगी ने विपक्ष पर बोला जमकर हमला, कहा- अब नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा

    कुशीनगर में CM योगी ने विपक्ष पर बोला जमकर हमला, कहा- अब नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा


    कुशीनगर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुशीनगर, रामकोला हाटा विधानसभा क्षेत्र की 525 करोड़ की 464 परियोजनाओं का शनिवार को लोकार्पण व शिलान्यास करते हुए विपक्ष को विकास और कानून व्यवस्था पर घेरते हुए सीधा हमला बोला। कहा कि, पहले की सरकार के पास नीयत थी न नीति थी। सोच ही लकवाग्रस्त थी, ऐसे में विकास की बात ही बेमानी थी।

    इस दौरान टेकुआटार में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने सपा पर हमला बोला और कहा कि, पहले उत्तर प्रदेश में त्योहारों पर दंगे होते थे, अब नो कर्फ्यू , नो दंगा, यूपी में सब चंगा। बिना राम मंदिर चढ़ावा चोरी का जिक्र करते हुए कहा कि मंदिरों पर कब्जा करने वाले अयोध्या, काशी और मथुरा के बारे में कैसे सोच सकते हैं। धर्म आस्था पर आज हमें आइना दिखाने वाले अपना चेहरा देखें।

    मुख्यमंत्री योगी ने कुशीनगर की इंसेफेलाइटिस से मासूमो के बचपन छिनने व मुसहरों की मौत का उदाहरण देते पूर्व की सरकारों को कठघरे में खड़ा किया तो कहा कि, अब इंसेफेलाइटिस से बचपन छिनता है और न कोई प्रदेश में भूख से मरता है। अब आवास, बिजली, गैस कनेक्शन, उपचार व रोजगार संग विकास की बात होती है।

    कुशीनगर से शीघ्र शुरू होगी उड़ान, गया और जेवर से जुड़ेगा
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, पश्चिम एशिया संकट से दुनिया में मची उथल-पुथल के चलते नए नए एयरक्राफ्ट नहीं आ सके, जिससे कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान शुरू नहीं हो सकी। शीघ्र ही यहां से उड़ान शुरू होगी और गया और जेवर को जोड़ जाएगा। सरकार पूरी तरह संजीदा है।

    दियारा को मिलेगा 800 करोड़ का पुल
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नारायणी उस पार दियारा के गांवों की दुर्दशा के लिए पूर्ववर्ती सरकारों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि डीपीआर बन रहा है। शीघ्र ही नारायणी पर 800 करोड़ का पुल बनेगा। दियारा के सभी गांव विकास की मुख्य धारा से जुड़ेगें। अंतिम व्यक्ति का विकास ही हमारी सरकार की सोच है। इस पर हम इमानदारी से कार्य भी कर रहे हैं।

  • खनन माफिया पर कार्रवाई या सिस्टम की चूक, कुशीनगर में अफसर सस्पेंशन से गरमाई राजनीति और प्रशासनिक बहस

    खनन माफिया पर कार्रवाई या सिस्टम की चूक, कुशीनगर में अफसर सस्पेंशन से गरमाई राजनीति और प्रशासनिक बहस


    कुशीनगर । कुशीनगर जिले में अवैध खनन के खिलाफ चलाए जा रहे सख्त अभियान के बीच एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र और कानून व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस अभियान को सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का मजबूत उदाहरण माना जा रहा था उसी अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अधिकारी अभिषेक सिंह के निलंबन ने पूरे मामले को अचानक सुर्खियों में ला दिया है

    और इस कार्रवाई को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले कई दिनों से जिले में अवैध खनन के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा था जिसमें नदी घाटों से लेकर खनन के संभावित और संदिग्ध क्षेत्रों तक लगातार छापेमारी की जा रही थी।

    इस दौरान बिना वैध परमिट चल रहे वाहनों और ओवरलोड ट्रकों पर भी सख्त कार्रवाई की गई थी जिससे अवैध खनन से जुड़े नेटवर्क में हड़कंप की स्थिति बन गई थी। खासकर बिहार सीमा से आने वाले ट्रकों पर निगरानी बढ़ाए जाने के बाद इस अवैध कारोबार पर प्रशासन का दबाव काफी बढ़ गया था और कई स्थानों पर जुर्माना जब्ती और कानूनी कार्रवाई भी की गई थी।

    इन कार्रवाइयों के चलते यह संकेत मिल रहा था कि प्रशासन इस बार अवैध खनन के खिलाफ पूरी सख्ती के मूड में है। लेकिन इसी बीच अचानक अधिकारी अभिषेक सिंह के निलंबन की कार्रवाई ने पूरे अभियान की दिशा और उसकी मंशा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि जब अवैध खनन पर कार्रवाई का असर साफ तौर पर दिखाई देने लगा था

    और माफिया नेटवर्क पर दबाव बढ़ रहा था तो ऐसे समय में कार्रवाई करने वाले अधिकारी को ही क्यों हटाया गया। जनपद में यह भी माना जा रहा है कि अवैध खनन का यह पूरा कारोबार केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है बल्कि इसके पीछे एक मजबूत आर्थिक तंत्र और प्रभावशाली संरक्षण का नेटवर्क सक्रिय रहता है जो लंबे समय से इस अवैध गतिविधि को संचालित और सुरक्षित करता आया है।

    ऐसे में जब किसी अधिकारी की सख्ती से करोड़ों के इस अवैध कारोबार पर सीधा असर पड़ता है तो कई बड़े हित प्रभावित होना स्वाभाविक माना जाता है। फिलहाल स्थिति यह है कि जहां एक ओर अवैध खनन से जुड़े तत्वों में राहत की भावना देखी जा रही है वहीं दूसरी ओर अभियान का नेतृत्व करने वाला अधिकारी खुद प्रशासनिक कार्रवाई के घेरे में आ गया है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस प्रशासन और खनन विभाग की कार्यशैली पर भी गंभीर बहस छेड़ दी है और यह सवाल उठने लगा है कि क्या अवैध कारोबार पर सख्ती दिखाने की कोई कीमत भी चुकानी पड़ती है।

    अब पूरे मामले में शासन स्तर पर अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं क्योंकि यह मामला केवल एक अधिकारी के निलंबन का नहीं बल्कि अवैध खनन के खिलाफ चल रही पूरी मुहिम की विश्वसनीयता और उसके भविष्य से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।