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  • लेह एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का 15 अक्टूबर को उद्घाटन करेंगे पीएम मोदी, 600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से हुआ निर्माण

    लेह एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का 15 अक्टूबर को उद्घाटन करेंगे पीएम मोदी, 600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से हुआ निर्माण

    नई दिल्ली: लद्दाख के लेह स्थित कुशोक बकुला रिम्पोचे (केबीआर) एयरपोर्ट की नई टर्मिनल बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अक्टूबर को इस आधुनिक टर्मिनल का वर्चुअल उद्घाटन कर सकते हैं। इसके लिए जमीन पर जरूरी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अब कार्यक्रम के समय को लेकर अंतिम मंजूरी का इंतजार है। इस नई सुविधा के शुरू होने से हवाई अड्डे की यात्री क्षमता बढ़ेगी और यात्रियों को पहले के मुकाबले बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

    लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने उद्घाटन कार्यक्रम से पहले निर्माण स्थल का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने नए टर्मिनल के विभिन्न हिस्सों को देखा, जिनमें प्रस्थान लाउंज, आगमन लाउंज, प्रतीक्षालय, यात्रियों की जांच के लिए निर्धारित क्षेत्र और फूड लाउंज शामिल हैं। उन्होंने यात्रियों को दी जाने वाली दूसरी सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। साथ ही, टर्मिनल को पूरी तरह चालू करने के लिए शेष कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। अधिकारियों के अनुसार, भवन से जुड़ी संरचनात्मक और परिचालन तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। उम्मीद है कि उद्घाटन के तुरंत बाद नए टर्मिनल को यात्रियों के इस्तेमाल के लिए खोल दिया जाएगा।

    भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने इस परियोजना को 600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया है। लगभग 23,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैली यह तीन मंजिला इमारत सालाना 35 लाख यात्रियों को संभालने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसके अलावा, यहां प्रतिदिन 54 उड़ानों के संचालन को ध्यान में रखकर सुविधाएं विकसित की गई हैं। नए टर्मिनल में यात्रियों की आवाजाही और विमान सेवाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए आधुनिक व्यवस्थाएं की गई हैं। इनमें 20 चेक-इन काउंटर, इनलाइन बैगेज हैंडलिंग सिस्टम, सामान प्राप्त करने के लिए दो कैरोसेल, 15 लिफ्ट और 12 एस्केलेटर शामिल हैं। इन सुविधाओं से यात्रियों के चेक-इन, सामान प्रबंधन और टर्मिनल के भीतर आवागमन में मदद मिलने की उम्मीद है।

    नई टर्मिनल बिल्डिंग को ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण अनुकूल तकनीक को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें 700 किलोवाट पीक क्षमता का रूफटॉप सौर ऊर्जा संयंत्र लगाया गया है। इसके साथ ही, अत्यधिक ठंड वाले मौसम में इमारत को गर्म रखने के लिए भू-तापीय तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया है। इस परियोजना में शून्य से नीचे तापमान वाले सर्दियों के मौसम की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है। भू-तापीय तकनीक के उपयोग को भारत में इस तरह की व्यवस्था के शुरुआती बड़े पैमाने के इस्तेमाल के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इससे लेह जैसे ठंडे क्षेत्र में हवाई अड्डे के संचालन के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

    टर्मिनल के उद्घाटन के बाद परियोजना के दूसरे चरण के तहत पुराने टर्मिनल को गिराने की योजना है। अधिकारियों के मुताबिक, इससे हवाई अड्डे के एप्रन का विस्तार करने और विमानों के संचालन से जुड़ी अतिरिक्त सुविधाएं विकसित करने का रास्ता साफ होगा। योजना में तीन एयरोब्रिज और विमानों की पार्किंग के लिए चार अतिरिक्त बे बनाने का प्रस्ताव शामिल है। इन बदलावों से यात्रियों को विमान तक पहुंचने में सुविधा मिलने के साथ विमानों की पार्किंग और परिचालन व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इससे पहले 11 अगस्त को मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने लेह एयरपोर्ट के नए टर्मिनल के निर्माण और नुब्रा क्षेत्र के थॉइस एयरपोर्ट से नागरिक उड़ान सेवाएं शुरू करने की प्रगति की समीक्षा के लिए बैठक की थी। उस बैठक में एएआई के एयरपोर्ट निदेशक और परियोजना महाप्रबंधक ए. उमाशंकर ने निर्माण कार्य की स्थिति की जानकारी दी थी। अब नई टर्मिनल बिल्डिंग तैयार होने के बाद इसके उद्घाटन और यात्रियों के लिए संचालन शुरू होने पर ध्यान केंद्रित है।

  • लद्दाख हिंसा की बरसी पर सोनम वांगचुक ने जताया एनकाउंटर का डर, मांगा अमित शाह का इस्तीफा

    लद्दाख हिंसा की बरसी पर सोनम वांगचुक ने जताया एनकाउंटर का डर, मांगा अमित शाह का इस्तीफा

    नई दिल्ली । लद्दाख में पिछले साल हुई लेह हिंसा की पहली बरसी पर जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका जताई। उन्होंने कहा कि सरकार के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें मुठभेड़ में मारे जाने का डर है। वांगचुक ने इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करते हुए 24 सितंबर 2025 की हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने पर जोर दिया।

    लेह में हिंसा की पहली बरसी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वांगचुक ने कहा कि उन्हें अपनी जान को लेकर चेतावनियां मिली हैं। उनका कहना था कि यदि देश और समाज को किसी मुद्दे पर जागरूक करने के लिए उन्हें किसी भी तरह के परिणाम का सामना करना पड़े, तो वह उसके लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जेल भेजे जाने के बाद अब उनके साथ मुठभेड़ होने की आशंका भी जताई जा रही है।

    वांगचुक ने पिछले साल की घटना की न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि रिपोर्ट सामने नहीं लाई जाती है तो पुलिस कार्रवाई और गोलीबारी की परिस्थितियों की जांच के लिए स्वतंत्र जन न्यायाधिकरण गठित करने की दिशा में कदम उठाया जाएगा। उनका कहना था कि घटना में हुई मौतों के लिए जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।

    24 सितंबर 2025 को लेह में गंभीर कानून-व्यवस्था की स्थिति के बाद पुलिस कार्रवाई में चार लोगों की मौत हुई थी। केंद्र सरकार ने घटना की परिस्थितियों, पुलिस कार्रवाई और चार लोगों की मौत के कारणों की जांच के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीएस चौहान की अध्यक्षता में न्यायिक जांच गठित की थी। वांगचुक ने जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और घटना के लिए जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई।

    वांगचुक ने कार्यक्रम के दौरान गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले साल के प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों ने स्थानीय युवाओं पर स्वचालित हथियारों का इस्तेमाल किया और बाद में प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रविरोधी बताया गया। उन्होंने कहा कि घटना में मारे गए लोगों को गोली लगी थी और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। ये आरोप वांगचुक द्वारा लगाए गए हैं।

    उन्होंने दिल्ली में छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग का भी उल्लेख किया। वांगचुक ने उस मांग का समर्थन करते हुए सवाल उठाया कि लद्दाख में हुई हिंसा और चार लोगों की मौत के मामले में भी समान रूप से जवाबदेही की मांग क्यों नहीं की गई।

    हिंसा की पहली बरसी पर लेह और लद्दाख के कई हिस्सों में बंद का असर दिखाई दिया। लेह और कारगिल में दुकानें तथा कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे और सड़कों पर सामान्य दिनों की तुलना में कम आवाजाही रही। कुछ लोगों ने 24 सितंबर को मृतकों की याद में शहीद दिवस के रूप में मनाया।

    वांगचुक ने यह भी कहा कि बरसी के कार्यक्रम में अपेक्षाकृत कम लोगों की मौजूदगी को आंदोलन की हार नहीं माना जाना चाहिए। उनके मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था और प्रतिबंधों के बीच भी लोगों ने पिछले साल की घटना में मारे गए चार लोगों को याद किया और न्याय तथा जवाबदेही की मांग को सामने रखा। लद्दाख में राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा की मांग को लेकर आंदोलन का मुद्दा भी इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में बना हुआ है।

  • लद्दाख हिंसा की पहली बरसी पर सोनम वांगचुक का शहीद दिवस कार्यक्रम, 23 सितंबर को 20 किलोमीटर की सांकेतिक पदयात्रा

    लद्दाख हिंसा की पहली बरसी पर सोनम वांगचुक का शहीद दिवस कार्यक्रम, 23 सितंबर को 20 किलोमीटर की सांकेतिक पदयात्रा

    नई दिल्ली ।लद्दाख में पिछले साल हुई हिंसा में मारे गए लोगों की पहली बरसी के मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 23 सितंबर को एक दिवसीय सांकेतिक पदयात्रा निकालने का ऐलान किया है। इसके साथ ही 24 सितंबर को शहीद दिवस से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य मृतकों को श्रद्धांजलि देने के साथ उनके परिवारों के लिए उचित मुआवजे और संबंधित मामलों में दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग उठाना है।

    वांगचुक के अनुसार, 24 सितंबर को हुई मौतों की पहली बरसी पर उन लोगों को याद किया जाएगा, जिन्होंने लद्दाख की संस्कृति और पर्यावरण की रक्षा तथा संरक्षण के लिए अपनी जान गंवाई। इस अवसर पर शांतिपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है।

    पहले वांगचुक ने 19 से 23 सितंबर तक छह दिवसीय पदयात्रा की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि यदि सरकार की ओर से ठोस आश्वासन नहीं मिलता है तो यह यात्रा निकाली जाएगी। बाद में उन्होंने अपने कार्यक्रम में बदलाव करते हुए छह दिवसीय यात्रा को स्थगित कर दिया।

    अब तय कार्यक्रम के मुताबिक 23 सितंबर को केवल एक दिन की सांकेतिक पदयात्रा होगी। यह पदयात्रा लेह की दिशा में निकाली जाएगी और इसकी दूरी करीब 20 किलोमीटर बताई गई है। कार्यक्रम को शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित करने की बात कही गई है।

    वांगचुक लंबे समय से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और क्षेत्र को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग उठाते रहे हैं। उनके आंदोलन में लद्दाख के लिए राजनीतिक अधिकारों के साथ क्षेत्र की संस्कृति और पर्यावरण से जुड़े मुद्दे भी प्रमुख रहे हैं।

    शहीद दिवस कार्यक्रम के तहत पिछले वर्ष मारे गए लोगों के परिवारों के लिए उचित मुआवजे की मांग दोहराई जाएगी। इसके अलावा मृतकों से जुड़े मामलों में दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग भी कार्यक्रम का हिस्सा होगी।

    इस बीच लद्दाख के प्रतिनिधिमंडल और केंद्र सरकार के बीच बातचीत का मुद्दा भी चर्चा में है। गृह मंत्रालय की सब-कमेटी के साथ बैठक के बाद लद्दाख के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित चुनी हुई संस्था से संबंधित ड्राफ्ट पेश नहीं किए जाने पर निराशा जताई थी।

    नए कार्यक्रम के अनुसार, 23 सितंबर को कारगिल में शांतिपूर्ण विरोध रैली भी आयोजित की जाएगी। इसके बाद 24 सितंबर को शहीद दिवस से जुड़े अन्य कार्यक्रम होंगे। इस दौरान पिछले साल की घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी जाएगी और उनकी मांगों को फिर से सामने रखा जाएगा।

    वांगचुक को पिछले वर्ष लद्दाख में हुई हिंसा के सिलसिले में नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत हिरासत में लिया गया था और वह करीब छह महीने तक हिरासत में रहे थे। अब पहली बरसी के मौके पर प्रस्तावित कार्यक्रमों के जरिए लद्दाख से जुड़ी लंबित मांगों को फिर सार्वजनिक रूप से उठाने की तैयारी है।

  • मोदी-जिनपिंग मुलाकात के बाद LAC पर चीन ने घटाई PLA की तैनाती, गलवान झड़प के बाद पहली बार डि-एस्केलेशन

    मोदी-जिनपिंग मुलाकात के बाद LAC पर चीन ने घटाई PLA की तैनाती, गलवान झड़प के बाद पहली बार डि-एस्केलेशन

    नई दिल्ली ।भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर लंबे समय से जारी सैन्य तनाव के बीच चीनी सेना की तैनाती में कमी सामने आई है। रक्षा मंत्रालय की 2025-26 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में उत्तरी सीमा के सामने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी PLA की तैनाती में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार पूर्वी लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक भारतीय सेना की स्थिति मजबूत है और वह किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

    रिपोर्ट में भारत और चीन के बीच राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर जारी संपर्क का सीमा की स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की बात कही गई है। इसमें वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोआर्डिनेशन और भारत-चीन सीमा से संबंधित स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव वार्ता का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इन प्रयासों से उत्तरी सीमा पर स्थिरता लाने में मदद मिली है।

    यह घटनाक्रम 2024 में दोनों देशों के बीच हुई डिसएंगेजमेंट प्रक्रिया के बाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक चीन ने अब भारतीय पक्ष की डि-एस्केलेशन से जुड़ी शर्त को भी स्वीकार किया है। डि-एस्केलेशन के तहत सीमा पर तैनात सैनिकों की संख्या कम की जाती है। हालांकि सैनिकों को पूरी तरह पीछे स्थित बैरकों में भेजने की प्रक्रिया यानी डि-इंडक्शन अभी बाकी है। इसके बाद ही LAC पर 2020 की गलवान घाटी की झड़प से पहले जैसी स्थिति बहाल होने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा।

    रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन की कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड में करीब 14 से 15 हजार सैनिक हो सकते हैं। इसमें पैदल सेना के साथ मैकेनाइज्ड कॉलम, बख्तरबंद वाहन, तोपखाना, एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन वॉरफेयर से जुड़ी इकाइयां शामिल होती हैं। रिपोर्ट में LAC पर चीन की करीब 10 कंबाइंड ब्रिगेड की तैनाती का उल्लेख किया गया है, जिससे वहां बड़ी संख्या में चीनी सैनिकों की मौजूदगी का संकेत मिलता है।

    हालांकि सीमा पर तैनाती में कमी के बावजूद भारत के लिए चिंता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। रिपोर्ट के अनुसार PLA के करीब डेढ़ लाख सैनिक भारतीय सीमा के करीब ट्रेनिंग क्षेत्रों में भी तैनात हैं। इन क्षेत्रों से सैनिकों को जरूरत पड़ने पर LAC की ओर तेजी से भेजा जा सकता है। इसी वजह से भारतीय सेना चीन से डि-इंडक्शन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है।

    गलवान घाटी में 2020 की झड़प के समय अकेले पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में चीन के करीब एक लाख सैनिक तैनात बताए गए थे। इसके बाद पिछले छह वर्षों में 3488 किलोमीटर लंबी LAC पर चीन की सैन्य तैनाती में कमी आई है।

    इसी बीच अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबानसिरी क्षेत्र में पिछले एक महीने से भारत और चीन की सेनाओं के बीच फेस-ऑफ की स्थिति बनी हुई है। गतिरोध दूर करने के लिए दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्तर की दो बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन क्षेत्र में तनाव अभी बरकरार है।

    रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सीमा पर स्थिरता के लिए जारी संवाद और उच्चस्तरीय संपर्क महत्वपूर्ण रहे हैं। भारत-चीन संबंधों में सैन्य स्तर की बातचीत के साथ राजनीतिक और कूटनीतिक संपर्कों को भी सीमा पर स्थिति सुधारने की प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है।

  • सिंधु के पानी के इस्तेमाल की भारत की नई तैयारी, लद्दाख में पहला रॉक चेक डैम तैयार, पाक को दिया झटका

    सिंधु के पानी के इस्तेमाल की भारत की नई तैयारी, लद्दाख में पहला रॉक चेक डैम तैयार, पाक को दिया झटका


    लेह। सिंधु नदी के पानी का स्थानीय स्तर पर अधिक से अधिक उपयोग करने की दिशा में लद्दाख में एक अहम परियोजना शुरू की गई है। उपशी में सिंधु नदी पर देश का पहला रॉक चेक डैम तैयार किया गया है। डैम में फिलहाल 10 फीट तक पानी जमा हो चुका है। परियोजना का उद्देश्य लद्दाख में जल उपलब्धता बढ़ाने के साथ खेती और स्थानीय जरूरतों के लिए पानी का बेहतर इस्तेमाल करना है।

    यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। इसके बाद भारत संधि के तहत आने वाली छह नदियों के जल का अपने हिस्से में अधिकतम उपयोग करने की दिशा में काम कर रहा है। सिंधु नदी भी इन्हीं नदियों में शामिल है।

    उपशी में तैयार डैम के जरिए स्थानीय स्तर पर पानी रोककर उसे लद्दाख की जरूरतों में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है और नदी का जो पानी बहाव के जरिए आगे चला जाता था, उसका एक हिस्सा स्थानीय उपयोग में आ सकेगा।

    56 करोड़ से ज्यादा की लागत, 36 और डैम प्रस्तावित

    उपशी का प्रोजेक्ट लद्दाख में प्रस्तावित बड़े जल संरक्षण अभियान का शुरुआती मॉडल है। सूत्रों के मुताबिक, सिंधु नदी पर 36 और रॉक चेक डैम बनाए जाने की योजना है। इसके लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है।

    प्रस्तावित परियोजना के तहत लेह में 7 हिमालयन रॉक चेक डैम और कारगिल में 29 चेक डैम बनाए जाएंगे। कारगिल जिले में सिंधु नदी बटालिक सेक्टर से होकर गुजरती है। सभी प्रस्तावित परियोजनाओं पर 56 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होने का अनुमान है।

    सीमेंट-चूने के बजाय नदी के पत्थरों से निर्माण

    उपशी के रॉक चेक डैम की निर्माण तकनीक इसे पारंपरिक बांधों से अलग बनाती है। इसे तैयार करने में सीमेंट या चूने का इस्तेमाल नहीं किया गया है। नदी के तल से निकाले गए बड़े प्राकृतिक पत्थरों को आपस में इंटरलॉक कर संरचना तैयार की गई है।

    इस डैम की पानी जमा करने की क्षमता करीब 4 करोड़ लीटर है। अधिकारियों के मुताबिक, स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल कर तैयार की गई ऐसी संरचनाएं लद्दाख जैसे क्षेत्र में जल संरक्षण के लिए उपयोगी मॉडल साबित हो सकती हैं।

    10 फीट पानी जमा, नहर से खेतों तक पहुंचेगा

    लद्दाख में खेती के लिए पानी की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती रही है। खासकर वसंत ऋतु में बुवाई के दौरान किसानों को पानी की कमी का सामना करना पड़ता है।

    उपशी डैम में जलस्तर 10 फीट तक पहुंचने के बाद इसे इगू फे नहर के जरिए आसपास के खेतों तक पहुंचाने की योजना है। इससे सिंचाई की सुविधा बढ़ेगी और खेती योग्य जमीन को पर्याप्त पानी मिलने की उम्मीद है।

    परियोजना के आगे बढ़ने के साथ लद्दाख के दूसरे इलाकों में भी इसी तरह की जल संरक्षण संरचनाएं विकसित करने की तैयारी है।

    पानी के स्थानीय इस्तेमाल पर बढ़ा फोकस

    उपशी का यह डैम केवल एक स्थानीय जल संरक्षण परियोजना नहीं, बल्कि सिंधु नदी तंत्र में भारत के अपने हिस्से के पानी के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में उठाया गया कदम भी है। आने वाले समय में प्रस्तावित 36 अन्य डैमों पर काम आगे बढ़ता है तो लद्दाख में सिंचाई, स्थानीय जल उपलब्धता और कृषि गतिविधियों को इसका लाभ मिल सकता है।

  • सोनम वांगचुक फिर आंदोलन की तैयारी में, लद्दाख हिंसा की जांच रिपोर्ट और राज्य के दर्जे की मांग पर बढ़ेगा दबाव

    सोनम वांगचुक फिर आंदोलन की तैयारी में, लद्दाख हिंसा की जांच रिपोर्ट और राज्य के दर्जे की मांग पर बढ़ेगा दबाव

    नई दिल्ली ।लद्दाख में पिछले साल हुई हिंसा की बरसी से पहले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने एक बार फिर आंदोलन तेज करने का संकेत दिया है। लेह में 24 सितंबर 2025 की हिंसक घटना में मारे गए लोगों की याद में कैंडल मार्च निकाला गया। इस दौरान वांगचुक ने कहा कि आने वाले दिनों में लद्दाख की लंबित मांगों और पिछले साल की घटना की जवाबदेही को लेकर कार्यक्रमों को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।

    वांगचुक के मुताबिक 24 अगस्त से 24 सितंबर तक का समय पिछले साल की घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों को याद करने और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए रखा गया है। उन्होंने कहा कि शुरुआती कार्यक्रम को सीमित रखा गया है, क्योंकि इस समय दलाई लामा लद्दाख में हैं। उनके लद्दाख से जाने के बाद बड़े स्तर पर प्रदर्शन शुरू करने का संकेत दिया गया है।

    24 सितंबर 2025 को लद्दाख में राज्य के दर्जे और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किए जाने समेत कई मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन हिंसक हो गया था। इस दौरान सरकारी और राजनीतिक प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा, वाहनों में आगजनी हुई और सुरक्षा बलों के साथ झड़प की स्थिति बनी। हिंसा के दौरान कई लोगों की मौत हुई और सुरक्षा बलों के जवान भी घायल हुए थे।

    इस घटना से पहले वांगचुक ने 10 सितंबर 2025 को भूख हड़ताल शुरू की थी। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में लद्दाख को राज्य का दर्जा देना, संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करना, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा क्षेत्र के प्रशासन में स्थानीय प्रतिनिधित्व बढ़ाना शामिल रहा है।

    24 सितंबर की घटना के बाद केंद्र सरकार ने न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था। आयोग का उद्देश्य हिंसा की परिस्थितियों, घटनाक्रम और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच करना है। वांगचुक और आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों की प्रमुख मांग अब यह है कि आयोग की रिपोर्ट जल्द सार्वजनिक की जाए।

    वांगचुक ने कहा है कि घटना को एक साल पूरा होने के करीब है, लेकिन जांच रिपोर्ट सामने नहीं आने से लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं। उनके अनुसार रिपोर्ट सार्वजनिक होने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि 24 सितंबर को परिस्थितियां किस तरह बिगड़ीं और हिंसा तथा पुलिस कार्रवाई के पीछे क्या घटनाक्रम रहा।

    लद्दाख की राजनीतिक मांगों को लेकर केंद्र और क्षेत्र के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी जारी रही है। लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस लंबे समय से राज्य के दर्जे और छठी अनुसूची जैसी मांगों को लेकर केंद्र के साथ बातचीत कर रहे हैं। मई 2026 में भी केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई थी।

    मई की बातचीत में लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा और प्रतिनिधित्व की व्यवस्था पर चर्चा हुई थी। बातचीत के दौरान कुछ वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर भी विचार सामने आया, लेकिन राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग अब भी आंदोलनकारी पक्ष के प्रमुख मुद्दों में बनी हुई है। दोनों पक्षों के बीच आगे की बातचीत को लेकर भी उम्मीद बनी हुई है।

    सोनम वांगचुक की भूमिका इस आंदोलन में महत्वपूर्ण रही है। सितंबर 2025 की घटनाओं के बाद उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया था। केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में उनकी हिरासत रद्द कर दी, जिसके बाद वह दोबारा सार्वजनिक गतिविधियों में सक्रिय हुए। इसके बाद उन्होंने बातचीत और शांतिपूर्ण आंदोलन के जरिए लद्दाख की मांगों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

    अब सितंबर की बरसी के दौरान लद्दाख में होने वाले कार्यक्रमों पर सबकी नजर रहेगी। वांगचुक ने स्पष्ट संकेत दिया है कि कैंडल मार्च केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में आंदोलन का स्वरूप बड़ा हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि लद्दाख की मांगों को आगे बढ़ाने का रास्ता शांतिपूर्ण होना चाहिए। जांच रिपोर्ट, राज्य के दर्जे और संवैधानिक सुरक्षा जैसे मुद्दे आने वाले दिनों में केंद्र और लद्दाख प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के केंद्र में रहेंगे।

  • भारत की दो टूक…. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भारतीय क्षेत्रों पर चीन ने कर रखा है अवैध कब्जा

    भारत की दो टूक…. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भारतीय क्षेत्रों पर चीन ने कर रखा है अवैध कब्जा


    नई दिल्ली।
    भारत (India) ने दो टूक शब्दों में कहा है कि उसने कभी भी चीन (China) की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं किया है, उलटा चीन जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir) तथा लद्दाख (Ladakh) में भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्जा किए हुए है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल (Randhir Jaiswal) से शुक्रवार को मीडिया ब्रीफिंग में यह सवाल पूछा गया कि हाल ही में मनीला में भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की वार्ता के बाद चीन ने कहा है कि भारतीय विदेश मंत्री ने वार्ता के दौरान कहा कि ताइवान को लेकर भारत के रुख में बदलाव नहीं आया है और वह चीन की संप्रभुता का सम्मान करता है।

    प्रवक्ता जायसवाल ने स्पष्ट किया कि विदेश मंत्री ने साथ ही यह भी कहा कि भारत किसी भी प्रकार से चीन की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं करता है और वह चीन से भी इसी तरह के सम्मान की अपेक्षा करता है लेकिन चीन ने 1963 से भारतीय क्षेत्रों पर अवैध कब्जा कर रखा है।

    प्रवक्ता ने आगे कहा , “विदेश मंत्री ने कहा कि जब संप्रभुता के मुद्दों की बात आती है, तो वास्तव में भारत को ही उन्हें उठाना चाहिए और भारत उन्हें उठाता भी है। भारत किसी भी प्रकार से चीन की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं करता और इस मामले में लगातार एक समान रुख पर कायम रहा है। लेकिन चीन 1963 से जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख में भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्ज़ा किए हुए है, जहां भारत का अधिकार स्वयं चीन द्वारा भी आधिकारिक रूप से स्वीकार किया गया है। इसके अतिरिक्त, जम्मू कश्मीर के उन क्षेत्रों में, जो भारत के हैं, चीन की परियोजनाएं चल रही हैं, और हम इसका विरोध करते हैं।” उल्लेखनीय है कि जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री के बीच मनीला में आसियान क्षेत्रीय मंच की बैठक से इतर द्विपक्षीय वार्ता हुई थी।


    ‘भारत जानबूझकर नहीं छोड़ रहा पानी’

    वहीं, भारत ने पाकिस्तान के मीडिया में आ रही इन रिपोर्टों को पूरी तरह से निराधार बताया है जिनमें, आरोप लगाया गया है कि भारत जानबूझकर पानी छोड़ कर पाकिस्तान में बाढ की स्थिति उत्पन्न कर रहा है। भारत का कहना है कि चेनाब नदी में पानी की वृद्धि जम्मू और आसपास के क्षेत्रों में भारी मॉनसूनी बारिश का नतीजा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को यहां मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि पाकिस्तानी मीडिया का यह आरोप कि भारत जानबूझकर पानी छोड़ कर बाढ़ की स्थिति उत्पन्न कर रहा है , पूरी तरह से निराधार है। उन्होंने कहा कि 20 से 23 जुलाई के दौरान चेनाब नदी के बहाव में हाल ही में हुई वृद्धि, जम्मू और उसके आसपास केक्षेत्रों में हुई भारी मानसूनी बारिश का सीधा नतीजा है।

    बाढ़ पर विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
    प्रवक्ता ने कहा कि गौर करने वाली बात यह है कि पाकिस्तान के लाहौर स्थित बाढ़ पूर्वानुमान विभाग ने 22 जुलाई को जारी अपनी बाढ़ चेतावनी में, चेनाब नदी में बाढ़ के ऊंचे स्तर का कारण ऊपरी जल क्षेत्र में हुई भारी बारिश को ही बताया था। इसमें यह भी कहा गया था कि मराला में पानी का तेज बहाव बना रहेगा और बारिश कम होने पर यह धीरे-धीरे घटेगा। जायसवाल ने कहा कि इसलिए, नदी के बहाव में यह वृद्धि भारी मानसूनी बारिश की एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है न कि भारत द्वारा जानबूझकर उठाए गए कदम का नतीजा। मौसम की वजह से आई बाढ़ की इस घटना को ऊपरी क्षेत्र से की गई छेड़छाड़ के रूप में पेश करने की कोशिशें गलत और तकनीकी रूप से आधारहीन हैं। उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान की अपनी आधिकारिक बाढ़ चेतावनियों के भी विपरीत है।

  • गर्मियों में सर्दी का मज़ा: भारत के 4 हिल स्टेशन जहाँ रहता है ठंडा मौसम

    गर्मियों में सर्दी का मज़ा: भारत के 4 हिल स्टेशन जहाँ रहता है ठंडा मौसम


    नई दिल्ली। मई का महीना आते ही देश के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच जाता है। ऐसे में लोग राहत की तलाश में हिल स्टेशनों की ओर रुख करते हैं। भारत में कुछ ऐसी खूबसूरत जगहें हैं जहां इस समय भी ठंडी हवाएं, कोहरा और कभी-कभी हल्की बारिश का आनंद मिलता है।

    1. कुफरी – छोटा लेकिन ठंडा हिल स्टेश
    कुफरी हिमाचल प्रदेश का एक शांत और खूबसूरत हिल स्टेशन है, जो अपनी ठंडी जलवायु और हरियाली के लिए जाना जाता है। मई के महीने में भी यहां का मौसम सर्द रहता है, जिससे यह जगह गर्मी से बचने के लिए परफेक्ट बन जाती है। यहां ट्रेकिंग, एडवेंचर एक्टिविटीज और प्राकृतिक नजारे पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

    2. नैनीताल – झीलों के बीच ठंडी हवा का एहसास
    नैनीताल अपनी खूबसूरत नैनी झील के लिए मशहूर है।
    चारों तरफ पहाड़ों से घिरी यह जगह मई में भी ठंडी और आरामदायक रहती है।
    यहां बोटिंग, मॉल रोड पर घूमना और शांत वातावरण में समय बिताना पर्यटकों को खास अनुभव देता है।

    3. मनाली – एडवेंचर और ठंड का परफेक्ट कॉम्बिनेशन
    मनाली उन लोगों के लिए बेहतरीन जगह है जो ठंड के साथ एडवेंचर का मजा लेना चाहते हैं।
    यहां ब्यास नदी, बर्फ से ढकी चोटियां और घने जंगल इसे बेहद आकर्षक बनाते हैं।
    मई में भी यहां का मौसम ठंडा रहता है, और पैराग्लाइडिंग, राफ्टिंग जैसी एक्टिविटीज इसे और खास बनाती हैं।

    4. लद्दाख – सपनों जैसी ठंडी दुनिय
    लद्दाख अपने ऊंचे पहाड़ों, नीले आसमान और बर्फीले नजारों के लिए दुनिया भर में मशहूर है।
    यहां का मौसम मई में भी काफी ठंडा रहता है, जिससे यात्रियों को जैकेट की जरूरत पड़ती है।
    बाइक राइड, रोड ट्रिप और शांत वातावरण इसे एक यादगार डेस्टिनेशन बनाते हैं।

    अगर आप गर्मी से परेशान हैं और एक सुकून भरी छुट्टी चाहते हैं, तो कुफरी, नैनीताल, मनाली और लद्दाख आपके लिए बेहतरीन विकल्प हैं। यहां का ठंडा मौसम और प्राकृतिक सुंदरता आपको गर्मी से पूरी तरह राहत देगी।

  • भगवान बुद्ध का ज्ञान आज भी उतना ही प्रासंगिक, अमित शाह ने बताया शांति का मार्ग

    भगवान बुद्ध का ज्ञान आज भी उतना ही प्रासंगिक, अमित शाह ने बताया शांति का मार्ग

    नई दिल्ली। लद्दाख की शांत और पवित्र वादियों में उस समय एक विशेष आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला जब भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन के लिए लोगों की बड़ी संख्या एकत्र हुई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में Amit Shah ने कहा कि भगवान बुद्ध का संदेश केवल अतीत की धरोहर नहीं है, बल्कि यह आज भी उतना ही जीवंत और प्रासंगिक है जितना वह 2500 साल पहले था।

    उनके अनुसार बुद्ध का ज्ञान मानव जीवन के हर दौर में दिशा दिखाने वाला प्रकाश है।

    अपने संबोधन में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बुद्ध पूर्णिमा का यह अवसर केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक गहरी आध्यात्मिक अनुभूति का क्षण है। जब इतने लंबे अंतराल के बाद पवित्र अवशेषों का पुनः आगमन लद्दाख की धरती पर हुआ, तो यह न केवल आस्था का विषय बना, बल्कि लोगों के लिए एक भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षण भी साबित हुआ। इस आयोजन ने क्षेत्र में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण निर्मित किया।

    अमित शाह ने भगवान बुद्ध के जीवन को मानवता के लिए एक आदर्श उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि सिद्धार्थ से तथागत बनने की यात्रा करुणा, त्याग और आत्मज्ञान की ऐसी मिसाल है, जो हर व्यक्ति को जीवन में सही दिशा अपनाने की प्रेरणा देती है। बुद्ध का संदेश अहिंसा, मध्यम मार्ग और संतुलित जीवन पर आधारित था, जो आज के समय में पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

    उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास में बहुत कम ऐसे व्यक्तित्व हुए हैं जिनके जीवन की घटनाएं इतनी गहराई से प्रतीकात्मक हों। जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण जैसे महत्वपूर्ण पड़ावों का एक ही आध्यात्मिक अर्थ में जुड़ जाना उनके जीवन की विशिष्टता को दर्शाता है। यह अपने आप में मानवता के लिए एक दुर्लभ और प्रेरणादायक उदाहरण है।

    लद्दाख की सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र सदियों से बौद्ध धम्म का केंद्र रहा है। यहां न केवल बौद्ध विचारधारा को संरक्षित किया गया, बल्कि उसे आगे भी बढ़ाया गया। यह भूमि शांति, करुणा और सह-अस्तित्व की जीवंत मिसाल है, जो आज के समय में और भी प्रासंगिक हो गई है।

    अंत में उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में जब दुनिया कई चुनौतियों से गुजर रही है, तब भगवान बुद्ध का संदेश समाधान का मार्ग दिखाता है। उनका विचार आज भी उतना ही प्रभावशाली है और मानवता को एक बेहतर, शांत और संतुलित दिशा की ओर ले जाने की क्षमता रखता है।

  • पाक-चीन की कारस्तानी पर भड़के लद्दाख के LG, बोले- ये 1962 नहीं, खुद हो जाएगा टुकड़े-टुकड़े

    पाक-चीन की कारस्तानी पर भड़के लद्दाख के LG, बोले- ये 1962 नहीं, खुद हो जाएगा टुकड़े-टुकड़े


    जम्मू
    । लद्दाख (Ladakh) के उप राज्यपाल कविंदर गुप्ता (Lieutenant Governor Kavinder Gupta) ने मंगलवार को शक्सगाम घाटी (Shaksgam Valley) पर चीन के दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (Pakistan-occupied Kashmir- PoK) का पूरा क्षेत्र भारत का है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी विस्तारवादी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शक्सगाम घाटी में कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स शुरू करने के लिए चीन की आलोचना करते हुए गुप्ता ने कहा है कि यह इलाका भारत का हिस्सा है और ऐसी गतिविधियों को तुरंत रोका जाना चाहिए। भारत की आपत्तियों के मद्देनजर, चीन ने सोमवार को शक्सगाम घाटी पर अपने क्षेत्रीय दावों को दोहराते हुए जोर दिया कि इस क्षेत्र में चीनी अवसंरचना परियोजनाएं ‘संदेह से परे’ हैं।

    गुप्ता ने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लोग भी भारत का हिस्सा बनना चाहते हैं और जल्द ही पाकिस्तान ‘खुद टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा’। जम्मू में उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘पूरा कश्मीर (पाकिस्तान के कब्जे वाले हिस्से समेत) हमारा है। हमें नहीं पता कि पाकिस्तान ने चीन के साथ क्या सौदा किया है। चीन को यह समझना चाहिए कि उसकी विस्तारवादी नीति से कुछ भी हासिल नहीं होगा। भारत सक्षम है। यह 1962 का भारत नहीं, 2026 का भारत है। ऐसे किसी भी प्रयास को विफल कर दिया जाएगा। विदेश मंत्रालय इसका संज्ञान ले रहा है।’’


    पहले से हम ज्यादा मजबूत, ये बात समझ ले चीन

    गुप्ता ने कहा कि ऐसे किसी भी कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और चीन को यह समझना होगा कि आज भारत पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन ने पहले अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों पर भी दावा किया था। पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए राज्यपाल ने आरोप लगाया कि पड़ोसी देश अपने ही लोगों को छल चुका है और संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त है।


    बेचा जा रहा पाकिस्तान

    गुप्ता ने कहा, “पाकिस्तान एक ऐसा देश है जिसे बेचा जा रहा है। उसे अपनी संप्रभुता या अपने लोगों की कोई परवाह नहीं है। बलूचिस्तान, सिंध और कराची में आवाजें उठ रही हैं और वहां पाकिस्तानी सेना द्वारा अत्याचार किए जा रहे हैं। उन क्षेत्रों पर वस्तुतः सेना का ही शासन है।’’ गुप्ता ने संवेदनशील मुद्दों पर भड़काऊ बयानों के प्रति आगाह करते हुए कहा कि पीओके पर संसद का स्पष्ट रुख है।


    ऐसे बयान नहीं दें जो भड़काऊ हो

    उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे बयान नहीं दिए जाने चाहिए जो भड़काऊ प्रकृति के हों। 1994 का एक संसदीय प्रस्ताव है जो स्पष्ट रूप से कहता है कि पूरा पीओके भारत का है।’’ सेना प्रमुख के हालिया बयान (जिसमें कहा गया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जारी है) पर प्रतिक्रिया देते हुए गुप्ता ने कहा कि सशस्त्र बलों को पूर्ण राष्ट्रीय समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा, ‘‘पूरा देश सेना के साथ खड़ा है। सेना प्रमुख ने एक जिम्मेदार बयान दिया है और मैं इसका स्वागत करता हूं।’’ पाकिस्तान ने 1963 में अवैध रूप से शक्सगाम घाटी में स्थित 5,180 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र चीन को सौंप दिया था, जिसे उसने अवैध रूप से कब्जा करके हासिल किया था।