Tag: Ladli Behna Yojana

  • MP: लाड़ली बहना योजना के लाभ से वंचित महिलाओं के लिए खुशखबरी, खुलेगा पोर्टल… मंत्री ने दिए संकेत

    MP: लाड़ली बहना योजना के लाभ से वंचित महिलाओं के लिए खुशखबरी, खुलेगा पोर्टल… मंत्री ने दिए संकेत


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना (Chief Minister’s Ladli Behna Yojana) का लाभ पाने से वंचित रह गई महिलाओं (Women) के लिए राहत की उम्मीद जगी है. राज्य सरकार योजना से छूटी हुई महिलाओं के नाम जोड़ने के लिए पोर्टल दोबारा खोलने पर विचार कर सकती है. स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने इस संबंध में संकेत दिए हैं।

    बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल (Minister Narendra Shivaji Patel) ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) ने निकट भविष्य में लाड़ली बहना योजना से छूटी हुई महिलाओं के नाम जोड़ने की बात कही है. इसके लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को योजना के दायरे से बाहर रह गई महिलाओं की संख्या का आकलन करने के निर्देश दिए हैं. मंत्री के इस बयान के बाद उन महिलाओं को उम्मीद बंधी है, जो पात्र होने के बावजूद अब तक योजना में अपना नाम नहीं जुड़वा सकी हैं. हालांकि, अभी पोर्टल दोबारा खोलने को लेकर कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है।


    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए आकलन के निर्देश

    मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने स्पष्ट किया कि फिलहाल यह नहीं बताया जा सकता कि लाड़ली बहना योजना का पोर्टल कब खोला जाएगा. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को पहले यह पता लगाने के निर्देश दिए हैं कि योजना के लाभ से कितनी महिलाएं बाहर रह गई हैं. सरकार की ओर से इस आकलन के बाद आगे की प्रक्रिया पर निर्णय लिया जा सकता है. यदि पोर्टल दोबारा खोलने का फैसला होता है, तो योजना से वंचित रह गई महिलाओं को आवेदन करने का अवसर मिल सकता है।

    हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नए आवेदन कब से लिए जाएंगे, आवेदन की प्रक्रिया क्या होगी और पात्रता की शर्तों में कोई बदलाव किया जाएगा या नहीं. इन सभी बातों पर सरकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है. 1.25 करोड़ महिलाओं के खातों में आई 41वीं किस्त लाड़ली बहना योजना को लेकर यह बयान ऐसे समय आया है, जब बुधवार, 14 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उमरिया जिले के गुरुवाही ग्राम में आयोजित राज्य स्तरीय लाड़ली बहना सम्मेलन में योजना की 41वीं किस्त जारी की।

    मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक के जरिए योजना की 1.25 करोड़ पात्र महिलाओं के बैंक खातों में राशि ट्रांसफर की. इस दौरान करीब 1834 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी गई. इस कार्यक्रम के साथ ही योजना से जुड़ी महिलाओं के खातों में किस्त पहुंचने की प्रक्रिया आगे बढ़ी. वहीं, अब योजना से बाहर रह गई महिलाओं के नाम जोड़ने को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।


    वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 23,882.81 करोड़ रुपये का बजट

    मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 23,882.81 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है. योजना के तहत पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है. अब सरकार की ओर से योजना के दायरे से बाहर रह गई महिलाओं की संख्या का आकलन कराया जा रहा है. इस प्रक्रिया के बाद पोर्टल दोबारा खोलने को लेकर फैसला लिए जाने की संभावना है. फिलहाल महिलाओं को आवेदन शुरू होने की तारीख और पात्रता से जुड़ी आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना होगा. मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल के बयान से पोर्टल दोबारा खुलने की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन अभी इसे लेकर अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।

  • लाड़ली बहना के सवाल पर ठहाकों से गूंजा बुंदेली समागम, CM मोहन यादव बोले मुझे क्या पता था इतनी भारी मार पड़ेगी

    लाड़ली बहना के सवाल पर ठहाकों से गूंजा बुंदेली समागम, CM मोहन यादव बोले मुझे क्या पता था इतनी भारी मार पड़ेगी


    भोपाल । भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित बुंदेली समागम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का अलग अंदाज देखने को मिला। कार्यक्रम के दौरान बुंदेली कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने मुख्यमंत्री से कई सवाल पूछे। इसी दौरान छतरपुर की बुंदेली कंटेंट क्रिएटर बिन्नू रानी ने मुख्यमंत्री से महिलाओं और बेटियों को लेकर सवाल किया। इस पर मुख्यमंत्री ने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया और लाड़ली बहना योजना का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें पता चला कि इस योजना की कितनी बड़ी जिम्मेदारी है।

    बिन्नू रानी ने मुख्यमंत्री से पूछा कि उन्होंने अपनी जिज्जियों यानी बहनों के लिए तो काफी कुछ किया है लेकिन उनकी बिन्नुओं यानी बेटियों के लिए वह क्या करना चाहते हैं। सवाल सुनकर मुख्यमंत्री ने हल्के फुल्के अंदाज में कहा कि उन्हें क्या पता था कि मुख्यमंत्री बनते ही इतनी भारी मार पड़ती है। मुख्यमंत्री के इस जवाब के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच ठहाके गूंजने लगे।

    मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि उनकी बहनों के लिए किसी तरह की परेशानी नहीं है। उन्होंने लाड़ली बहना योजना की शुरुआत में मिलने वाली एक हजार रुपए की राशि का जिक्र किया। साथ ही बताया कि अब यह सहायता बढ़कर डेढ़ हजार रुपए तक पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री ने बिन्नू रानी से मजाकिया अंदाज में कहा कि अभी वह लाड़ली बहना योजना के लिए छोटी हैं और जब बड़ी हो जाएंगी तो उन्हें भी इसका लाभ दिया जाएगा।

    बुंदेली समागम में मुख्यमंत्री से बुंदेलखंड के विकास और युवाओं से जुड़े सवाल भी किए गए। एक युवा ने उनसे पूछा कि अगर बुंदेलखंड के युवाओं की कोई एक समस्या 24 घंटे में हल करनी हो तो वह क्या करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बुंदेलखंड जैसी बड़ी समस्या को 24 घंटे में हल करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के लोगों में क्षमता योग्यता और बुद्धिमत्ता की कमी नहीं है। सरकार का काम उन्हें आगे बढ़ने के लिए अवसर उपलब्ध कराना है।

    मुख्यमंत्री ने बुंदेलखंड से होने वाले पलायन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले रोजगार और पानी से जुड़ी समस्याओं के कारण क्षेत्र से पलायन की स्थिति बनती थी। अब सरकार सिंचाई का रकबा बढ़ाने पर काम कर रही है। इसी क्रम में केन बेतवा जैसी बड़ी परियोजना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी की उपलब्धता बढ़ने से क्षेत्र के कई सेक्टर में बदलाव आने की उम्मीद है।

    कार्यक्रम में फिल्म अभिनेता मुकेश तिवारी के साथ बड़ी संख्या में बुंदेली सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स मौजूद रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उनसे संवाद किया और उनके सवालों के जवाब भी दिए। कार्यक्रम में बुंदेली संस्कृति और क्षेत्र की समस्याओं के साथ सरकार की योजनाओं को लेकर भी चर्चा हुई।

    लाड़ली बहना योजना की बात करें तो इसकी घोषणा 28 जनवरी 2023 को तत्कालीन शिवराज सरकार ने की थी। योजना का औपचारिक शुभारंभ 5 मार्च 2023 को हुआ था। शुरुआत में पात्र महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान था। जून 2023 में योजना की पहली किस्त जारी की गई थी।

    शुरुआती चरण में करीब एक करोड़ 25 लाख महिलाएं योजना के लिए पात्र थीं। पहली किस्त के दौरान एक करोड़ से ज्यादा महिलाओं को भुगतान किया गया था। इसके बाद समय के साथ योजना की मासिक सहायता राशि बढ़ाई गई। सितंबर 2026 में जारी 40वीं किस्त के दौरान करीब एक करोड़ 25 लाख महिलाओं के खातों में राशि भेजी गई। मौजूदा समय में पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपए की सहायता राशि मिल रही है।

    बुंदेली समागम में मुख्यमंत्री की लाड़ली बहना पर की गई टिप्पणी भले ही मजाकिया अंदाज में रही हो लेकिन इसके जरिए उन्होंने योजना की जिम्मेदारी और महिलाओं के लिए सरकार की आर्थिक सहायता का भी उल्लेख किया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों की प्रतिक्रियाओं और सवाल जवाब के बीच मुख्यमंत्री का यह अंदाज चर्चा का विषय बना रहा।

  • MP: लाड़ली बहना योजना पर हर माह 1,900 करोड़ रुपये खर्च… HC ने सरकार को नोटिस भेज मांगा जवाब

    MP: लाड़ली बहना योजना पर हर माह 1,900 करोड़ रुपये खर्च… HC ने सरकार को नोटिस भेज मांगा जवाब


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) को लेकर अब हाईकोर्ट (High Court) में सवाल उठाए गए हैं. योजना की उपयोगिता, सरकारी खजाने पर पड़ रहे आर्थिक भार और महिलाओं को दी जा रही राशि के इस्तेमाल को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है. हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच (High Court Gwalior Bench) ने मामले में प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है. ग्वालियर की सुधा दुबे की ओर से दायर इस जनहित याचिका में योजना से जुड़े कई सवाल उठाए गए हैं. याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने कोर्ट में पक्ष रखा. हाईकोर्ट ने सरकार से योजना के लाभार्थियों, उन्हें दी जा रही राशि और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जानकारी भी मांगी है।

    याचिकाकर्ता की ओर से योजना के तहत खर्च होने वाली सरकारी राशि के इस्तेमाल पर सवाल उठाया गया है. वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा का कहना है कि महिलाओं के कल्याण के नाम पर खर्च हो रहे सरकारी पैसे का इस्तेमाल रोजगार और स्थायी आर्थिक अवसर पैदा करने में किया जा सकता था. उनका तर्क है कि अगर महिलाओं के हित में पैसा खर्च करना था तो इससे उद्योग-धंधे या रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते थे. उनका कहना है कि रोजगार के जरिए पैसा आर्थिक गतिविधियों में बना रह सकता है और महिलाओं को लंबे समय तक इसका फायदा मिल सकता है. अनिल मिश्रा ने सवाल उठाया कि सरकार इस पैसे से क्या फायदा हासिल कर रही है, यह स्पष्ट होना चाहिए. उनके मुताबिक, सीधे राशि देने की बजाय अगर महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जाए तो उससे आर्थिक गतिविधियों का एक चक्र बन सकता है।

    सरकारी खजाने पर पड़ रहे बोझ को लेकर उठे सवाल

    वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने योजना के खर्च को लेकर दावा किया कि हर महीने करीब 1,900 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. उन्होंने सरकारी खजाने की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अगर कर्ज लेकर पैसा बांटा जाएगा तो बेरोजगारी और बढ़ सकती है. उनके मुताबिक, जनता के टैक्स से आने वाले पैसे का इस्तेमाल डेवलपमेंट, एजुकेशन और रोजगार जैसे क्षेत्रों में किया जाना चाहिए. वकील ने यह भी दावा किया कि मध्य प्रदेश पर करीब 3.08 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है. हालांकि यह आंकड़ा और इससे जुड़े आर्थिक प्रभाव याचिकाकर्ता की ओर से रखी गई दलीलों का हिस्सा हैं. इन दावों पर राज्य सरकार का जवाब अभी सामने आना बाकी है।

    याचिकाकर्ता की ओर से लाड़ली बहना योजना के लागू होने के समय को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. अनिल मिश्रा ने कहा कि योजना मार्च 2023 में लागू की गई थी और उस समय चुनाव का माहौल था. उन्होंने योजना को चुनाव के समय तोहफे बांटने जैसी स्थिति बताते हुए इस पर सवाल उठाया. यह याचिकाकर्ता की ओर से रखी गई दलील है. इस मामले में सरकार का पक्ष अभी आना बाकी है।

    मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से योजना से जुड़े आंकड़े और रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा है. कोर्ट ने यह जानकारी भी मांगी है कि योजना के कितने लाभार्थी हैं और उनके लिए कितनी राशि का भुगतान किया जा रहा है. सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करना है. सरकारी वेबसाइट पर वर्तमान में करीब 1 करोड़ 25 लाख पात्र आवेदक दर्ज हैं. याचिकाकर्ता की ओर से इसी योजना के वित्तीय असर और इसके उद्देश्य को लेकर सवाल उठाए गए हैं. वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने कहा कि सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी किए हैं, ताकि सरकार इन सवालों पर अपना जवाब दे सके. अब सरकार को योजना से जुड़े आंकड़े और रिकॉर्ड अदालत के सामने रखने हैं।


    रोजगार और स्वरोजगार के जरिए महिलाओं को मजबूत किया जाए

    लाड़ली बहना योजना को लेकर हाईकोर्ट में मामला पहुंचने के बावजूद फिलहाल योजना को बंद करने का कोई आदेश नहीं दिया गया है. कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है और मामले की आगे की कार्रवाई सरकार के जवाब के बाद होगी. याचिकाकर्ता की मुख्य दलील है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए सीधे भुगतान के बजाय रोजगार और स्वरोजगार के स्थायी अवसर पैदा करने पर सरकारी धन खर्च किया जाना चाहिए. अब इस मामले में सरकार के जवाब पर नजर रहेगी. सरकार को यह बताना होगा कि योजना का उद्देश्य क्या है, इसके तहत कितने लाभार्थी हैं, कितनी राशि वितरित की जा रही है और योजना से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड क्या हैं. इसके बाद हाईकोर्ट में मामले की आगे सुनवाई होगी।

  • लाड़ली बहना योजना में घटती जा रही महिलाओं की संख्या 2026 में अब तक 21 हजार नाम बाहर

    लाड़ली बहना योजना में घटती जा रही महिलाओं की संख्या 2026 में अब तक 21 हजार नाम बाहर


    भोपाल। मध्य प्रदेश की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में पात्र हितग्राहियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। विधानसभा चुनाव 2023 से पहले शुरू हुई इस योजना में जहां शुरुआत में बड़ी संख्या में महिलाओं को शामिल किया गया था वहीं अब पात्रता की शर्तों और अन्य कारणों के चलते हजारों महिलाओं के नाम सूची से बाहर हो रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2026 से सितंबर 2026 के बीच करीब 21 हजार 150 महिलाओं के नाम योजना से हटाए गए हैं। इसके साथ ही योजना शुरू होने के बाद तीन साल में करीब 6 लाख 26 हजार महिलाओं के नाम सूची से बाहर हो चुके हैं।

    विभागीय आंकड़ों के अनुसार 1 जनवरी 2026 को लाड़ली बहना योजना में 1 करोड़ 25 लाख 31 हजार महिलाएं पात्र हितग्राही थीं। सितंबर 2026 तक यह संख्या घटकर 1 करोड़ 25 लाख 10 हजार 150 रह गई। यानी करीब आठ महीने की अवधि में ही 21 हजार से ज्यादा नाम कम हो गए। यह गिरावट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फिलहाल योजना में नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया नहीं चल रही है। ऐसे में एक तरफ नए हितग्राही नहीं जुड़ रहे हैं और दूसरी तरफ पात्रता पूरी नहीं करने वाली महिलाओं के नाम लगातार हटाए जा रहे हैं।

    योजना की शुरुआत में अक्टूबर 2023 में करीब 1 करोड़ 31 लाख 35 हजार 985 महिलाएं योजना में शामिल थीं। इसके बाद आपत्तियों और पात्रता की जांच के दौरान 2 लाख 18 हजार 858 नाम हटाए गए। इसके बाद पात्र हितग्राहियों की संख्या करीब 1 करोड़ 29 लाख 5 हजार 457 रह गई थी। समय के साथ यह संख्या और कम होती चली गई।

    अधिकारियों के मुताबिक लाड़ली बहना योजना में पात्रता के लिए अधिकतम उम्र 60 वर्ष निर्धारित है। जिन महिलाओं की उम्र 60 वर्ष पूरी हो जाती है उनके नाम योजना की सूची से हटा दिए जाते हैं। इसके अलावा किसी हितग्राही की मृत्यु होने या अन्य पात्रता शर्तें पूरी नहीं होने की स्थिति में भी नाम बाहर किया जाता है। इसी वजह से योजना के आंकड़ों में लगातार कमी देखने को मिल रही है।

    दूसरी ओर नए नाम नहीं जुड़ने के कारण योजना में शामिल महिलाओं की संख्या बढ़ने की संभावना फिलहाल कम है। योजना की शुरुआत जून 2023 में 1000 रुपए प्रतिमाह की आर्थिक सहायता के साथ हुई थी। सरकार ने इसे पांच साल में बढ़ाकर 3000 रुपए प्रतिमाह करने का निर्णय लिया था। शुरुआत के करीब चार महीने बाद मासिक राशि बढ़ाकर 1250 रुपए कर दी गई थी। इसके बाद नवंबर 2025 से इसमें 250 रुपए की और बढ़ोतरी की गई और वर्तमान में पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपए दिए जा रहे हैं।

    विभाग की ओर से पात्रता के आधार पर हितग्राहियों की समीक्षा लगातार जारी है। ऐसे में दिसंबर 2026 के अंत तक योजना में शामिल महिलाओं की संख्या और घट सकती है। खासकर उम्र की सीमा पूरी करने वाली महिलाओं और अन्य कारणों से अपात्र पाए जाने वाले हितग्राहियों के नाम सूची से हटाए जाने की प्रक्रिया जारी रहेगी। इस बीच योजना में नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू नहीं होने से मौजूदा संख्या में बढ़ोतरी की संभावना फिलहाल नजर नहीं आ रही है।

  • मोहन कैबिनेट के बड़े फैसले: महिलाओं-किसानों को बड़ी सौगात, 1.46 लाख करोड़ के विकास कार्यों को मंजूरी

    मोहन कैबिनेट के बड़े फैसले: महिलाओं-किसानों को बड़ी सौगात, 1.46 लाख करोड़ के विकास कार्यों को मंजूरी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार 18 अगस्त 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसलों पर मुहर लगी। मंत्रालय में हुई इस बैठक में महिला कल्याण से लेकर किसानों स्वास्थ्य शिक्षा नर्मदा संरक्षण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सड़क विकास और खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक प्रदेश में विकास और जनकल्याण से जुड़े विभिन्न कार्यों के लिए करीब 1 लाख 46 हजार करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन फैसलों को अगले पांच वर्षों के विकास और जनहित से जुड़े कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    कैबिनेट के फैसलों में महिलाओं और बेटियों से जुड़ी योजनाओं पर विशेष जोर दिखाई दिया। सरकार ने लाड़ली बहना योजना के लिए अगले पांच वर्षों में 1 लाख 14 हजार 365 करोड़ रुपये का प्रावधान मंजूर किया है। यह योजना मध्य प्रदेश सरकार की प्रमुख महिला कल्याण योजनाओं में शामिल है। इसके तहत पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है। लंबे समय के लिए वित्तीय प्रावधान तय होने से योजना के आगामी संचालन के लिए बजटीय आधार मजबूत होगा।

    इसी तरह बेटियों के भविष्य और शिक्षा से जुड़ी लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए 16 हजार 326 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए भी अगले पांच वर्षों में 2 हजार 137 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इन तीनों योजनाओं को मिलाकर महिला कल्याण और बेटियों से जुड़े कार्यक्रमों के लिए 1.32 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का वित्तीय प्रावधान किया गया है।

    स्वास्थ्य क्षेत्र को भी कैबिनेट से बड़ा बजट मिला है। सरकार ने स्वास्थ्य योजनाओं और संबंधित कार्यों के लिए 11 हजार 835 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसका इस्तेमाल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने मौजूदा सुविधाओं के विस्तार और विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन में किया जाएगा। सरकार की कोशिश प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को ज्यादा प्रभावी और सुलभ बनाने की है।

    किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। कृषि शिक्षा अनुसंधान और विस्तार गतिविधियों के लिए 870 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इसके जरिए कृषि क्षेत्र में नई तकनीक अनुसंधान प्रशिक्षण और किसानों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने से जुड़े कामों को बढ़ावा देने की योजना है। कैबिनेट में डिंडौरी जिले की उपलब्धि का भी उल्लेख हुआ जहां प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना के तहत किए गए कार्यों के मामले में देश में बेहतर प्रदर्शन की जानकारी दी गई। सरकार अब इस मॉडल को दूसरे जिलों तक पहुंचाने की दिशा में काम करेगी।

    बैठक का एक बड़ा फैसला नर्मदा संरक्षण से जुड़ा रहा। सरकार ने नर्मदा नदी को निर्मल और अविरल बनाए रखने के उद्देश्य से नमन मिशन के गठन को मंजूरी दी है। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का राज्य अनुदान दिए जाने की जानकारी सामने आई है। मिशन के तहत नदी के प्रदूषण को रोकने घाटों की साफ सफाई जल गुणवत्ता और नर्मदा के प्राकृतिक प्रवाह को बेहतर बनाए रखने जैसे मुद्दों पर काम किया जाएगा।

    विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी अगले पांच वर्षों के लिए 492 करोड़ रुपये से ज्यादा की मंजूरी दी गई है। सरकार का जोर तकनीकी विकास नवाचार और विज्ञान आधारित कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर रहेगा। वहीं प्रदेश में सड़क परियोजनाओं के प्रबंधन को मजबूत करने के लिए मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन में 35 नए पदों को मंजूरी दी गई है।

    खेल प्रतिभाओं को कम उम्र में पहचानने के लिए 5 से 15 वर्ष के बच्चों का टैलेंट सर्च कार्यक्रम चलाने की योजना को भी मंजूरी दी गई है। इसके जरिए प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान कर उन्हें उनकी खेल प्रतिभा के अनुसार प्रशिक्षण और आगे बढ़ने के अवसर देने की तैयारी है।

    कुल मिलाकर 18 अगस्त की मोहन कैबिनेट बैठक में सरकार ने महिला कल्याण किसानों स्वास्थ्य पर्यावरण विज्ञान तकनीक सड़क और खेल जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए बड़े फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विभागों को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और सरकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचाने पर जोर दिया है। अगले पांच वर्षों के लिए किए गए इन वित्तीय प्रावधानों से सरकार ने विकास और जनकल्याण का एक व्यापक रोडमैप सामने रखने की कोशिश की है।

  • सतना में बड़ा खुलासा: ट्रेजरी और समग्र आईडी लिंक होते ही सामने आया मामला

    सतना में बड़ा खुलासा: ट्रेजरी और समग्र आईडी लिंक होते ही सामने आया मामला


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना में सतना जिले से बड़ा अनियमितता मामला सामने आया है। जिले में 27 ऐसी महिलाओं की पहचान हुई है, जो सरकारी सेवा में होने के बावजूद हर महीने योजना के तहत 1500 रुपए की राशि ले रही थीं। ट्रेजरी सिस्टम में समग्र आईडी लिंक होने के बाद यह फर्जीवाड़ा उजागर हुआ, जिसके बाद प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग में हड़कंप मच गया है। अब इन महिलाओं से शासन द्वारा मिली राशि की रिकवरी की तैयारी शुरू कर दी गई है।

    जानकारी के मुताबिक, चिन्हित 27 महिलाओं में से 16 नगर निगम क्षेत्र की कर्मचारी हैं। ये महिलाएं एक तरफ सरकारी खजाने से वेतन ले रही थीं, वहीं दूसरी ओर लाड़ली बहना योजना का लाभ भी लगातार उठा रही थीं। जांच में सामने आया कि इन कर्मचारियों ने अब तक कुल 5 लाख 5 हजार 450 रुपए योजना के तहत अपने खातों में प्राप्त किए हैं। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि योजना में आवेदन करते समय गलत जानकारी दी गई थी या बाद में सरकारी सेवा मिलने के बावजूद लाभ लेना जारी रखा गया।

    महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, योजना की शुरुआत में लाभार्थियों का चयन सेल्फ डिक्लेरेशन यानी स्व-घोषणा के आधार पर किया गया था। उस समय समग्र आईडी और ट्रेजरी रिकॉर्ड आपस में लिंक नहीं थे। लगभग एक साल पहले जब सरकारी कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए समग्र आईडी को ट्रेजरी से जोड़ा गया, तब यह गड़बड़ी पकड़ में आई। इसके बाद विभाग ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी।

    जिला कार्यक्रम अधिकारी राजीव सिंह ने बताया कि संबंधित निकायों की समितियां जांच कर रही हैं। इसमें यह भी देखा जा रहा है कि कहीं कुछ महिलाएं योजना का लाभ लेने के बाद सरकारी सेवा में तो नहीं आईं। साथ ही, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मामलों की भी अलग से जांच होगी, क्योंकि शासन द्वारा उन्हें कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट दी गई है।

    प्रशासन ने संबंधित निकायों से इन महिला कर्मचारियों के आधार कार्ड, समग्र आईडी, बैंक खाते और सेवा संबंधी दस्तावेज मांगे हैं। जांच पूरी होने के बाद अपात्र पाए जाने वालों से पूरी राशि वापस ली जाएगी। इस मामले के सामने आने के बाद योजना की पारदर्शिता और सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं।

    वर्तमान में सतना जिले में लाड़ली बहना योजना के लगभग 3 लाख 76 हजार हितग्राही हैं। योजना के नियमों के अनुसार, सरकारी नौकरी करने वाली महिलाएं, आयकरदाता परिवार और अधिक आय वर्ग के लोग इस योजना के पात्र नहीं हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी योजना का लाभ ले रहे थे, जिससे प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

  • मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव महिला सशक्तिकरण और योजनाओं पर करेंगे संबोधन…

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव महिला सशक्तिकरण और योजनाओं पर करेंगे संबोधन…


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 15 अप्रैल को नारी शक्ति वंदन अभियान के अंतर्गत एक भव्य और वृहद कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन शहर के प्रतिष्ठित रवींद्र भवन में संपन्न होगा, जहां राज्य के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव मुख्य रूप से उपस्थित रहकर संबोधित करेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं के सशक्तिकरण, सामाजिक भागीदारी और उनके समग्र विकास की दिशा में सरकार की योजनाओं और प्रयासों को जन-जन तक पहुंचाना है।

    यह कार्यक्रम नारी शक्ति वंदन पखवाड़े का हिस्सा है, जो 25 अप्रैल तक पूरे प्रदेश में विभिन्न गतिविधियों के साथ मनाया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से महिलाओं के उत्थान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान को केंद्र में रखते हुए कई स्तरों पर जागरूकता और लाभकारी योजनाओं का विस्तार किया जा रहा है। राजधानी में होने वाला यह मुख्य कार्यक्रम इस पूरे अभियान का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव नारी सशक्तिकरण पर विस्तार से अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। सरकार का मानना है कि बेटियों और बहनों का विकास ही समाज और प्रदेश के समग्र विकास की आधारशिला है। इस अवसर पर विभिन्न योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी भी साझा की जाएगी, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि राज्य सरकार महिलाओं के हित में किस प्रकार निरंतर कार्य कर रही है।

    राज्य सरकार द्वारा लाडली बहना योजना को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया है। इस योजना के तहत प्रदेश की बड़ी संख्या में महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार हो रहा है और वे आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रही हैं। अब तक इस योजना के माध्यम से करोड़ों की राशि सीधे महिलाओं के खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है, जिससे इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहा है।

    नारी शक्ति वंदन पखवाड़े के दौरान राज्यभर में जागरूकता कार्यक्रम, संवाद सत्र और विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभ देना ही नहीं बल्कि उन्हें समाज के हर क्षेत्र में समान भागीदारी के लिए प्रेरित करना भी है। इसी क्रम में लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की दिशा में भी चर्चा और पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और निरंतर ऐसी नीतियां लागू की जा रही हैं जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आए। इस आयोजन को प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के प्रति सरकार की गंभीरता और संकल्प का प्रतीक माना जा रहा है।

  • लाड़ली बहना योजना से बदली मंजू यादव की किस्मत: घर से शुरू किया सिलाई काम, आज चला रहीं रोजगार देने वाला सेंटर

    लाड़ली बहना योजना से बदली मंजू यादव की किस्मत: घर से शुरू किया सिलाई काम, आज चला रहीं रोजगार देने वाला सेंटर


    भोपाल ।मध्यप्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभर रही है। इस योजना के माध्यम से कई महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। नर्मदापुरम जिले की रहने वाली मंजू यादव इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आई हैं जिन्होंने योजना से मिली आर्थिक सहायता का सदुपयोग करते हुए अपनी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। आज वे न केवल आत्मनिर्भर बन चुकी हैं बल्कि अपने प्रयासों से अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार कर रही हैं।

    नर्मदापुरम जिले के वार्ड क्रमांक 31 दीवान चौक ग्वालटोली निवासी 30 वर्षीय मंजू यादव कभी सीमित आय और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अपने परिवार का सहारा बनने का सपना देखती थीं। आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण उनके लिए यह सपना पूरा करना आसान नहीं था लेकिन मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने उनके जीवन में उम्मीद की एक नई किरण जगाई। जून 2023 से उन्हें इस योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता मिलने लगी जिससे उन्हें अपने भविष्य के लिए कुछ नया करने का आत्मविश्वास मिला।

    मंजू यादव ने योजना से प्राप्त राशि को खर्च करने के बजाय सोच समझकर उसका उपयोग करने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने घर से ही सिलाई का छोटा सा काम शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने सीमित संसाधनों के साथ काम शुरू किया लेकिन उनकी मेहनत और लगन ने धीरे धीरे इस छोटे से प्रयास को एक सफल व्यवसाय में बदल दिया। आसपास के लोगों से कपड़ों की सिलाई के ऑर्डर मिलने लगे और उनका काम लगातार बढ़ने लगा।

    फरवरी 2026 तक मंजू यादव को योजना की 33वीं किश्त सहित कुल 43 हजार 500 रुपये की सहायता राशि प्राप्त हो चुकी है। इस आर्थिक सहयोग और सिलाई के काम से हुए मुनाफे को उन्होंने अपने व्यवसाय के विस्तार में लगाया। उन्होंने सिलाई के लिए अतिरिक्त मशीनें खरीदीं और धीरे धीरे अपने काम को बढ़ाते हुए एक सिलाई सेंटर की शुरुआत कर दी। आज उनके सेंटर में पांच सिलाई मशीनें संचालित हो रही हैं और काम भी नियमित रूप से मिल रहा है।

    मंजू यादव की इस पहल का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि उन्होंने केवल खुद को ही आत्मनिर्भर नहीं बनाया बल्कि अपने सिलाई सेंटर के माध्यम से अन्य महिलाओं को भी रोजगार का अवसर प्रदान किया है। उनके साथ काम करने वाली कई महिलाएं अब नियमित आय अर्जित कर रही हैं जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हो रही है।

    मंजू यादव भावुक होकर बताती हैं कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने उनके जीवन में नया आत्मविश्वास और उम्मीद जगाई है। इस योजना ने उन्हें अपने सपनों को साकार करने का अवसर दिया। आज वे गर्व के साथ अपने परिवार की जिम्मेदारियों में योगदान दे रही हैं और अपने काम के माध्यम से समाज में एक सकारात्मक संदेश भी दे रही हैं कि सही अवसर और थोड़े से सहयोग से महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

    उनकी सफलता की कहानी यह दर्शाती है कि यदि योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाया जाए तो वे न केवल व्यक्तिगत जीवन में बदलाव ला सकती हैं बल्कि समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन की राह खोल सकती हैं।

  • पंधाना से लाड़ली बहना की 33वीं किश्त जारी, सीएम डॉ मोहन यादव करेंगे सिंगल क्लिक ट्रांसफर, उद्योगों की मांग भी उठेगी

    पंधाना से लाड़ली बहना की 33वीं किश्त जारी, सीएम डॉ मोहन यादव करेंगे सिंगल क्लिक ट्रांसफर, उद्योगों की मांग भी उठेगी


    मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना की 33वीं किश्त 14 फरवरी को पंधाना से जारी की जाएगी। राज्य स्तरीय इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सिंगल क्लिक के माध्यम से प्रदेश की लाखों हितग्राही महिलाओं के खातों में राशि अंतरित करेंगे। कार्यक्रम को लेकर खंडवा जिले में प्रशासनिक तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं और आयोजन को भव्य बनाने के लिए पंचायत स्तर तक जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं।

    पंधाना में अनाज मंडी के सामने विशाल मंच और पंडाल तैयार किया जा रहा है। कार्यक्रम स्थल पर टेंट, बैठक व्यवस्था, पेयजल, सुरक्षा और यातायात नियंत्रण सहित सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक स्वयं तैयारियों की मॉनिटरिंग कर चुके हैं। गुरुवार को क्षेत्रीय विधायक छाया मोरे और दीक्षा भगोरे ने भी स्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद पंधाना और छैगांवमाखन जनपद कार्यालय में सरपंचों और सचिवों की बैठक लेकर भीड़ प्रबंधन और परिवहन व्यवस्था पर चर्चा की गई।

    ब्लॉक स्तर पर प्रत्येक ग्राम पंचायत को लगभग 50 लोगों को कार्यक्रम स्थल तक लाने का लक्ष्य दिया गया है। अनुमान है कि इसके लिए हर पंचायत को करीब पांच वाहनों की व्यवस्था करनी होगी। बोर्ड परीक्षाओं के कारण इस बार स्कूल बसों की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाएगी, इसलिए पंचायतों को निजी वाहनों या ट्रेवल्स के माध्यम से लोगों को लाने और वापस भेजने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं कि परिवहन पर होने वाला खर्च पांचवें या पंद्रहवें वित्त आयोग की राशि से वहन किया जा सकता है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर एजेंसियों से समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि समय पर वाहन उपलब्ध हो सकें। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम की व्यवस्थाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं और टेंट व अन्य व्यवस्थाएं मध्यप्रदेश जनसंपर्क विभाग के माध्यम से की जा रही हैं।

    विधायक छाया मोरे ने कहा कि यह कार्यक्रम क्षेत्र के लिए गौरव का अवसर है। उन्होंने संकेत दिया कि मुख्यमंत्री की मौजूदगी में क्षेत्र में नए उद्योग स्थापित करने की मांग भी रखी जाएगी ताकि युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सके। उनके अनुसार लाड़ली बहना योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त किया है और अब क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देने की आवश्यकता है।

    लाड़ली बहना योजना राज्य सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं में से एक है, जिसके माध्यम से हर महीने महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। 33वीं किश्त का पंधाना से जारी होना न केवल प्रशासनिक बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सुरक्षा, यातायात और भीड़ नियंत्रण के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि आयोजन सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया जाएगा।

  • MP: लाड़ली बहना योजना के पंजीकरण दोबारा शुरू करने की मांग… HC ने खारिज की याचिका

    MP: लाड़ली बहना योजना के पंजीकरण दोबारा शुरू करने की मांग… HC ने खारिज की याचिका


    नई दिल्ली।
    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Scheme) में दोबारा पंजीकरण शुरू करने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज (PIL Rejected) कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि किसी योजना का संचालन कैसे करना है ये सरकार के जिम्मे में आता है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की बेंच ने ये फैसला सुनाया। जनहित याचिका रतलाम के पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने दायर की थी।

    सकलेचा ने मांग की थी कि राज्य सरकार द्वारा किए गए वादे के मुताबिक, हर लाभार्थी को 3,000 रुपये प्रति माह दिया जाए, नए लाभार्थियों का दोबारा पंजीयन शुरू करने और न्यूनतम पात्रता उम्र को 21 से घटाकर 18 किया जाए। उन्होंने याचिका में कहा था कि योजना के जारी रहने के बावजूद 20 अगस्त 2023 से नए पंजीकरण पर रोक लगाना मनमाना और भेदभावपूर्ण था। याचिका में कहा गया था कि पंजीयन रोके जाने से 21 वर्ष का उम्र पूरी कर चुकी कई महिलाएं योजना का लाभ नहीं उठा पा रही हैं।


    राज्य सरकार ने दी ये दलील

    वहीं सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि यह एक नीतिगत फैसला था और योजना का लाभ लेने वाली या चाहने वाली किसी भी महिला ने अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलील में दम न होने की बात कही और साथ ही ये माना कि राज्या सरकार का फैसला मनमाना और भेदभावपूर्ण नहीं था। कोर्ट ने कहा कि ‘योजना कब शुरू करनी है और इसे कब बंद करना है इसकी तारीख तय करना सरकार का काम है। हम एक ऐसे शख्स (याचिकाकर्ता) के कहने पर इसपर विचार नहीं कर सकते जो कि खुद योजना का लाभार्थी नहीं है।’


    क्या है लाडली बहना योजना?

    लाड़ली बहना योजना बीजेपी सरकार ने 2023 के विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले शुरू की थी। मौजूदा समय में, मध्य प्रदेश की 1.26 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को इस योजना के तहत हर महीने 1500 रुपये मिलते हैं। सरकार का कहना है कि 2028 तक इस राशि को बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दिया जाएगा।


    बीते महीने ही जारी की गई है 32वीं किस्त

    बीते महीने ही महिलाओं को 1500-1500 रुपये की सौगात दी गई है। आपको बता दें कि इस योजना की किस्त राशि में 250 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी जो कि नवंबर महीने से लागू है पहले किस्त के रूप में 1250 रुपये दिए जाते थे।