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  • लाहौर गैंगरेप मामले में बड़ा खुलासा, दो विदेशी महिलाओं से दुष्कर्म के आरोप में उप प्रधानमंत्री इशाक डार के रिश्तेदार सहित चार गिरफ्तार

    लाहौर गैंगरेप मामले में बड़ा खुलासा, दो विदेशी महिलाओं से दुष्कर्म के आरोप में उप प्रधानमंत्री इशाक डार के रिश्तेदार सहित चार गिरफ्तार

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के लाहौर में दो विदेशी महिलाओं के कथित अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म और फिरौती से जुड़े मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर हलचल पैदा कर दी है। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार का एक रिश्तेदार भी शामिल बताया जा रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने सभी आरोपियों को पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है, जबकि जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की विस्तृत पड़ताल कर रही हैं।

    पुलिस के अनुसार, पीड़ित महिलाओं में एक नीदरलैंड और दूसरी वेनेजुएला की नागरिक हैं। आरोप है कि 29 जून को लाहौर में दोनों महिलाओं का अपहरण कर उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। मामले का खुलासा तब हुआ जब स्पेन से प्राप्त एक आपातकालीन सूचना के आधार पर सुरक्षा एजेंसियों ने कार्रवाई करते हुए महिलाओं का पता लगाया और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला।

    जांच के दौरान पुलिस ने चार संदिग्धों को हिरासत में लिया। इनमें अहमद रजा डार, सिकंदर अजीज खान, हसन रजा और साजिद अली शामिल हैं। जांच अधिकारियों के अनुसार अहमद रजा डार को मामले का मुख्य आरोपी माना जा रहा है। चूंकि आरोपी का संबंध देश के उप प्रधानमंत्री के परिवार से बताया जा रहा है, इसलिए पूरे मामले पर राष्ट्रीय स्तर पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन पर भी कार्रवाई की गई है। प्राथमिकी दर्ज करने वाले संबंधित थाना प्रभारी सहित दो अन्य पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जांच प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता को स्वीकार नहीं किया जाएगा और सभी जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी।

    जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले के प्रत्येक पहलू की निष्पक्ष और गहन जांच की जा रही है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर घटनाक्रम, कथित अपहरण, अपराध की परिस्थितियों और संभावित अन्य सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटा रही है। साथ ही उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों, कॉल रिकॉर्ड, घटनास्थल से मिले प्रमाणों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का भी विश्लेषण किया जा रहा है।

    यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि आरोपी का संबंध देश के एक वरिष्ठ राजनीतिक परिवार से बताया जा रहा है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया को लेकर सार्वजनिक निगरानी बढ़ जाती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच कानून के दायरे में रहकर की जाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल सभी आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और जांच जारी है। अदालत द्वारा दी गई रिमांड अवधि के दौरान पुलिस साक्ष्य जुटाने, पीड़िताओं के बयान, फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामले को आगे बढ़ाएगी। इस बीच संबंधित प्रशासनिक और सुरक्षा एजेंसियां भी पूरे घटनाक्रम की निगरानी कर रही हैं ताकि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप पूरी की जा सके।

  • Pakistan: लाहौर में ट्यूशन सेंटर में पढ़ रहे थे बच्चे, अचानक भरभराकर गिरी छत …. 14 की मौत. 20 घायल

    Pakistan: लाहौर में ट्यूशन सेंटर में पढ़ रहे थे बच्चे, अचानक भरभराकर गिरी छत …. 14 की मौत. 20 घायल


    लाहौर।
    पाकिस्तान (Pakistan) के लाहौर (Lahore) शहर में मंगलवार को दर्दनाक हादसा हुआ है। घनी आबादी वाले काहना नौ क्षेत्र के बस्ती ईदगाह इलाके (Basti Eidgah area) में एक निजी ट्यूशन सेंटर (Tuition Center) की छत अचानक ढह गई, जिसमें 14 स्कूली बच्चों की मौत हो गई और कम से कम 20 अन्य बच्चे घायल हो गए। हादसे के समय सात से तेरह वर्ष की आयु के बच्चे कक्षाओं में बैठे हुए थे, जो मलबे के नीचे दब गए। पुलिस और बचाव टीमों के अनुसार, यह ट्यूशन सेंटर एक निर्माणाधीन इमारत के अंदर संचालित हो रहा था।

    बताया गया कि इमारत का एक हिस्सा अभी बन रहा था और मजदूर काम में व्यस्त थे, तभी छत का बड़ा हिस्सा अचानक गिर पड़ा। मलबे में दबे बच्चों को निकालने के लिए स्थानीय पुलिस, एधी फाउंडेशन की टीम और रेस्क्यू 1122 के कर्मी पिछले कई घंटों से अथक प्रयास कर रहे हैं।

    लाहौर के उप महानिरीक्षक (ऑपरेशंस) फैसल कामरान ने घटनास्थल पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि अब तक मलबे से 14 बच्चों के शव बरामद किए जा चुके हैं। 20 घायल बच्चों और एक महिला शिक्षिका को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हमने तुरंत ठेकेदार को गिरफ्तार कर लिया है। जांच चल रही है कि इमारत की सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

    उन्होंने आगे बताया कि इमारत पूरी तरह से निर्माणाधीन अवस्था में थी और उसमें ट्यूशन सेंटर चलाने की अनुमति भी संदिग्ध है। पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया है और मलबा हटाने के लिए भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    क्या बोला एधी फाउंडेशन?
    एधी फाउंडेशन ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि काहना नौ क्षेत्र के आवासीय भवन में स्थित अकादमी की छत अचानक गिर गई। फाउंडेशन की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और बचाव कार्य में सहयोग कर रही है। बयान में कहा गया है कि मृतकों के शवों को लाहौर जनरल अस्पताल के मुर्दाघर में भेज दिया गया है। कुछ बच्चे अभी भी मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं, इसलिए मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। एधी फाउंडेशन ने यह भी बताया कि सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

    वहीं, लाहौर जिला शिक्षा प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तारिक महमूद ने बताया कि यह निजी ट्यूशन सेंटर स्थानीय एक महिला निवासी द्वारा चलाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग इस मामले की भी जांच करेगा कि ऐसे संवेदनशील इलाके में अनधिकृत तरीके से ट्यूशन सेंटर चलाने की अनुमति किसने दी

    क्या बोलीं सीएममरियम नवाज?
    पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने पुलिस और जिला प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि इमारत ढहने के लिए जिम्मेदार ठेकेदार, मालिक और संबंधित अधिकारियों की तुरंत पहचान की जाए तथा उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू की जाए। सीएम ने कहा कि लापरवाही बरतने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

  • लाहौर में हिंदू-सिख नामों की वापसी पर सियासत गर्म, नजम सेठी बोले-पश्चिमी देशों में छवि चमकाने का खेल

    लाहौर में हिंदू-सिख नामों की वापसी पर सियासत गर्म, नजम सेठी बोले-पश्चिमी देशों में छवि चमकाने का खेल




    नई दिल्ली। पाकिस्तान के लाहौर में विभाजन से पहले के हिंदू, सिख और जैन समुदायों से जुड़े पुराने इलाकों और सड़कों के नाम बहाल करने की तैयारी ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। पंजाब सरकार की इस योजना को लेकर पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार नजम सेठी ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि इसके पीछे पाक सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की रणनीति काम कर रही है।

    दरअसल, पंजाब सरकार ने लाहौर और आसपास के कई ऐतिहासिक इलाकों के पुराने नाम दोबारा लागू करने की योजना को मंजूरी दी है। यह फैसला मुख्यमंत्री मरियम नवाज की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया और इसे नवाज शरीफ के नेतृत्व वाले ‘लाहौर हेरिटेज एरियाज़ रिवाइवल प्रोजेक्ट’ के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है।

    इस योजना के तहत इस्लामपुरा का नाम फिर से ‘कृष्ण नगर’, सुन्नत नगर का ‘संत नगर’, मुस्तफाबाद का ‘धर्मपुरा’ और बाबरी मस्जिद चौक का नाम ‘जैन मंदिर रोड’ किए जाने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। इसके अलावा भी कई ऐतिहासिक नामों की समीक्षा की जा रही है।

    इसी मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए पत्रकार नजम सेठी ने कहा कि पाकिस्तान में लंबे समय से इस्लामीकरण की राजनीति होती रही है और विभाजन के बाद हिंदू व अन्य गैर-मुस्लिम पहचान वाले नामों को व्यवस्थित तरीके से बदला गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अब अचानक पुराने नामों की वापसी के पीछे जनरल असीम मुनीर की पश्चिमी देशों में उदारवादी छवि पेश करने की कोशिश हो सकती है।

    सेठी ने यहां तक कहा कि सेना प्रमुख की मंजूरी के बिना इतना बड़ा फैसला संभव नहीं था। हालांकि पाकिस्तान सरकार की ओर से इसे केवल सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक पहचान को बचाने की पहल बताया जा रहा है।फिलहाल इस फैसले ने पाकिस्तान में इतिहास, राजनीति और पहचान की बहस को फिर से तेज कर दिया है।

  • लेंसकार्ट विवाद में धीरेंद्र शास्त्री की एंट्री, बोले- अपनी कंपनी लाहौर में खोल लो

    लेंसकार्ट विवाद में धीरेंद्र शास्त्री की एंट्री, बोले- अपनी कंपनी लाहौर में खोल लो

    प्रयागराज. प्रयागराज में एक कार्यक्रम के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने लेंसकार्ट कंपनी के मालिक पर जमकर भड़के और उन्हें लाहौर जाने की सलाह दे डाली. कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने ने कहा कि ‘एक कंपनी है उसका नाम लेंसकार्ट है. उसने अपने वर्करों को बोला है कि हमारे यहां कोई तिलक लगा के नहीं आ सकता, मंगलसूत्र पहन के नहीं आ सकता, सिंदूर लगा के नहीं आ सकता. अरे… नकटा, तू अपनी कंपनी लाहौर में खोल ले, भारत में काहे को मर रहा है.
    धीरेंद्र शास्त्री यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि लेंसकार्ट जैसी कंपनियां हिंदू समाज की भावनाओं और विचारधारा को आहत करती हैं, इनका बहिष्कार होना चाहिए. उन्हें लाहौर जाना चाहिए. इन्हें भारत में व्यापार करने का अधिकार नहीं है. ऐसे शुरू हुआ था विवाद यह पूरा विवाद कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित पॉलिसी डॉक्यूमेंट से शुरू हुआ था. इस दस्तावेज़ में दावा किया गया था कि कंपनी ने अपने कर्मचारियों के लिए कुछ धार्मिक प्रतीकों- जैसे बिंदी, तिलक और कलावा- पर रोक लगाई है.
    विवाद बढ़ने के बाद कंपनी के सह-संस्थापक पीयूष बंसल ने सार्वजनिक रूप से सफाई दी. उन्होंने कहा कि वायरल हो रहा दस्तावेज़ पुराना और भ्रामक है, जिसे पहले ही हटा दिया गया था. उन्होंने स्पष्ट किया कि लेंसकार्ट अपने कर्मचारियों के साथ किसी भी प्रकार का धार्मिक भेदभाव नहीं करता और सभी को अपनी आस्था के अनुसार पहनावे की पूरी स्वतंत्रता है. लेंसकार्ट के बहिष्कार की मांग कर रहे हैं लोग इसके बावजूद यह मुद्दा थमता नजर नहीं आ रहा है. सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग कंपनी के खिलाफ नाराजगी जाहिर कर रहे हैं और बहिष्कार की मांग कर रहे हैं. कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिले हैं. भोपाल में कुछ संगठनों ने लेंसकार्ट के स्टोर्स के बाहर प्रदर्शन किया और कंपनी के खिलाफ नारेबाजी की. फिलहाल यह मामला धार्मिक भावनाओं, कॉर्पोरेट नीतियों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच असंतुलन का एक बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है. अब देखना यह होगा कि कंपनी और संबंधित पक्ष इस विवाद को शांत करने के लिए आगे क्या कदम उठाते हैं?