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  • शुक्रवार व्रत से सुख-समृद्धि की कामना, सुबह से शाम तक ऐसे करें पूजा; इन नियमों का रखें विशेष ध्यान

    शुक्रवार व्रत से सुख-समृद्धि की कामना, सुबह से शाम तक ऐसे करें पूजा; इन नियमों का रखें विशेष ध्यान

    नई दिल्ली । हिंदू धार्मिक परंपरा में शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी और संतोषी माता की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ व्रत रखने से घर में सुख शांति और समृद्धि का भाव बढ़ता है। शुक्रवार को अलग अलग परंपराओं के अनुसार संतोषी माता व्रत और वैभव लक्ष्मी व्रत किया जाता है। इसलिए व्रत शुरू करने से पहले यह तय करना जरूरी है कि आप किस परंपरा के अनुसार उपवास कर रहे हैं क्योंकि दोनों की पूजा विधि और नियम अलग हो सकते हैं।

    संतोषी माता का शुक्रवार व्रत रखने वाले भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और साफ कपड़े पहनकर पूजा की तैयारी करते हैं। इसके बाद घर के पूजा स्थान की सफाई करके संतोषी माता की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित की जाती है। पूजा स्थल पर कलश रखा जा सकता है और माता को लाल या गुलाबी फूल तथा लाल चुनरी अर्पित करने की परंपरा है। इसके बाद धूप और दीप जलाकर माता का ध्यान किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा के दौरान मन को शांत रखना और श्रद्धा के साथ माता का स्मरण करना व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

    संतोषी माता के व्रत में गुड़ और चने का भोग विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। पूजा के दौरान गुड़ और चना माता को अर्पित किया जाता है और बाद में इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। व्रत कथा का पाठ या श्रवण भी इस पूजा का प्रमुख हिस्सा माना जाता है। कथा पूरी होने के बाद माता की आरती की जाती है और परिवार के सदस्यों में प्रसाद बांटा जाता है। धार्मिक परंपरा में यह व्रत अक्सर लगातार सोलह शुक्रवार तक करने का विधान बताया जाता है। हालांकि श्रद्धालु अपनी परंपरा और संकल्प के अनुसार व्रत की अवधि तय करते हैं।

    संतोषी माता के व्रत में खट्टी चीजों से परहेज करने का विशेष नियम माना जाता है। नींबू इमली अचार और अन्य खट्टे खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं किया जाता। कुछ परंपराओं में व्रत करने वाले व्यक्ति के साथ परिवार के सदस्यों को भी खट्टी चीजों से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि अलग अलग क्षेत्रों और परिवारों में व्रत के नियमों में अंतर हो सकता है। इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा या स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार नियमों का पालन करना उचित माना जाता है।

    अगर शुक्रवार का व्रत माता लक्ष्मी के लिए रखा जा रहा है तो पूजा में लाल वस्त्र पर माता लक्ष्मी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करके फूल फल अक्षत और दीप अर्पित करने की परंपरा है। शाम के समय भी माता की पूजा और दीपदान किया जा सकता है। वैभव लक्ष्मी व्रत से जुड़ी परंपराओं में संकल्प के साथ निश्चित संख्या में शुक्रवार तक व्रत रखने और अंत में उद्यापन करने का विधान भी मिलता है। उद्यापन की विधि व्रत की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।

    व्रत के दौरान केवल भोजन का त्याग ही महत्वपूर्ण नहीं माना जाता बल्कि संयम और सदाचार पर भी जोर दिया जाता है। क्रोध से बचना कटु वचन न बोलना और किसी के प्रति गलत भावना न रखना धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है। व्रत के दिन जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी पुण्यकारी माना जाता है।

    इस तरह शुक्रवार व्रत को केवल मनोकामना पूरी करने का माध्यम मानने के बजाय श्रद्धा संयम और सकारात्मक दिनचर्या के रूप में करना अधिक महत्वपूर्ण है। पूजा के नियमों में क्षेत्र और परिवार के अनुसार अंतर हो सकता है इसलिए किसी विशेष संकल्प या लंबे व्रत की शुरुआत से पहले योग्य पंडित या अपनी पारिवारिक परंपरा से जानकारी लेना बेहतर रहेगा। यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और इसे आस्था से जुड़े सामान्य मार्गदर्शन के रूप में देखा जाना चाहिए।

  • माता लक्ष्मी की कृपा पाने का सबसे सरल मार्ग जानिए वे नियम और उपाय जो भर देंगे जीवन में धन वैभव और खुशहाली

    माता लक्ष्मी की कृपा पाने का सबसे सरल मार्ग जानिए वे नियम और उपाय जो भर देंगे जीवन में धन वैभव और खुशहाली


    नई दिल्ली। सनातन धर्म में माता लक्ष्मी को धन समृद्धि ऐश्वर्य और सौभाग्य की देवी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि जिन लोगों पर माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है उनके जीवन में आर्थिक स्थिरता सुख शांति और खुशहाली का वास होता है। हालांकि केवल पूजा करने से ही मां लक्ष्मी प्रसन्न नहीं होतीं बल्कि जीवन में अच्छे आचरण स्वच्छता ईमानदारी और परिश्रम का भी विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक ग्रंथों में माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के कई नियम और उपाय बताए गए हैं जिन्हें श्रद्धा और विश्वास के साथ अपनाने से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

    माता लक्ष्मी को स्वच्छता अत्यंत प्रिय मानी जाती है इसलिए घर और विशेष रूप से पूजा स्थल को हमेशा साफ सुथरा रखना चाहिए। सुबह और शाम घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख समृद्धि का प्रवेश होता है। घर में अनावश्यक गंदगी टूटे हुए सामान और अव्यवस्था रखने से बचना चाहिए क्योंकि ऐसी स्थिति को लक्ष्मी आगमन में बाधक माना गया है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी की पूजा के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। उन्हें कमल का फूल लाल पुष्प खीर मिश्री नारियल और सुगंधित प्रसाद अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान श्रीसूक्त लक्ष्मी चालीसा या श्री महालक्ष्मी मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करने से मानसिक शांति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

    दान और सेवा को भी माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। जरूरतमंद लोगों को अन्न वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक सहायता देने से पुण्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति अपनी आय का एक हिस्सा परोपकार में लगाता है उसके जीवन में कभी धन की कमी नहीं रहती। इसके साथ ही माता पिता और बुजुर्गों का सम्मान करना तथा अतिथि का आदर करना भी लक्ष्मी कृपा का कारण माना गया है।

    जीवन में सत्य ईमानदारी और परिश्रम का पालन करना भी अत्यंत आवश्यक है। गलत तरीके से कमाया गया धन कभी स्थायी सुख नहीं देता जबकि मेहनत और ईमानदारी से अर्जित धन में बरकत बनी रहती है। इसलिए व्यापार नौकरी या किसी भी कार्य में नैतिकता का पालन करना चाहिए। क्रोध अहंकार लालच और छल कपट जैसी बुरी आदतों से दूर रहने की सलाह भी शास्त्रों में दी गई है क्योंकि ये गुण लक्ष्मी कृपा को कम कर सकते हैं।

    तुलसी का पौधा घर में लगाना और प्रतिदिन उसकी पूजा करना भी शुभ माना जाता है। इसी प्रकार शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर घी या तिल के तेल का दीपक जलाने की परंपरा आज भी कई घरों में निभाई जाती है। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सौहार्द बना रहता है।

    ध्यान रखने योग्य बात यह है कि माता लक्ष्मी की कृपा केवल धन तक सीमित नहीं होती बल्कि वह सुख शांति संतोष और सम्मान का भी आशीर्वाद देती हैं। इसलिए केवल धन प्राप्ति की इच्छा से नहीं बल्कि सच्चे मन और पवित्र भाव से उनकी आराधना करनी चाहिए। जब पूजा के साथ अच्छे कर्म अनुशासित जीवन और दूसरों के प्रति सम्मान जुड़ जाता है तब व्यक्ति के जीवन में वास्तविक समृद्धि का मार्ग खुलता है और परिवार में खुशहाली का वातावरण बना रहता है।

  • घर में चाहते हैं सुख समृद्धि और वैभव तो जानिए माता लक्ष्मी को क्या पसंद है और किन बातों से होती हैं प्रसन्न

    घर में चाहते हैं सुख समृद्धि और वैभव तो जानिए माता लक्ष्मी को क्या पसंद है और किन बातों से होती हैं प्रसन्न


    नई दिल्ली। सनातन धर्म में माता लक्ष्मी को धन वैभव सुख समृद्धि और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि जिस घर में मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है वहां कभी अन्न धन और खुशहाली की कमी नहीं होती। हालांकि केवल पूजा पाठ कर लेने से ही लक्ष्मी कृपा नहीं मिलती बल्कि व्यक्ति के कर्म व्यवहार और जीवनशैली का भी विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मां लक्ष्मी को स्वच्छता सत्य ईमानदारी और सेवा भाव अत्यंत प्रिय हैं। जो व्यक्ति इन गुणों को अपने जीवन में अपनाता है उसके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख समृद्धि का मार्ग खुलता है।

    माता लक्ष्मी को सबसे अधिक स्वच्छता पसंद है। इसलिए घर मंदिर रसोई और मुख्य द्वार को हमेशा साफ सुथरा रखना चाहिए। माना जाता है कि जहां गंदगी होती है वहां लक्ष्मी का स्थायी निवास नहीं होता। सुबह और शाम घर में दीपक जलाना और नियमित रूप से पूजा करना भी शुभ माना गया है। इससे घर का वातावरण पवित्र और सकारात्मक बना रहता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता लक्ष्मी को कमल का फूल अत्यंत प्रिय है। कमल पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। शुक्रवार के दिन कमल का फूल अर्पित करके मां लक्ष्मी की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है। इसके साथ ही सफेद और गुलाबी पुष्प अर्पित करना भी शुभ माना गया है। पूजा में खीर मिश्री बताशे नारियल और ताजे फलों का भोग लगाने से भी माता प्रसन्न होती हैं।

    दान और सेवा को भी लक्ष्मी प्राप्ति का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। जरूरतमंद लोगों की सहायता करना भूखे को भोजन कराना और गरीबों को वस्त्र दान करना पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति अपनी आय का एक हिस्सा समाज सेवा और दान में लगाता है उस पर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रहती है।

    सत्य और ईमानदारी भी माता लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय हैं। छल कपट झूठ और बेईमानी से कमाया गया धन कभी स्थायी सुख नहीं देता। इसलिए हमेशा मेहनत और ईमानदारी से कमाई गई आय को ही शुभ माना गया है। परिवार में प्रेम सम्मान और मधुर व्यवहार रखने वाले लोगों के घर भी लक्ष्मी का वास माना जाता है।

    शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी की पूजा के लिए विशेष माना गया है। इस दिन सफेद वस्त्र धारण कर श्रद्धा भाव से लक्ष्मी पूजन करना दीपक जलाना और श्रीसूक्त या लक्ष्मी मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। तुलसी के पास दीपक जलाने और शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर दीप रखने की परंपरा भी समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।

    धार्मिक मान्यता यह भी कहती है कि आलस्य क्रोध अपव्यय और नकारात्मक सोच से मां लक्ष्मी दूर हो जाती हैं। इसलिए समय का सदुपयोग करना घर में अनुशासन बनाए रखना और सकारात्मक विचार रखना भी आवश्यक माना गया है। जब व्यक्ति अपने जीवन में सदाचार सेवा स्वच्छता और श्रद्धा को स्थान देता है तब धन के साथ साथ मानसिक शांति और पारिवारिक सुख भी प्राप्त होता है। यही कारण है कि माता लक्ष्मी की कृपा केवल धन तक सीमित नहीं बल्कि संपूर्ण जीवन को सुखमय बनाने वाली मानी गई है।

  • मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का अचूक उपाय शुक्रवार व्रत की पूरी विधि पूजा नियम और शुभ फल

    मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का अचूक उपाय शुक्रवार व्रत की पूरी विधि पूजा नियम और शुभ फल


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में शुक्रवार का दिन धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखकर मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं उनके जीवन में आर्थिक समृद्धि सुख शांति और वैभव का आगमन होता है। यह व्रत केवल धन प्राप्ति का माध्यम नहीं बल्कि मन की शुद्धि सकारात्मक ऊर्जा और परिवार में सुखद वातावरण स्थापित करने का भी महत्वपूर्ण साधन माना गया है।

    शुक्रवार के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ और विशेष रूप से सफेद या हल्के रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। इसके बाद घर के पूजा स्थान की साफ सफाई कर मां लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें। पूजा स्थल पर सफेद या लाल वस्त्र बिछाकर मां लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाएं और धूप अगरबत्ती अर्पित करें। इसके बाद कमल का फूल गुलाब या सुगंधित पुष्प अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मां को खीर बताशे मिश्री सफेद मिठाई नारियल और मौसमी फल का भोग लगाया जाता है।

    पूजा के दौरान श्रीसूक्त लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र कनकधारा स्तोत्र अथवा लक्ष्मी चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करना लाभकारी माना जाता है। इसके साथ ही ओम श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है। पूजा के अंत में मां लक्ष्मी की आरती करें और पूरे परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें।

    व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिनभर सात्विक आचरण अपनाते हैं। कई लोग केवल फलाहार करते हैं जबकि कुछ श्रद्धालु एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। इस दिन लहसुन प्याज मांस मदिरा और तामसिक भोजन से दूर रहने की सलाह दी जाती है। साथ ही किसी का अपमान करने कटु वचन बोलने या क्रोध करने से भी बचना चाहिए क्योंकि मां लक्ष्मी को शांति स्वच्छता और सदाचार अत्यंत प्रिय माने गए हैं।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार शुक्रवार के दिन जरूरतमंद लोगों को सफेद वस्त्र चावल चीनी दूध दही या मिठाई का दान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली आर्थिक परेशानियां धीरे धीरे दूर होने लगती हैं। घर में स्वच्छता बनाए रखना और शाम के समय मुख्य द्वार पर दीपक जलाना भी शुभ फलदायी माना गया है।

    ज्योतिष के अनुसार शुक्रवार का संबंध शुक्र ग्रह से भी माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शुक्र कमजोर हो तो शुक्रवार का व्रत और मां लक्ष्मी की आराधना लाभदायक मानी जाती है। इससे वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और जीवन में भौतिक सुख सुविधाओं की प्राप्ति होने की मान्यता है।

    धार्मिक आस्था के साथ किया गया शुक्रवार का व्रत व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला माना जाता है। नियमित रूप से इस व्रत का पालन करने से आत्मविश्वास बढ़ता है मन को शांति मिलती है और परिवार में प्रेम सौहार्द तथा समृद्धि का वातावरण बनता है। श्रद्धा विश्वास और सच्चे मन से मां लक्ष्मी की आराधना करने वाले भक्तों पर उनकी कृपा सदैव बनी रहती है।

  • अक्षय तृतीया 2026 पर ये छोटा सा वास्तु ट्रिक दिला सकता है अपार धन और समृद्धि

    अक्षय तृतीया 2026 पर ये छोटा सा वास्तु ट्रिक दिला सकता है अपार धन और समृद्धि


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का दिन अत्यंत शुभ और पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए हर शुभ कार्य का फल अक्षय होता है यानी वह कभी समाप्त नहीं होता। यही कारण है कि इस दिन दान, पूजा और निवेश को विशेष महत्व दिया जाता है। वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया 19 अप्रैल रविवार को मनाई जाएगी और यह दिन धन, समृद्धि और खुशहाली को आकर्षित करने का एक विशेष अवसर माना जा रहा है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख और समृद्धि आती है। हालांकि आमतौर पर लोग इस दिन सोना या चांदी खरीदते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र के कुछ छोटे-छोटे उपाय भी उतने ही प्रभावशाली माने जाते हैं।

    पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक बताया गया है। इस समय विधिपूर्वक पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। वहीं सोना या चांदी खरीदने के लिए 19 अप्रैल सुबह 10:49 बजे से 20 अप्रैल सुबह 5:51 बजे तक का समय अत्यंत शुभ रहेगा।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि इस दिन सोना खरीदा जाए तो उसे घर की दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखना चाहिए। ऐसा करने से धन में वृद्धि होती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। इसके अलावा घर की उत्तर दिशा को साफ और व्यवस्थित रखना भी बेहद जरूरी माना गया है, क्योंकि यह दिशा धन के देवता कुबेर से जुड़ी होती है। इस दिशा में तिजोरी या अलमारी रखना आर्थिक स्थिरता लाने में सहायक माना जाता है।

    मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए इस दिन कुछ सरल उपाय भी किए जा सकते हैं। तिजोरी या अलमारी पर हल्दी या रोली से स्वास्तिक चिन्ह बनाना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह उपाय घर में धन के आगमन के द्वार खोलता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।

    इसके अलावा इस दिन दान का भी विशेष महत्व है। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में कभी कमी नहीं आती। यह दिन हमें यह भी सिखाता है कि केवल धन अर्जित करना ही नहीं बल्कि उसे सही दिशा में उपयोग करना भी उतना ही जरूरी है।

    अक्षय तृतीया का यह पावन अवसर हर व्यक्ति को अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का मौका देता है। यदि इस दिन सही विधि से पूजा और छोटे-छोटे वास्तु उपाय किए जाएं तो जीवन में स्थायी सुख और समृद्धि प्राप्त की जा सकती है।

  • फाल्गुन पूर्णिमा 2026: इस विधि से रखें व्रत, बरसेगी विष्णु लक्ष्मी की असीम कृपा

    फाल्गुन पूर्णिमा 2026: इस विधि से रखें व्रत, बरसेगी विष्णु लक्ष्मी की असीम कृपा


    नई दिल्ली । फाल्गुन मास की पूर्णिमा सनातन परंपरा में अत्यंत पावन मानी गई है। इसे वसंत पूर्णिमा और होली पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह हिंदू वर्ष की अंतिम पूर्णिमा होती है और इस दिन भगवान Vishnu माता Lakshmi भगवान Narasimha तथा Radha Krishna की पूजा का विशेष विधान है। मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से व्रत और पूजा करने से सुख समृद्धि सौभाग्य और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।

    फाल्गुन पूर्णिमा 2026 का शुभ मुहूर्त

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को शाम 5:55 बजे से प्रारंभ होकर 3 मार्च 2026 को शाम 5:07 बजे तक रहेगी। 3 मार्च को चंद्र ग्रहण और सूतक लगने के कारण पूजा में बाधा रहेगी इसलिए 2 मार्च 2026 को व्रत रखना अधिक शुभ माना गया है।

    फाल्गुन पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

    पूर्णिमा व्रत को अत्यंत फलदायी बताया गया है। इस दिन स्नान दान जप और पूजा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि इससे धन धान्य में वृद्धि होती है और कुंडली में चंद्र दोष होने पर मानसिक शांति मिलती है। व्रत करने वालों को अगले दिन स्नान दान अवश्य करना चाहिए तभी व्रत पूर्ण फलदायी माना जाता है।
    फाल्गुन पूर्णिमा व्रत विधि
    प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें। संभव हो तो पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करें। सूर्यदेव को अर्घ्य देकर व्रत का संकल्प लें। घर में स्वच्छ स्थान पर लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। तिलक पुष्प और वस्त्र अर्पित करें।  ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। भोग लगाकर पूर्णिमा व्रत कथा का पाठ करें और आरती करें। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को जल में कच्चा दूध मिलाकर अर्घ्य दें। इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करें। अगले दिन दान पुण्य अवश्य करें।

    विशेष मंत्र और महाउपाय

    फाल्गुन पूर्णिमा के दिन ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का 108 बार जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही जरूरतमंदों को अन्न वस्त्र या धन का दान करने से लक्ष्मी कृपा स्थायी होती है।यह दिन भक्ति श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। विधि विधान से श्री लक्ष्मीनारायण की आराधना करने पर जीवन में सुख समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

  • ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार ये काम करने से घर से चली जाती हैं मां लक्ष्मी, जानें पूरी सूची

    ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार ये काम करने से घर से चली जाती हैं मां लक्ष्मी, जानें पूरी सूची


    नई दिल्ली /मां लक्ष्मी, धन, सुख और समृद्धि की अधिष्ठात्री मानी जाती हैं। हर कोई अपने घर में उनकी कृपा पाने के लिए पूजा-पाठ और साधनाओं का सहारा लेता है। लेकिन ब्रह्मवैवर्त पुराण में बताया गया है कि कुछ ऐसी आदतें और व्यवहार हैं, जो घर में लक्ष्मी के वास को रोकते हैं। यदि कोई इनका पालन करता है, तो घर में धन और सुख की कमी हो सकती है।

    लक्ष्मी को नापसंद करने वाले कार्य
    पुराण के अनुसार, निम्नलिखित परिस्थितियों में लक्ष्मी का वास नहीं रहता:शंख ध्वनि न होना और तुलसी का न होना- जहां शंख की ध्वनि नहीं होती और तुलसी का पौधा नहीं होता, वहां लक्ष्मी नहीं रहती।शिव और ब्राह्मणों की अनदेखी- जहां शिवलिंग की पूजा और ब्राह्मणों को भोजन नहीं कराया जाता, वहां लक्ष्मी का मन नहीं लगता।भक्तों की निंदा- जिस घर में भक्तों की निंदा होती है, वहां लक्ष्मी का क्रोध उत्पन्न होता है और वे घर छोड़ देती हैं। एकादशी और जन्माष्टमी की अनदेखी- एकादशीऔर जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीहरि और कृष्ण का पूजन न करना भी लक्ष्मी को नाराज करता है अशुद्ध हृदय और क्रूरता- क्रूर, हिंसक, निराशावादी या निंदक व्यक्ति के घर लक्ष्मी नहीं टिकती। अतिथि अन्न का त्याग- यदि घर में अतिथियों को भोजन नहीं दिया जाता, तो लक्ष्मी का वास समाप्त हो जाता है। अनैतिक या अस्वच्छ आदतें- भिगे पैर या नंगे होकर सोना, बेसिर-पैर की बातें करना, निराशावादी होना, दिन में सोना और सूर्योदय के समय भोजन करना जैसी आदतें लक्ष्मी को दूर भगाती हैं। अनुचित व्यवहार और अपवित्रता- अपने सिर का तेल किसी पर लगाना, अपवित्रता और विष्णुभक्ति में कमी होना, ब्राह्मणों की निंदा करना, जीवों के साथ हिंसा करना, दयारहित होना आदि भी लक्ष्मी को नाराज कर देता है।

    लक्ष्मी को प्रसन्न करने वाले उपाय

    ब्रह्मवैवर्त पुराण में यह भी बताया गया है कि किस प्रकार घर में लक्ष्मी निवास करती हैं: भगवान श्रीहरि और श्रीकृष्ण का गुणगान- जहां इनके गुणों का गान और चर्चा होती है, वहां लक्ष्मी का वास होता है। शंख ध्वनि और पूजा- शंख की ध्वनि, शिवलिंग की पूजा, शालिग्राम और तुलसी के पौधे की स्थापना, कीर्तन और वंदना से लक्ष्मी हमेशा घर में रहती हैं। सकारात्मक और धार्मिक वातावरण- पवित्र कीर्तन, दुर्गा पूजा, भक्तों की सेवा और ध्यान से घर में लक्ष्मी की स्थायी उपस्थिति रहती है।

    ब्रह्मवैवर्त पुराण में यह स्पष्ट किया गया है कि लक्ष्मी का वास केवल पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों पर नहीं बल्कि घर के वातावरण और रहन-सहन पर भी निर्भर करता है। सदाचार, अतिथियों का आदर, भक्तों की सेवा और घर में शुद्धता बनाए रखने से ही मां लक्ष्मी हमेशा प्रसन्न रहती हैं।हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक ग्रंथों परआधारित हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ या धार्मिक गुरु से परामर्श लेना चाहिए।घर में सुख-समृद्धि बनाए रखना केवल पूजा का विषय नहीं है, बल्कि शुद्धता, दया और सही आचार-विचार से भी जुड़ा हुआ है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में बताए गए नियमों का पालन कर लोग घर में धन, सुख और संतोष का अनुभव कर सकते हैं।