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  • किसानों से भूमि अधिग्रहण पर उन्हें दिया जाएगा चार गुना मुआवजा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    किसानों से भूमि अधिग्रहण पर उन्हें दिया जाएगा चार गुना मुआवजा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार खेती और किसान के हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने किसानों को भरोसा देते हुए कहा कि किन्हीं भी शासकीय योजनाओं के निर्माण के लिए कृषि भूमि का अधिग्रहण करने पर किसानों को एक-दो नहीं, पूरे चार गुना मुआवजा दिया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार शाम को मंत्रालय से भोपाल की करौंद कृषि उपज मंडी परिसर में हुए बलराम कृषि महोत्सव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने किसानों से अपनी जमीन हर हाल में सुरक्षित रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि भूमि हमारी माता है। यह हमारा उदर-पोषण करती है। इसे किसी को न बेचें।

    मुख्यमंत्री ने किसानों से कहा कि आपके खेत सरकार के लिए देवस्थल है और आपका एक-एक दाना हमारे लिए प्रसाद के समान है। आपके पसीने की हरेक बूंद के सम्मान के लिए हमारी सरकार हमेशा आपके साथ है। उन्होंने कहा कि बलराम कृषि महोत्सव किसानों की मेहनत, समर्पण और कृषि क्षेत्र में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को सम्मान देने का माध्यम है।

    मुख्यमंत्री ने वीसी से बलराम कृषि महोत्सव में मौजूद किसानों से संवाद भी किया। उन्होंने कहा कि आपकी खुशी हमारे लिए होली और सबसे बड़ी दिवाली है। उन्होंने किसानों से पूरे उत्साह के साथ बलराम कृषि महोत्सव में सहभागी बनने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव आयोजित किए जा रहे हैं। बीते 26 दिनों में यह प्रदेश का 14वां बलराम कृषि महोत्सव आयोजन है। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द भोपाल मुख्यालय में भी एक बड़ा कृषि महोत्सव आयोजित किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से “कवच” योजना शुरू की है। इससे सहकारी खातों की पुरानी गड़बड़ियां दूर कर पांच हजार किसानों को ऋण और विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाया गया है। किसानों को बिना ब्याज के ऋण और ऋण चुकाने के लिए पूरे 12 महीने का समय देने की व्यवस्था भी इस योजना में की गई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश का किसान अपने परिश्रम से प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। मध्य प्रदेश दलहन में पहले अन्न उत्पादन में देश में दूसरे, , तिलहन में दूसरे और दुग्ध उत्पादन में तीसरे स्थान पर है। जैविक खेती और जैविक कपास उत्पादन में प्रदेश पूरे देश में अव्वल है।

    उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय के साधन बढ़ाने, खेती की लागत घटाने तथा तकनीक और नवाचार के माध्यम से उत्पादन एवं आमदनी बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है। हमने प्रदेश में सिंचाई क्षमता को 100 लाख हैक्टेयर तक बढ़ाने, उद्यानिकी का रकबा 30 लाख हैक्टेयर करने तथा 10 हजार नई सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से फसल विविधीकरण अपनाने, उद्यानिकी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा पशुपालन एवं मछली पालन से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खेती को सिर्फ अन्न उत्पादन का जरिया होने तक सीमित न रखकर इसे प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग से जोड़कर किसानों की आय के नए रास्ते खोले जा रहे है।

    बलराम कृषि महोत्सव में स्थानीय विधायक विष्णु खत्री, तीरथ सिंह मीणा, गोपाल सिंह मीणा, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ जिलाधिकारीगण सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय किसान बंधु उपस्थित थे। विधायक रामेश्वर शर्मा और अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने मंत्रालय से ही बलराम कृषि महोत्सव में सहभागिता की।

  • जमीन अधिग्रहण पर बवाल: देवास में किसानों का भोपाल कूच नाकाम, मुआवजे को लेकर सड़क पर आंदोलन

    जमीन अधिग्रहण पर बवाल: देवास में किसानों का भोपाल कूच नाकाम, मुआवजे को लेकर सड़क पर आंदोलन


    देवास । देवास में वेस्टर्न रिंग रोड परियोजना के लिए हो रहे भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसानों का आंदोलन सोमवार को और तेज हो गया। अपनी कृषि भूमि के बदले बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा देने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टरों के साथ भोपाल कूच के लिए निकले, लेकिन पुलिस ने उन्हें शिप्रा चौराहे पर ही रोक दिया। इसके बाद हालात तनावपूर्ण हो गए और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए प्रशासन ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। कार्रवाई के बाद किसान बरलाई जागीर गांव में सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान कर दिया।

    किसानों का कहना है कि उनकी उपजाऊ और सिंचित कृषि भूमि वेस्टर्न रिंग रोड परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही है, लेकिन उन्हें कानून के अनुसार उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के प्रावधानों के अनुसार बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा चाहते हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन उनकी सहमति के बिना जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है, जिससे किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

    सोमवार सुबह किसान ट्रैक्टरों के साथ भोपाल की ओर रवाना होने की तैयारी में थे। बड़ी संख्या में पुलिस बल पहले से ही शिप्रा चौराहे पर तैनात था। जैसे ही किसानों ने आगे बढ़ने का प्रयास किया, पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद किसानों और प्रशासन के बीच बहस हुई और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। हालांकि, इसके बावजूद किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हुए और बरलाई जागीर में सड़क पर बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

    प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास परियोजनाओं के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीन ले रही है, लेकिन उसके बदले उचित मुआवजा और पुनर्वास की व्यवस्था नहीं कर रही। किसानों का कहना है कि उनकी बहु-फसली सिंचित भूमि ही उनके परिवार की आय का मुख्य स्रोत है और इसके अधिग्रहण से उनका भविष्य प्रभावित होगा।

    प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। अधिकारियों के अनुसार प्रदर्शन शांतिपूर्ण बनाए रखने की कोशिश की जा रही है और किसानों से बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास भी जारी है।

    वेस्टर्न रिंग रोड परियोजना इंदौर और देवास क्षेत्र की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है। इस आउटर हाईवे का उद्देश्य भारी वाहनों को शहरों के भीतर प्रवेश किए बिना वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराना है, जिससे ट्रैफिक का दबाव कम हो सके। साथ ही वर्ष 2028 में उज्जैन सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि इस परियोजना से इंदौर, देवास, सांवेर और देपालपुर क्षेत्र के करीब 39 गांव प्रभावित होंगे।

    फिलहाल किसानों और प्रशासन के बीच गतिरोध बना हुआ है। एक ओर सरकार इस परियोजना को क्षेत्रीय विकास और बेहतर यातायात व्यवस्था के लिए जरूरी बता रही है, वहीं किसान उचित मुआवजे और अपनी जमीन के अधिकारों को लेकर आंदोलन पर अड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच होने वाली बातचीत इस विवाद की दिशा तय करेगी।

  • खेत बचाने की लड़ाई सड़क पर, खाने का सामान लेकर धरने पर बैठे किसान

    खेत बचाने की लड़ाई सड़क पर, खाने का सामान लेकर धरने पर बैठे किसान


    मध्य प्रदेश । इंदौर में भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों का विरोध आंदोलन तेज हो गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के पूर्वी बायपास प्रोजेक्ट और इंदौर-मनमाड़ रेलवे लाइन परियोजना के लिए प्रस्तावित जमीन अधिग्रहण के खिलाफ सोमवार से किसानों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। कलेक्टर कार्यालय के बाहर गंजी कंपाउंड में शुरू हुए इस आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान, महिलाएं और बच्चे शामिल हुए हैं।

    धरने में मुख्य रूप से सिमरोल, तिल्लौर खुर्द, फरसपुर, खुड़ैल और आसपास के गांवों के किसान शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि दोनों परियोजनाओं के कारण उनकी उपजाऊ कृषि भूमि प्रभावित होगी, जिससे उनकी आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। किसानों ने मांग की है कि सरकार भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर पुनर्विचार करे और इन परियोजनाओं को वर्तमान स्वरूप में लागू न किया जाए।

    आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि किसान अपने परिवारों के साथ धरना स्थल पर पहुंचे हैं। कई महिलाएं और बच्चे भी प्रदर्शन में शामिल हैं। आंदोलनकारियों ने अपने साथ भोजन बनाने का सामान भी लाया है। किसानों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे धरना स्थल पर ही भोजन बनाकर आंदोलन जारी रखेंगे।

    किसानों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में उनकी चिंताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। उनका कहना है कि जिन जमीनों का अधिग्रहण प्रस्तावित है, वे वर्षों से उनकी जीविका का प्रमुख आधार रही हैं। ऐसे में बिना संतोषजनक समाधान और उचित सहमति के भूमि अधिग्रहण स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    इस मुद्दे को लेकर कानूनी लड़ाई भी जारी है। पिछले महीने हाई कोर्ट ने इस परियोजना से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए थे। यह याचिका भारतीय किसान यूनियन की ओर से दायर की गई थी। अदालत ने मामले में एनएचएआई और प्रशासन को नोटिस जारी कर उनका पक्ष भी मांगा है।

    किसान नेताओं का कहना है कि अदालत के आदेश के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर स्पष्टता नहीं है, जिससे किसानों में चिंता बनी हुई है। इसी वजह से उन्होंने सड़क पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद करने का फैसला किया है। आंदोलनकारी चाहते हैं कि सरकार और प्रशासन किसानों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी आशंकाओं का समाधान करें।

    धरना स्थल पर लगातार किसानों की संख्या बढ़ रही है और विभिन्न गांवों से लोग समर्थन देने पहुंच रहे हैं। किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

    इंदौर में शुरू हुआ यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है। प्रशासन की ओर से फिलहाल स्थिति पर नजर रखी जा रही है, जबकि किसान अपने अधिकारों और जमीन की सुरक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने के मूड में दिखाई दे रहे हैं।

  • उज्जैन–जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे: किसानों की जीत, मुआवजे की लड़ाई जारी

    उज्जैन–जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे: किसानों की जीत, मुआवजे की लड़ाई जारी


    नई दिल्ली। उज्जैन–जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजना को अब नॉर्मल हाईवे के रूप में स्वीकृति मिल गई है। यह फैसला प्रभावित 62 गांवों के करीब 400 किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। शनिवार देर रात किसानों ने भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर इस निर्णय के लिए उनका आभार जताया।

    किसानों ने मुख्यमंत्री से अपनी दो प्रमुख मांगों पर चर्चा की। पहली मांग थी कि हाईवे को एक्सेस कंट्रोल रोड के बजाय नॉर्मल हाईवे के रूप में बनाया जाए ताकि गांवों की कनेक्टिविटी और आवागमन प्रभावित न हो। मुख्यमंत्री ने इस मांग को स्वीकार कर किसानों को संतोष दिया।

    दूसरी और सबसे महत्वपूर्ण मांग थी भूमि अधिग्रहण के लिए वास्तविक बाजार मूल्य पर मुआवजा देने की। किसानों का आरोप है कि जिला प्रशासन द्वारा तय मुआवजा दरें बेहद कम हैं। 2024–25 की गाइडलाइन के अनुसार केवल 1,700 रुपये से 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, उज्जैन–इंदौर ग्रीनफील्ड रोड परियोजना में किसानों को कई जगह 45 लाख रुपये प्रति बीघा तक का मुआवजा मिला था। इसके मुकाबले उज्जैन–जावरा परियोजना में केवल 2–4 लाख रुपये प्रति बीघा का प्रस्ताव है, जिसे किसान अन्यायपूर्ण मान रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने किसानों को भरोसा दिलाया कि उचित मुआवजा दिया जाएगा और उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने किसानों से संयम और भरोसा बनाए रखने की अपील भी की।

    इस निर्णय से प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में हल्की राहत की स्थिति है, लेकिन मुआवजे को लेकर संघर्ष अभी जारी है।

  • जबलपुर–दमोह फोरलेन पर बस्ती का बवाल, NHAI कार्यालय घेरा, करणी सेना ने 15 दिन में फैसला मांगा

    जबलपुर–दमोह फोरलेन पर बस्ती का बवाल, NHAI कार्यालय घेरा, करणी सेना ने 15 दिन में फैसला मांगा



    जबलपुर। जबलपुर–दमोह NH-34 को टू-लेन से फोरलेन करने की योजना के विरोध में बोरिया बस्ती के ग्रामीणों ने शुक्रवार को सड़क पर उतरकर NHAI कार्यालय का घेराव किया। करणी सेना के कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं और स्थानीय नागरिक भी प्रदर्शन में शामिल रहे। ग्रामीणों का आरोप है कि बस्ती के 50 से अधिक घर फोरलेन के लिए ध्वस्त हो सकते हैं, जिससे 150 से अधिक लोग बेघर होने की कगार पर हैं।
    करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष अनुराग प्रताप राघव ने NHAI को 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि इस अवधि में प्रभावितों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने कहा, जरूरत पड़ी तो सड़क से लेकर प्रशासनिक दफ्तरों तक आंदोलन बढ़ाया जाएगा। क्षेत्रीय विधायक और स्थानीय मंत्री ग्रामीणों के समर्थन में नहीं खड़े हुए, इसलिए करणी सेना ने मोर्चा संभाला है।

    ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें उजाड़ा जा रहा है, जो पूरी तरह अन्याय है। महिलाओं ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि वर्षों से बसे परिवारों को हटाने से पहले प्रशासन को पुनर्वास और वैकल्पिक इंतजामों की ठोस योजना प्रस्तुत करनी चाहिए।

    ग्रामीणों की मुख्य मांगें
    प्रभावित लोगों के लिए वैकल्पिक पुनर्वास की व्यवस्था हो
    जमीन अधिग्रहण पर तत्काल रोक
    प्रभावितों को साथ लेकर प्रोजेक्ट के विकल्पों पर चर्चा
    सड़क के सेंटर से दोनों तरफ बराबर भूमि अधिग्रहण किया जाए
    बोरिया गांव के सतिश पटेल ने कहा कि वर्तमान में 70 फीट की सड़क को 150 फीट करने की योजना है, लेकिन सड़क एक तरफ चौड़ी की जा रही है, जिससे 70 मकान प्रभावित हो रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि रोड सेंटर से दोनों तरफ बराबर अधिग्रहण किया जाए या बस्ती वाले क्षेत्र में सड़क चौड़ाई को घटाकर 120 फीट किया जाए। साथ ही प्रभावितों को मुआवजे के साथ घर बनाने के लिए जमीन भी दी जाए।

    सुनीता बर्मन ने कहा कि यदि उनका घर टूटता है तो वे पूरी तरह से बर्बाद हो जाएँगी, क्योंकि परिवार में बुजुर्ग ही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क के विरोध में नहीं हैं, लेकिन सरकार को यह देखना चाहिए कि किसी को बेघर न किया जाए।

    NHAI का जवाब
    NHAI प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृत लाल साहू ने कहा कि फोरलेन के लिए 150 फीट भूमि अधिग्रहण का नियम है। बोरिया और आसपास के गांवों में बायपास का प्रावधान नहीं है, इसलिए मुख्य मार्ग को चौड़ा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस मार्ग पर फ्लाईओवर भी बनाया जाएगा। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि जनता की मांग पर विचार किया जाएगा और वैकल्पिक विकल्पों पर काम किया जाएगा।