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  • नोएडा इंजीनियर मौत केस: CBI ने मामला लिया, नोएडा अथॉरिटी से फाइलें जब्त, अब तक 4 गिरफ्तार

    नोएडा इंजीनियर मौत केस: CBI ने मामला लिया, नोएडा अथॉरिटी से फाइलें जब्त, अब तक 4 गिरफ्तार



    नई दिल्ली। नोएडा सेक्टर-150 में 16 जनवरी को हुए दर्दनाक हादसे में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत की जांच अब सीबीआई करेगी। इस मामले में CBI की एंट्री 21 जनवरी की रात हुई, जब जांच एजेंसी ने नोएडा प्राधिकरण से MJ विजटाउन से जुड़े दस्तावेज और फाइलें अपने साथ ले लीं।

    यह कदम इस बात का संकेत है कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि भूमि आवंटन, निर्माण मानक और सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर लापरवाही से जुड़ा मामला बन चुका है।

    अब CBI इस केस में स्पोर्ट्स सिटी प्लॉट आवंटन और MJ विजटाउन की भूमिका की जांच करेगी।

    CBI की जांच का केंद्र: स्पोर्ट्स सिटी प्लॉट और बिल्डर की भूमिका
    हादसा स्पोर्ट्स सिटी प्लॉट नंबर-2 (ए-3) में हुआ था। यह वही जगह है जहाँ गहरे पानी से भरा गड्ढा था और युवराज की कार उसमें गिर गई थी।यह प्लॉट 27,185 वर्ग मीटर का है और लेआउट में इसे कॉमर्शियल उपयोग के लिए दिखाया गया था।
    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, MJ विजटाउन को इस प्लॉट का एक हिस्सा आवंटित किया गया था और इस पर नोएडा अथॉरिटी का करीब 129 करोड़ रुपये बकाया बताया गया है।

    यही वजह है कि CBI अब इस प्लॉट के आवंटन, उपविभाजन और बिल्डर के कर्ज के मसले की भी जांच करेगी।

    फॉरेंसिक टीम ने की गहन जांच
    घटना स्थल पर फॉरेंसिक टीम ने इंच-इंच माप कर जांच की और उस स्थान का निरीक्षण किया जहाँ कार गहरे पानी से भरे गड्ढे में गिर गई थी।

    जांच में यह बात सामने आई कि हादसे वाली जगह पर सुरक्षा रेलिंग या ठोस बैरिकेडिंग नहीं थी, जिसे हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है।पुलिस, NDRF और SDRF की टीमों ने कोहरे के बीच बचाव कार्य किया, लेकिन युवा इंजीनियर को बचाया नहीं जा सका।

    अभय कुमार की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत
    इस मामले में MJ विजटाउन प्लानर्स के निदेशक अभय कुमार को गिरफ्तार किया गया और उन्हें सूरजपुर की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 27 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की जांच पर कड़ी टिप्पणी की और निर्देश दिए कि यह स्पष्ट किया जाए कि लापरवाही किसकी हैनाली टूटने की जिम्मेदारी किसकी, और बैरिकेडिंग नहीं लगाने की जिम्मेदारी किसकी।

    क्या था पूरा मामला?
    गुरुग्राम में काम करने वाले इंजीनियर युवराज मेहता 16 जनवरी की रात घर लौट रहे थे। सेक्टर-150 में निर्माण स्थल के पास उनकी कार गहरे पानी से भरे गड्ढे में गिर गई।
    कथित तौर पर उन्होंने लगभग दो घंटे तक मदद की गुहार लगाई, लेकिन मदद नहीं पहुंची और उनकी मौत हो गई।

    उनके पिता राज कुमार मेहता ने इस पूरी त्रासदी को अपनी आंखों के सामने देखा।

    अब तक 4 गिरफ्तार, 2 FIR दर्ज
    नोएडा पुलिस ने इस मामले में दो FIR दर्ज की हैं और अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
    CBI की जांच के बाद यह संख्या बढ़ने की भी संभावना है, क्योंकि जांच का दायरा भूमि आवंटन और प्राधिकरण के फैसलों तक पहुंच गया है।

    यह मामला अब सिर्फ हादसा नहीं रहा। CBI की जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि किसकी लापरवाही और किसके स्वार्थ ने एक युवा की जान ली।
    अब सभी की निगाहें CBI की जांच पर टिकी हैं—क्योंकि इस केस में न सिर्फ बिल्डर, बल्कि प्राधिकरण के अधिकारियों की जवाबदेही भी सवालों के घेरे में है।

  • सिंगरौली में 6 लाख पेड़ काटे जा रहे, कांग्रेस ने अडानी पर आरोप लगाए

    सिंगरौली में 6 लाख पेड़ काटे जा रहे, कांग्रेस ने अडानी पर आरोप लगाए


    सिंगरौली । मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों को लेकर विवाद गहरा गया है। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि सिंगरौली में करीब 6 लाख पेड़ काटे जा रहे हैं और यह सभी अडानी समूह की कंपनी के लिए किया जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा सरकार ने अडानी को न केवल पूरे जंगल को लूटने की अनुमति दी है बल्कि आदिवासियों की आवाज़ को दबाने के लिए पुलिस बल का भी सहारा लिया जा रहा है।

    यह विवाद अहमदाबाद की एक कंपनी मेसर्स स्ट्राटाटेक मिनरल रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कोल ब्लॉक आवंटन से जुड़ा हुआ है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि यह कोल ब्लॉक आवंटन आदिवासी इलाकों में हो रहा है जहां पेड़ों और जमीनों की भारी कटाई की जा रही है। इस पर विरोध करते हुए स्थानीय आदिवासी समुदाय लंबे समय से शांति पूर्वक आंदोलन कर रहे हैं लेकिन सरकार उनकी आवाज़ों को अनदेखा कर रही है।

    कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बिना किसी वैध अनुमति के और मनमाने तरीके से पेड़ों की कटाई की जा रही है। इसके साथ ही हजारों आदिवासी परिवारों को उनके घरों से बेदखल किया जा रहा है बिना पुनर्वास की कोई व्यवस्था किए। सिंगरौली में आदिवासी परिवारों के खिलाफ पुलिस बल तैनात किया जा रहा है ताकि उनका विरोध कुचला जा सके। कांग्रेस ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया कानून के खिलाफ है और आदिवासी समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन है।

    इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए एमपी कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। कांग्रेस ने ट्वीट किया प्रधानमंत्री मोदी एक तरफ कहते हैं कि ‘एक पेड़ मां के नाम लगाओ और दूसरी तरफ वही मोदी अडानी को हजारों पेड़ काटने की अनुमति दे रहे हैं। कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि सरकार आदिवासियों के खिलाफ दमनात्मक नीतियां अपना रही है जबकि वही लोग अपनी ज़मीन पर काबिज होते हुए भी अन्याय का शिकार हो रहे हैं।

    ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी द्वारा गठित एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने इस मामले की जांच की और पाया कि अडानी के लिए 2672 हेक्टेयर ज़मीन आवंटित की गई है। फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने यह भी कहा कि एक ओर जहां आदिवासी समुदायों को अपनी ज़मीन पर काबिज होने के लिए परेशान किया जाता है वहीं दूसरी ओर बड़े उद्योगपतियों को विशाल भूमि और जंगल की छूट दी जा रही है।

    इस विवाद में एक और गंभीर आरोप यह है कि आदिवासी लोगों को अपने घरों से बेदखल किया जा रहा है जबकि सरकार ने किसी तरह का पुनर्वास या मुआवजा नहीं दिया है। सिंगरौली में स्थानीय लोग लंबे समय से शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन अब प्रशासन ने इन प्रदर्शनों को कुचलने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया है। यह स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई है क्योंकि आदिवासी समुदाय के लोग अपनी ज़मीन और जीवन का अधिकार बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

    इस मामले को लेकर एमपी कांग्रेस ने सरकार से जवाब की मांग की है और यह सुनिश्चित करने की बात की है कि आदिवासी समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन न हो। साथ ही कांग्रेस ने यह भी कहा कि जब तक पेड़ों की कटाई और आदिवासियों का शोषण बंद नहीं होता उनका विरोध जारी रहेगा।