Tag: Land Scam

  • कोलकाता में बड़ा मामला: फरार आरोपी सोना पप्पू ईडी दफ्तर पहुंचा, लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार

    कोलकाता में बड़ा मामला: फरार आरोपी सोना पप्पू ईडी दफ्तर पहुंचा, लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार


    नई दिल्ली । कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के तहत एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां पिछले तीन महीनों से फरार चल रहा बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू अचानक सॉल्ट लेक स्थित ईडी कार्यालय पहुंच गया। उसके इस अचानक कदम ने जांच एजेंसियों को भी हैरान कर दिया, क्योंकि लंबे समय से वह लगातार फरार चल रहा था और कई बार समन जारी होने के बावजूद पेश नहीं हुआ था।

    सूत्रों के अनुसार, सोमवार सुबह सोना पप्पू ईडी कार्यालय पहुंचा और अंदर प्रवेश करते समय उसने खुद को व्यवसायी बताते हुए कहा कि वह कोई अपराधी नहीं है। हालांकि इसके बाद शुरू हुई पूछताछ कई घंटों तक चली, जिसमें जांच अधिकारियों ने उससे विभिन्न मामलों को लेकर सवाल-जवाब किए। करीब नौ घंटे से अधिक चली इस लंबी पूछताछ के बाद उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।

    जांच एजेंसियों का कहना है कि सोना पप्पू पर जबरन वसूली, जमीन हड़पने और अवैध वित्तीय लेनदेन से जुड़े गंभीर आरोप हैं। उसके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज होने की बात भी सामने आई है, जिनमें प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोगों को धमकाकर पैसे वसूलने और संपत्ति पर अवैध कब्जे जैसे आरोप शामिल हैं।

    इस मामले में यह भी जानकारी सामने आई है कि हाल के महीनों में पुलिस और ईडी की संयुक्त कार्रवाई के दौरान उसके कई ठिकानों पर छापेमारी की गई थी, जहां से कथित तौर पर बड़ी मात्रा में नकदी, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद की गई थी। इसके बाद से ही वह लगातार फरार चल रहा था और उसकी तलाश तेज कर दी गई थी।

    जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि फरारी के दौरान भी सोना पप्पू सोशल मीडिया के जरिए अपनी मौजूदगी का संकेत देता रहा और खुद को निर्दोष बताने की कोशिश करता रहा। हालांकि जांच एजेंसियों के पास मौजूद साक्ष्यों के आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ती रही।

    ईडी सूत्रों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ यह भी संदेह है कि वह कोलकाता के विभिन्न इलाकों में सक्रिय कई नेटवर्क और सिंडिकेट्स के जरिए अवैध गतिविधियों को संचालित करता था। इन नेटवर्क्स के जरिए कथित रूप से वसूली और संपत्ति से जुड़े मामलों को नियंत्रित किया जाता था, जिससे कई लोगों पर दबाव बनाए जाने की बात सामने आई है।

    फिलहाल गिरफ्तारी के बाद उसे मंगलवार को अदालत में पेश किए जाने की तैयारी है, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम ने कोलकाता में प्रॉपर्टी और वित्तीय अपराधों से जुड़े नेटवर्क पर एक बार फिर ध्यान केंद्रित कर दिया है और जांच एजेंसियां अब मामले की गहराई से जांच में जुट गई हैं।

  • बालाघाट में बड़ा खुलासा: सूदखोरी और जमीन घोटाले में वारासिवनी का आरोपी गिरफ्तार, संपत्तियों की जांच शुरू

    बालाघाट में बड़ा खुलासा: सूदखोरी और जमीन घोटाले में वारासिवनी का आरोपी गिरफ्तार, संपत्तियों की जांच शुरू


    नई दिल्ली । बालाघाट के वारासिवनी में सूदखोरी और आदिवासियों की जमीन हड़पने के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार अनिल अरोरा को कोर्ट ने जेल भेज दिया है। पुलिस अब उसके बैंक खातों और संपत्ति दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है, जिसमें बड़े वित्तीय और जमीन घोटाले के संकेत मिले हैं।

    सूदखोरी के जाल में फंसते रहे लो
    वारासिवनी क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे कथित सूदखोरी के नेटवर्क का अब बड़ा खुलासा हुआ है। आरोपी अनिल अरोरा पर आरोप है कि वह आम लोगों के साथ-साथ नौकरीपेशा वर्ग को भी ऊंचे ब्याज दरों पर कर्ज देकर शोषण करता था। बताया जा रहा है कि वह 10 से 15 प्रतिशत तक ब्याज वसूलता था, जिससे कई लोग कर्ज के जाल में फंसते चले गए।

    छापेमारी में मिले चौंकाने वाले दस्तावे
    पुलिस की कार्रवाई के दौरान आरोपी के ठिकानों से बड़ी संख्या में खाली चेक, जमीन की रजिस्ट्री और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए हैं। ये दस्तावेज कथित तौर पर उसके संगठित अवैध कारोबार की ओर इशारा करते हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि पूरा नेटवर्क योजनाबद्ध तरीके से संचालित किया जा रहा था।

    आदिवासियों की जमीन पर कब्जे का आरो
    मामले में सबसे गंभीर आरोप आदिवासी समुदाय की जमीनों को हड़पने का है। पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी ने कुछ लोगों के नाम का उपयोग कर आदिवासियों से सस्ते दामों पर जमीन खरीदी। इसके बाद उन्हीं जमीनों को बड़े कॉलोनाइजरों और गैर-आदिवासियों को ऊंचे दामों पर बेचकर भारी मुनाफा कमाया गया। अब तक इस तरह की करीब 6 रजिस्ट्रियां पुलिस के हाथ लगी हैं।

    कोर्ट ने भेजा जेल, जांच में बढ़ी सख्त
    शनिवार को कोर्ट ने आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेजते हुए जेल भेज दिया। पुलिस अब उसके बैंक खातों और संपत्तियों की गहन जांच कर रही है ताकि अवैध कमाई का पूरा नेटवर्क सामने आ सके। अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

    यह मामला न केवल सूदखोरी की गंभीर समस्या को उजागर करता है, बल्कि आदिवासी भूमि के अवैध लेन-देन और संगठित आर्थिक अपराध की ओर भी इशारा करता है। पुलिस की जांच से आने वाले समय में पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होने की संभावना है।

  • जमीन मुक्त कराने के नाम पर खेल, एक महीने में दो बार भेजी गई नकली NOC

    जमीन मुक्त कराने के नाम पर खेल, एक महीने में दो बार भेजी गई नकली NOC


    इंदौर मध्य प्रदेश के इंदौर में जमीन से जुड़े कामकाज को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) में फर्जी एनओसी (No Objection Certificate) का संगठित रैकेट सक्रिय होने का खुलासा हुआ है, जिसमें प्राधिकरण के अंदरूनी लोगों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है।

    एक महीने में दो बार भेजी गई फर्जी NOC

    मामला योजना 97 पार्ट-4 बिजलपुर की करीब 20 हजार वर्गफुट जमीन से जुड़ा है। जमीन मालिक ने ले-आउट मंजूरी के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) में आवेदन किया था।

    जांच के दौरान TNCP अधिकारियों को संदेह हुआ क्योंकि IDA से जारी NOC और उसके प्रारूप में साइन मेल नहीं खा रहे थे। जब पुष्टि के लिए IDA से संपर्क किया गया, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ-ऐसी कोई NOC वहां से जारी ही नहीं हुई थी। हैरानी की बात यह है कि करीब डेढ़ महीने के भीतर दो बार फर्जी NOC भेजी गई।

     अफसरों के साइन भी निकले नकली

    भू-अर्जन अधिकारी सुदीप मीणा ने साफ कहा कि उनके नाम से फर्जी साइन कर NOC बनाई गई। इससे पहले कंट्री प्लानिंग विभाग के अधिकारी के भी सिग्नेचर फर्जी पाए गए।

    इससे साफ है कि रैकेट काफी सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था और दस्तावेजों को असली जैसा दिखाने के लिए अधिकारियों के हस्ताक्षर तक कॉपी किए जा रहे थे।

     IDA कर्मचारी पर शक, मोबाइल बंद कर गायब

    इस पूरे मामले में IDA के विधि विभाग के बाबू शुभम श्रीवास्तव पर संदेह गहराया है। खुलासे के बाद से वह बिना सूचना के गायब है, उसका मोबाइल भी बंद है और घर से भी लापता बताया जा रहा है। इससे जांच और गंभीर हो गई है।

    करोड़ों के घोटाले की आशंका

    सूत्रों के मुताबिक, यह रैकेट पिछले करीब एक साल से सक्रिय था और जमीन की कीमत के हिसाब से NOC जारी करने के रेट तय किए जाते थे। आशंका है कि इस तरह कई मामलों में शासन को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया है। अब प्राधिकरण पुरानी NOC फाइलों की भी जांच कराने की तैयारी में है, जिससे इस घोटाले का दायरा और बढ़ सकता है।

     अब पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन

    मामले की गंभीरता को देखते हुए IDA के सीईओ परीक्षित झाड़े ने NOC प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन करने का फैसला लिया है, ताकि भविष्य में इस तरह की फर्जीवाड़े की गुंजाइश खत्म हो सके। फिलहाल विभागीय जांच जारी है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही जा रही है।