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  • भारत की मदद से कंबोडिया का गांव हुआ बारूदी सुरंगों से मुक्त, 134 परिवारों को मिली सुरक्षित जमीन

    भारत की मदद से कंबोडिया का गांव हुआ बारूदी सुरंगों से मुक्त, 134 परिवारों को मिली सुरक्षित जमीन

    नोम पेन्ह। भारत ने कंबोडिया में मानवीय सहायता और पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। भारत सरकार की क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट (क्यूआईपी) योजना के तहत बारूदी सुरंगों और बिना फटे गोला-बारूद से मुक्त कराई गई जमीन को कंबोडिया के कोह कोंग प्रांत के काओ पाओ गांव के लोगों को सौंप दिया गया है। सुरक्षित की गई इस जमीन से करीब 134 परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।

    जमीन समुदाय को सौंपने के लिए आयोजित विशेष कार्यक्रम में कंबोडिया में भारतीय दूतावास की डिप्टी चीफ ऑफ मिशन तनु प्रिया, कोह कोंग प्रांत के डिप्टी गवर्नर वाई. नियरिनेट और कंबोडिया माइन एक्शन एंड विक्टिम असिस्टेंस अथॉरिटी (सीएमएए) के डिप्टी सेक्रेटरी जनरल टेप कल्याण मौजूद रहे।

    भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि डिप्टी चीफ ऑफ मिशन डॉ. तनु प्रिया ने सीएमएए के डिप्टी सेक्रेटरी जनरल टेप कल्याण और कोह कोंग प्रांत के डिप्टी गवर्नर के साथ मेकांग-गंगा सहयोग की क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट योजना के तहत साफ की गई जमीन को समुदाय को सौंपने के कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

    करीब 1.98 लाख वर्ग मीटर जमीन सुरक्षित

    कंबोडिया के अखबार द नोम पेन्ह पोस्ट के मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान गांववालों को करीब 1,97,810 वर्ग मीटर जमीन सौंपी गई। बारूदी सुरंगों और बिना फटे गोला-बारूद से मुक्त कराई गई इस जमीन का अब ग्रामीण खेती, आवास निर्माण और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल कर सकेंगे।

    भारतीय दूतावास ने कहा कि जमीन को समुदाय को वापस सौंपे जाने से स्थानीय लोगों को आजीविका, कृषि, आवास और अन्य सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों के लिए सुरक्षित पहुंच उपलब्ध होगी।

    1990 के दशक से कंबोडिया की मदद कर रहा भारत

    भारत का कंबोडिया के मानवीय बारूदी सुरंग हटाने के प्रयासों में लंबे समय से सहयोग रहा है। भारतीय दूतावास के अनुसार, 1990 के दशक की शुरुआत से भारत कंबोडिया को क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण के साथ-साथ तकनीकी सहायता, बारूदी सुरंग हटाने के उपकरण और माइन डिटेक्शन डॉग उपलब्ध कराता रहा है। इसके अलावा भारत बारूदी सुरंगों से प्रभावित लोगों को भी सहायता देता रहा है।

    भारत की यह मदद ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब कंबोडिया में लंबे समय से मौजूद बारूदी सुरंगों की समस्या ग्रामीण आबादी की जमीन, खेती और आजीविका के लिए चुनौती बनी हुई है। जमीन को साफ कर स्थानीय समुदाय को लौटाने से न केवल सुरक्षा बढ़ी है, बल्कि लोगों के लिए आर्थिक गतिविधियों के नए रास्ते भी खुले हैं।

    व्यापार बढ़ाने पर भी दोनों देशों में सहमति

    भारत और कंबोडिया के बीच सहयोग का दायरा केवल मानवीय सहायता तक सीमित नहीं है। इससे पहले 24 अगस्त को दोनों देशों ने आपसी व्यापार बढ़ाने पर भी सहमति जताई थी।

    नोम पेन्ह में ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट पर जॉइंट वर्किंग ग्रुप की तीसरी बैठक के दौरान दोनों देशों ने पारंपरिक चिकित्सा, ई-गवर्नेंस, भारतीय फार्माकोपिया को मान्यता देने और डिजिटल पेमेंट सिस्टम को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा की थी।

    दोनों देशों के बीच व्यापार में भी 36 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है और यह वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 406.78 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया।

  • हरियाणा के पानीपत में किसानों को बड़ी राहत, हाई कोर्ट ने जमीन का मुआवजा 40 से बढ़ाकर 78 लाख किया

    हरियाणा के पानीपत में किसानों को बड़ी राहत, हाई कोर्ट ने जमीन का मुआवजा 40 से बढ़ाकर 78 लाख किया


    नई दिल्ली । पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पानीपत के सिवाह गांव में भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामले में जमीन मालिकों को राहत देते हुए अधिग्रहित भूमि का बाजार मूल्य 78 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया है। यह जमीन 25 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई थी। पहले भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने इसका मुआवजा 40 लाख रुपये प्रति एकड़ तय किया था।

    भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया वर्ष 2013 में शुरू हुई थी। 28 फरवरी 2013 को भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा चार के तहत अधिसूचना जारी की गई थी। इसके बाद 16 अप्रैल 2013 को धारा छह के तहत अगली अधिसूचना जारी हुई। 26 सितंबर 2013 को भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने अधिग्रहित जमीन का बाजार मूल्य 40 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया था।

    मुआवजे की इस राशि से असंतुष्ट जमीन मालिकों ने इसे बढ़ाने की मांग की और मामला अदालत तक पहुंचा। संदर्भ अदालत ने 23 जनवरी 2017 को जमीन का बाजार मूल्य बढ़ाकर 64 लाख 64 हजार 102 रुपये प्रति एकड़ कर दिया था। इसके बाद भी मुआवजे को लेकर विवाद जारी रहा और मामला हाई कोर्ट पहुंचा।

    हाई कोर्ट के सामने जमीन मालिकों और राज्य सरकार, दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलों के समर्थन में बिक्री विलेख पेश किए। जमीन मालिकों की ओर से वर्ष 2010 से 2014 के बीच हुए कई जमीन सौदों के दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। इनमें कुछ लेन-देन में जमीन की कीमत करीब एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक दर्ज थी।

    अदालत ने माना कि संबंधित अवधि के वास्तविक और तुलनीय बिक्री विलेख उपलब्ध होने की स्थिति में पुराने अवार्ड को केवल उसके आधार पर यांत्रिक तरीके से लागू करना उचित नहीं है। जमीन का बाजार मूल्य तय करते समय आसपास की जमीन के वास्तविक लेन-देन, उनकी तुलना और संबंधित परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।

    राज्य सरकार की ओर से पेश किए गए कुछ बिक्री विलेखों में जमीन की कीमत 35 से 40 लाख रुपये प्रति एकड़ के बीच बताई गई थी। वहीं जमीन मालिकों द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों में इससे कहीं अधिक कीमत वाले सौदे सामने आए। अदालत ने उपलब्ध बिक्री विलेखों का तुलनात्मक अध्ययन करने के बाद जमीन के उचित बाजार मूल्य का निर्धारण किया।

    अदालत ने अंततः अधिग्रहित जमीन का बाजार मूल्य 78 लाख रुपये प्रति एकड़ तय किया। इस तरह भूमि अधिग्रहण कलेक्टर द्वारा निर्धारित 40 लाख रुपये प्रति एकड़ की राशि की तुलना में बाजार मूल्य में 38 लाख रुपये प्रति एकड़ की बढ़ोतरी हुई।

    फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया कि भूमि अधिग्रहण के मामलों में मुआवजा तय करने के लिए किसी पुराने अवार्ड को हर मामले में सीधे आधार नहीं बनाया जा सकता। यदि संबंधित समय और क्षेत्र से जुड़े वास्तविक बिक्री विलेख उपलब्ध हैं, तो उनका उचित मूल्यांकन जरूरी है। इससे अधिग्रहित जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य का अधिक उचित आकलन किया जा सकता है।

    इस फैसले के बाद सिवाह गांव की अधिग्रहित जमीन के लिए निर्धारित बाजार मूल्य 78 लाख रुपये प्रति एकड़ हो गया है। मामला 25 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण के उद्देश्य से की गई भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया से जुड़ा था।

  • राम मंदिर केस: आरोप पत्र में जमीन से लेकर गाड़ियों तक… दान के पैसों से करोड़ों की संपत्तियां बनाने का जिक्र

    राम मंदिर केस: आरोप पत्र में जमीन से लेकर गाड़ियों तक… दान के पैसों से करोड़ों की संपत्तियां बनाने का जिक्र


    अयोध्या।
    अयोध्या (Ayodhya) के राम मंदिर (Ram Mandir) चढ़ावा चोरी के मामले में आरोपियों पर शिकंजा कस गया है। पुलिस की तरफ से बुधवार को अदालत में दाखिल किए गए आरोप पत्र के अनुसार दान चोरी (Theft Donation) से करोड़ों की संपत्तियां बनाई गईं। जमीन और गाड़ियां खरीदी गईं। आरोपियों के वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आने की बात कही जा रही है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक 25 जून 2026 को थाना राम जन्मभूमि (Ram Janmabhoomi) में मुकदमा दर्ज होने के बाद विवेचना के दौरान आरोपियों के बैंक खातों और अन्य वित्तीय गतिविधियों का गहन विश्लेषण किया गया। पुलिस ने अपनी 74 हजार पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट में ब्योरा जुटाकर उसे चार्जशीट का हिस्सा बनाया है।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार विवेचना में आरोपियों के खातों में बड़ी मात्रा में हुए नकद लेनदेन के साथ जमीन, मकान, वाहन और अन्य मूल्यवान संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल की गई। पुलिस ने इन संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन का क्रमवार विश्लेषण करते हुए चार्जशीट में उनका उल्लेख किया है। आरोप लगाया कि अभियुक्तों ने स्वयं और अपने सगे संबंधियों के माध्यम से करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्ति चढ़ावा चोरी से बनाई हैं।


    आरोप पत्र में दस्तावेजों के साथ गवाहों के बयान

    पुलिस ने अपने आरोप पत्र में इसे साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज व गवाहों के बयान दर्ज किए हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, विवेचना के दौरान ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिनसे आरोपियों पर चढ़ावे की रकम के दुरुपयोग से करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित करने का आरोप बनता है। इसमें जमीन और मकान के अलावा कई वाहन तथा अन्य मूल्यवान वस्तुएं शामिल हैं।


    सरकारी दस्तावेजों से पुष्टि का भी दावा

    पुलिस ने आरोपियों के बैंक खातों में हुए लेनदेन, संपत्ति की खरीद और अन्य आर्थिक गतिविधियों के बीच संबंधों की भी पड़ताल की है। जांच में सामने आए दस्तावेजों और वित्तीय विवरणों को साक्ष्य के रूप में चार्जशीट में शामिल किया गया है। पुलिस ने अयोध्या समेत एक दर्जन जिलों के सरकारी दस्तावेजों व मशीनरी से इसकी बकायदा पुष्टि कराते हुए आरोप लगाए हैं।


    चार्जशीट में संपत्तियों का क्रमवार विवरण

    विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपियों की ओर से अर्जित बताई जा रही चल और अचल संपत्तियों का अलग-अलग ब्योरा तैयार किया। इसमें संपत्ति की प्रकृति, खरीद से जुड़े दस्तावेज और उपलब्ध वित्तीय लेनदेन का विवरण शामिल किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस का दावा है कि इन तथ्यों के आधार पर चढ़ावा चोरी से अर्जित रकम और उससे बनाई गई संपत्तियों के बीच कड़ियों की जांच की गई है। अदालत में चार्जशीट पर होने वाली सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से पेश किए गए वित्तीय दस्तावेज और संपत्तियों से जुड़े साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे।


    ये आठ हैं आरोपी

    राममंदिर दान चोरी के मामले में 25 जून 2026 को थाना रामजन्मभूमि में एफआईआर दर्ज करने के बाद अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव व रामशंकर यादव टिन्नू को गिरफ्तार कर आरोपी बनाया गया था। इन पर बीएनएस की धारा 305, 306, 3016 (5), 317(4), 317 (5) 61, 3 (5) के साथ भ्रष्टचार निवारण अधिनियम 13 (1) ए लगाए गए थे। यह सभी धाराएं चोरी और चोरी के माल से अवैध कार्यों को करने से संबंधित हैं।

    चार्जशीट में आरोपियों से हटाई गयी धाराएं
    चार्जशीट में बीएनएस की धारा 305 व 306 सभी आठों आरोपियों से हटा दी गई है। सुभाष के ऊपर लगी धारा 317 (2) को भी हटा दिया गया है। आरोपियों पर लगी धाराएं परिवर्तित होने के बाद अब फिर से आरोपियों के पास जमानत पत्र दूसरे तरीके से दाखिल करने का अवसर होगा। वहीं जानकारों के मुताबिक इसका लाभ आरोपी पक्ष को मिल सकता है।

  • अपने होम स्टेट में घर बसाना चाहते हैं ऋषभ पंत, तीन साल से जमीन की तलाश के बाद सीएम से लगाई गुहार

    अपने होम स्टेट में घर बसाना चाहते हैं ऋषभ पंत, तीन साल से जमीन की तलाश के बाद सीएम से लगाई गुहार

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत इन दिनों श्रीलंका दौरे पर हैं, लेकिन इस बीच उनका एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में आ गया है। पंत ने उत्तराखंड में जमीन नहीं मिलने को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मदद की अपील की है। उन्होंने कहा कि वह दिल्ली से अपने गृह राज्य उत्तराखंड में वापस आकर बसना चाहते हैं और इसके लिए लंबे समय से जमीन तलाश रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक उपयुक्त जमीन नहीं मिल सकी है।

    ऋषभ पंत ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को संबोधित करते हुए कहा कि वह लंबे समय से उत्तराखंड में जमीन लेने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह दिल्ली से उत्तराखंड शिफ्ट होना चाहते हैं और अपने परिवार के साथ अपने राज्य में रहना चाहते हैं। पंत ने बड़ी और अच्छी जमीन की जरूरत बताई, जहां वह अपना घर बना सकें और स्थायी रूप से रह सकें।

    पंत ने अपनी पोस्ट में उत्तराखंड के प्रति अपने लगाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह अपने राज्य से बेहद प्यार करते हैं और पहाड़ के लोगों के बीच रहना चाहते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले को देखने और जमीन उपलब्ध कराने में मदद करने की अपील की। पंत के मुताबिक, इस प्रयास को करीब तीन साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें जमीन नहीं मिल पाई है।

    क्रिकेटर ने यह भी कहा कि उन्हें उत्तराखंड को प्रमोट करने के उद्देश्य से कुछ अन्य जमीन भी मिलनी थी, लेकिन वह प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद पंत ने एक और पोस्ट करते हुए कहा कि अपने राज्य के लिए देश का उच्च स्तर पर प्रतिनिधित्व करने के बदले अगर राज्य की ओर से घर बनाने के लिए जमीन मिल जाए तो यह उनके लिए खुशी की बात होगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर वह सरकार से जमीन खरीदने के लिए तैयार हैं।

    ऋषभ पंत की अपील पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिक्रिया देते हुए मदद का भरोसा दिया। मुख्यमंत्री ने पंत को उत्तराखंड का गौरव बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने खेल और उपलब्धियों से देश-दुनिया में देवभूमि का नाम रोशन किया है। उन्होंने पंत की मातृभूमि के प्रति भावना और उत्तराखंड लौटकर योगदान देने की इच्छा की सराहना की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पंत द्वारा उठाए गए मामले के संबंध में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अधिकारी जल्द ही ऋषभ पंत से संपर्क करेंगे और नियमानुसार हरसंभव सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इससे पंत की जमीन से जुड़ी समस्या के समाधान की उम्मीद बढ़ी है।

    हालांकि, ऋषभ पंत उत्तराखंड में पूरी तरह जमीनविहीन नहीं हैं। रुड़की में उनके परिवार का करीब दो से ढाई हजार वर्ग गज में फैला पैतृक मकान है। इसी परिसर में उनके पिता स्वर्गीय राजेंद्र पंत पहले न्यू मॉडर्न पब्लिक स्कूल भी चलाते थे। परिवार का यह आवास आज भी मौजूद है और वहां ऋषभ पंत की मां रहती हैं। मकान पर उनके पिता के साथ ऋषभ पंत के नाम की नेम प्लेट भी लगी हुई है।

    पंत का पैतृक संबंध पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट विकासखंड के गांव पाली से भी है। गांव में उनके परिवार के सदस्य और उनके दो चाचा जगदीश चंद्र पंत और हेम पंत रहते हैं। ऐसे में उत्तराखंड में जमीन और घर को लेकर पंत की इच्छा उनके पुराने पारिवारिक जुड़ाव से भी जुड़ी हुई है। अब मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद संबंधित अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी।

  • यूका फैक्ट्री का कचरा हटने से भोपाल से मिटा गैस त्रासदी का कलंक, अब जमीन का करेंगे प्रबंधनः CM मोहन यादव

    यूका फैक्ट्री का कचरा हटने से भोपाल से मिटा गैस त्रासदी का कलंक, अब जमीन का करेंगे प्रबंधनः CM मोहन यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने 1984 की भोपाल गैस त्रासदी (Bhopal gas tragedy) को प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का सबसे बड़ा उदाहरण बताया. कहा कि इस भयानक घटना ने नागरिकों और पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया।

    CM यादव विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, जहां ‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान की शुरुआत की गई। सीएम यादव ने कहा, “भोपाल गैस त्रासदी प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का सबसे बड़ा उदाहरण है. यह सबसे भयानक घटना थी जिसने आम नागरिकों और पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया।


    फैक्ट्री के कचरे का हुआ सफल निपटारा

    मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने 40 साल बाद यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में पड़े कचरे का निपटारा कर दिया है. उन्होंने आगे कहा, “इससे भोपाल की धरती से गैस त्रासदी का कलंक मिट गया है. अब राज्य सरकार यूनियन कार्बाइड की जमीन के सही प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ रही है।

    बता दें कि 2-3 दिसंबर 1984 की रात भोपाल में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से बेहद जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव हुआ था. इसमें कम से कम 5,479 लोगों की मौत हुई और हजारों लोग अपंग हो गए. इसे दुनिया की सबसे बुरी औद्योगिक त्रासदियों में से एक माना जाता है।


    ग्रीन एनर्जी और वन्यजीवों का सह-अस्तित्व

    CM यादव ने कहा कि राज्य में स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई अहम पहल की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरित ऊर्जा के लिए सौर, पवन, बायोमास और जलविद्युत परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है, और सांची, खजुराहो व अन्य जगहों पर बड़ी परियोजनाएं चल रही हैं।

    वन्यजीव संरक्षण के साथ सह-अस्तित्व का बेहतरीन उदाहरण पेश करने का जिक्र करते हुए यादव ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने बताया कि राज्य में तेंदुओं को लाने के अलावा असम से जंगली भैंसें भी लाई गई हैं.

    उन्होंने कहा, “पर्यावरण संरक्षण की मूल अवधारणा हमारी सनातन संस्कृति में निहित है. 5 तत्वों से बनी इस सृष्टि के संरक्षण के लिए हर तत्व का महत्व हमारी पूजा-पद्धति, खान-पान और प्रार्थनाओं में मौजूद है. सनातन संस्कृति में एक पेड़ को दस पुत्रों के बराबर माना जाता है. पर्यावरण संरक्षण हमारी जीवनशैली में झलकता है.”

    यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है. यादव ने कहा कि ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत राज्य में नदियों, कुओं, बावड़ियों और तालाबों के संरक्षण का पवित्र कार्य चल रहा है.

    इस मौके पर वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार और वन एवं पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक बरनवाल समेत कई अन्य लोग मौजूद थे. अहिरवार ने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा के लिए हवा, पानी और पेड़ों को बचाना बहुत जरूरी है।

  • अयोध्या में अमिताभ बच्चन ने दो साल में चौथी जमीन खरीदी

    अयोध्या में अमिताभ बच्चन ने दो साल में चौथी जमीन खरीदी


    मुंबई। अमिताभ बच्‍चन ने भगवान राम की नगरी में एक और जमीन खरीदकर चर्चा बटोर ली है। सदी के महानायक ने पिछले दो वर्षों में यहां चौथी बार निवेश किया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने करीब 10,617 वर्ग मीटर जमीन लगभग 25.20 करोड़ रुपये में खरीदी है।
    यह जमीन The House of Abhinandan Lodha की परियोजना के पास स्थित है और सरयू नदी के तट के नजदीक विकसित हो रहे लक्जरी लैंड प्रोजेक्ट के आसपास बताई जा रही है। इस जमीन की खरीद एबी कॉर्प लिमिटेड के प्रबंध निदेशक राजेश ऋषिकेश यादव ने पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए पूरी की।

    अयोध्या में तेजी से बढ़ रहा निवेश
    राम मंदिर अयोध्‍या के निर्माण और उद्घाटन के बाद से अयोध्या में पर्यटन, कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित हो रहा है। इसी वजह से बड़े उद्योगपति और फिल्मी हस्तियां भी यहां रियल एस्टेट में निवेश कर रही हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अयोध्या सिर्फ धार्मिक पर्यटन ही नहीं बल्कि रियल एस्टेट निवेश का भी बड़ा केंद्र बन सकता है।

    पहले कहां-कहां खरीदी जमीन?
    अमिताभ बच्चन इससे पहले भी अयोध्या में तीन प्लॉट खरीद चुके हैं।
    2024: The Sarayu Project Ayodhya में लगभग 10,000 वर्ग फुट का प्लॉट करीब 14.5 करोड़ रुपये में खरीदा था।

    2025: सरयू नदी के पास ही 25,000 वर्ग फुट का प्लॉट लगभग 40 करोड़ रुपये में लिया।

    2025: उसी क्षेत्र के पास एक और जमीन में निवेश किया गया था, जो सरयू तट के आसपास विकसित हो रही परियोजनाओं से जुड़ी बताई जाती है।

    2026 (नया सौदा): सरयू किनारे के पास लक्जरी प्रोजेक्ट के आसपास 10,617 वर्ग मीटर जमीन 25.20 करोड़ रुपये में खरीदी गई है।

    यूपी से खास जुड़ाव

    अमिताभ बच्चन का उत्तर प्रदेश से पुराना रिश्ता है। उनका पैतृक संबंध Prayagraj से रहा है। ऐसे में अयोध्या में लगातार निवेश को उनके यूपी से भावनात्मक जुड़ाव के तौर पर भी देखा जा रहा है।

    बताया जा रहा है कि अयोध्या में तेजी से विकसित हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यटन के कारण यहां जमीन की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे बड़े निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ती जा रही है।

  • ईरान की धरती पर नहीं उतरेंगे अमेरिकी सैनिक? जानिए वजह

    ईरान की धरती पर नहीं उतरेंगे अमेरिकी सैनिक? जानिए वजह


    वाशिंगटन। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए व्यापक हवाई हमलों के बाद मध्य पूर्व में युद्ध भड़क गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरानी जनता के लिए ‘आजादी’ बताया है। आसमान से बरसती मिसाइलों और भयानक बमबारी के बीच ट्रंप का ‘एंडगेम’ यानी अंतिम लक्ष्य बिल्कुल साफ हो चुका है- ईरान में पूरी तरह से सत्ता परिवर्तन। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के असली लक्ष्य को हासिल करना- बिना जमीनी सेना के लगभग असंभव है।

    इस संघर्ष ने अपने शुरुआती दिनों में ही पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है। शनिवार तड़के हुए अमेरिकी-इजरायली हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, कई शीर्ष अधिकारी और सैकड़ों नागरिक मारे गए हैं। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों, अमेरिकी ठिकानों और इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए हैं। इराक स्थित ईरान-समर्थित गुटों और लेबनान के हिज्बुल्लाह ने भी युद्ध में प्रवेश कर लिया है। इसके साथ ही इजरायल द्वारा दक्षिणी लेबनान पर जमीनी हमले की योजना की भी खबरें हैं।
    क्या केवल हवाई हमलों से सत्ता परिवर्तन संभव है?

    राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी जनता से अपील करते हुए कहा है- जब हम अपना काम खत्म कर लेंगे, तो अपनी सरकार पर कब्ब्जा कर लेना। यह आपकी होगी। हालांकि, विशेषज्ञ इस रणनीति पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।

    अल-जजीरा से बात करते हुए स्टिम्सन सेंटर थिंक टैंक के केली ग्रीको ने कहा कि जमीनी सेना के बिना इतना बड़ा राजनीतिक बदलाव लाना लगभग असंभव है। उन्होंने चेतावनी दी कि ट्रंप हवाई हमलों की ताकत को लेकर कुछ ज्यादा ही मुग्ध हो गए हैं। सेंटर फॉर इंटरनेशनल पॉलिसी के मैथ्यू डस ने स्पष्ट किया कि इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जहां केवल हवाई हमलों से सत्ता परिवर्तन हुआ हो। उन्होंने 2011 के लीबिया युद्ध का उदाहरण दिया, जहां नाटो के हवाई हमलों के बावजूद मुअम्मर गद्दाफी को हटाने के लिए जमीनी स्तर पर विद्रोहियों को ही लड़ना पड़ा था।
    हालिया रॉयटर्स सर्वेक्षण के अनुसार, केवल 25% अमेरिकी इस युद्ध का समर्थन कर रहे हैं। इसकी तुलना में 2003 के इराक युद्ध को शुरुआत में लगभग 55% जनसमर्थन प्राप्त था। डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंटल ने एक खुफिया ब्रीफिंग के बाद चिंता व्यक्त की है कि अमेरिका ईरान में जमीनी सेना उतारने की दिशा में बढ़ रहा है, जिससे अमेरिकी सैनिकों के लिए खतरा बहुत अधिक बढ़ जाएगा।
    ट्रंप का ‘मास्टरप्लान’: हवा और समंदर से तबाही

    ट्रंप प्रशासन की रणनीति इराक या अफगानिस्तान जैसी नहीं है, जहां लाखों सैनिक भेजकर कब्ज़ा किया गया था। ट्रंप का दांव है कि आसमान और समंदर से ही इतना भयानक प्रहार किया जाए कि ईरान का पूरा सिस्टम ताश के पत्तों की तरह ढह जाए। इस रणनीति का सबसे बड़ा उदाहरण ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत है।

    ट्रंप का मानना है कि नेतृत्व को खत्म करने से व्यवस्था अपने आप पंगु हो जाएगी। अमेरिका ईरान की मिसाइल क्षमता, उसकी नेवी और उसके परमाणु ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर रहा है ताकि ईरान के पास पलटवार की कोई ताकत ही न बचे।
    ‘बूट्स ऑन द ग्राउंड’ से परहेज क्यों?

    ट्रंप हमेशा से अमेरिका को दूसरे देशों के ‘अंतहीन युद्धों’ में फंसाने के खिलाफ रहे हैं। किसी देश में पैदल सेना भेजने का मतलब है अमेरिकी सैनिकों की लाशें वापस आना और खरबों डॉलर का खर्च। ट्रंप का ‘अमेरिका फर्स्ट’ का नारा इसके सख्त खिलाफ है।

    ट्रंप खुलेआम ईरानी जनता से कह रहे हैं कि वे इस मौके का फायदा उठाएं और खुद अपनी सरकार को उखाड़ फेंकें। ट्रंप को उम्मीद है कि भारी बमबारी और बदहाली से टूटकर ईरानी जनता खुद बगावत कर देगी और अमेरिका को सेना उतारने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
    ट्रंप प्रशासन के भीतर और बाहर अलग-अलग सुर

    इस युद्ध के उद्देश्यों को लेकर अमेरिकी नेताओं और प्रशासन के बयानों में काफी विरोधाभास देखने को मिल रहा है। विदेश मंत्री मार्क रूबियो ने कहा कि लक्ष्य ईरान के परमाणु और ड्रोन कार्यक्रमों तथा नौसेना को नष्ट करना है ताकि वह विदेशी हमलों से न बच सके।

    वहीं रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि यह कोई अंतहीन युद्ध नहीं होगा; हम स्पष्ट उद्देश्यों के साथ काम कर रहे हैं। डेमोक्रेटिक सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने कहा, ‘यह एक अवैध युद्ध है जो झूठ पर आधारित है। ट्रंप प्रशासन के पास ईरान को लेकर कोई स्पष्ट योजना नहीं है।’

    विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ने इस युद्ध की आवश्यकता और इसके सटीक लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से जनता के सामने नहीं रखा है। यह संघर्ष अब उस त्वरित सैन्य कार्रवाई से कहीं अधिक लंबा खिंचता दिख रहा है, जिसके लिए ट्रंप जाने जाते हैं, जैसे जनवरी में वेनेज़ुएला के निकोलस मादुरो का अपहरण या जून में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले।

  • ऑपरेशन ‘सिंदूर 2.0’ पर सख्त संदेश: जमीन, समुद्र और हवा-हर मोर्चे पर जवाब को तैयार सेना

    ऑपरेशन ‘सिंदूर 2.0’ पर सख्त संदेश: जमीन, समुद्र और हवा-हर मोर्चे पर जवाब को तैयार सेना

    नई दिल्ली। भारत ने सीमा पार से किसी भी उकसावे की स्थिति में पहले से अधिक कठोर प्रतिक्रिया देने के संकेत दिए हैं। भारतीय सेना की पश्चिमी कमान ने स्पष्ट किया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ के तहत सैन्य तैयारियों को व्यापक रूप से मजबूत किया गया है और भविष्य की कार्रवाई बहु-आयामी हो सकती है।

    यह बयान पठानकोट में आयोजित एक ऑपरेशनल क्षमता प्रदर्शन के दौरान सामने आया, जहां वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने सेना की तैयारी और रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन किया।

    2 कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग राजेश पुष्कर ने कहा कि पिछले वर्ष चलाया गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ केवल भारतीय सैन्य क्षमता का सीमित उदाहरण था। उनका कहना था कि चार दिनों के भीतर ही पाकिस्तान को संघर्षविराम की अपील करनी पड़ी थी, जबकि मौजूदा चरण में कहीं अधिक बड़े स्तर की तैयारी की गई है।

    किसी भी मोर्चे पर जवाब की तैयारी

    अधिकारियों ने संकेत दिया कि भविष्य की सैन्य प्रतिक्रिया परिस्थितियों पर निर्भर करेगी, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर कार्रवाई जमीन, समुद्र या हवा—तीनों क्षेत्रों में एक साथ की जा सकती है।

    सेना का उद्देश्य अब केवल जवाब देना नहीं, बल्कि प्रतिरोध क्षमता को निर्णायक स्तर तक ले जाना है।

    “न्यूक्लियर ब्लफ” पर भी सख्त रुख

    पश्चिमी कमान के प्रमुख मनोज कुमार कटियार ने पाकिस्तान की ओर से बार-बार दिए जाने वाले परमाणु संकेतों को “न्यूक्लियर ब्लफ” करार देते हुए कहा कि भारत अब ऐसे दबावों में आने वाला नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि शहबाज शरीफ भारत को कड़ी कार्रवाई से रोकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भारतीय सेना हर परिस्थिति के लिए तैयार है।

    पिछले साल हमले के बाद शुरू हुआ था ऑपरेशन

    जानकारी के अनुसार, मई 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी, के बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। इस अभियान के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर सटीक सैन्य कार्रवाई की गई थी।

    रणनीति अब और आक्रामक

    सेना के ताजा संकेतों से स्पष्ट है कि भारत ने अपनी सैन्य रणनीति, समन्वित युद्धक क्षमता और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को पहले से अधिक सशक्त बनाया है। किसी भी संभावित उकसावे की स्थिति में इस बार जवाब अधिक तीव्र, व्यापक और बहु-क्षेत्रीय हो सकता है।