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  • धार्मिक स्थल आवंटन पर नॉर्थस्टोव में विवाद, हिंदू संगठन का आवेदन खारिज, चर्च और मुस्लिम संस्थाओं को मिली जमीन

    धार्मिक स्थल आवंटन पर नॉर्थस्टोव में विवाद, हिंदू संगठन का आवेदन खारिज, चर्च और मुस्लिम संस्थाओं को मिली जमीन


    नई दिल्ली ।
    ब्रिटेन के कैम्ब्रिजशायर स्थित नए विकसित शहर नॉर्थस्टोव में धार्मिक स्थल के लिए भूमि आवंटन को लेकर विवाद सामने आया है। स्थानीय काउंसिल द्वारा आरक्षित भूखंड चर्च नेटवर्क और एक मुस्लिम संगठन को 999 वर्ष की लीज पर दिए जाने के बाद हिंदू समुदाय ने फैसले पर निराशा व्यक्त की है। स्थानीय हिंदू संगठन का कहना है कि क्षेत्र में मंदिर नहीं होने के कारण लंबे समय से एक स्थायी पूजा स्थल की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

    मामला उस समय चर्चा में आया जब हिंदू समाज नॉर्थस्टोव नामक संगठन ने धार्मिक एवं सामुदायिक केंद्र स्थापित करने के उद्देश्य से भूमि आवंटन के लिए आवेदन किया था। संगठन के प्रस्ताव में मंदिर के साथ एक इंटरफेथ सेंटर और वेलनेस सेंटर विकसित करने की योजना भी शामिल थी। हालांकि काउंसिल ने आवेदन को तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए स्वीकार नहीं किया और भूमि दूसरे आवेदकों को आवंटित कर दी।

    काउंसिल के निर्णय के बाद नॉर्थस्टोव और आसपास रहने वाले हिंदू परिवारों में निराशा देखी जा रही है। स्थानीय समुदाय का कहना है कि क्षेत्र में हिंदू आबादी लगातार बढ़ रही है, लेकिन अब तक उनके लिए कोई स्थायी मंदिर उपलब्ध नहीं है। धार्मिक आयोजनों और पूजा-पाठ के लिए उन्हें दूसरे शहरों की यात्रा करनी पड़ती है, जिससे नियमित धार्मिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं।

    हिंदू समुदाय का दावा है कि यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती तो यह केवल पूजा स्थल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि विभिन्न समुदायों के बीच संवाद और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने वाला केंद्र भी बन सकता था। उनका कहना है कि इस परियोजना का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर सांस्कृतिक गतिविधियों, आध्यात्मिक कार्यक्रमों और सामुदायिक सहयोग को मजबूत करना था।

    दूसरी ओर चर्च और मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने भूमि आवंटन का स्वागत किया है। मुस्लिम संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि नॉर्थस्टोव में रहने वाले मुस्लिम परिवारों के लिए नियमित नमाज और धार्मिक शिक्षा के उद्देश्य से स्थायी स्थान की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। उनका मानना है कि नए परिसर से समुदाय की धार्मिक और सामाजिक जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिलेगी।

    इस पूरे घटनाक्रम ने धार्मिक समानता और सार्वजनिक संसाधनों के आवंटन को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। स्थानीय स्तर पर कई लोगों का कहना है कि तेजी से विकसित हो रहे शहरों में सभी प्रमुख समुदायों की धार्मिक आवश्यकताओं को संतुलित ढंग से ध्यान में रखा जाना चाहिए ताकि किसी भी वर्ग में उपेक्षा की भावना न पैदा हो।

    फिलहाल काउंसिल की ओर से यही कहा गया है कि आवेदन निर्धारित प्रक्रिया और तकनीकी मानकों के आधार पर परखे गए थे तथा उसी के अनुरूप निर्णय लिया गया। वहीं हिंदू समुदाय के प्रतिनिधि आगे की संभावित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पर विचार कर रहे हैं। आने वाले समय में यह मामला स्थानीय प्रशासन, सामुदायिक संगठनों और विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच चर्चा का महत्वपूर्ण विषय बना रह सकता है।

  • मराठा आरक्षण पर फिर गरमाई राजनीति मुंबई मार्च की तैयारी साथ ही मालाड जमीन आवंटन पर

    मराठा आरक्षण पर फिर गरमाई राजनीति मुंबई मार्च की तैयारी साथ ही मालाड जमीन आवंटन पर


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र में एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है जहां एक ओर मराठा समाज ने आरक्षण को लेकर मुंबई मार्च की तैयारी शुरू कर दी है वहीं दूसरी ओर मुंबई के मालाड इलाके में जमीन आवंटन में कथित गड़बड़ी को लेकर सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं

    मराठा आंदोलन के प्रमुख चेहरा मनोज जरांगे पाटिल ने साफ कहा है कि समुदाय अब दोबारा मुंबई की ओर कूच करने के लिए तैयार है उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वादे पूरे नहीं किए गए तो इसके गंभीर परिणाम होंगे उनका कहना है कि अगर सरकार आरक्षण देने के पक्ष में नहीं थी तो पहले ही संबंधित आदेश जारी नहीं किए जाने चाहिए थे

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मराठा समाज अब पूरी तरह संगठित और जागरूक है और अपने अधिकारों के लिए पीछे हटने वाला नहीं है इससे साफ संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में राज्य में एक बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है

    इसी बीच महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के मालाड इलाके में प्रोजेक्ट प्रभावित व्यक्तियों के लिए जमीन आवंटन में कथित अनियमितताओं की जांच के आदेश दिए हैं यह मामला तब सामने आया जब विधानसभा में इसे लेकर गंभीर सवाल उठाए गए

    राज्य की शहरी विकास मंत्री माधुरी मिसाल ने बताया कि इस पूरे मामले की जांच अतिरिक्त मुख्य सचिव के नेतृत्व में की जाएगी और जब तक जांच पूरी नहीं होती तब तक किसी भी तरह की आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी

    यह मुद्दा कांग्रेस नेता असलम शेख द्वारा उठाया गया था जिसके बाद भाजपा के योगेश सागर और मुर्जी पटेल ने भी इस पर सवाल खड़े किए

    विधानसभा में आरोप लगाया गया कि जमीन आवंटन के दौरान डेवलपर को ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स और प्रीमियम सामान्य दर से कहीं अधिक दिया गया जिससे बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की आशंका जताई जा रही है

     महाराष्ट्र इस समय दो बड़े मुद्दों से जूझ रहा है एक तरफ मराठा आरक्षण को लेकर आंदोलन की आहट तेज हो रही है और दूसरी तरफ जमीन आवंटन में गड़बड़ी के आरोपों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं आने वाले दिनों में इन दोनों मामलों का राजनीतिक और सामाजिक असर और गहरा होने की संभावना है