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  • एयर इंडिया की AI 1741 फ्लाइट लैंडिंग के दौरान पक्षी से टकरा गई। पायलट ने विमान को सुरक्षित उतारा और सभी 164 यात्री सुरक्षित रहे।

    एयर इंडिया की AI 1741 फ्लाइट लैंडिंग के दौरान पक्षी से टकरा गई। पायलट ने विमान को सुरक्षित उतारा और सभी 164 यात्री सुरक्षित रहे।

    नई दिल्ली ।दिल्ली से पटना आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI 1741 के साथ सोमवार सुबह लैंडिंग के दौरान बर्ड हिट की घटना सामने आई। विमान में 164 यात्री सवार थे। पटना के जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने से पहले विमान के दाहिने हिस्से में एक पक्षी टकरा गया। स्थिति को देखते हुए पायलट ने तुरंत सतर्कता बरती और विमान को सुरक्षित तरीके से रनवे पर उतार लिया।

    विमान ने सुबह करीब 7:43 बजे पटना एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की। विमान के जमीन पर उतरने के बाद सभी यात्रियों को सुरक्षित टर्मिनल भवन तक पहुंचाया गया। घटना के दौरान किसी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है। पायलट की तत्परता और समय पर लिए गए फैसले से स्थिति को नियंत्रित किया जा सका।

    लैंडिंग से पहले विमान के दाहिने इंजन के आसपास पक्षी के टकराने का पता चला। इसके बाद पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल और हवाई अड्डे के अधिकारियों को इसकी सूचना दी। जानकारी मिलते ही एयरपोर्ट प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए आपातकालीन व्यवस्था सक्रिय कर दी।

    किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए रनवे के आसपास दमकल वाहनों और चिकित्सा दलों को तैयार रखा गया। विमान के सुरक्षित उतरने के बाद यात्रियों को बाहर निकाला गया और इसके बाद तकनीकी टीम ने विमान की विस्तृत जांच शुरू की।

    ग्राउंड इंजीनियरिंग और तकनीकी विशेषज्ञों ने विमान के बाहरी हिस्से के साथ दोनों इंजनों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान बर्ड हिट की पुष्टि हुई। शुरुआती तकनीकी निरीक्षण में विमान के मुख्य इंजन और टरबाइन में किसी बड़े आंतरिक या संरचनात्मक नुकसान की जानकारी नहीं मिली।

    सुरक्षा मानकों के तहत विमान की दोबारा उड़ान से पहले आवश्यक तकनीकी जांच और प्रक्रियाएं पूरी की गईं। विमान को उड़ान के लिए उपयुक्त पाए जाने के बाद आगे के संचालन की अनुमति दी गई। इस प्रक्रिया के कारण विमान के निर्धारित कार्यक्रम पर असर पड़ा।

    AI 1741/1852 विमान को पटना से दिल्ली के लिए सुबह 8:45 बजे रवाना होना था। हालांकि, बर्ड हिट के बाद की गई अनिवार्य सुरक्षा जांच और तकनीकी परीक्षण के चलते विमान को करीब डेढ़ घंटे की देरी से दिल्ली के लिए रवाना किया गया।

    बर्ड स्ट्राइक विमानन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा चुनौती मानी जाती है, खासकर टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान जब विमान अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर होता है। पक्षी के इंजन या विमान के किसी महत्वपूर्ण हिस्से से टकराने की स्थिति में तकनीकी समस्या पैदा हो सकती है। ऐसे मामलों में पायलट की सतर्कता के साथ एयरपोर्ट पर मौजूद आपातकालीन सेवाओं की तत्परता भी महत्वपूर्ण होती है।

    पटना एयरपोर्ट पर हुई इस घटना में विमान को सुरक्षित उतारने के बाद यात्रियों को टर्मिनल तक पहुंचाया गया और तकनीकी जांच के जरिए विमान की उड़ान क्षमता सुनिश्चित की गई। घटना के कारण कुछ समय के लिए संचालन प्रभावित हुआ, लेकिन सभी 164 यात्रियों के सुरक्षित रहने से बड़ी चिंता टल गई। सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद विमान ने निर्धारित मार्ग पर अपनी अगली उड़ान भरी।

  • सीमा पर चीन की ‘साइलेंट स्ट्रैटेजी’, PoK के करीब नई काउंटी; वैश्विक तनाव के बीच बढ़ी हलचल

    सीमा पर चीन की ‘साइलेंट स्ट्रैटेजी’, PoK के करीब नई काउंटी; वैश्विक तनाव के बीच बढ़ी हलचल


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने जहां दुनिया का ध्यान पश्चिम एशिया की ओर खींच रखा है, वहीं इसी बीच चीन ने अपने सीमावर्ती इलाके में एक अहम प्रशासनिक कदम उठाकर नई भू-राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। चीन ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और अफगानिस्तान से सटे शिनजियांग क्षेत्र में “सेनलिंग” नाम से नई काउंटी का गठन किया है।
    रिपोर्ट्स के अनुसार, यह नई प्रशासनिक इकाई काराकोरम पर्वतमाला के पास स्थित है और रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। खासकर वाखान कॉरिडोर की निगरानी और क्षेत्र में उइगर गतिविधियों पर नियंत्रण को लेकर इसे चीन की बड़ी तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

    सीमावर्ती इलाकों पर लगातार फोकस
    चीन पिछले एक साल में शिनजियांग में “हेआन” और “हेकांग” के बाद यह तीसरी नई काउंटी बना चुका है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सीमा क्षेत्रों में प्रशासनिक पकड़ मजबूत करने और सुरक्षा तंत्र को स्थानीय स्तर पर सुदृढ़ करने की दीर्घकालिक नीति का हिस्सा है।

    भारत की आपत्ति बरकरार
    भारत ने इस तरह के बदलावों पर पहले भी कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भारत का कहना है कि इन नई इकाइयों के कुछ हिस्से उसके केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में आते हैं।

    विशेष रूप से अक्साई चिन को लेकर भारत ने अपनी संप्रभुता दोहराते हुए चीन के कदमों को अस्वीकार्य बताया है।

    काशगर से जुड़ा प्रशासनिक नियंत्रण
    नई काउंटी को काशगर प्रशासन के तहत रखा जाएगा, जो ऐतिहासिक रूप से सिल्क रूट का प्रमुख केंद्र रहा है। यही क्षेत्र चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) का शुरुआती बिंदु भी है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।

    सुरक्षा और रणनीति का मिश्रण
    विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम केवल प्रशासनिक पुनर्गठन नहीं, बल्कि सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी मजबूत करने की व्यापक रणनीति है। वाखान कॉरिडोर—करीब 74 किलोमीटर लंबा यह क्षेत्र—चीन के लिए संवेदनशील इसलिए भी है क्योंकि यह ताजिकिस्तान और PoK के बीच स्थित है।

    चीन को आशंका रही है कि ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट से जुड़े उइगर लड़ाके इस रास्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में नई काउंटी के जरिए स्थानीय प्रशासन, खुफिया निगरानी और सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

    आगे क्या?
    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की चेतावनियों के बावजूद चीन के इस कदम से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है। आने वाले समय में यह मुद्दा कूटनीतिक और सामरिक स्तर पर और अहम हो सकता है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।

  • चंद्रयान-4 मिशन धरती पर वापस लौटेगा भारत, ISRO ने लैंडिंग के लिए खोजी जगह

    चंद्रयान-4 मिशन धरती पर वापस लौटेगा भारत, ISRO ने लैंडिंग के लिए खोजी जगह


    नई दिल्ली।
    चंद्रयान-4 मिशन (Chandrayaan-4 Mission) को लेकर ISRO को बड़ी सफलता हाथ लगी है। इसरो के स्पेस ऐप्लिकेशन सेंटर (Space Applications Center-SAC) ने अब तक के सबसे कठिन मून मिशन के लिए लैंडिंग की जगह खोज ली है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लगभग 1 वर्ग किलोमीटर का पैच है जहां चंद्रयान-4 की सफल लैंडिंग करवाई जा सकती है। बता दें कि यह इसरो का पहला रिटर्न मिशन होगा। यानी चंद्रयान-4 को वापस धरती पर भी लाना है।

    चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से भजी गई हाई रिजोल्यूशन तस्वीरों से इस जगह को खोजा है जहां चंद्रयान-4 को उतारा जा सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक यह पूरा अध्ययन अमिताभ के सुरेश, अजय के पाराशर, कनन वी अय्यर, अब्दुल एस, श्वेता वर्मा त्रिवेदी और नितांत दुबे ने की है। इस मिशन में प्रोपल्सन मॉड्यूल के अलावा डिसेंटर और असेंडर मॉड्यूल भी होंगे। इसके अलावा ट्रांसफर मॉड्यूल और रीएंट्री मॉड्यूल भी काम करेगा।


    क्या होगी चंद्रयान- 4 की खासियत

    यह मिशन भारत के लिए बहुत खास होने वाला है। इसका उद्देश्य चंद्रमा पर लैंडिंग करके मिट्टी और पत्थरों के सैंपल इकट्ठे करना और फिर वापस धरती पर लौटना है। इसरो का चंद्रयान -3 मिशन पूरी तरह से सफल हुआ था। इसके बाद इसरो ने यह कठिन कदम उठाने का फैसला किया है। चंद्रयान-4 अगर सफलतापूर्वक वापस लौटता है तो आगे मानव मिशन का भी रास्ता खुल जाएगा।


    चंद्रयान-4 कहां उतरेगा

    वैज्ञानिकों ने ऑर्बिटर से भेजी गई तस्वीरों में से चार जगहों के बारे में अध्ययन किया था। इसमें एमएम-4 नाम की जगह को सुरक्षित पाया गया है। यह जगह नॉविस माउटन पहाड़ी के पास है लेकिन समतल है। ऐसे में लैंडर को नुकसान पहु्ंचने का खतरा नहीं है। इस जगह पर सूरज की रोशनी भी अच्छी रहती है। ऐसे में लैंडिंग के लिए जगह उपयुक्त है। यहां बड़े गड्ढे ना होने की वजह से लैंडर को चलने में भी आसानी होगी।

    अब तक के अध्ययन से इतना स्पष्ट हो गया है कि इसी इलाके में चंद्रयान-4 को उतारा जाएगा। यह शिव-शक्ति पॉइंट से बहुत दूर नहीं है। वहीं इस इलाके में गड्ढों के पास अंधेरा रहता है। इसरो का कहना है कि इस इलाके में पानी या बर्फ के सैंपल भी मिल सकतेहैं। इसके अलावा यहां से मिले सैंपल से चंद्रमा के निर्माण और यहां उपस्थिति संसाधनों के बारे में जानकारी मिलेगी।