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  • एक ही मकान में मकान मालिक और किरायेदार ले सकते हैं अलग-अलग LPG कनेक्शन, जानें क्या हैं जरूरी शर्तें

    एक ही मकान में मकान मालिक और किरायेदार ले सकते हैं अलग-अलग LPG कनेक्शन, जानें क्या हैं जरूरी शर्तें

    नई दिल्ली ।किराए के मकान में रहने वाले लोगों के सामने अक्सर रसोई गैस कनेक्शन को लेकर असमंजस की स्थिति रहती है। खासकर तब, जब मकान मालिक के नाम पर पहले से घरेलू LPG कनेक्शन मौजूद हो। ऐसे में किरायेदार के मन में सवाल उठता है कि क्या वह उसी मकान के पते पर अपने नाम से अलग गैस कनेक्शन ले सकता है? इसका जवाब हां है। निर्धारित शर्तें पूरी होने पर एक ही पते पर मकान मालिक और किरायेदार दोनों के नाम से अलग-अलग घरेलू गैस कनेक्शन हो सकते हैं।

    घरेलू LPG कनेक्शन के नियमों के अनुसार, एक परिवार के लिए सामान्य रूप से एक ही घरेलू गैस कनेक्शन की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य एक ही परिवार के सदस्यों द्वारा अलग-अलग नामों से एक से अधिक घरेलू कनेक्शन लेने पर रोक लगाना है। हालांकि, एक ही मकान में रहने वाले दो अलग-अलग परिवार अपनी अलग रसोई होने पर अलग-अलग कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं।

    इस नियम के तहत मकान मालिक और किरायेदार को अलग परिवार के रूप में रहना जरूरी है। साथ ही दोनों की रसोई भी अलग-अलग होनी चाहिए। केवल मकान के अलग-अलग हिस्सों में रहने या अलग कमरे इस्तेमाल करने से दूसरा गैस कनेक्शन लेने की पात्रता नहीं बनती। परिवार और रसोई की अलग व्यवस्था इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    उदाहरण के तौर पर, यदि मकान मालिक अपने परिवार के साथ पहली मंजिल पर रहता है और किरायेदार दूसरी मंजिल पर रहता है, तो केवल मंजिल अलग होने से किरायेदार को दूसरा LPG कनेक्शन नहीं मिल सकता। यदि दोनों परिवार एक ही रसोई में खाना बनाते हैं और साझा व्यवस्था का इस्तेमाल करते हैं, तो अलग-अलग कनेक्शन लेने की अनुमति नहीं होगी।

    इसके विपरीत, यदि मकान मालिक और किरायेदार के परिवार अलग हैं और दोनों के पास खाना बनाने के लिए अपनी स्वतंत्र रसोई है, तो वे एक ही मकान के पते पर अलग-अलग घरेलू गैस कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, आवेदन करने के बाद संबंधित गैस कंपनी और वितरक की ओर से दस्तावेजों तथा पात्रता की जांच की जाएगी। अंतिम मंजूरी इसी प्रक्रिया के आधार पर मिलेगी।

    नया गैस कनेक्शन लेने के लिए किरायेदार को अपनी पहचान और निवास से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने पड़ सकते हैं। इसमें आधार कार्ड या अन्य मान्य पहचान पत्र, किराए का समझौता और बिजली बिल जैसे पते के प्रमाण शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा गैस एजेंसी की ओर से निर्धारित KYC प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी।

    कुछ मामलों में एजेंसी अलग परिवार और स्वतंत्र रसोई होने से संबंधित जानकारी या अतिरिक्त दस्तावेज भी मांग सकती है। इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित LPG वितरक से आवश्यक कागजात और प्रक्रिया की जानकारी लेना उचित रहेगा। इससे आवेदन के दौरान दस्तावेजों की कमी या पात्रता को लेकर होने वाली परेशानी से बचा जा सकता है।

    वहीं, यदि मकान मालिक और किरायेदार वास्तव में एक ही परिवार का हिस्सा हैं और एक ही रसोई का इस्तेमाल करते हैं, तो अलग-अलग घरेलू कनेक्शन लेने का विकल्प उपलब्ध नहीं होगा। ऐसी स्थिति में डबल बॉटल कनेक्शन यानी DBC की सुविधा ली जा सकती है।

    DBC में एक ही घरेलू गैस कनेक्शन के तहत दो सिलेंडर उपलब्ध कराए जाते हैं। इसमें एक सिलेंडर खत्म होने पर दूसरे सिलेंडर का उपयोग किया जा सकता है। इससे गैस की आपूर्ति बनाए रखने में सुविधा मिलती है। हालांकि, इसे दो अलग-अलग घरेलू गैस कनेक्शन नहीं माना जाता।

    इसलिए किराए के मकान में रहने वाले लोगों को नया LPG कनेक्शन लेने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका परिवार और रसोई मकान मालिक से अलग हैं। निर्धारित दस्तावेजों और जांच प्रक्रिया के बाद ही एक ही पते पर अलग कनेक्शन की मंजूरी मिल सकती है।

  • करदाता को अब बताना होगा मकान मालिक से उसका क्या रिश्ता है…1 अप्रैल से बदलेंगे नियम

    करदाता को अब बताना होगा मकान मालिक से उसका क्या रिश्ता है…1 अप्रैल से बदलेंगे नियम

    Tax

    नई दिल्ली। सरकार (Government) ने नए आयकर अधिनियम, 2025 (New Income Tax Act, 2025) के तहत मसौदा आयकर नियम और फॉर्म जारी किए हैं, जिनमें किराया भत्ते (एचआरए) के दावों में पारदर्शिता बढ़ाने, विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों की कड़ी जांच और ऑडिटर की जिम्मेदारी बढ़ाने का प्रस्ताव है। सरकार (Government) ने नए आयकर अधिनियम, 2025 (New Income Tax Act, 2025) के तहत मसौदा आयकर नियम और फॉर्म जारी किए हैं, जिनमें किराया भत्ते (एचआरए) के दावों में पारदर्शिता बढ़ाने, विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों की कड़ी जांच और ऑडिटर की जिम्मेदारी बढ़ाने का प्रस्ताव है। नया आयकर अधिनियम एक अप्रैल, 2026 से लागू होगा। सरकार ने हितधारकों के लिए नियमों का मसौदा एवं फॉर्म जारी किए हैं। इसके आधार पर अंतिम नियम एवं फॉर्म अगले महीने अधिसूचित किए जाएंगे।

    नियमों के मसौदे के मुताबिक, नए फॉर्म 124 में करदाता को यह बताना होगा कि वह जिस मकान मालिक को किराया दे रहा है, उससे उसका कोई पारिवारिक या कोई अन्य संबंध तो नहीं है। फिलहाल एचआरए का दावा करते समय कर्मचारी अपने नियोक्ता को किराये का अनुमानित विवरण देता है, लेकिन मकान मालिक के साथ संबंध का खुलासा करना अनिवार्य नहीं है।


    फर्जी किराया दावों पर लगाम लगेगी

    कर विशेषज्ञों का मानना है कि मकान मालिक और किरायेदार के बीच के संबंधों का खुलासा अनिवार्य किए जाने से फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए किराया दावों पर अंकुश लगेगा। नांगिया ग्लोबल एडवाइजर्स फर्म में साझेदार संदीप झुनझुनवाला ने कहा, ‘यह प्रावधान वास्तविक व्यवस्थाओं को प्रभावित किए बगैर कृत्रिम दावों की पहचान में मदद करेगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अनुचित दावों को खारिज करना आसान होगा।’


    किन्हें देनी होगी जानकारी?

    अगर आप सालाना एक लाख रुपए से ज्यादा किराया किसी मकान मालिक को देते हैं, तो आपको फॉर्म 124 में मकान मालिक के साथ अपना रिश्ता बताना होगा। यह नियम उन मामलों पर लागू होगा, जहां किराया पति या पत्नी, माता-पिता, भाई-बहन या दूसरे रिश्तेदारों को दिया जा रहा है।


    कौन-कौन सी जानकारी देनी होगी?

    एचआरए क्लेम करते समय वेतन पर काम करने वाले करदाताओं को मकान मालिक की ये जानकारी देनी होगी -नाम, पता, पैन, मकान मालिक से संबंध। इसका मकसद यह पक्का करना है कि रिश्तेदारों को दिए गए किराए के लिए एचआरए दावा असली और सत्यापित हो।


    परिवार को किराया देना अब भी मान्य

    नए नियम में परिवार के सदस्य को किराया देने पर रोक नहीं है। आप एचआरए छूट का दावा कर सकते हैं। इसके लिए जरूरी है – वैध किराया अनुबंध, किराया नगद की बजाय बैंक ट्रांसफर के जरिए देना होगा। मकान मालिक की तरफ से उस किराये की आय को अपने आयकर रिटर्न में दिखाना होगा।


    जानकारी न देने पर क्या होगा?

    अगर कोई टैक्सपेयर रिश्तेदारी की जानकारी नहीं देता या फर्जी दावा करता है, तो इसे आय की गलत रिपोर्टिंग माना जा सकता है। इसके लिए आयकर अधिनियम 2025 की धारा 439 के तहत टैक्स चोरी की राशि के 200% तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा भुगतान या मकान मालिक की आय में गड़बड़ी मिलने पर नोटिस भी मिल सकता है।


    ऑडिटर की भूमिका और सख्त की गई

    नियमों के मसौदे में विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों के खुलासे के लिए ऑडिटर के साथ कंपनियों की भी जवाबदेही बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों के लिए प्रस्तावित फॉर्म 44 में ऑडिटर की भूमिका और सख्त की गई है। अब चार्टर्ड अकाउंटेंट को विदेशी टैक्स कटौती प्रमाणपत्र, भुगतान का प्रमाण, विनिमय दर रूपांतरण और कर संधि की पात्रता की स्वतंत्र जांच करनी होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह उन मामलों में चुनौतीपूर्ण हो सकता है जहां विदेशी देशों में एकीकृत कर विवरण जारी होते हैं या कर को अलग वित्त वर्ष में अदा किया जाता है।


    कंपनियों के लिए सख्त पैन आवेदन प्रक्रिया

    मसौदा प्रस्ताव में कंपनियों के लिए पैन आवेदन प्रक्रिया भी सख्त की गई है। अब आवेदन करते समय यह घोषणा देना अनिवार्य होगा कि कंपनी के पास पहले से से कोई पैन नहीं है। शाखाओं, परियोजना कार्यालयों या पूर्ववर्ती इकाइयों के नाम पर पहले से पैन होने की स्थिति में दोहराव से बचने के लिए आंतरिक जांच जरूरी होगी। झुनझुनवाला ने कहा कि यह प्रावधान डेटाबेस की शुचिता मजबूत करेगा, लेकिन आवेदकों की जिम्मेदारी भी बढ़ाएगा।

    ऑडिटर की आपत्ति का असर बताना होगा
    नए कर ऑडिट फॉर्म 26 में यह अनिवार्य किया गया है कि वैधानिक ऑडिटर की रिपोर्ट में यदि कोई प्रतिकूल टिप्पणी, अस्वीकरण या पात्रता है तो उसका आय, हानि या बुक प्रॉफिट पर प्रभाव स्पष्ट किया जाए।

    उदाहरण के लिए, यदि राजस्व मान्यता, शेयर मूल्यांकन या प्रावधान में कमी पर आपत्ति दर्ज होती है, तो कर ऑडिटर को देखना होगा कि इससे कर-योग्य आय को कम करके तो नहीं दिखाया गया। इसके अलावा, कर ऑडिट रिपोर्ट में इस्तेमाल किए गए अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर, क्लाउड या सर्वर का विवरण, आईपी पता, डेटा भंडारण का देश और भारत में स्थित बैकअप सर्वर का पता भी बताना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि नए प्रावधानों से अनुपालन की लागत बढ़ सकती है लेकिन इससे पारदर्शिता और जवाबदेही में मजबूती आने की संभावना है।