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  • मौसम विभाग ने उत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट किया जारी, पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और बाढ़ का बढ़ा खतरा

    मौसम विभाग ने उत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट किया जारी, पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और बाढ़ का बढ़ा खतरा

    नई दिल्ली ।देश के कई हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के तीव्र होने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों में अगले तीन से चार दिनों तक मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया है। भारी बारिश के चलते पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और मैदानी क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्वी और दक्षिण भारत के विभिन्न हिस्सों में 20 से 25 अगस्त के बीच भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है। पहाड़ी राज्यों में बारिश के साथ तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है, जिसको देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने आम नागरिकों को सतर्क रहने और आवश्यक न होने पर यात्रा से बचने की सलाह दी है।

    उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में भारी बारिश के कारण बड़ा नुकसान हुआ है। धारचूला-तवाघाट मार्ग पर स्थित वैली ब्रिज टूटकर गिर जाने से चीन सीमा से सटे दारमा, व्यास और चौंदास घाटियों के दर्जनों गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क पूरी तरह कट गया है। भूस्खलन और मलबे के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है और राहत कार्य शुरू कर दिए गए हैं।

    हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। गांदरबल क्षेत्र में बादल फटने की घटना के बाद निचले इलाकों में जलभराव की समस्या पैदा हो गई। वहीं कालका-शिमला रेलखंड पर मलबा आने से रेल यातायात प्रभावित हुआ है। मैदानी इलाकों की बात करें तो पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में लगातार हो रही वर्षा से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है।

    मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में भी मानसून की गतिविधियां बेहद सक्रिय बनी हुई हैं। राज्य के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में आगामी दिनों में तेज हवाओं के साथ भारी वर्षा का अनुमान जताया गया है, जिससे नदी-नालों के जलस्तर में बढ़ोतरी हो सकती है। राज्य शासन ने बाढ़ संभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है।

    पूर्वी भारत के राज्यों जैसे झारखंड, बिहार और ओडिशा में भी भारी बारिश और बाढ़ का प्रभाव देखा जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की यह स्थिति अगले कुछ दिनों तक बनी रहेगी। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन के खतरे को देखते हुए आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

  • अफ्रीकन देश Ethiopia में भूस्खलन से 14 मौतें…. कई लोग मलबे में दबे, कई लापता

    अफ्रीकन देश Ethiopia में भूस्खलन से 14 मौतें…. कई लोग मलबे में दबे, कई लापता


    अदीस अबाबा।
    पूर्वी अफ्रीका (East Africa) के देश इथियोपिया (Ethiopia) के अमहारा क्षेत्र (Amahara region) में सोमवार सुबह भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन (Landslide) में 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि सात लोग घायल हो गए। कई लोगों के अब भी मलबे में दबे होने की आशंका है और राहत-बचाव अभियान लगातार जारी है।


    क्या धार्मिक अनुष्ठान के दौरान हुआ हादसा?

    यह हादसा त्सादकाने देब्रे मिटमाक सेंट मैरी मठ में हुआ, जहां सैकड़ों श्रद्धालु पवित्र जल से शुद्धिकरण के धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने पहुंचे थे। यह अनुष्ठान लंबे समय से बीमारियों से राहत और आध्यात्मिक उपचार की मान्यता से जुड़ा माना जाता है।


    कई लोग अब भी मलबे में फंसे

    डायोसीज के महाप्रबंधक मेगाबे हादिस नेका तिबेब अबाबू के अनुसार, हादसा सुबह करीब सात बजे हुआ। उन्होंने बताया कि मृतकों में से 11 का अंतिम संस्कार मठ परिसर में कर दिया गया है, जबकि अन्य के शव उनके गृह नगर भेजे गए हैं। कुछ शवों की पहचान करना भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि कई लोगों के अब भी मलबे में दबे होने की आशंका है।


    राहत-बचाव अभियान जारी

    गंभीर रूप से घायल लोगों को नॉर्थ शेवा प्रशासनिक क्षेत्र की राजधानी देब्रे बिरहान के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि आपदा प्रबंधन विभाग की विशेषज्ञ टीम मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव अभियान में जुटी हुई है।


    लगातार बढ़ रही हैं ऐसी प्राकृतिक आपदाएं?

    इथियोपिया में जून से सितंबर तक चलने वाले बारिश के मौसम के दौरान भूस्खलन और बाढ़ की घटनाएं आम हो गई हैं। जुलाई 2024 में दक्षिणी इथियोपिया में हुए भूस्खलन में कम से कम 257 लोगों की मौत हुई थी, जबकि इसी वर्ष की शुरुआत में गामो क्षेत्र में भी ऐसे ही हादसे में 100 से अधिक लोगों की जान गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन और कमजोर बुनियादी ढांचे के कारण देश में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

  • चीन के गांसू में भीषण भूस्खलन से भारी तबाही, 21 मजदूरों की मौत, कई घंटे तक चला राहत एवं बचाव अभियान

    चीन के गांसू में भीषण भूस्खलन से भारी तबाही, 21 मजदूरों की मौत, कई घंटे तक चला राहत एवं बचाव अभियान

    नई दिल्ली । चीन के पश्चिमी गांसू प्रांत में आए भीषण भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। लोंगनान शहर के नानहे क्षेत्र में मंगलवार सुबह हुए इस हादसे में कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि सात अन्य घायल हो गए। प्रशासन ने राहत एवं बचाव अभियान पूरा होने के बाद मृतकों और घायलों की संख्या की पुष्टि की है। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में आपातकालीन बचाव दलों को तैनात किया गया और कई घंटों तक मलबा हटाने का अभियान चलाया गया।

    जानकारी के अनुसार, भूस्खलन सुबह लगभग सात बजे उस समय हुआ जब घाटी क्षेत्र में स्थित सरकारी वानिकी फार्म के आसपास रहने वाले लोग अपने दैनिक कार्यों की तैयारी कर रहे थे। अचानक पहाड़ी से भारी मात्रा में मिट्टी और चट्टानें नीचे आ गईं, जिससे आसपास का इलाका मलबे में दब गया। इस घटना की चपेट में कुल 33 लोग आ गए, जिनमें अधिकांश स्थानीय ग्रामीण और अस्थायी मजदूर शामिल थे।

    राहत दलों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर खोज एवं बचाव अभियान शुरू किया। भारी मशीनों और विशेष उपकरणों की मदद से मलबा हटाया गया तथा फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया गया। अभियान के दौरान पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि सात घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रशासन के अनुसार उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है।

    प्रभावित लोगों में अधिकांश वे मजदूर थे जिन्हें घाटी में स्थित सरकारी फॉरेस्ट्री फार्म में अस्थायी रूप से काम पर लगाया गया था। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि राहत कार्य में कई एजेंसियों ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया और प्रभावित क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी गई ताकि किसी संभावित खतरे से बचा जा सके। बचाव अभियान पूरा होने के बाद प्रशासन ने मृतकों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि की।

    हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित इलाके को सुरक्षा कारणों से सील कर दिया है। विशेषज्ञों की टीम घटनास्थल का निरीक्षण कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि भूस्खलन किन परिस्थितियों में हुआ। शुरुआती स्तर पर किसी एक कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, हालांकि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और हालिया मौसम की परिस्थितियों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।

    गांसू प्रांत का पर्वतीय इलाका पहले भी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील माना जाता रहा है। यहां कई स्थानों पर ऊंचे पहाड़, संकरी घाटियां और अस्थिर ढलान होने के कारण भूस्खलन का जोखिम बना रहता है। प्रशासन समय-समय पर जोखिम वाले क्षेत्रों की निगरानी करता है, लेकिन इस बार हुई घटना ने स्थानीय स्तर पर व्यापक नुकसान पहुंचाया है।

    चीनी प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचाव के लिए जोखिम वाले क्षेत्रों का विस्तृत सर्वेक्षण और सुरक्षा उपायों को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है। फिलहाल अधिकारियों का ध्यान प्रभावित लोगों की सहायता, घायलों के उपचार और हादसे के कारणों की विस्तृत जांच पर केंद्रित है।

  • केरल के वायनाड में भारी बारिश बनी बड़ी आफत, मुख्यमंत्री ने बुलाई आपात बैठक; राहत-बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी

    केरल के वायनाड में भारी बारिश बनी बड़ी आफत, मुख्यमंत्री ने बुलाई आपात बैठक; राहत-बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी

    नई दिल्ली । केरल के वायनाड जिले में एक बार फिर भारी बारिश के बीच भूस्खलन की गंभीर घटना सामने आई है। सुरंग सड़क परियोजना के निर्माण स्थल के पास हुए इस हादसे के बाद कई श्रमिकों और पर्यटकों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही राज्य सरकार ने हालात की समीक्षा के लिए आपात बैठक बुलाई और राहत एवं बचाव कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश जारी किए। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और प्रभावित क्षेत्र में व्यापक स्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

    यह घटना वायनाड के अनाक्कम्पॉयिल-कल्लाडी सुरंग सड़क परियोजना के वायनाड छोर पर मीनाक्षी पुल के समीप कलाड़ी क्षेत्र में हुई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान निकाली गई मिट्टी का बड़ा ढेर लगातार बारिश के कारण अचानक ढह गया। पिछले 24 घंटों में क्षेत्र में हुई अत्यधिक वर्षा से जमीन की पकड़ कमजोर हो गई, जिसके चलते मिट्टी खिसककर निर्माण स्थल के हिस्से पर आ गिरी और वहां मौजूद लोगों के फंसने की आशंका पैदा हो गई।

    राज्य सरकार ने घटना को गंभीर मानते हुए वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित मंत्रियों को तत्काल प्रभावित क्षेत्र में पहुंचने के निर्देश दिए हैं। राहत एवं बचाव अभियान की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके। प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ तेज गति से कार्य करने के निर्देश दिए हैं।

    घटनास्थल से प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक तीन लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि निर्माण कार्य में लगे कई श्रमिक और आसपास मौजूद कुछ पर्यटक अब भी मलबे में फंसे हो सकते हैं। प्रभावित क्षेत्र पर्यटकों के बीच लोकप्रिय माना जाता है और घटना के समय वहां कई निजी वाहन भी खड़े थे। श्रमिकों को परियोजना स्थल तक पहुंचाने वाली एक बस के मलबे में दबने की आशंका भी व्यक्त की गई है, जिसके कारण खोज अभियान और अधिक सतर्कता के साथ चलाया जा रहा है।

    राहत कार्य में स्थानीय प्रशासन, पुलिस, दमकल विभाग और अन्य आपातकालीन एजेंसियां संयुक्त रूप से लगी हुई हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की टीम भी मौके पर पहुंचकर अभियान में शामिल हो चुकी है। आधुनिक मशीनों और विशेष उपकरणों की सहायता से मलबा हटाने का कार्य लगातार जारी है। लगातार बारिश और अस्थिर पहाड़ी ढलानों के कारण बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है, फिर भी टीमें पूरी सावधानी के साथ अभियान को आगे बढ़ा रही हैं।

    स्थानीय अधिकारियों के अनुसार मेप्पडी क्षेत्र में पिछले 24 घंटों के दौरान लगभग 226 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य से कहीं अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक वर्षा के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में मिट्टी की पकड़ कमजोर होने से भूस्खलन का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसी कारण प्रशासन ने आसपास के संवेदनशील इलाकों की भी निगरानी बढ़ा दी है और लोगों से अनावश्यक रूप से प्रभावित क्षेत्र में जाने से बचने की अपील की है।

    वायनाड पहले भी भारी वर्षा और भूस्खलन की घटनाओं का सामना कर चुका है। ऐसे में इस बार प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है और राहत अभियान को लगातार मजबूत किया जा रहा है। फिलहाल बचाव कार्य जारी है तथा फंसे हुए लोगों की वास्तविक संख्या और नुकसान का आकलन अभियान पूरा होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए प्रभावित लोगों तक जल्द से जल्द पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।