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  • हिमालय में बार-बार क्यों आती है तबाही? बाढ़, भूस्खलन और भूकंप का कनेक्शन समझिए

    हिमालय में बार-बार क्यों आती है तबाही? बाढ़, भूस्खलन और भूकंप का कनेक्शन समझिए


    काठमांडू।
    नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों की संवेदनशीलता को सामने ला दिया है। खूबसूरत पहाड़ों और घाटियों के लिए पहचाना जाने वाला हिमालय दरअसल प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से दुनिया के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है। यहां बाढ़, भूस्खलन, बादल फटना, भूकंप और ग्लेशियर से जुड़ी घटनाएं समय-समय पर बड़े संकट में बदल जाती हैं।

    लेकिन आखिर हिमालय से सटे इलाकों में आपदाओं का खतरा इतना ज्यादा क्यों है? इसके पीछे भूगर्भीय बनावट, पहाड़ों की ढलान, भारी बारिश और तेजी से बदलती जलवायु जैसे कई कारण एक साथ काम करते हैं।

    भारतीय और यूरेशियन प्लेटों की टक्कर है बड़ी वजह

    हिमालय दुनिया की सबसे युवा प्रमुख पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है। इसका निर्माण भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों की लगातार टक्कर से हुआ है। खास बात यह है कि दोनों प्लेटों की गति आज भी जारी है।

    इन प्लेटों की लगातार हलचल पृथ्वी के भीतर भूगर्भीय तनाव पैदा करती है। इसी कारण हिमालयी क्षेत्र तकनीकी रूप से बेहद सक्रिय है और यहां भूकंप का खतरा लगातार बना रहता है।

    हिमालय से जुड़े भारत के कई हिस्से भी उच्च भूकंपीय जोखिम वाले क्षेत्रों में आते हैं, खासकर भूकंपीय क्षेत्र IV और V में शामिल इलाके।

    पहाड़ों की युवा संरचना क्यों बढ़ाती है खतरा?

    हिमालय की अपेक्षाकृत युवा भूगर्भीय संरचना का एक परिणाम यह भी है कि यहां कई जगह मिट्टी, चट्टान और तलछट अपेक्षाकृत अस्थिर हैं। तेज बारिश होने पर यही सामग्री ढलानों से नीचे खिसकने लगती है।

    इससे भूस्खलन की घटनाएं होती हैं। जब बड़ी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और मलबा अचानक नीचे आता है तो सड़कें, पुल और बस्तियां इसकी चपेट में आ सकती हैं।

    खड़ी ढलानें पानी को बना देती हैं खतरनाक

    हिमालय का भूभाग बेहद खड़ा है। यहां गहरी घाटियां और तीखी ढलानें हैं। भारी बारिश के दौरान पानी पहाड़ों पर ज्यादा देर ठहरने के बजाय तेजी से नीचे की ओर बहता है और संकरी नदी घाटियों में पहुंच जाता है।

    तेज बहाव अपने साथ चट्टान, मिट्टी, पेड़ और दूसरे मलबे को भी बहाकर ले जा सकता है। यही प्रक्रिया अचानक आने वाली बाढ़ को और ज्यादा विनाशकारी बना देती है।

    संकरी घाटियों में पानी का वेग बहुत तेजी से बढ़ सकता है। इसका सीधा असर नदी किनारे बने घरों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे पर पड़ता है।

    जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई मुश्किल

    हिमालय की प्राकृतिक संवेदनशीलता के ऊपर अब जलवायु परिवर्तन का अतिरिक्त दबाव भी पड़ रहा है। हिमालय को कई बार ‘तीसरा ध्रुव’ कहा जाता है क्योंकि ध्रुवीय क्षेत्रों के बाहर यहां बड़ी मात्रा में बर्फ और ग्लेशियर मौजूद हैं।

    बढ़ते तापमान के कारण कई ग्लेशियर पीछे हट रहे हैं। इसके साथ ही जमी हुई जमीन और पहाड़ी ढलानों की स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है।

    ग्लेशियर की झील फटी तो तबाही और तेज

    ग्लेशियरों के पिघलने से उनके आसपास बनी झीलों का आकार बढ़ सकता है। इन झीलों को रोकने वाली प्राकृतिक बर्फ, चट्टान या मलबे की दीवार अगर पानी के दबाव, भूस्खलन या किसी अन्य वजह से टूट जाए तो अचानक बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर बह सकता है।

    इसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) कहा जाता है।

    ऐसी बाढ़ कुछ ही समय में निचली घाटियों में बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकती है। खासकर उन इलाकों में खतरा ज्यादा होता है जहां बस्तियां और बुनियादी ढांचा नदियों के बेहद करीब बना हुआ है।

    बादल फटने से कुछ मिनटों में बदल सकते हैं हालात

    हिमालयी इलाकों में बादल फटना भी अचानक बड़ी आपदा का कारण बन सकता है। इसमें बेहद कम समय में एक छोटे क्षेत्र में बहुत ज्यादा बारिश होती है।

    पहाड़ी इलाकों में इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। अचानक हुई मूसलाधार बारिश एक साथ भूस्खलन, मलबा प्रवाह और फ्लैश फ्लड जैसी घटनाओं को जन्म दे सकती है।

    नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है और अतिरिक्त पानी का भार पहले से कमजोर पहाड़ी ढलानों को अस्थिर कर सकता है।

    हिमालय में आपदाएं अलग-अलग नहीं, एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं

    हिमालयी क्षेत्रों की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यहां एक प्राकृतिक घटना दूसरी आपदा को जन्म दे सकती है। भारी बारिश से ढलान कमजोर होता है, भूस्खलन नदी का रास्ता रोक सकता है और बाद में जमा पानी अचानक निकलकर बाढ़ ला सकता है। वहीं ग्लेशियरों के पिघलने से बनी झीलों के टूटने पर भी निचले इलाकों में अचानक जलप्रलय आ सकता है।

    यानी हिमालय में भूगर्भीय सक्रियता, खड़ी ढलान, अस्थिर चट्टानें, भारी बारिश, ग्लेशियरों में बदलाव और जलवायु परिवर्तन मिलकर आपदा का जोखिम बढ़ाते हैं।

    इसीलिए नेपाल, भारत, भूटान और हिमालय से जुड़े दूसरे क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन, शुरुआती चेतावनी प्रणाली, नदी घाटियों में सुरक्षित निर्माण और संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

  • उत्तराखंड में भारी बारिश का कहर… लैंडस्लाइड के कारण रोकी केदारनाथ यात्रा, 850 श्रद्धालु फंसे

    उत्तराखंड में भारी बारिश का कहर… लैंडस्लाइड के कारण रोकी केदारनाथ यात्रा, 850 श्रद्धालु फंसे


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) में भारी बारिश (Heavy rain) के कारण पहाड़ से मैदान तक हर ओर बारिश कहर बरपा रही है। लैंडस्लाइड के कारण केदारनाथ यात्रा (Kedarnath Yatra) रोक दी गई है। कम से कम 850 श्रद्धालु फंसे हुए हैं। हरिद्वार (Haridwar) में दो कारें बह गईं। यमुनोत्री हाईवे पर पत्थर गिरने से कई घंटे यात्रा बाधित रही। देहरादून में भारी बारिश के बाद नाले के तेज बहाव में दो सगी बहनें बह गईं। उनके शव बरामद हुए हैं। मौसम विभाग ने आज 8 जिलों में फ्लैश फ्लड (Flash flood) और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। देहरादून, रुद्रप्रयाग और चमोली समेत कुछ जिलों में विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

    केदारनाथ हाईवे पर सोनप्रयाग से गौरीकुंड के बीच कई स्थानों पर भूस्खलन और पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण गुरुवार को केदारनाथ यात्रा रोक दी गई। भारी बारिश के बीच प्रशासन ने केदारनाथ से वापस आने वाले करीब 600 यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोक लिया। केदारनाथ जाने वाले करीब 250 यात्रियों को सोनप्रयाग में रोका गया। बारिश से उत्तराखंड में कुल 91 सड़कें बंद हुईं।


    मुनकटिया में आया मलबा

    केदारनाथ हाईवे सोनप्रयाग से गौरीकुंड के बीच मुनकटिया में मलबा आने से बंद है। गौरीकुंड गेट से करीब 200 मीटर पर पहाड़ी से भूस्खलन हो रहा है। केदारनाथ पैदल मार्ग में भी छौड़ी, जंगलचट्टी और चीरबासा के पास कई जगहों पर मलबा बोल्डर गिर रहे हैं। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि मौसम खुलने के साथ ही मार्ग खुलने की स्थिति में यात्रियों की आवाजाही करा दी जाएगी। उधर, कुमाऊं में बारिश के कारण तवाघाट-लिपुलेख हाईवे पर मल्लघाट के पास भूस्खलन हो गया। नौ घंटे बाद इसको खोला जा सका।


    आज 8 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    शुक्रवार को भारी बारिश के पूर्वानुमान के मद्दनेजर आठ जिलों के लिए अलर्ट जारी किया गया है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने देहरादून, उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के डीएम को अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा है।


    कई घरों में घुसा मलबा

    लगातार हो रही बारिश के कारण ज्योतिर्मठ के दूरस्थ गांव किमाणा के 7 आवासीय भवन खतरे की जद में आ गए हैं। लगातर पहाड़ी से बह कर आ रही गाद लोगों के घरों में घुसने लगी है। पहाड़ी से बह कर आ रहे मलबे और बोल्डरों से गांव के संपर्क और काश्तकारी मार्ग भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं पेयजल लाईन टूटने से पेयजल संकट भी गहरा गया है।

    बता दें कि किमाणा गांव की सरहद से लगभग 50 मीटर की दूरी पर स्थित पहाड़ी भारी बरसात के कारण बुधवार देर रात से लगातर दरकती रही। पहाडी से टूटकर लगातार बडे़ बडे़ बोल्डर बरसाती नाले में बहकर गाद गांव तक पहुंच रही है। इस मलबे की चपेट में आने से गांव की शीर्ष में स्थित चंडिका मंदिर की भोग मंडी और सभी सुरक्षा दीवारें पूरी तरह से टूट गई है। क्षेत्र पंचायत सदस्य मुकेश सेमवाल ने बताया कि पूरा गांव दहशत में है और गांव के 7 मकानों में लगातार बह कर आ रहा मलबा घुस रहा है। इन घरों के आंगन भी मलबे से भर चुके हैं, जिस कारण से इन परिवारों को भारी परेशानियों से दो चार होना पड़ रहा है।


    हरिद्वार में दो कार बहीं, यमुनोत्री हाईवे पर गिरे पेड़

    हरिद्वार में मूसलाधार बारिश के चलते खड़खड़ी स्थित सूखी नदी उफान पर आ गई। इससे नदी के बीच रपटे पर खड़ी दो कार बह गईं। घटना से मौके पर अफरातफरी मच गई। बहाव कम होने के बाद कारों को नदी से बाहर निकला गया। उधर, स्याना चट्टी और राना चट्टी के बीच भू-धंसाव होने से कई पेड़ यमुनोत्री हाईवे पर गिर गए। पेड़ों के गिरने से कुछ समय के लिए हाईवे पर यातायात बाधित हो गया।


    देहरादून में दो बहनों की दर्दनाक मौत

    इधर, देहरादून के क्लेमनटाउन क्षेत्र की नई बस्ती में बारिश से उफनाई नाली में बहने से दो मासूम बहनों की मौत हो गई। सात वर्षीय लक्ष्मी कुमारी और तीन वर्षीय सोनाक्षी कुमारी के शवों को रैंप के नीचे से निकाला गया। बच्चियों के पिता रुदल सदा और मां रीना कुमारी यहां नई बस्ती में किराये पर रहकर मजदूरी करते हैं। रुदल सदा किसी काम से अपने गांव गए हुए हैं। बच्चियों की मां रीना ने पुलिस को बताया कि दोपहर करीब एक बजे दोनों बहनें खेलने गई थीं।

  • खराब मौसम ने अमरनाथ यात्रा पर लगाया ब्रेक…. भारी बारिश-भूस्खलन का अलर्ट

    खराब मौसम ने अमरनाथ यात्रा पर लगाया ब्रेक…. भारी बारिश-भूस्खलन का अलर्ट


    जम्मू।
    अगर आप 19 जुलाई को अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) पर निकलने वाले थे, तो यह खबर आपके लिए है. खराब मौसम (Bad Weather) के पूर्वानुमान को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) को फिलहाल रोक दिया है. पहलगाम (Pahalgam) और बालटाल (Baltal), दोनों रास्तों से किसी भी श्रद्धालु को आगे जाने की अनुमति नहीं होगी. जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप में श्रद्धालुओं को रोक दिया गया है. खराब मौसम ने इस बार अमरनाथ यात्रा की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।

    प्रशासन ने 19 जुलाई 2026 से यात्रा को अस्थायी रूप से स्थगित करने का फैसला लिया है. यह रोक यात्रा के दोनों प्रमुख मार्गों पहलगाम और बालटाल पर लागू रहेगी. प्रशासन के मुताबिक, मौसम विभाग ने अगले कुछ समय के लिए खराब मौसम का पूर्वानुमान जारी किया है. पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश, फिसलन और भूस्खलन जैसी स्थितियों की आशंका को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा प्राथमिकता है, इसलिए जोखिम उठाने की बजाय यात्रा को फिलहाल रोकना जरूरी समझा गया।

    इस फैसले के बाद जम्मू स्थित भगवती नगर यात्री निवास बेस कैंप में मौजूद श्रद्धालुओं को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई. उन्हें बेस कैंप में ही रुकने और प्रशासन के अगले निर्देश का इंतजार करने को कहा गया है।

    हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अमरनाथ पहुंचते हैं. लेकिन ऊंचाई वाले इस इलाके में मौसम कुछ ही घंटों में बदल जाता है. ऐसे में प्रशासन समय-समय पर मौसम और रास्तों की स्थिति की समीक्षा करता है. अगर हालात अनुकूल नहीं होते, तो यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया जाता है।

    अधिकारियों ने कहा है कि जैसे ही मौसम साफ होगा, उसी हिसाब से फैसला लिया जाएगा. तब तक श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें. यानी फिलहाल बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए निकले श्रद्धालुओं को थोड़ा इंतजार करना होगा. मौसम की मार थमेगी, रास्ते सुरक्षित होंगे, तभी यात्रा दोबारा आगे बढ़ेगी।


    राजौरी में बारिश ने बिगाड़े हालात

    जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में लगातार हो रही भारी बारिश ने हालात बिगाड़ दिए हैं. तेज बारिश के चलते जिले के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं. नदियां और बरसाती नाले उफान पर हैं, जबकि कई निचले इलाकों में पानी भरने से जनजीवन प्रभावित हुआ है. जिला प्रशासन ने लोगों से बिना जरूरत यात्रा न करने, नदियों और नालों से दूर रहने तथा बाढ़ संभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है. प्रशासन का कहना है कि जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और हालात पर नजर रखी जा रही है।


    उत्तराखंड में भी बारिश की वजह से यात्रा पर असर

    लगातार हो रही बारिश का असर उत्तराखंड की तीर्थ यात्राओं पर भी पड़ा है. रुद्रप्रयाग जिले में गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर शुक्रवार को पहाड़ी से बोल्डर और मलबा गिरने के कारण रास्ता कुछ समय के लिए बंद हो गया था. हालांकि राहत एवं बचाव दलों ने मलबा हटाकर पैदल मार्ग फिर से खोल दिया, लेकिन सुरक्षा कारणों से घोड़ा-खच्चर और डोली सेवा फिलहाल स्थगित रखी गई है. प्रशासन लगातार मार्ग की निगरानी कर रहा है।

    वहीं, पिथौरागढ़ जिले में कैलाश-मानसरोवर यात्रा भी प्रभावित हुई है. गरबाधार क्षेत्र में भूस्खलन के कारण गुंजी मार्ग बंद हो गया. इसके चलते 50 श्रद्धालुओं वाले चौथे जत्थे को धारचूला बेस कैंप पर ही रोक दिया गया. प्रशासन का कहना है कि रास्ता सेफ होने के बाद ही यात्रियों को आगे भेजा जाएगा।

    राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं. जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों (DEOC) को 24 घंटे एक्टिव रखने, राहत एवं बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखने और भूस्खलन संभावित मार्गों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं. साथ ही चारधाम यात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करें. भारी बारिश के दौरान नदियों, नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें।

  • देशभर में हो रही झमाझम बारिश….कई राज्यों में भूस्खलन और बाढ़ ने मचाई तबाही

    देशभर में हो रही झमाझम बारिश….कई राज्यों में भूस्खलन और बाढ़ ने मचाई तबाही


    नई दिल्ली।
    पूरे देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) के पहुंचने के बाद झमाझम बारिश (Heavy downpour) हो रही है। पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र, विशेषतौर पर हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) और उत्तराखंड (Uttarakhand) में तो बारिश प्रचंड चरण में है। शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश में वर्षा जनित घटनाओं में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो घायल हो गए। दोनों राज्यों में मूसलाधार बारिश से नदियां और पहाड़ी नाले उफान पर हैं, बाढ़ और भूस्खलन ने तबाही मचा रखी है।

    उत्तराखंड के यमुनोत्री हाईवे के साथ दोनों राज्यों में सैकड़ों सड़के बंद हैं, संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है। शुक्रवार को मूसलाधार बारिश से स्थिति इतनी भयावह हुई कि कई क्षेत्रों में स्कूलों को बंद करना पड़ा। मौसम विभाग ने इन दोनों राज्यों समेत उत्तर-पश्चिम भारत और देश के कई अन्य हिस्सों में तीन-चार दिन भार बारिश का अलर्ट जारी किया है।

    हिमाचल प्रदेश में खराब मौसम की सबसे भारी मार सिरमौर और सोलन जिलों में पड़ी है। कुल्लू जिले में पहाड़ी से गिरे बड़े पत्थर की चपेट में आने से 70 वर्ष के एक व्यक्ति की जान चली गई। कालका-शिमला नेशनल हाईवे पर भी कई जगह भूस्खलन में लोगों के घायल होने की खबर है। त्रिपुरा में पिछले कुछ दिनों से जारी भारी बारिश के बाद बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है। राज्य के उनकोटी, खोवाई और धलाई जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं। बाढ़ और बारिश के कारण करीब 11 हजार लोग बेघर हो गए हैं, जबकि 4,027 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।


    देहरादून समेत सात जिलों में स्कूल बंद

    मूसलाधार बारिश के कारण अचानक बाढ़ और भूस्खलन से उत्तराखंड में भी जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग समेत 118 सड़कें बंद हैं। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग को बारिश और बार-बार हो रहे भूस्खलन के चलते अभी तक खोला नहीं जा सका है। भारी बारिश के चलते देहरादून समेत सात जिलों में शुक्रवार को 12वीं तक के स्कूल बंद रहे। हरिद्वार जिले के भगवानपुर में उफनती नदी में डूबने से 18 साल के एक लड़के की मौत हो गई है।


    हरियाणा, पंजाब व यूपी में भारी बारिश

    भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बीते 24 घंटों के दौरान कई राज्यों में मूसलाधार बारिश हुई। हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली, पश्चिमी व पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, बिहार और पूर्वोत्तर के लगभग सभी राज्यों में भारी से बहुत बारिश (7-20 सेमी) दर्ज की गई। इन राज्यों के साथ ही अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, ओडिशा, राजस्थान, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, गुजरात क्षेत्र, कच्छ, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, केरल, रायलसीमा, तेलंगाना और कर्नाटक के अंदरूनी इलाकों में कुछ जगहों पर 40-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं भी चलीं।


    वायनाड में मृतक संख्या सात हुई

    केरल के वायनाड जिले में भूस्खलन वाली जगह से शुक्रवार को एक और शव मिला, जिससे इस आपदा में मरने वालों की संख्या 7 हो गई है। बरामद शव की पहचान पश्चिम बंगाल के पूर्वी मिदनापुर निवासी सर्वेयर राकेश गुचैत के रूप में हुई है। उनका शव यहां मीनाक्षी पुल के पास से निकाला गया। हिमाचल प्रदेश के कंस्ट्रक्शन मैनेजर विक्रम राणा अभी भी लापता हैं। गुरुवार तक, भूस्खलन वाली जगह से छह शव बरामद किए गए थे। बता दें कि सात जुलाई को अनाक्कोम्पोयिल-मेप्पाडी टनल प्रोजेक्ट वाली जगह पर भूस्खलन हुआ था। यह टनल वायनाड और कोझिकोड जिलों को जोड़ने के लिए बनाई जा रही है।


    पुणे में इमारत में अभी भी दबे हैं आठ लोग, 30 ट्रेनों को किया गया रद्द

    मुंबई में शुक्रवार को तो बारिश से राहत मिली, लेकिन पुणे में कूड़े के पहाड़ के नीचे गिरने से दबी इमारत में अभी भी 8 लोग फंसे हुए हैं। हादसे के तीन दिन बाद भी उन्हें बाहर नहीं निकाला जा सका है। अधिकारियों ने बताया कि लोगों को बाहर निकालने के लिए मलबा हटाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। इमारत के सामने वाला हिस्सा पूरी तरह मलबे में दबा है, इसलिए लोगों को पीछे से रास्ता बनाकर निकालने की कोशिशें की जा रही हैं। भोर घाट खंड में भारी भूस्खलन के चलते मुंबई-पुणे कॉरिडोर पर रेल सेवा बाधित हुई, जिसके 17 जुलाई से पहले सुचारू होने की संभावना नहीं है। इसके चलते लंबी दूरी की 30 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है।

  • उत्तराखंड में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित, 32 सड़कें बंद, नदियां उफान पर

    उत्तराखंड में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित, 32 सड़कें बंद, नदियां उफान पर


    नई दिल्ली। उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। प्रदेश के कई हिस्सों में भूस्खलन की घटनाओं के कारण पहाड़ों से चट्टानें और मलबा सड़क पर आ गया है, जिससे आवागमन बाधित हो गया है। वहीं, लगातार बारिश से अलकनंदा समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है और वे उफान पर बह रही हैं।

    राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, भूस्खलन और मलबा आने की वजह से प्रदेश में फिलहाल 32 सड़कें बंद हैं। प्रशासन ने बताया कि प्रभावित मार्गों से चट्टानें और मलबा हटाने का काम युद्ध स्तर पर किया जा रहा है, ताकि जल्द से जल्द यातायात बहाल किया जा सके। इसके लिए संबंधित विभागों की टीमें लगातार मौके पर जुटी हुई हैं।

    मंगलवार को राज्य के कई इलाकों में भारी वर्षा दर्ज की गई। मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून के मुताबिक सबसे अधिक 107 मिमी बारिश पंतनगर में रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा चोरगलिया में 79.5 मिमी, रुद्रपुर में 43.5 मिमी, यमकेश्वर में 38 मिमी और किच्छा में 32.5 मिमी वर्षा हुई। खानपुर में 27 मिमी, जबकि देहरादून और लक्सर में 19-19 मिमी बारिश दर्ज की गई। अन्य क्षेत्रों में हाथीबड़कला में 15 मिमी, पिथौरागढ़ में 8.9 मिमी और लोहाघाट में 8 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।

    मौसम विज्ञान केंद्र ने बुधवार को भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। साथ ही देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, ऊधम सिंह नगर, नैनीताल, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों के कुछ इलाकों में भारी बारिश का अनुमान व्यक्त किया गया है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है।

  • जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर छह ब्लैक स्पॉट…. हल्की बारिश में भूस्खलन, अमरनाथ यात्रा को लेकर बढ़ी चिंता

    जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर छह ब्लैक स्पॉट…. हल्की बारिश में भूस्खलन, अमरनाथ यात्रा को लेकर बढ़ी चिंता


    जम्मू।
    जम्मू-कश्मीर हाईवे (Jammu Kashmir Highway) पर लगातार भूस्खलन (Frequent Landslides) ने अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) से पहले चिंता बढ़ा दी है। जम्मू से श्रीनगर के बीच करीब छह जगह ब्लैक स्पॉट (Black spot) चिह्नित किए गए हैं। हल्की बारिश के बाद यहां भारी भूस्खलन हो रहा है, जिससे हाल ही में कई बार हाईवे बाधित हो चुका है।

    अप्रैल में हुई बारिश के बाद रामबन-बनिहाल सेक्शन में बन रही लगभग तीन किलोमीटर लंबी सुरंग का काम भी फंस गया है। पहले मई में काम पूरा होने की संभावना थी, लेकिन अब कार्य आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इससे यात्रा के दौरान जाम से मुक्ति मिलने की संभावना प्रभावित हो सकती है।

    जम्मू से श्रीनगर के बीच यात्रा के दौरान सबसे संवेदनशील हिस्सा उधमपुर से बनिहाल तक है। पिछले साल अप्रैल में रामबन में बादल फटने के बाद आई बाढ़ ने हाईवे का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त कर दिया था। सितंबर में उधमपुर-रामबन के बीच करीब 200 मीटर हिस्सा दलदल में बदल गया, जिससे कश्मीर की सप्लाई चेन बाधित हुई।

    इस साल अप्रैल में हल्की बारिश के बाद सात अप्रैल को डिगडोल और खूनी नाला के बीच भारी भूस्खलन से तीन दिन तक यातायात बाधित रहा। अमरनाथ यात्रा तीन जुलाई से शुरू होगी और बारिश होने पर भूस्खलन की संभावना बनी रहेगी। हालांकि एनएचएआई ने संभावित जगहों पर विशेषज्ञों की मदद से सुरक्षा इंतजाम किए हैं और हाईवे की समीक्षा पूरी की है।


    हाईवे पर खतरे के ब्लैक स्पॉट

    रामबन, बनिहाल, नाशरी–चिनैनी, पंथियाल मेहर-कैफेटेरिया मोड़ और खूनी नाला शामिल हैं। अमरनाथ यात्रा के दौरान 2023 में रामबन के पास हाईवे पर भूस्खलन हुआ था। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा था।


    विशेषज्ञों की मदद से पूरे हो रहे सुधार कार्य

    हाईवे पर अमरनाथ यात्रा से पहले सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। संभावित क्षेत्रों में विशेषज्ञों की मदद से सुधार कार्य पूरे किए जा रहे हैं। टनल निर्माण का कार्य जारी है। यात्रा प्रभावित न हो इसके लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
    -आरएस यादव, क्षेत्रीय अधिकारी, एनएचएआई


    जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर कब-कब भूस्खलन

    – रामबन में 6 अप्रैल, 2026 को जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर भूस्खलन से आवाजाही प्रभावित हुई।
    – रामबन में 20 अप्रैल 2025 को बादल फटा। जम्मू-श्रीनगर हाईवे बंद होने से सैकड़ों वाहन फंस गए। कश्मीर की सप्लाई चेन टूट गई।
    – 30 अगस्त 2025 को रामबन में फिर बादल फटसे भारी भूस्खलन हुआ। हाईवे बाधित होने से कश्मीर जा रहे सैकड़ों ट्रक हाईवे पर फंस गए।
    – सितंबर 2025 में उधमपुर-रामबन के बीच हाईवे का करीब 200 मीटर हिस्सा दलदल में बदल गया। यह हादसा सेब सीजन के दौरान हुआ और इससे कश्मीर की आर्थिकी पर असर पड़ा।
    – चिनैनी-नाशनी टनल के बाहर और उधमपुर क्षेत्र में अगस्त-सितंबर में भूस्खलन की छोटी-बड़ी कई घटनाएं हुईं। इससे आवाजाही प्रभावित हुई।

  • ब्राज़ील में बारिश का कहर: बाढ़-भूस्खलन से 6 मौतें, हजारों लोग बेघर

    ब्राज़ील में बारिश का कहर: बाढ़-भूस्खलन से 6 मौतें, हजारों लोग बेघर


    नई दिल्ली। दक्षिण अमेरिका के ब्राज़ील के पूर्वोत्तर हिस्से में भारी बारिश ने तबाही मचा दी है। लगातार दो दिनों तक हुई मूसलाधार वर्षा के चलते बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई, जबकि हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि कई इलाकों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

    सबसे ज्यादा असर पेर्नंबुको राज्य में देखने को मिला, जहां बाढ़ और लैंडस्लाइड के कारण चार लोगों की जान चली गई। वहीं पड़ोसी पैराइबा में भी दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। तेज बारिश के चलते नदियां उफान पर हैं और निचले इलाकों में पानी भर जाने से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।

    अधिकारियों के मुताबिक करीब डेढ़ हजार परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि कई इलाकों में राहत और बचाव कार्य तेजी से जारी है। प्रशासन ने आपात अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है।

    मौसम विभाग ने भले ही आने वाले दिनों में बारिश की तीव्रता कम होने की संभावना जताई है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। प्रशासन का कहना है कि जमीन में नमी बढ़ने से भूस्खलन का जोखिम बना हुआ है, ऐसे में लोगों को सावधानी बरतनी होगी। यह आपदा एक बार फिर दिखाती है कि चरम मौसम की घटनाएं किस तरह बड़े पैमाने पर जन-धन का नुकसान कर रही हैं।