Tag: Larsen & Toubro

  • L&T का धमाका: मुनाफा उछला, ₹38 प्रति शेयर डिविडेंड; ऑर्डर बुक रिकॉर्ड स्तर पर

    L&T का धमाका: मुनाफा उछला, ₹38 प्रति शेयर डिविडेंड; ऑर्डर बुक रिकॉर्ड स्तर पर


    नई दिल्ली। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से चर्चा में रही इंजीनियरिंग दिग्गज Larsen & Toubro (L&T) ने अपने तिमाही और सालाना नतीजों से निवेशकों को खुश कर दिया है। कंपनी ने न सिर्फ मुनाफे में जबरदस्त बढ़त दर्ज की, बल्कि हर शेयर पर ₹38 के भारी-भरकम डिविडेंड का ऐलान भी किया है।

    कंपनी की ओर से जारी एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, L&T का ग्रुप ऑर्डर इनफ्लो 22% की बढ़त के साथ ₹4.35 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह कंपनी की मजबूत ऑर्डर बुक और भविष्य की ग्रोथ संभावनाओं का साफ संकेत देता है।

    वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कंपनी का समेकित राजस्व ₹82,762 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 11% ज्यादा है। खास बात यह रही कि अंतरराष्ट्रीय कारोबार से ₹43,747 करोड़ की कमाई हुई, जो कुल राजस्व का 53% हिस्सा है।

    पूरे वित्त वर्ष की बात करें तो कंपनी का Recurring PAT ₹17,238 करोड़ रहा, जिसमें सालाना आधार पर 18% की मजबूत बढ़त दर्ज की गई। वहीं, Consolidated PAT ₹16,084 करोड़ रहा। इसमें ₹1,155 करोड़ का एक बार का प्रावधान (Exceptional Item) शामिल है, जो नए श्रम कानूनों के तहत कर्मचारियों को मिलने वाले लाभों के लिए किया गया है।

    निवेशकों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी डिविडेंड को लेकर आई है। L&T ने ₹2 फेस वैल्यू वाले हर शेयर पर ₹38 का फाइनल डिविडेंड घोषित किया है, जो पिछले साल के ₹34 प्रति शेयर से ज्यादा है।

    कंपनी ने इसके लिए 22 मई 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की है। यानी इस तारीख तक जिन निवेशकों के डीमैट अकाउंट में L&T के शेयर होंगे, उन्हें यह डिविडेंड मिलेगा। शेयरधारकों की मंजूरी मिलने के बाद डिविडेंड का भुगतान 10 जून 2026 तक किया जा सकता है।

    कुल मिलाकर, मजबूत ऑर्डर बुक, बढ़ता मुनाफा और आकर्षक डिविडेंड—तीनों फैक्टर L&T को निवेशकों के लिए एक बार फिर चर्चा में ले आए हैं। बाजार के जानकार मानते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग सेक्टर में कंपनी की पकड़ आने वाले समय में और मजबूत हो सकती है।

  • सिंगरौली में टैक्स वसूली का सख्त अभियान: 7 दिन में बकाया नहीं चुकाया तो होगी संपत्ति कुर्की

    सिंगरौली में टैक्स वसूली का सख्त अभियान: 7 दिन में बकाया नहीं चुकाया तो होगी संपत्ति कुर्की


    सिंगरौली । मध्य प्रदेश के सिंगरौली में नगर पालिक निगम ने संपत्ति कर के बकायादारों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। निगम के डिप्टी कमिश्नर आरपी बैस ने औद्योगिक कंपनियों और अन्य बकायादारों को नोटिस जारी करते हुए 7 दिन के भीतर बकाया कर जमा करने के निर्देश दिए हैं। चेतावनी दी गई है कि तय समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं होने पर संबंधितों की चल-अचल संपत्ति की कुर्की कर वसूली की जाएगी।

    नगर निगम के इस अभियान का मकसद लंबे समय से बकाया टैक्स वसूली को सुनिश्चित करना है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब कोई भी करदाता इस मामले में अनदेखी नहीं कर पाएगा। इस अभियान के तहत एक दर्जन से ज्यादा बड़ी कंपनियों को नोटिस जारी किए गए हैं जिसमें कई प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठान शामिल हैं।

    सूची में डीबीएल कंपनी निगाही पर 4,25,455 रुपये सिक्कल लॉजिस्टिक पर 8,72,328 रुपये पीसी पटेल पर 5,67,674 रुपये और राम किपाल कंपनी पर 2,26,025 रुपये बकाया शामिल हैं। वहीं कन्द्रोई ट्रांसपोर्ट पर 12,83,406 रुपये और विन्ध्या एग्रो इंडस्ट्री पर 12,62,43 रुपये का बकाया दर्ज है। देश की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लार्सन एंड टर्बो लिमिटेड पर 8,85,524 रुपये बकाया है। इसके अलावा लोहिया एग्रो राइस मिल रुद्राक्ष हाईटेक विपिन कुमार जायसवाल शिवा इंडस्ट्रीज और भारत पेट्रोलियम सहित अन्य कंपनियों का भी बकाया बताया गया है।

    अन्य बकायादारों में विन्ध्या मेटल्स अब्दुल अहाद बाजार इंडिया होटल सागर नरेश कुमार शाह और सेंट जोसेफ स्कूल शामिल हैं जिन पर लाखों रुपये का टैक्स बकाया है। निगम ने स्पष्ट किया कि समयसीमा समाप्त होने पर चल और अचल संपत्तियों की कुर्की की जाएगी। इसमें बैंक खाते जमीन भवन और अन्य संपत्तियां भी शामिल हो सकती हैं।

    नगर निगम प्रशासन ने बताया कि यह अभियान केवल नोटिस तक सीमित नहीं है। यह सख्ती संदेश देने के लिए है कि नियमों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से बकाया टैक्स की वसूली न होने से निगम की आय पर असर पड़ा था इसलिए इस बार अभियान तेज और कड़ा किया गया है।

    इस कार्रवाई से न केवल निगम की आय में सुधार की उम्मीद है बल्कि अन्य करदाताओं के लिए भी एक चेतावनी बनकर सामने आया है कि समय पर भुगतान करना कितना जरूरी है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नोटिस मिलने के बाद बकायादार कंपनियां बकाया जमा कराती हैं या निगम को कुर्की जैसी सख्त कार्रवाई करनी पड़ती है।