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  • इस्लामाबाद में लश्कर कमांडर की अचानक मौत से उठे सवाल, मस्जिद पहुंचने से पहले आखिर कहां खाया था खाना

    इस्लामाबाद में लश्कर कमांडर की अचानक मौत से उठे सवाल, मस्जिद पहुंचने से पहले आखिर कहां खाया था खाना

    नई दिल्ली । पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक वरिष्ठ कमांडर कारी सईद अब्दुल अजीज की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वह नमाज पढ़ने के लिए कुबा मस्जिद पहुंचा था, जहां मस्जिद के गेट के पास अचानक गिर पड़ा। उसकी मौत के वास्तविक कारण की आधिकारिक तौर पर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

    कारी सईद अब्दुल अजीज को लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख सदस्यों में शामिल बताया जाता था। उसके जिम्मे जम्मू-कश्मीर में मुठभेड़ के दौरान मारे गए आतंकवादियों के परिवारों की सहायता से जुड़ा काम था। संगठन के भीतर उसकी भूमिका को देखते हुए उसकी अचानक हुई मौत को महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

    स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, मस्जिद पहुंचने से पहले कारी सईद ने एक अनजान रेस्टोरेंट में खाना खाया था। इसके बाद वह नमाज के लिए कुबा मस्जिद गया। वहां पहुंचने के बाद वह अचानक गिर पड़ा और उसकी मौत हो गई। हालांकि, इस घटनाक्रम और उसकी मौत के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।

    कारी सईद की मौत ऐसे समय हुई है जब पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कई सदस्यों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत को लेकर चर्चा बनी हुई है। संगठन से जुड़े रिजवान हनीफ ने हाल में एक वीडियो में दावा किया था कि पिछले तीन से चार वर्षों के दौरान लश्कर के करीब 30 से अधिक सदस्य पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मारे गए हैं।

    रिजवान के अनुसार, पेशावर, कराची, रावलपिंडी, रावलाकोट और मुजफ्फराबाद जैसे इलाकों में संगठन के कई सदस्यों की हत्या हुई। उसने इन घटनाओं के पीछे अज्ञात लोगों के होने की बात कही थी। लश्कर से जुड़े किसी सदस्य की ओर से संगठन के इतने लोगों के मारे जाने की बात स्वीकार किए जाने को भी इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    पाकिस्तान में पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़े कुछ आतंकवादियों की संदिग्ध मौत के मामलों में अज्ञात हमलावरों का जिक्र सामने आता रहा है। हालांकि, इन घटनाओं के पीछे कौन लोग हैं और उनके उद्देश्यों क्या हैं, इसे लेकर सार्वजनिक स्तर पर अलग-अलग दावे किए जाते रहे हैं। ऐसे मामलों में ठोस निष्कर्ष के लिए जांच और आधिकारिक पुष्टि जरूरी होती है।

    लश्कर-ए-तैयबा को आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े होने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है। संगठन लंबे समय से जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों और भारत विरोधी हिंसा से जुड़ा रहा है। ऐसे में उसके किसी वरिष्ठ कमांडर की पाकिस्तान में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत सुरक्षा एजेंसियों और आतंकवादी नेटवर्क से जुड़े घटनाक्रम के लिहाज से भी ध्यान आकर्षित करती है।

    फिलहाल कारी सईद अब्दुल अजीज की मौत की सटीक वजह स्पष्ट नहीं है। उसके द्वारा मौत से पहले किए गए संपर्कों, रेस्टोरेंट में खाने और मस्जिद पहुंचने के बीच की घटनाओं की जानकारी सामने आने के बाद ही मामले की परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा। साथ ही, संगठन के अन्य सदस्यों की संदिग्ध मौतों से इस घटना का कोई संबंध है या नहीं, यह भी जांच का विषय बना हुआ है।

  • पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर कारी सईद की संदिग्ध मौत, हाफिज सईद से तीन दशक पुराना था संबंध

    पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर कारी सईद की संदिग्ध मौत, हाफिज सईद से तीन दशक पुराना था संबंध

    नई दिल्ली । पाकिस्तान में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कमांडर कारी सईद उर्फ अब्दुल अजीज की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद स्थित लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी एक मस्जिद में नमाज से पहले वह अचानक जमीन पर गिर गया। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे संभालने और प्राथमिक उपचार देने की कोशिश की, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। बाद में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। उसकी मौत के कारणों को लेकर फिलहाल अलग-अलग तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं।

    कारी सईद को लश्कर-ए-तैयबा के पुराने और प्रभावशाली कमांडरों में गिना जाता था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वह संगठन के साथ लंबे समय से जुड़ा हुआ था और आतंकी सरगना हाफिज सईद के करीबी लोगों में शामिल था। बताया जाता है कि कारी सईद वर्ष 1990 से हाफिज सईद के साथ जुड़ा हुआ था। शुरुआती वर्षों में उसने संगठन के लिए सक्रिय भूमिका निभाई और आतंकियों की भर्ती जैसे कामों में भी उसकी जिम्मेदारी रही।

    रिपोर्ट के अनुसार, कारी सईद वर्ष 2017 तक लश्कर-ए-तैयबा की आतंकी गतिविधियों से जुड़े कामों में सक्रिय रहा। बाद के वर्षों में संगठन ने उसे प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंप दी थीं। वह दक्षिण पंजाब क्षेत्र में संगठन से जुड़े एक विभाग की जिम्मेदारी संभालता था। इस विभाग का काम भारत में मारे गए आतंकियों के परिवारों तक आर्थिक सहायता पहुंचाने और संगठन से जुड़े लोगों का रिकॉर्ड तैयार करने से संबंधित बताया जाता है।

    कारी सईद की मौत से जुड़ी घटनाओं का क्रम भी सामने आया है। बताया गया है कि वह इस्लामाबाद की मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए पहुंचा था। वहां उसने अपना बैग एक साथी को सौंपा और वुजू किया। इसके बाद जब वह नमाज के लिए मुख्य हॉल की ओर बढ़ा और चप्पल उतारने के लिए बैठा, तभी अचानक जमीन पर गिर पड़ा। आसपास मौजूद लश्कर के अन्य सदस्यों ने उसे उठाया और मदद की कोशिश की। उसकी सांस रुकने के बाद कथित तौर पर सीपीआर भी दिया गया, लेकिन उसे होश नहीं आया।

    इसके बाद कारी सईद को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसकी अचानक हुई मौत ने उसके संगठन से जुड़े लोगों के बीच भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, मौत की वास्तविक वजह को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में इस घटना को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच और मेडिकल जानकारी का इंतजार करना जरूरी है।

    बताया जाता है कि सक्रिय आतंकी भूमिका से हटने के बाद कारी सईद को लश्कर-ए-तैयबा के प्रशासनिक नेटवर्क में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई थीं। दक्षिण पंजाब के मुल्तान, बहावलपुर और डेरा गाजी खान जैसे क्षेत्रों से जुड़े आतंकियों के बारे में जानकारी जुटाना और उनके परिवारों तक आर्थिक सहायता पहुंचाना उसकी जिम्मेदारियों में शामिल था। उसकी मौत ऐसे समय में सामने आई है जब पाकिस्तान में आतंकी संगठनों से जुड़े कई पुराने चेहरों की गतिविधियों और उनके नेटवर्क को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। कारी सईद की संदिग्ध मौत के कारण और उससे जुड़े अन्य पहलुओं पर आगे मिलने वाली जानकारी से स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

  • पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के नेटवर्क पर बड़ा वार? 30 से ज्यादा आतंकियों की टारगेट किलिंग का पहली बार कबूलनामा

    पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के नेटवर्क पर बड़ा वार? 30 से ज्यादा आतंकियों की टारगेट किलिंग का पहली बार कबूलनामा


    नई दिल्ली।
    पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के नेटवर्क को लेकर बड़ा दावा सामने आया है। संगठन से जुड़े भारत के वांटेड आतंकी रिजवान हनीफ का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह पिछले कुछ वर्षों के दौरान लश्कर के 30 से ज्यादा प्रमुख सदस्यों की टारगेट किलिंग का दावा करता नजर आ रहा है। वीडियो के मुताबिक, ये घटनाएं पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoJK) के अलग-अलग इलाकों में हुई हैं।

    दावे के अनुसार, पिछले 3 से 4 वर्षों में पेशावर, कराची, रावलपिंडी, रावलाकोट और मुजफ्फराबाद जैसे इलाकों में लश्कर से जुड़े कई लोगों को अज्ञात हमलावरों ने निशाना बनाया। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि किए जाने की बात कही है।

    पहली बार कैमरे के सामने संगठन के नुकसान का दावा

    लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े किसी बड़े चेहरे की ओर से इतने बड़े पैमाने पर अपने नेटवर्क के सदस्यों की मौत का सार्वजनिक दावा सामने आना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वीडियो में रिजवान हनीफ कथित तौर पर इन घटनाओं के लिए भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को जिम्मेदार ठहराता दिखाई देता है।

    हालांकि, भारत सरकार और उसकी सुरक्षा एजेंसियां पाकिस्तान में होने वाली ऐसी कथित टारगेट किलिंग में अपनी भूमिका के आरोपों से लगातार इनकार करती रही हैं। इसलिए वीडियो में लगाए गए आरोपों को संगठन से जुड़े व्यक्ति का दावा माना जाना चाहिए।

    पेशावर से मुजफ्फराबाद तक हुईं हत्याएं

    रिजवान हनीफ के दावे के मुताबिक, लश्कर के जिन सदस्यों को निशाना बनाया गया, उनमें संगठन के प्रमुख और महत्वपूर्ण पदों से जुड़े लोग भी शामिल थे। इन घटनाओं के लिए जिन जगहों का उल्लेख किया गया है, उनमें पेशावर, कराची, रावलपिंडी, रावलाकोट और मुजफ्फराबाद प्रमुख हैं।

    अगर यह दावा सही साबित होता है तो यह पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के नेटवर्क और उसके सुरक्षित ठिकानों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    हमलों के पीछे कौन? अब तक साफ नहीं

    वीडियो में मौतों के लिए भारतीय एजेंसियों पर आरोप लगाया गया है, लेकिन इन हत्याओं के पीछे वास्तव में कौन है, इसका कोई स्वतंत्र और सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है। इसी वजह से अज्ञात हमलावरों और उनके मकसद को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

    दूसरी ओर, संगठन से जुड़े व्यक्ति का कैमरे पर अपने नेटवर्क के 30 से अधिक सदस्यों के मारे जाने की बात स्वीकार करना पाकिस्तान में आतंकी संगठनों के भीतर सुरक्षा और आपसी खौफ की स्थिति की ओर संकेत जरूर करता है।

    वीडियो में फिर दिखी कट्टरपंथी भाषा

    वीडियो में रिजवान हनीफ ने कथित तौर पर इन घटनाओं को लेकर भारत पर आरोप लगाने के साथ हिंदू धर्म के खिलाफ भी आपत्तिजनक और भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल किया। ऐसे बयानों को आतंकी संगठनों द्वारा अपनी गतिविधियों और नेटवर्क के नुकसान के बीच समर्थकों को कट्टरपंथ की ओर धकेलने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के 30 से ज्यादा सदस्यों की कथित टारगेट किलिंग के पीछे कौन है और क्या ये घटनाएं वास्तव में किसी सुनियोजित नेटवर्क का हिस्सा थीं। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी खासा महत्वपूर्ण हो गया है।

  • पहलगाम हमले की जांच में अहम मोड़, NIA की सप्लीमेंट्री चार्जशीट के बाद हाफिज सईद पर गैरहाजिरी में ट्रायल का रास्ता साफ

    पहलगाम हमले की जांच में अहम मोड़, NIA की सप्लीमेंट्री चार्जशीट के बाद हाफिज सईद पर गैरहाजिरी में ट्रायल का रास्ता साफ

    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने बड़ा कदम उठाते हुए आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में हाफिज सईद को इस हमले का मुख्य साजिशकर्ता बताया है। इसके बाद संबंधित अदालत ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया है। इस आदेश के साथ ही उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाने और गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाने की प्रक्रिया का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

    एनआईए ने अदालत में लगभग 60 पृष्ठों की सप्लीमेंट्री चार्जशीट प्रस्तुत करते हुए दावा किया कि पहलगाम आतंकी हमले की साजिश पाकिस्तान में रची गई थी और इसमें हाफिज सईद की अहम भूमिका रही। जांच एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के आधार पर उसके खिलाफ मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ाना आवश्यक है, ताकि मामले में न्यायिक कार्रवाई बाधित न हो।

    अदालत में दायर आवेदन में एनआईए ने यह भी कहा कि हाफिज सईद वर्तमान में पाकिस्तान में है और उसे भारत लाना फिलहाल संभव नहीं है। एजेंसी के अनुसार, उसे भारत लाने के लिए उपलब्ध कानूनी विकल्प लगभग समाप्त हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में नए आपराधिक कानूनों के तहत गैरहाजिरी में मुकदमा चलाने का प्रावधान लागू किया जाना उचित होगा। अदालत ने एजेंसी की दलीलों से सहमति जताते हुए गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया।

    न्यायालय के आदेश के बाद यदि निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के बावजूद आरोपी अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं होता है, तो उसे भगोड़ा घोषित करने की कार्रवाई भी आगे बढ़ सकती है। इसके बाद अदालत उसके बिना उपस्थित हुए भी मामले की सुनवाई जारी रख सकती है। यह प्रावधान हाल ही में लागू किए गए नए आपराधिक कानूनों के तहत शामिल किया गया है, जिसका उद्देश्य ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावी बनाए रखना है, जहां आरोपी जानबूझकर न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं होता।

    एनआईए की पहली चार्जशीट में भी इस मामले में कई आरोपियों को नामजद किया गया था। जांच एजेंसी ने तीन पाकिस्तानी आतंकियों के साथ-साथ पाकिस्तान में बैठे कथित आतंकी संचालकों और स्थानीय सहयोगियों को भी आरोपी बनाया है। एजेंसी का दावा है कि इन सभी की भूमिका हमले की योजना बनाने, उसे अंजाम देने और आतंकियों को सहायता उपलब्ध कराने में रही।

    नए कानूनों के तहत ‘ट्रायल इन एब्सेंशिया’ का प्रावधान ऐसे मामलों में लागू किया जा सकता है, जहां आरोपी देश से फरार हो, अदालत में जानबूझकर पेश न हो और उसके खिलाफ गंभीर अपराधों के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हों। इसके लिए पहले समन और वारंट जारी किए जाते हैं। यदि इसके बावजूद आरोपी अदालत में उपस्थित नहीं होता, तो उसे भगोड़ा घोषित कर उसकी गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाया जा सकता है।

    गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई थी। इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक जांच शुरू की थी। बाद में भारतीय सुरक्षा बलों ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के तहत सीमापार आतंकी ढांचों को निशाना बनाते हुए अभियान भी चलाया। अब एनआईए की सप्लीमेंट्री चार्जशीट और अदालत के आदेश के बाद इस मामले की कानूनी प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है और आगे की कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगी।

  • शोपियां में सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी, लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर जाकिर गनी मारा गया, चार दिन बाद मिला शव

    शोपियां में सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी, लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर जाकिर गनी मारा गया, चार दिन बाद मिला शव


    नई दिल्ली
    । जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में सुरक्षा बलों को आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान बड़ी सफलता मिली है। संयुक्त अभियान में लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर जाकिर गनी को मार गिराया गया। मुठभेड़ के कुछ दिनों बाद चलाए गए व्यापक तलाशी अभियान के दौरान उसका शव बरामद किया गया। सुरक्षा बलों ने घटनास्थल से हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किए हैं। इस कार्रवाई को दक्षिण कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, शोपियां के सैदपोरा क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों को आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस, राष्ट्रीय राइफल्स और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की संयुक्त टीम ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया। घने बागानों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच आधुनिक निगरानी उपकरणों की सहायता से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी गई।

    अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने दो आतंकवादियों की मौजूदगी का पता लगाया। इसके बाद पूरे क्षेत्र को घेरकर तलाशी और सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया। इसी दौरान गोलीबारी हुई, जिसका सुरक्षा बलों ने जवाब दिया। बाद में इलाके की विस्तृत तलाशी के दौरान एक शव बरामद हुआ, जिसकी पहचान लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर जाकिर गनी के रूप में की गई। घटनास्थल से हथियार और अन्य सैन्य सामग्री भी बरामद होने की पुष्टि हुई।

    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, जाकिर गनी लंबे समय से दक्षिण कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ा हुआ था और वह कई आतंकी अभियानों में शामिल माना जाता था। उसकी मौजूदगी को लेकर सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही थीं। संयुक्त अभियान के जरिए उसे निष्क्रिय करना आतंकवाद विरोधी प्रयासों की एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।

    शोपियां जिला लंबे समय से आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों के कारण संवेदनशील क्षेत्र रहा है। दक्षिण कश्मीर का यह इलाका अपने घने बागानों, जंगलों और दुर्गम भूभाग के कारण आतंकवादियों के लिए छिपने और एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने का मार्ग माना जाता रहा है। यही वजह है कि सुरक्षा बल यहां लगातार तलाशी अभियान और निगरानी अभियान चलाते रहते हैं।

    पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों को सीमित करने के लिए सुरक्षा बलों ने कई बड़े अभियान चलाए हैं। इन अभियानों के दौरान अनेक वांछित आतंकवादी मारे गए या गिरफ्तार किए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि लगातार दबाव बनाए रखने से स्थानीय आतंकी नेटवर्क कमजोर हुआ है और उनकी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा रहा है।

    अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में अभी भी तलाशी अभियान जारी है ताकि किसी भी संभावित खतरे को पूरी तरह समाप्त किया जा सके। सुरक्षा बल आसपास के इलाकों में भी सतर्कता बनाए हुए हैं और संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। स्थानीय लोगों से भी सहयोग की अपील की गई है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंच सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अभियान आतंकवादी संगठनों की नेतृत्व क्षमता और परिचालन ढांचे को कमजोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लगातार खुफिया समन्वय, आधुनिक तकनीक और संयुक्त सुरक्षा अभियानों के जरिए जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि क्षेत्र में शांति और सामान्य स्थिति बनाए रखने के लिए ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे।

  • आतंक के ठिकानों पर अज्ञात हमलों का साया: पाकिस्तान में लश्कर से जुड़े तीन आतंकियों की संदिग्ध मौतों से मचा हड़कंप

    आतंक के ठिकानों पर अज्ञात हमलों का साया: पाकिस्तान में लश्कर से जुड़े तीन आतंकियों की संदिग्ध मौतों से मचा हड़कंप


    नई दिल्ली ।
    पाकिस्तान में आतंकी संगठनों से जुड़े तत्वों की रहस्यमयी मौतों को लेकर हाल के दिनों में सुरक्षा और खुफिया हलकों में हलचल तेज हो गई है। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े तीन आतंकियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में है कि क्या देश के भीतर किसी प्रकार का संगठित टारगेट ऑपरेशन चल रहा है या यह आपसी संघर्ष का परिणाम है।

    सूत्रों और सामने आई रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में हाल के दिनों में तीन आतंकियों के शव मिलने से आतंकी नेटवर्क में बेचैनी बढ़ी है। इनमें गाजी मुमताज, मोहम्मद खुजैमा कासिम और खालिद बशीर जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं, जो कथित रूप से लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे। इन मौतों के कारण संगठन के भीतर असुरक्षा का माहौल गहराने की बात कही जा रही है।

    पाकिस्तान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकी संगठनों को संरक्षण देने के आरोपों का सामना करता रहा है। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को लेकर भी विभिन्न समय पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि वर्तमान घटनाक्रम में जिस तरह से एक के बाद एक संदिग्ध मौतों की खबरें सामने आ रही हैं, उसने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

    सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार इस तरह की घटनाएं या तो आंतरिक संघर्ष, गुटीय टकराव या फिर किसी गुप्त ऑपरेशन का संकेत हो सकती हैं। हालांकि किसी भी पक्ष की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। स्थानीय स्तर पर कुछ घटनाओं में हमलों और गोलीबारी का जिक्र भी सामने आया है, जिससे यह मामला और अधिक संवेदनशील बन गया है।

    इसी क्रम में खैबर पख्तूनख्वा और अन्य संवेदनशील इलाकों में पहले भी आतंकी कमांडरों पर हमलों की खबरें आती रही हैं, जिनमें अज्ञात हमलावरों की भूमिका की बात कही जाती है। इन घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था और आतंकी ढांचे की स्थिरता पर सवाल खड़े किए हैं।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान के भीतर मौजूद आतंकी नेटवर्क अब पहले जितना सुरक्षित नहीं रह गया है और आंतरिक व बाहरी दबाव दोनों के बीच उसकी स्थिति कमजोर हो रही है। लगातार हो रही घटनाओं से संगठनों के भीतर नेतृत्व और सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बढ़ती दिखाई दे रही है।

    हालांकि इन सभी घटनाओं के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं, यह स्पष्ट नहीं है और जांच एजेंसियों की ओर से भी कोई ठोस निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसके बावजूद लगातार सामने आ रही संदिग्ध मौतों ने आतंकी संगठनों की गतिविधियों और उनकी आंतरिक संरचना को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।