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  • नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार देर रात क्यों हुआ? बेटे मल्हार ने बताई वजह, सुबह निधन के बाद लिया था फैसला

    नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार देर रात क्यों हुआ? बेटे मल्हार ने बताई वजह, सुबह निधन के बाद लिया था फैसला

    नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में गोवा में निधन हो गया। 8 अक्टूबर की सुबह उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद देर रात उनका अंतिम संस्कार किया गया। बेटे मल्हार पाटेकर और उनकी पत्नी ने उन्हें मुखाग्नि दी। नाना को अंतिम विदाई देने के लिए परिवार के सदस्यों के साथ उनके करीबी और फिल्म जगत से जुड़े कई लोग पहुंचे। अंतिम संस्कार देर रात किए जाने को लेकर जब मल्हार से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसकी वजह बताई।

    मल्हार पाटेकर से पूछा गया कि अंतिम संस्कार इतनी देर रात क्यों किया गया, जबकि कई अन्य लोग और फिल्म जगत की हस्तियां भी नाना को अंतिम विदाई देने के लिए पहुंचना चाहती थीं। सवाल में यह भी कहा गया कि बॉलीवुड के कई लोग अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके, ऐसे में उसी रात अंतिम विदाई देने की क्या जरूरत थी। इस पर मल्हार ने स्पष्ट किया कि परिवार के फैसले के पीछे ऐसी कोई खास वजह नहीं थी, जैसा सवाल में पूछा जा रहा था।

    मल्हार ने बताया कि नाना पाटेकर के साथ यह घटना सुबह जल्दी हुई थी और तब तक काफी समय बीत चुका था। इसलिए परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई विशेष कारण नहीं था कि अंतिम संस्कार रात में ही करना जरूरी था या अगले दिन नहीं किया जा सकता था। परिवार ने परिस्थितियों को देखते हुए उसी दिन उन्हें विदाई देने का निर्णय लिया। इस तरह मल्हार ने देर रात अंतिम संस्कार किए जाने को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया।

    नाना पाटेकर को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनके अंतिम सफर के दौरान ‘नाना साहेब अमर रहें’ के नारे भी सुनाई दिए। अंतिम संस्कार में अभिनेता जैकी श्रॉफ, फिल्म निर्देशक अनिल शर्मा, प्रवीण तरड़े, ‘क्रांतिवीर’ के निर्देशक मेहुल कुमार, लेखक किरण और महेश मांजरेकर की पत्नी मेधा मांजरेकर सहित कई लोग शामिल हुए। नाना के चाहने वाले और करीबी भी उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे। उनके निधन से फिल्म जगत में शोक का माहौल रहा।

    नाना पाटेकर की तबीयत गोवा स्थित उनके फ्लैट में बिगड़ी थी। जानकारी के मुताबिक, उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ था। इसके बाद उनके बेटे मल्हार के अनुसार, घर पर मेडिकल टीम बुलाई गई। टीम जब पहुंची, तब नाना बेहोशी की हालत में थे। उन्हें बचाने की कोशिश की गई और फिर तुरंत मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी जान बचाने के लिए प्रयास जारी रखे।

    अस्पताल में डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर देकर नाना पाटेकर को बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद सुबह 5 बजकर 20 मिनट पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 75 वर्ष की उम्र में उनके निधन के बाद परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया। मल्हार के बयान के अनुसार, सुबह घटना होने और काफी समय बीत जाने के कारण परिवार ने देर रात अंतिम विदाई दी। अंतिम संस्कार में मौजूद लोगों ने नाना को श्रद्धांजलि दी और उन्हें याद किया।

  • नाना पाटेकर का देर रात क्यों हुआ अंतिम संस्कार? बेटे मल्हार ने बताई वजह, 75 साल की उम्र में हुआ निधन

    नाना पाटेकर का देर रात क्यों हुआ अंतिम संस्कार? बेटे मल्हार ने बताई वजह, 75 साल की उम्र में हुआ निधन

    नई दिल्ली: हिंदी और मराठी सिनेमा के अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया। गोवा में उनके निधन के बाद गुरुवार, 8 अक्टूबर की देर रात उनका अंतिम संस्कार किया गया। बेटे मल्हार पाटेकर और पत्नी ने उन्हें मुखाग्नि दी। नाना पाटेकर के अंतिम दर्शन और विदाई के लिए उनके परिवार के सदस्यों, करीबी लोगों और फिल्म जगत से जुड़े कई कलाकारों ने पहुंचकर श्रद्धांजलि दी। हालांकि, देर रात अंतिम संस्कार किए जाने को लेकर सवाल भी उठे। इस पर उनके बेटे मल्हार ने स्पष्ट किया कि परिवार ने किसी विशेष वजह से अंतिम संस्कार में देरी नहीं की थी। उन्होंने बताया कि नाना पाटेकर के निधन की घटना सुबह जल्दी हुई थी और तब तक काफी समय बीत चुका था। इसी कारण परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया।

    नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार के बाद उनके बेटे मल्हार से पूछा गया कि जब फिल्म जगत के कई लोग और अन्य परिचित उन्हें अंतिम विदाई देना चाहते थे, तो अंतिम संस्कार इतनी देर रात क्यों किया गया। सवाल में यह भी कहा गया कि देर होने के कारण फिल्म उद्योग से जुड़े कई लोग अंतिम दर्शन के लिए नहीं पहुंच सके। इस पर मल्हार ने कहा कि ऐसी कोई विशेष बात नहीं थी कि अंतिम संस्कार देर रात ही करना जरूरी था। उन्होंने बताया कि परिवार के सामने ऐसा कोई कारण नहीं था कि अंतिम संस्कार अगले दिन किया जाता। चूंकि घटना सुबह जल्दी हुई थी और तब तक काफी समय बीत चुका था, इसलिए परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। उनके बयान से स्पष्ट हुआ कि अंतिम विदाई का समय परिवार के फैसले के अनुसार तय किया गया था।

    नाना पाटेकर को अंतिम विदाई राजकीय सम्मान के साथ दी गई। उनके अंतिम सफर के दौरान मौजूद लोगों ने श्रद्धांजलि दी और ‘नाना साहेब अमर रहें’ के नारे भी सुनाई दिए। उनके निधन से फिल्म जगत में शोक का माहौल रहा। अंतिम संस्कार में अभिनेता जैकी श्रॉफ, फिल्म निर्देशक अनिल शर्मा, प्रवीण तरड़े, फिल्म ‘क्रांतिवीर’ के निर्देशक मेहुल कुमार, ‘नटसम्राट’ के लेखक किरण और महेश मांजरेकर की पत्नी मेधा मांजरेकर सहित कई लोग पहुंचे। इन लोगों ने नाना पाटेकर को अंतिम विदाई दी। उनके लंबे फिल्मी करियर और अभिनय के कारण उन्हें जानने वाले लोगों के लिए उनका निधन एक बड़ी क्षति है। अंतिम संस्कार में शामिल लोगों ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

    नाना पाटेकर का निधन गोवा स्थित उनके फ्लैट में सीने में तेज दर्द होने के बाद हुआ। जानकारी के मुताबिक, उनकी तबीयत बिगड़ने पर घर पर मेडिकल टीम पहुंची। उस समय वह बेहोशी की हालत में मिले। उन्हें बचाने के लिए चिकित्सकीय प्रयास किए गए और इसके बाद तुरंत मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश जारी रखी। बताया गया कि डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर दिया, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद सुबह 5 बजकर 20 मिनट पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। नाना पाटेकर 75 वर्ष के थे। उनके निधन के बाद परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का फैसला किया और देर रात उन्हें अंतिम विदाई दी गई। उनके बेटे मल्हार ने अंतिम संस्कार के समय को लेकर उठे सवालों पर परिवार का पक्ष स्पष्ट किया।

  • भिंड के शहीद हवलदार की अंतिम विदाई: 6 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि, पत्नी ने रोना-धोना बंद करने की दी हिम्मत

    भिंड के शहीद हवलदार की अंतिम विदाई: 6 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि, पत्नी ने रोना-धोना बंद करने की दी हिम्मत

    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में सर्चिंग ऑपरेशन के दौरान हुए हादसे में शहीद हुए भिंड के हवलदार शैलेंद्र सिंह भदौरिया का शनिवार सुबह उनके पैतृक गांव चितावली (अटेर) में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान शहीद के 6 वर्षीय बेटे भावेश ने पिता को मुखाग्नि दी, वहीं शहीद की पत्नी शिवानी ने अदम्य साहस दिखाते हुए लोगों से कहा, “रोना-धोना बंद करो, कुछ नहीं होगा।”

    जब शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

    सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर सलामी दी। डोडा में सेना का वाहन खाई में गिरने से शैलेंद्र सिंह समेत 10 जवान शहीद हुए थे।

    पत्नी का दर्दनाक लेकिन साहसी रुख
    शहीद की पत्नी शिवानी ने अपने पति के शव के पास बैठकर बार-बार बलाएं लेकर अपने पति के गाल चूमा और सभी को हिम्मत दी। उनका यह साहस देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। उन्होंने बताया कि 21 जनवरी की रात शैलेंद्र से आखिरी कॉल पर शैलेंद्र ने कहा था कि उन्हें डर लग रहा है। उन्होंने सपना देखा था कि उनकी बेटियाँ पढ़ाई के बावजूद सफल नहीं हो रही हैं, और परिवार शादी के लिए परेशान है। शिवानी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि रिटायरमेंट के बाद प्लॉट बेचकर बेटियों की शादी कर देंगे, लेकिन शैलेंद्र ने कहा, “मुझे बहुत डर लग रहा है, कुछ होने वाला है।”

    इसके बाद उनकी शहादत की खबर आई।

    परिवार की शौर्य गाथा: दादा भी थे शहीद
    शैलेंद्र के पिता हनुमत सिंह ने गर्व और आंसूओं के साथ बताया कि उनके तीनों बेटे सेना में हैं और शैलेंद्र उनके दूसरे बेटे थे। उन्होंने कहा कि उनका दादा भी 1972 में शहीद हुए थे, और आज उनका बेटा भी देश के लिए शहीद हुआ है।

    शहीद के बड़े भाई देव सिंह ने कहा कि परिवार को दुख है, लेकिन फौजी होने पर गर्व भी है। उन्होंने बताया कि वे तीनों भाई सेना में सेवा कर चुके हैं और देश रक्षा में शैलेंद्र की शहादत पर उन्हें गर्व है।

    अंतिम यात्रा में भावुक माहौल
    अंतिम यात्रा के दौरान लोगों ने फूलों की वर्षा की और “शैलेंद्र सिंह भदौरिया अमर रहें” के नारे लगाए। शमशान घाट पर जब मासूम भावेश ने पिता का शव देखा तो वह फूट-फूटकर रो पड़ा और मुखाग्नि देने से पहले पिता से लिपट गया। इस मौके पर मेजर अक्षय कुमार, एसडीएम शिवानी अग्रवाल, तहसीलदार जगन सिंह कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

    ब्रिगेडियर अमित वर्मा ने कहा कि पूरा आर्मी परिवार शहीद के परिजनों के साथ खड़ा है और परिवार को मिलने वाली सभी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।