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  • तेज रफ्तार बनी हादसे की वजह चाय की गुमटी में घुसी कार सीसीटीवी के आधार पर ड्राइवर की तलाश जारी

    तेज रफ्तार बनी हादसे की वजह चाय की गुमटी में घुसी कार सीसीटीवी के आधार पर ड्राइवर की तलाश जारी


    इंदौर । इंदौर में तेज रफ्तार का एक और मामला सामने आया है जहां रविवार तड़के एक कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बनी चाय की गुमटी में जा घुसी। हादसे के बाद चालक ने कार को बाहर निकालने की कोशिश की लेकिन रिवर्स लेते समय वहां खड़ी दो बाइकों को भी टक्कर मार दी। घटना के बाद इलाके में अफरा तफरी मच गई और लोगों ने चालक को पकड़ने का प्रयास किया लेकिन वह कार लेकर मौके से फरार हो गया। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर वाहन और चालक की पहचान करने में जुटी है।

    यह हादसा लसूडिया थाना क्षेत्र के स्कीम नंबर 78 स्थित टेलीपरफॉर्मेंस कार्यालय के बाहर हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तेज रफ्तार से आ रही एक अर्टिगा कार अचानक असंतुलित हो गई और सीधे सड़क किनारे स्थित चाय की गुमटी में जा घुसी। टक्कर इतनी तेज थी कि गुमटी को नुकसान पहुंचा और आसपास मौजूद लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि चालक नशे की हालत में था। हादसे के बाद उसने कार को रिवर्स कर निकालने की कोशिश की लेकिन इस दौरान पास में खड़ी दो मोटरसाइकिलें उसकी चपेट में आ गईं। इतना ही नहीं कार सड़क किनारे खड़े लोगों की ओर भी बढ़ गई जिससे लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर उधर भागने लगे। हालांकि इस घटना में किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है।

    घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों ने चालक को रोकने और पकड़ने की कोशिश की लेकिन वह तेजी से कार लेकर वहां से भाग निकला। इसके बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जुटाई।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार सीसीटीवी फुटेज की मदद से कार के पंजीकरण नंबर और चालक की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। यदि जांच में यह पुष्टि होती है कि चालक नशे की हालत में वाहन चला रहा था तो उसके खिलाफ संबंधित धाराओं में सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही दुर्घटना के कारण हुए नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है।

    यह घटना एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाह ड्राइविंग के खतरों की याद दिलाती है। पुलिस ने वाहन चालकों से यातायात नियमों का पालन करने और नशे की हालत में वाहन नहीं चलाने की अपील की है ताकि ऐसे हादसों से बचा जा सके।

  • इंदौर में कारोबारी और आरटीआई कार्यकर्ता के विवाद ने पकड़ा तूल, शिकायतकर्ता पर ही एफआईआर से उठे सवाल

    इंदौर में कारोबारी और आरटीआई कार्यकर्ता के विवाद ने पकड़ा तूल, शिकायतकर्ता पर ही एफआईआर से उठे सवाल


    मध्य प्रदेश
    के इंदौर में एक शराब कारोबारी और आरटीआई कार्यकर्ता के बीच विवाद अब कानूनी और प्रशासनिक चर्चा का विषय बन गया है। दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ लगाए गए आरोपों के बीच पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। मामले की विशेष चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि ब्लैकमेलिंग और कथित रंगदारी की शिकायत करने वाले व्यक्ति के खिलाफ ही पहले मामला दर्ज हो गया, जबकि उसकी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, शराब कारोबारी सूरज रजक ने स्थानीय पुलिस थाने में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया था कि एक आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा उनके खिलाफ सोशल मीडिया और व्हाट्सएप समूहों में कथित रूप से मानहानिकारक सामग्री प्रसारित की जा रही है। शिकायत में यह भी दावा किया गया कि उनसे कथित रूप से बड़ी धनराशि की मांग की गई और भुगतान नहीं करने पर और अधिक सामग्री सार्वजनिक करने की चेतावनी दी गई।

    कारोबारी का आरोप है कि उन्होंने पुलिस से ब्लैकमेलिंग, मानहानि और सूचना प्रौद्योगिकी कानून से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की थी। उनका कहना है कि शिकायत देने के बावजूद कई दिनों तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसी दौरान दूसरे पक्ष की ओर से भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर कारोबारी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया।

    इस घटनाक्रम के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया। कारोबारी का कहना है कि उन्होंने सबसे पहले पुलिस को शिकायत दी थी और अपनी बात रखने के लिए कानूनी प्रक्रिया का सहारा लिया था। उनका आरोप है कि उनकी शिकायत पर कार्रवाई लंबित रहने के दौरान उनके खिलाफ दर्ज हुए मामले ने पूरे घटनाक्रम को विवादास्पद बना दिया है। वहीं दूसरे पक्ष की शिकायत के आधार पर दर्ज प्रकरण अब जांच का विषय बना हुआ है।

    मामले में दोनों पक्षों के आरोप और प्रत्यारोपों के बीच पुलिस की भूमिका को लेकर भी चर्चा हो रही है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि यदि किसी व्यक्ति ने पहले गंभीर आरोपों के साथ शिकायत दर्ज कराई थी, तो उसकी शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई और किस आधार पर दूसरे पक्ष की शिकायत पर पहले प्रकरण दर्ज किया गया। हालांकि पुलिस की ओर से अभी तक विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

    विवाद के दौरान आरटीआई कार्यकर्ता को लेकर भी विभिन्न प्रकार के दावे सामने आए हैं। कुछ सूत्रों के अनुसार उन पर पूर्व में भी सूचना के अधिकार से जुड़े मामलों को लेकर दबाव बनाने जैसे आरोप लगाए जाते रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही संबंधित पक्ष की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। इसलिए इन आरोपों को जांच पूरी होने तक प्रमाणित नहीं माना जा सकता।

    फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों द्वारा दिए गए दस्तावेजों, शिकायतों, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध तथ्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। इस बीच यह मामला शहर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और लोग जांच के निष्कर्ष का इंतजार कर रहे हैं।