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  • महाराष्ट्र के लातूर में युवक को निर्वस्त्र कर बेल्ट से पीटा, निजी अंगों पर पेट्रोल डालने के आरोप से मचा हड़कंप

    महाराष्ट्र के लातूर में युवक को निर्वस्त्र कर बेल्ट से पीटा, निजी अंगों पर पेट्रोल डालने के आरोप से मचा हड़कंप

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के लातूर में एक युवक के साथ बर्बरता से मारपीट करने का मामला सामने आया है। युवक को निर्वस्त्र कर बेल्ट से पीटा गया और उसके निजी अंगों पर पेट्रोल डालकर हमला किया गया। घटना का वीडियो हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यह घटना करीब दो महीने पुरानी है।

    सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कुछ लोग एक युवक को घेरकर उसके साथ मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में युवक के कपड़े उतारकर उसे बेल्ट से पीटते हुए देखा जा सकता है। हमलावर उस पर लात-घूंसे भी बरसाते नजर आ रहे हैं। आरोप है कि मारपीट के दौरान युवक के निजी अंगों पर पेट्रोल भी डाला गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने वीडियो सामने आने के बाद मामले की पड़ताल शुरू कर दी है।

    बताया जा रहा है कि हमलावरों ने मारपीट की पूरी घटना को मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किया था। इसके बाद वीडियो को सोशल मीडिया समूहों में साझा कर दिया गया, जहां से यह फैलता हुआ लोगों तक पहुंचा। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस का ध्यान इस घटना की ओर गया और जांच की प्रक्रिया शुरू की गई।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि युवक के साथ हुई यह घटना लगभग दो महीने पहले की है। मारपीट और हमले के बाद पीड़ित युवक कथित तौर पर उस जगह को छोड़कर चला गया था। घटना के बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। अब वीडियो सामने आने के बाद पुलिस उसकी पहचान कर उससे संपर्क करने की कोशिश कर रही है, ताकि मामले से जुड़ी जानकारी जुटाई जा सके।

    एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारी ने बताया कि पीड़ित युवक की पहचान कर ली गई है और उसे अपना बयान दर्ज कराने के लिए पुलिस स्टेशन आने को कहा गया है। पुलिस का मानना है कि पीड़ित का बयान दर्ज होने के बाद घटना से जुड़ी परिस्थितियों और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने में मदद मिलेगी।

    फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि युवक पर हमला किस वजह से किया गया था। इसके साथ ही उन लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है, जो कथित तौर पर मारपीट में शामिल थे। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि घटना का वीडियो रिकॉर्ड करने और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने में किन लोगों की भूमिका रही।

    इस मामले में अभी तक पीड़ित की ओर से औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। ऐसे में पुलिस की जांच में उसका बयान अहम माना जा रहा है। बयान दर्ज होने के बाद ही हमले की वजह, घटनाक्रम और इसमें शामिल लोगों के संबंध में अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी। फिलहाल पुलिस वायरल वीडियो और उपलब्ध शुरुआती जानकारी के आधार पर मामले की जांच कर रही है।

  • लातूर में सूखे की मार: पशुओं के चारे का संकट, स्कूली बच्चों ने गुल्लक तोड़कर जुटाए 2 लाख रुपये

    लातूर में सूखे की मार: पशुओं के चारे का संकट, स्कूली बच्चों ने गुल्लक तोड़कर जुटाए 2 लाख रुपये


    लातूर।
    महाराष्ट्र के लातूर जिले में सूखे ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में फसल बचाना चुनौती बन गया है, वहीं पशुओं के लिए हरे चारे की कमी भी गंभीर संकट का रूप ले रही है। ऐसे मुश्किल समय में अहमदपुर के स्कूली बच्चों ने संवेदनशीलता की मिसाल पेश की है। डॉ. हरिवंशराय बच्चन विद्यालय के प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों ने अपनी गुल्लक तोड़कर दो लाख रुपये जुटाए और मुख्यमंत्री राहत कोष में दान कर दिए। बच्चों की इस पहल ने सूखा प्रभावित किसानों के लिए उम्मीद की किरण जगाई है।

    गुल्लक तोड़कर जुटाई रकम, मुख्यमंत्री को सौंपा चेक

    अहमदपुर के स्कूली बच्चों ने अपनी छोटी-छोटी बचत को सूखा पीड़ितों की मदद के लिए समर्पित कर दिया। बच्चों ने गुल्लकों में जमा रकम इकट्ठा कर कुल दो लाख रुपये जुटाए। इसके बाद मुंबई में चेक के माध्यम से यह राशि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपी गई।

    बच्चों की इस पहल का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि सूखे से जूझ रहे किसान अब अपनी फसलों को अनाज के लिए बचाने के बजाय पशुओं का पेट भरने के लिए काटने को मजबूर हैं।

    पशुओं को बचाने के लिए गन्ने की फसल काट रहे किसान

    लातूर के काव्हा गांव के किसान नारायण गुडे के पास सात भैंसें, दो गायें और बछड़े हैं। बारिश नहीं होने के कारण खेतों में हरा चारा खत्म हो गया है। पशुओं को भूख से बचाने के लिए उन्हें अब गन्ने की खड़ी फसल काटनी पड़ रही है।

    यह स्थिति बताती है कि सूखे का असर केवल कृषि उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि पशुपालन पर निर्भर किसानों की आजीविका भी संकट में है। चारे की कमी के कारण किसानों के सामने अपने पशुओं को बचाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।

    लोअर तेरणा परियोजना में महज 21 प्रतिशत पानी बचा

    लातूर जिले में जल संकट की गंभीरता का अंदाजा लोअर तेरणा परियोजना में घटते जलस्तर से लगाया जा सकता है। परियोजना में पानी घटकर कुल क्षमता का महज 21 प्रतिशत रह गया है। प्रशासन ने जलाशय के पानी को पेयजल के लिए सुरक्षित रखने का निर्णय लिया है। खेती के लिए अवैध रूप से पानी उठाने पर निगरानी भी बढ़ाई गई है।

    लातूर के जिलाधिकारी ने स्थिति की समीक्षा की है। पानी की सीमित उपलब्धता के बीच प्रशासन के सामने पेयजल आपूर्ति बनाए रखने के साथ सूखा प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने की चुनौती है।

    महाराष्ट्र के 265 तालुके सूखा प्रभावित घोषित

    महाराष्ट्र सरकार ने सितंबर के अंत में राज्य के कुल 358 तालुकों में से 265 को सूखा प्रभावित घोषित किया था। यह संख्या राज्य के लगभग 74 प्रतिशत तालुकों के बराबर है। ये तालुके 32 जिलों में फैले हुए हैं।

    सरकार की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान का आकलन और राहत संबंधी कदम शुरू किए गए हैं। इनमें फसल ऋण के पुनर्गठन, कृषि ऋण की वसूली स्थगित करने, भूमि राजस्व में रियायत देने और कृषि पंपों के बिजली बिल में राहत जैसे उपाय शामिल हैं।

    सूखे की इस व्यापक मार के बीच अहमदपुर के बच्चों का दो लाख रुपये का योगदान केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि संकट से जूझ रहे किसानों और पशुपालकों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश भी है।

  • NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI का बड़ा खुलासा, विशेषज्ञों ने परीक्षा से पहले छात्रों तक पहुंचाए सवाल

    NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI का बड़ा खुलासा, विशेषज्ञों ने परीक्षा से पहले छात्रों तक पहुंचाए सवाल

    नई दिल्ली । NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच एजेंसी ने परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाले दावे किए हैं। जांच के अनुसार प्रश्नपत्र किसी प्रिंटिंग प्रेस से सीधे बाहर नहीं निकला, बल्कि प्रश्नों की जांच, अनुवाद और सुधार की प्रक्रिया से जुड़े कुछ लोगों ने अपने अधिकार का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया। एजेंसी की चार्जशीट में कई लोगों के नाम सामने आए हैं और मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में होनी है।

    जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, प्रश्नपत्र तैयार करने और उसकी समीक्षा से जुड़ी प्रक्रिया के दौरान कुछ विषय विशेषज्ञों के पास परीक्षा से पहले प्रश्नों तक पहुंच थी। आरोप है कि इसी दौरान बॉटनी, जूलॉजी, केमिस्ट्री और फिजिक्स से जुड़े कुछ विशेषज्ञों ने प्रश्नों को निर्धारित प्रक्रिया से बाहर पहुंचाया। एजेंसी का मानना है कि उन्हें मिली गोपनीय जानकारी और जिम्मेदारी का इस्तेमाल परीक्षा की निष्पक्षता को प्रभावित करने के लिए किया गया।

    जांच का एक अहम हिस्सा पुणे में आयोजित कथित गुप्त पढ़ाई के सत्रों से जुड़ा है। एजेंसी के अनुसार कुछ छात्रों को परीक्षा से पहले ऐसे स्थानों पर बुलाया गया, जहां उन्हें संभावित प्रश्न, उनके चार विकल्प और सही उत्तर बताए गए। इन सवालों को छात्रों से हाथ से लिखवाने की बात भी जांच में सामने आई है। कथित तौर पर ऐसा इसलिए किया गया ताकि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल से बचा जा सके और गतिविधि का डिजिटल रिकॉर्ड न बने।

    सीबीआई की जांच के अनुसार कुछ प्रश्नों की तस्वीरें भी बाद में ली गईं और उन्हें दूसरे लोगों तक पहुंचाया गया। जांच में इस पूरे नेटवर्क में पैसों के लेन-देन की आशंका भी सामने आई है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्न कितने लोगों तक पहुंचे और इस प्रक्रिया में कौन-कौन लोग सीधे या परोक्ष रूप से शामिल थे।

    मामले में लातूर से जुड़ी गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है। जांच के मुताबिक कुछ छात्रों को अस्पताल बुलाकर कथित तौर पर पूरे प्रश्न याद कराए गए। इसके बाद लीक हुए प्रश्नों की एक पीडीएफ तैयार की गई और उसे टेलीग्राम के माध्यम से आगे भेजा गया। जांच एजेंसी का दावा है कि यह फाइल कई लोगों तक पहुंची और बाद में लाखों रुपये के बदले दूसरे व्यक्ति को दी गई।

    जांच में सामने आया है कि कथित तौर पर प्रश्नों के इस नेटवर्क में 10 से 12 लाख रुपये तक के लेन-देन की बात सामने आई है। हालांकि, पूरे मामले में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका और आर्थिक लेन-देन की वास्तविक स्थिति जांच के आगे बढ़ने के साथ स्पष्ट होगी।

    NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा में प्रश्नों की गोपनीयता और परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में यदि जांच में सामने आए आरोप अदालत में साबित होते हैं, तो यह परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद गंभीर खामियों की ओर संकेत कर सकते हैं। फिलहाल सीबीआई पूरे नेटवर्क, प्रश्नों के स्रोत और उन्हें आगे पहुंचाने वाले लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। मामले में अदालत की अगली सुनवाई के बाद आगे की कानूनी स्थिति भी स्पष्ट होने की उम्मीद है।