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  • होटलों में सफेद तौलिया रखने के पीछे सफाई, लॉन्ड्री और मेहमानों के भरोसे से जुड़े ये व्यावहारिक कारण होते हैं

    होटलों में सफेद तौलिया रखने के पीछे सफाई, लॉन्ड्री और मेहमानों के भरोसे से जुड़े ये व्यावहारिक कारण होते हैं


    नई दिल्ली ।होटल में ठहरने के दौरान सफेद तौलिया एक सामान्य दृश्य होता है। बाथरूम में हाथ पोंछने से लेकर नहाने के लिए इस्तेमाल होने वाले तौलियों का रंग अक्सर सफेद रखा जाता है। इसके पीछे केवल पसंद या सजावट की वजह नहीं होती, बल्कि सफाई, लॉन्ड्री व्यवस्था, रखरखाव और मेहमानों के अनुभव से जुड़े व्यावहारिक कारण भी होते हैं।

    होटल में रोज बड़ी संख्या में तौलिए इस्तेमाल होते हैं और हर मेहमान के बाद उन्हें साफ करके दोबारा तैयार करना पड़ता है। सफेद रंग का सबसे बड़ा लाभ यह है कि उस पर गंदगी, दाग या किसी तरह का निशान आसानी से दिखाई देता है। यदि तौलिया ठीक से साफ नहीं हुआ हो या उस पर दाग रह गया हो तो होटल का कर्मचारी उसे जल्दी पहचान सकता है और दोबारा धुलाई के लिए भेज सकता है।

    रंगीन तौलियों में कुछ दाग या हल्की गंदगी कम दिखाई दे सकती है। ऐसे में सफेद तौलिया होटल की सफाई व्यवस्था में एक तरह के दृश्य निरीक्षण का काम करता है। इससे हाउसकीपिंग टीम को इस्तेमाल किए गए लिनेन की स्थिति समझने और साफ तौलिया उपलब्ध कराने में सुविधा होती है।

    सफेद रंग चुनने का एक महत्वपूर्ण कारण लॉन्ड्री प्रक्रिया भी है। होटल में तौलियों की संख्या काफी अधिक होती है और उन्हें नियमित रूप से उच्च तापमान वाली धुलाई तथा जरूरत के अनुसार उपयुक्त सफाई उत्पादों से धोया जाता है। सफेद कपड़े पर दाग हटाने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान होती है और रंग फीका पड़ने की चिंता रंगीन कपड़ों की तुलना में कम रहती है।

    होटल में सफेद तौलिए का इस्तेमाल इसलिए भी सुविधाजनक माना जाता है क्योंकि सभी तौलिए एक ही रंग के होने पर उन्हें एक साथ धोना आसान होता है। अलग-अलग रंगों के लिनेन को रंग छोड़ने या रंग मिल जाने की आशंका के कारण अलग-अलग संभालना पड़ सकता है। एक समान सफेद लिनेन बड़े होटल की लॉन्ड्री व्यवस्था को व्यवस्थित रखने में मदद करता है।

    इसके अलावा सफेद रंग मेहमानों के मन में स्वच्छता और ताजगी की भावना पैदा करता है। सफेद चादर, तकिया और तौलिया कमरे को साफ, सादा और व्यवस्थित दिखाने में मदद करते हैं। होटल में प्रवेश करने वाले मेहमान के लिए यह दृश्य अनुभव महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि कमरे की साफ-सफाई का आकलन अक्सर दिखाई देने वाली चीजों से ही किया जाता है।

    सफेद तौलिया होटल की पेशेवर छवि से भी जुड़ा हुआ है। अलग-अलग कमरों में एक जैसा लिनेन इस्तेमाल करने से होटल की व्यवस्था एकरूप दिखाई देती है। इससे हाउसकीपिंग, स्टॉक प्रबंधन और तौलियों की गुणवत्ता की निगरानी भी आसान हो सकती है। साथ ही, एक ही रंग के लिनेन से कर्मचारियों को इस्तेमाल, धुलाई और दोबारा कमरे में रखने की प्रक्रिया में पहचान संबंधी सुविधा मिलती है।

    हालांकि हर होटल में सफेद तौलिया होना अनिवार्य नियम नहीं है। कुछ होटल अपनी सजावट, ब्रांड पहचान या डिजाइन के अनुसार दूसरे रंगों के तौलिए भी इस्तेमाल करते हैं। फिर भी सफेद रंग अपनी साफ-सफाई दिखाने, लॉन्ड्री प्रक्रिया को सरल रखने और मेहमानों को ताजगी का एहसास कराने जैसे कारणों से होटल उद्योग में लंबे समय से लोकप्रिय बना हुआ है।

  • वॉशिंग मशीन में ज्यादा डिटर्जेंट डालना कपड़ों की सफाई नहीं बढ़ाता, मशीन के ड्रम और ड्रेनेज सिस्टम को पहुंचा सकता है नुकसान

    वॉशिंग मशीन में ज्यादा डिटर्जेंट डालना कपड़ों की सफाई नहीं बढ़ाता, मशीन के ड्रम और ड्रेनेज सिस्टम को पहुंचा सकता है नुकसान

    नई दिल्ली । वॉशिंग मशीन ने कपड़े धोने का काम काफी आसान कर दिया है, लेकिन मशीन का सही इस्तेमाल न किया जाए तो सुविधा देने वाला यह उपकरण धीरे-धीरे खराब भी हो सकता है। ऐसी ही एक आम गलती जरूरत से ज्यादा डिटर्जेंट डालना है। कई लोगों को लगता है कि अधिक डिटर्जेंट से कपड़े ज्यादा साफ और चमकदार होंगे, जबकि वास्तविकता में ज्यादा डिटर्जेंट सफाई बढ़ाने के बजाय कपड़ों और मशीन दोनों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।

    वॉशिंग मशीन में आवश्यकता से अधिक डिटर्जेंट डालने पर सामान्य से ज्यादा झाग बन सकता है। यह झाग कपड़ों के रेशों के बीच फंस सकता है और कई बार पूरी तरह पानी के साथ बाहर नहीं निकल पाता। इसका असर कपड़ों पर सफेद अवशेष, कड़ापन या अजीब गंध के रूप में दिखाई दे सकता है। खासकर गहरे रंग के कपड़ों पर डिटर्जेंट के निशान आसानी से नजर आ सकते हैं।

    अतिरिक्त डिटर्जेंट का असर केवल कपड़ों तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक ज्यादा डिटर्जेंट इस्तेमाल करने पर इसके अवशेष मशीन के ड्रम, पाइप, फिल्टर और ड्रेनेज सिस्टम के कुछ हिस्सों में जमा हो सकते हैं। इससे पानी की निकासी प्रभावित हो सकती है और मशीन को अपना सामान्य चक्र पूरा करने में परेशानी हो सकती है।

    मशीन के अंदर लगातार नमी और डिटर्जेंट के अवशेष जमा होने से रबर गैसकेट और दूसरे हिस्सों के आसपास गंदगी तथा सूक्ष्मजीवों की वृद्धि के लिए अनुकूल वातावरण भी बन सकता है। इसका एक संकेत मशीन के अंदर से आने वाली बदबू हो सकता है। खासकर फ्रंट लोड मशीन में दरवाजे के आसपास मौजूद रबर सील की नियमित सफाई नहीं करने पर यह समस्या अधिक महसूस हो सकती है।

    डिटर्जेंट की सही मात्रा हर स्थिति में एक जैसी नहीं होती। यह मशीन के प्रकार, कपड़ों की संख्या, पानी की गुणवत्ता और कपड़ों पर मौजूद गंदगी की मात्रा पर निर्भर करती है। इसलिए डिटर्जेंट के पैकेट पर दिए गए निर्देश और वॉशिंग मशीन के निर्माता की सलाह को प्राथमिकता देना बेहतर होता है।

    फ्रंट लोड मशीनें सामान्यतः कम पानी का इस्तेमाल करती हैं। इसलिए इनमें अत्यधिक डिटर्जेंट डालने से झाग बनने की समस्या ज्यादा हो सकती है। दूसरी ओर टॉप लोड मशीनों में पानी की मात्रा अलग होती है, इसलिए डिटर्जेंट की जरूरत भी मशीन और उसके वॉश प्रोग्राम के अनुसार बदल सकती है।

    अगर कपड़े बहुत ज्यादा गंदे हैं तो केवल डिटर्जेंट की मात्रा बढ़ाना सही तरीका नहीं है। कपड़ों को उपयुक्त तरीके से पहले भिगोना या मशीन में सही वॉश प्रोग्राम चुनना बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे कम डिटर्जेंट में भी प्रभावी सफाई मिल सकती है।

    मशीन की बेहतर कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए डिटर्जेंट डालने वाले ड्रॉअर, फिल्टर और रबर सील की समय-समय पर सफाई करना भी जरूरी है। वॉशिंग साइकल पूरा होने के बाद मशीन का दरवाजा कुछ समय खुला रखने से अंदर की नमी कम होने में मदद मिल सकती है।

    इसलिए अगली बार कपड़े ज्यादा साफ करने के इरादे से डिटर्जेंट की मात्रा बढ़ाने से पहले मशीन और डिटर्जेंट के निर्देश जरूर देखें। सही मात्रा में डिटर्जेंट का इस्तेमाल न केवल कपड़ों पर अवशेष और बदबू की समस्या कम कर सकता है, बल्कि मशीन की सफाई व्यवस्था और लंबे समय तक उसकी कार्यक्षमता बनाए रखने में भी मदद कर सकता है।