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  • मंदिर में संत की हत्या से भड़का गुस्सा महोबा में नामदेव समाज ने दोषियों की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की उठाई मांग

    मंदिर में संत की हत्या से भड़का गुस्सा महोबा में नामदेव समाज ने दोषियों की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की उठाई मांग


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में मंदिर के पुजारी और संत सच्चिदानंद महाराज की हत्या के बाद नामदेव समाज में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। घटना के विरोध में अखंड भारतीय नामदेव महासभा के कार्यकर्ताओं ने महोबा में विरोध प्रदर्शन करते हुए अपर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा और दोषियों के खिलाफ त्वरित तथा कठोर कार्रवाई की मांग की। संगठन ने कहा कि इस जघन्य वारदात ने पूरे समाज की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।

    बताया गया कि बांदा जिले के तिंदवारा गांव स्थित त्रिदेव शनि मंदिर में रहने वाले 68 वर्षीय संत बाल ब्रह्मचारी सच्चिदानंद महाराज मंदिर की छत पर विश्राम कर रहे थे। इसी दौरान देर रात कुछ अज्ञात हमलावर वहां पहुंचे और लाठी डंडों तथा धारदार हथियार से उन पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल संत को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया लेकिन इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया।

    घटना ऐसे समय हुई जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुंदेलखंड के दौरे पर थे। ऐसे में कानून व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं। नामदेव समाज के लोगों का कहना है कि प्रदेश में संत और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और इस तरह की घटना बेहद चिंताजनक है।

    महोबा में अखंड भारतीय नामदेव महासभा के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष अखिलेन्द्र नामदेव के नेतृत्व में बड़ी संख्या में समाज के लोग एकत्र हुए। उन्होंने राष्ट्रपति प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित पांच सूत्रीय ज्ञापन अपर जिलाधिकारी को सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की घटना को अंजाम देने की हिम्मत न कर सके।

    संगठन ने यह भी मांग उठाई कि यदि आरोपी दोषी पाए जाते हैं तो उनके अवैध निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि घटना के कई दिन बाद भी पुलिस हत्या के पीछे की असली वजह का खुलासा नहीं कर सकी है और अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होना जांच की धीमी रफ्तार को दर्शाता है।

    प्रदर्शन के दौरान समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि मंदिर जैसे पवित्र स्थल में एक संत की हत्या केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं बल्कि समाज की आस्था पर भी चोट है। उन्होंने सरकार से निष्पक्ष और तेज जांच कर दोषियों को जल्द सजा दिलाने की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

  • सिक्किम पुलिस को ‘राष्ट्रपति का निशान’, मुर्मु ने कहा– जनता के साथ भरोसा बढ़ाना जरूरी

    सिक्किम पुलिस को ‘राष्ट्रपति का निशान’, मुर्मु ने कहा– जनता के साथ भरोसा बढ़ाना जरूरी


    नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को सिक्किम की राजधानी गंगटोक में सिक्किम पुलिस को ‘राष्ट्रपति का निशान’ प्रदान किया। इस अवसर पर उन्होंने पुलिस बल से जुड़े सभी वर्तमान और पूर्व अधिकारियों व कर्मियों को बधाई दी और उनके योगदान की सराहना की।

    राष्ट्रपति ने कहा कि सिक्किम पुलिस ने वर्ष 1897 में अपनी स्थापना के बाद से राज्य में शांति, सुरक्षा और न्याय बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने इसे एक अनुशासित और जनसेवा से जुड़ा हुआ पुलिस बल बताया।

    अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मु ने भारत की पुलिस व्यवस्था के ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि औपनिवेशिक काल की व्यवस्था में पुलिस का मुख्य उद्देश्य जनता की सेवा नहीं बल्कि नियंत्रण और आदेशों का सख्ती से पालन कराना था। उन्होंने कहा कि इसी कारण पुलिस व्यवस्था में एक समय ‘गुलामी की मानसिकता’ विकसित हो गई थी, जिसे अब बदलने की आवश्यकता है।

    राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि देश को विकसित भारत के लक्ष्य की ओर ले जाने के लिए इस सोच से पूरी तरह मुक्त होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण हैं, ताकि नागरिकों का भरोसा मजबूत हो सके।

    उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस को अधिक नागरिक-हितैषी बनना चाहिए, जिससे लोग बिना भय के अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें। महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील व्यवहार को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर भी उन्होंने बल दिया।

    राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि पुलिस को केवल कानून लागू करने वाली संस्था नहीं, बल्कि समाज की सहयोगी और मार्गदर्शक की भूमिका निभानी चाहिए। इससे पुलिस और जनता के बीच विश्वास बढ़ेगा और समाज में सुरक्षा तथा कानून के प्रति सम्मान मजबूत होगा।

    उन्होंने सिक्किम पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में शांति और भाईचारे को बनाए रखने में इस बल का योगदान उल्लेखनीय रहा है। सिक्किम पुलिस ने अपने व्यवहार और पेशेवर कार्यशैली के जरिए जनता का विश्वास और सम्मान अर्जित किया है।