Tag: law and order

  • बीजापुर: सुरक्षा बलों और माओवादी के बीच मुठभेड़, दो माओवादी ढेर, हथियार बरामद

    बीजापुर: सुरक्षा बलों और माओवादी के बीच मुठभेड़, दो माओवादी ढेर, हथियार बरामद


    बीजापुर छत्तीसगढ़। आज इंद्रावती नदी के आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा बलों और माओवादी समूह के बीच जबरदस्त मुठभेड़ हुई जिसमें दो वर्दीधारी माओवादी मारे गए। यह मुठभेड़ उस समय हुई जब सुरक्षा बल नक्सल विरोधी अभियान के तहत इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। मौके से भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक भी बरामद किए गए हैं जो सुरक्षा बलों की सफलता को और बढ़ाते हैं।

    पुलिस अधीक्षक बीजापुर डॉ. जितेन्द्र यादव ने बताया कि इंद्रावती नदी क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों के बारे में सटीक सूचना मिलने पर एक संयुक्त टीम का गठन किया गया था। टीम में पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र बलों के जवान शामिल थे जो इलाके में सक्रिय माओवादी गुटों की जानकारी और संभावित खतरों का जायजा लेने के लिए रवाना हुए।

    जैसे ही सुबह सुरक्षा बलों ने सर्च अभियान शुरू किया माओवादी समूह ने अचानक हमला कर दिया। माओवादी अंधाधुंध फायरिंग करने लगे जिसके जवाब में सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की। दोनों ओर से करीब एक घंटे तक चली यह मुठभेड़ इलाके में भारी तनाव पैदा कर गई। सुरक्षा बलों की सटीक कार्रवाई और प्रशिक्षण ने माओवादी समूह के दो सदस्यों को ढेर कर दिया जबकि बाकी माओवादी भागने में सफल रहे।

    मुठभेड़ स्थल से बरामद किए गए हथियारों और विस्फोटकों में असलहे कारतूस ग्रेनेड और शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह बरामदगी माओवादी गतिविधियों की गंभीरता और उनकी योजनाओं के खतरनाक स्वरूप को दर्शाती है। सुरक्षा बलों ने कहा कि बरामद हथियार और विस्फोटक आगे के हमलों को रोकने में मददगार साबित होंगे।

    डॉ. जितेन्द्र यादव ने आगे बताया कि इस अभियान का उद्देश्य न केवल माओवादी तत्वों को निशाना बनाना था बल्कि इलाके में आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और नक्सली गतिविधियों को रोकना भी था। उन्होंने कहा कि बीजापुर जिले में नक्सलियों की सक्रियता पर लगातार नजर रखी जा रही है और सुरक्षा बल हर समय तैयार हैं।

    स्थानीय लोगों ने भी सुरक्षा बलों की तारीफ की और कहा कि इस अभियान से उन्हें राहत मिली है क्योंकि माओवादी हमलों से इलाके में दहशत का माहौल बना रहता था। अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि ऐसे अभियान लगातार जारी रहेंगे और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी संसाधनों का उपयोग किया जाएगा।

    इस मुठभेड़ ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि छत्तीसगढ़ के बीजापुर क्षेत्र में सुरक्षा बल और माओवादी के बीच संघर्ष लगातार जारी है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सुरक्षित रहें और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत अधिकारियों को दें।

  • महिला से मारपीट मामले को लेकर कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला: पीसी शर्मा बोले आरोपी बीजेपी के, सच छुपाने की कोशिश

    महिला से मारपीट मामले को लेकर कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला: पीसी शर्मा बोले आरोपी बीजेपी के, सच छुपाने की कोशिश


    भोपाल । मध्यप्रदेश के सीधी जिले में महिला के साथ मारपीट की घटना को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री श्री पीसी शर्मा ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी इस मामले में झूठ फैला रही है और वास्तविक आरोपियों को कांग्रेसी बताकर जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है।

    श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। एक महिला को डंडों से पीटा जा रहा है और मौके पर मौजूद लोग ‘मारो-मारो’ के नारे लगा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार की घटनाओं में शामिल लोग भाजपा से जुड़े हुए हैं, लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए उन्हें जबरन कांग्रेस से जोड़ा जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि ‘लाड़ली बहन’ और ‘लाड़ला भैया’ जैसी योजनाओं के दावे करने वाली सरकार में महिलाओं के साथ खुलेआम मारपीट हो रही है, जो बेहद शर्मनाक है। कांग्रेस नेता ने सरकार से मांग की कि दोषियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए, उन्हें पार्टी से निष्कासित किया जाए और जेल भेजा जाए।

    पूर्व मंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश में बलात्कार, मारपीट और अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। भाजपा केवल भ्रम फैलाने का काम कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि ऐसे अहंकारी और हिंसक नेता उसी पार्टी से जुड़े हुए हैं।

    नकल माफिया पर गंभीर आरोप

    पीसी शर्मा ने बोर्ड परीक्षाओं और नकल माफिया का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रदेश में वर्षों से संगठित रूप से नकल कराई जा रही है। हर साल पेपर लीक होते हैं, लेकिन जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने ग्वालियर-चंबल, विंध्य और निमाड़ अंचल को नकल माफिया का बड़ा केंद्र बताते हुए कहा कि इसका खामियाजा प्रदेश के छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है।

    निगम-मंडल नियुक्तियों पर सवाल
    उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा में निगम और मंडल के पद भ्रष्टाचार की राजनीति के लिए भरे जाते हैं। बिना लेन-देन के कोई नियुक्ति नहीं होती। जिला प्रभारियों की नियुक्ति भी संभावित नुकसान को नियंत्रित करने के उद्देश्य से की गई है। पार्टी के भीतर पदों को लेकर गुटबाजी और टकराव की स्थिति बनी हुई है, जिसमें असली कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है।

    विजय शाह प्रकरण पर बयान
    विजय शाह मामले को लेकर पीसी शर्मा ने कहा कि उन्हें न्यायालय से बड़ी उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है और उन्हें विश्वास है कि न्याय होगा। उन्होंने कहा कि चार बार माफी मांगने के बावजूद विजय शाह को अपने पद से हाथ धोना ही पड़ेगा।

    संघ और जनसंख्या बयान पर प्रतिक्रिया

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख के तीन बच्चों वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी चरम पर है, रोजगार के अवसर नहीं हैं और ऐसे समय में जनसंख्या बढ़ाने की बात करना चिंताजनक है। उन्होंने संघ की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए इसे असंवेदनशील बताया।

    BLO और SIR को लेकर आरोप

    पीसी शर्मा ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया में गड़बड़ी की जा रही है। जबरन नाम काटे और जोड़े जा रहे हैं। BLO पर दबाव बनाया जा रहा है और उनका वेतन भी रोका जा रहा है। उन्होंने इसे भाजपा की सुनियोजित साजिश करार दिया। कांग्रेस ने इन सभी मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही तय करने और पारदर्शी कार्रवाई की मांग की है।

  • राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बना सियासी तूफान, मुख्यमंत्री सरमा के आरोपों के केंद्र में सांसद गौरव गोगोई और उनकी पत्नी

    राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बना सियासी तूफान, मुख्यमंत्री सरमा के आरोपों के केंद्र में सांसद गौरव गोगोई और उनकी पत्नी


    गुवाहाटी। असम की राजनीति में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया जब मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और उनकी पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न से जुड़े गंभीर आरोपों को सार्वजनिक किया। गुवाहाटी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरमा ने दावा किया कि एलिजाबेथ कोलबर्न जो ब्रिटिश नागरिक हैं को एक पाकिस्तान आधारित फर्म ने नौकरी पर रखा था और उनकी सैलरी पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख के माध्यम से दी जाती थी। मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले को व्यक्तिगत नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया।

    दरअसल यह विवाद अचानक नहीं उभरा है इसकी जड़ें फरवरी 2025 में असम सरकार द्वारा गठित एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम SIT तक जाती हैं। इस टीम का गठन अली तौकीर शेख नामक पाकिस्तानी नागरिक की गतिविधियों की जांच के लिए किया गया था। सरकार के अनुसार शेख पर भारत विरोधी साजिश रचने और देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के आरोप थे। SIT ने करीब सात महीने तक जांच करने के बाद सितंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी।

    सरकार के मुताबिक रिपोर्ट में कुछ संवेदनशील जानकारियां थीं लेकिन राज्य पुलिस के अधिकार क्षेत्र और संसाधनों की सीमाओं को देखते हुए असम कैबिनेट ने निर्णय लिया कि इस मामले को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय MHA को भेजा जाए। अब संभावना जताई जा रही है कि आगे की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो IB या केंद्रीय जांच ब्यूरो CBI जैसी केंद्रीय एजेंसियों द्वारा की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर इंटरपोल की मदद लेने की बात भी सामने आई है।

    मुख्यमंत्री सरमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि एलिजाबेथ कोलबर्न को मार्च 2011 से मार्च 2012 के बीच पाकिस्तान स्थित एक फर्म में नियुक्त किया गया था। बाद में उन्हें भारत ट्रांसफर किया गया। सरमा के अनुसार उनकी सैलरी अली तौकीर शेख के माध्यम से दी जाती थी जिसे उन्होंने “पाकिस्तानी एजेंट करार दिया। आरोप है कि भारत में रहने के दौरान एलिजाबेथ ने विभिन्न सामाजिक और सरकारी मुद्दों पर जानकारी एकत्र की और कथित तौर पर उसे शेख तक पहुंचाया।

    मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि अगस्त 2014 की एक रिपोर्ट में भारतीय खुफिया एजेंसी IB से जुड़ी कुछ गोपनीय सूचनाओं का उल्लेख था। साथ ही जलवायु परिवर्तन से जुड़े प्रोजेक्ट्स और सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर भी जानकारी साझा करने की बात कही गई। हालांकि इन दावों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत दस्तावेज पेश नहीं किए गए हैं और जांच अभी आगे की प्रक्रिया में है।

    अली तौकीर शेख को लेकर भी मुख्यमंत्री ने कई तथ्य रखे। उनके अनुसार शेख 2010 से 2013 के बीच कम से कम 13 बार भारत आया था। उन पर आरोप है कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के खिलाफ नैरेटिव बनाने और देश के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप करने का प्रयास कर रहे थे। सरमा ने यह भी कहा कि जांच शुरू होने के बाद शेख ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स से कई पोस्ट हटा दिए जिसे उन्होंने सबूत मिटाने की कोशिश बताया।

    इस पूरे विवाद में एक और महत्वपूर्ण दावा मुख्यमंत्री ने सांसद गौरव गोगोई को लेकर किया। उन्होंने कहा कि गोगोई 2012 से 2016 के बीच पाकिस्तान गए थे और इन यात्राओं की जानकारी केंद्र सरकार को नहीं दी गई थी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस दौरान गोगोई सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं थे। हालांकि मुख्यमंत्री ने यह स्वीकार किया कि फोन कॉल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं लेकिन एक व्यक्ति के पाकिस्तान जाने का सबूत मिलने की बात कही गई।

    सरमा ने कहा कि इस मामले में तीन मुख्य किरदार हैं एक पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख एक ब्रिटिश नागरिक एलिजाबेथ कोलबर्न और एक भारतीय सांसद गौरव गोगोई। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ पहलुओं में धार्मिक परिवर्तन से जुड़े कोण की भी जांच हो सकती है हालांकि इस संबंध में कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। अब राजनीतिक हलकों में यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ जहां राज्य सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रही है वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा मान रहा है।

  • अपराधियों को पूरा विश्वास… ये सरकार कुछ नहीं उखाड़ सकती', सदन में खूब गरजे तेजस्वी यादव

    अपराधियों को पूरा विश्वास… ये सरकार कुछ नहीं उखाड़ सकती', सदन में खूब गरजे तेजस्वी यादव


    नई दिल्ली । बिहार विधानसभा में गुरुवार 05 फरवरी, 2026 को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एनडीए सरकार पर जमकर भड़ास निकाली. तेजस्वी यादव ने कहा कि आप लोगों ने लोकतंत्र को डरतंत्र बना दिया है. इस सरकार की नींद बेटियों की चीख से भी नहीं टूटती है. तेजस्वी ने कहा कि बिहार की हालत देखकर तो यही लगता है कि अपराधियों को पूरा विश्वास हो गया है कि ये सरकार उसका कुछ नहीं उखाड़ सकती है. बिहार के अपराधियों में डर नहीं बल्कि सरकार में शर्म भी नहीं है.

    तेजस्वी यादव ने सदन में स्पीकर से कहा कि उनके पैर का नाखून पूरा उखड़ गया है इसलिए वे अपनी बात बैठकर कहना चाहते हैं. विधानसभा अध्यक्ष ने बैठने की अनुमति दे दी. इसके बाद तेजस्वी यादव ने पटना के नीट कांड का जिक्र किया. इसके अलावा उन्होंने अन्य जिलों के बारे में कहा कि मधेपुरा में महिला के साथ दुष्कर्म और हत्या हुई, खगड़िया में चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की गई. मुजफ्फरपुर में महिला और तीन बच्चों का अपहरण और फिर हत्या की गई. इसके साथ ही और भी अपराध को उन्होंने गिनवाया.

    बिहार सरकार को बताया कोल्ड स्टोरेज

    तेजस्वी यादव ने कहा कि थाना खामोश है, प्रशासन बेहोश है और सरकार पूरी तरह मदहोश है. जनता में इस सरकार के लिए अफसोस और आक्रोश है. बिहार सरकार कोल्ड स्टोरेज बन चुकी है. हर मामले को ठंडा करने में लगी हुई रहती है.

    बिहार आखिर किस चीज में नंबर वन?
    आरजेडी नेता ने कहा कि बिहार जब इतना विकास कर रहा है तो एक बात बता दें कि बिहार आखिर किस चीज में नंबर वन है? आर राज्यों के मुकाबले बिहार सबसे ज्यादा गरीब है. सबसे ज्यादा बेरोजगारी है. शिक्षा के मामले में फिसड्डी है. स्वास्थ्य के मामले में फिसड्डी है. भ्रष्टाचार में अव्वल है. अपराधियों का बोलबाला है. प्रति व्यक्ति आय सबसे कम है. किसान ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. जिन गरीबों का वोट लिया उसके घर को उजाड़ रहे हैं.

  • MP PSC के सामने धरना बना प्रदर्शनकारियों के लिए सिरदर्द, लाउडस्पीकर की तेज आवाज पर केस दर्ज

    MP PSC के सामने धरना बना प्रदर्शनकारियों के लिए सिरदर्द, लाउडस्पीकर की तेज आवाज पर केस दर्ज


    इंदौर । मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग MP PSC कार्यालय के सामने आयोजित धरना प्रदर्शन अब प्रदर्शनकारियों के लिए मुश्किल का कारण बन गया है। ध्वनि प्रदूषण नियमों के उल्लंघन को लेकर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संयोगितागंज थाने में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने इस प्रकरण में चार लोगों को नामजद आरोपी बनाया है, जबकि अन्य की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, MP PSC कार्यालय के सामने 27 जनवरी तक धरना प्रदर्शन किया गया था। इस दौरान प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि लाउडस्पीकर का उपयोग केवल निर्धारित समय और तय डेसिबल सीमा के भीतर ही किया जाए। इसके बावजूद प्रदर्शन के दौरान बार-बार तेज आवाज में माइक और साउंड सिस्टम का उपयोग किए जाने की शिकायतें सामने आईं।

    बताया जा रहा है कि धरना समाप्त होने के बाद जब प्रदर्शनकारियों द्वारा ज्ञापन सौंपा जा रहा था, उस समय भी लाउडस्पीकर की आवाज निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मौके पर ध्वनि स्तर की जांच की गई, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि माइक की आवाज तय डेसिबल सीमा से ज्यादा थी। इससे MP PSC कार्यालय के आसपास के इलाके में ध्वनि प्रदूषण की स्थिति बन गई और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    पुलिस के अनुसार, यह मामला केवल नियमों की अनदेखी का नहीं है, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था और पर्यावरण संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के तहत सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शन करते समय लाउडस्पीकर की आवाज को नियंत्रित रखना अनिवार्य है। इसके उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

    इस मामले में पुलिस ने राधे जाट, रंजीत सहित कुल चार लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। वहीं, कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और ध्वनि मापन रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    संयोगितागंज थाना पुलिस का कहना है कि प्रशासन ने पहले ही प्रदर्शनकारियों को नियमों के पालन की सख्त हिदायत दी थी, इसके बावजूद लाउडस्पीकर की तेज आवाज का उपयोग किया गया। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन सभी का अधिकार है, लेकिन इसके लिए तय नियमों और शर्तों का पालन करना अनिवार्य है।

    इस कार्रवाई के बाद शहर में यह संदेश भी गया है कि प्रशासन ध्वनि प्रदूषण को लेकर सख्त है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने आम नागरिकों और संगठनों से अपील की है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी कार्यक्रम या प्रदर्शन के दौरान नियमों का पालन करें, ताकि दूसरों को असुविधा न हो। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • MP PSC के सामने धरना बना प्रदर्शनकारियों के लिए सिरदर्द, लाउडस्पीकर की तेज आवाज पर केस दर्ज

    MP PSC के सामने धरना बना प्रदर्शनकारियों के लिए सिरदर्द, लाउडस्पीकर की तेज आवाज पर केस दर्ज


    इंदौर । मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग MP PSC कार्यालय के सामने आयोजित धरना प्रदर्शन अब प्रदर्शनकारियों के लिए मुश्किल का कारण बन गया है। ध्वनि प्रदूषण नियमों के उल्लंघन को लेकर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संयोगितागंज थाने में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने इस प्रकरण में चार लोगों को नामजद आरोपी बनाया है, जबकि अन्य की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, MP PSC कार्यालय के सामने 27 जनवरी तक धरना प्रदर्शन किया गया था। इस दौरान प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि लाउडस्पीकर का उपयोग केवल निर्धारित समय और तय डेसिबल सीमा के भीतर ही किया जाए। इसके बावजूद प्रदर्शन के दौरान बार-बार तेज आवाज में माइक और साउंड सिस्टम का उपयोग किए जाने की शिकायतें सामने आईं।

    बताया जा रहा है कि धरना समाप्त होने के बाद जब प्रदर्शनकारियों द्वारा ज्ञापन सौंपा जा रहा था, उस समय भी लाउडस्पीकर की आवाज निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मौके पर ध्वनि स्तर की जांच की गई, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि माइक की आवाज तय डेसिबल सीमा से ज्यादा थी। इससे MP PSC कार्यालय के आसपास के इलाके में ध्वनि प्रदूषण की स्थिति बन गई और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    पुलिस के अनुसार, यह मामला केवल नियमों की अनदेखी का नहीं है, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था और पर्यावरण संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के तहत सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शन करते समय लाउडस्पीकर की आवाज को नियंत्रित रखना अनिवार्य है। इसके उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

    इस मामले में पुलिस ने राधे जाट, रंजीत सहित कुल चार लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। वहीं, कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और ध्वनि मापन रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    संयोगितागंज थाना पुलिस का कहना है कि प्रशासन ने पहले ही प्रदर्शनकारियों को नियमों के पालन की सख्त हिदायत दी थी, इसके बावजूद लाउडस्पीकर की तेज आवाज का उपयोग किया गया। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन सभी का अधिकार है, लेकिन इसके लिए तय नियमों और शर्तों का पालन करना अनिवार्य है।

    इस कार्रवाई के बाद शहर में यह संदेश भी गया है कि प्रशासन ध्वनि प्रदूषण को लेकर सख्त है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने आम नागरिकों और संगठनों से अपील की है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी कार्यक्रम या प्रदर्शन के दौरान नियमों का पालन करें, ताकि दूसरों को असुविधा न हो। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • शहडोल में बेखौफ अपराधी: देवलौंद में ASI पर हमला, खाकी पर लगातार वार से कानून-व्यवस्था तार-तार

    शहडोल में बेखौफ अपराधी: देवलौंद में ASI पर हमला, खाकी पर लगातार वार से कानून-व्यवस्था तार-तार


    शहडोल । मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। जिले में लगातार पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने की बढ़ती घटनाएं यह साफ कर रही हैं कि अपराधियों के मन से वर्दी का खौफ खत्म होता जा रहा है। ताजा सनसनीखेज मामला देवलौंद थाना क्षेत्र का है जहाँ बाणसागर बाजार में एक ज्वेलरी शॉप को लेकर हुए आपसी विवाद को सुलझाने गए सहायक उप निरीक्षक ASI महेश झा पर सरेआम हमला कर दिया गया।

    घटना के वक्त एएसआई महेश झा दोनों पक्षों को समझाइश देकर शांति व्यवस्था कायम करने की कोशिश कर रहे थे लेकिन तभी मौके पर मौजूद सुनील सोनी नामक व्यक्ति ने अपना आपा खो दिया और ड्यूटी पर तैनात अधिकारी पर हमला बोल दिया। इस झड़प में पुलिसकर्मी को चोटें आई हैं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी सुनील सोनी को हिरासत में ले लिया है और उस पर शासकीय कार्य में बाधा डालने व जान से मारने की धमकी देने जैसी गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। हालांकि आरोपी के परिजनों ने पुलिस पर ही पलटवार करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं जिससे मामला और पेचीदा हो गया है।

    हैरानी की बात यह है कि शहडोल में पुलिस पर हमले का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम पर नजर डालें तो हाल ही में बस स्टैंड पर ड्यूटी कर रहे महेश पाठक को एक बस ने कुचल दिया था वहीं ब्यौहारी में विवाद सुलझाने गए प्रधान आरक्षक और आरक्षक के साथ बस मालिकों द्वारा अभद्रता की गई थी। इसके साथ ही पुलिस लाइन में एक आरक्षक द्वारा सुसाइड की घटना ने विभाग के अंदरूनी तनाव और बाहरी चुनौतियों को उजागर कर दिया है।

    जिले में कानून की रक्षा करने वालों पर हो रहे इन हमलों ने आम जनता के मन में असुरक्षा का भाव भर दिया है। जब रक्षक ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम नागरिक की सुरक्षा का क्या होगा? फिलहाल वरिष्ठ अधिकारियों की चुप्पी इस मामले को और गंभीर बना रही है। क्या यह हमलों का सिलसिला पुलिस की नरम कार्यप्रणाली का नतीजा है या प्रशासनिक ढिलाई का? यह एक बड़ा सवाल है।

  • अपनी बात मनवाने के लिए जान जोखिम में डालने का ट्रेंड: प्रेमी और नाराज पत्नी मोबाइल टावर पर चढ़े, समाज के लिए चेतावनी

    अपनी बात मनवाने के लिए जान जोखिम में डालने का ट्रेंड: प्रेमी और नाराज पत्नी मोबाइल टावर पर चढ़े, समाज के लिए चेतावनी


    सिंगरौली । अपनी बात मनवाने और भावनात्मक दबाव बनाने के लिए जान जोखिम में डालने का चलन अब चिंताजनक रूप लेता जा रहा है। सिंगरौली जिले में बीते दो दिनों के भीतर सामने आई दो अलग-अलग घटनाओं ने न केवल लोगों को चौंकाया है, बल्कि समाज के सामने कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। परिस्थितियां भले ही अलग रही हों, लेकिन दोनों मामलों में तरीका एक ही थामोबाइल टावर पर चढ़कर आत्मघाती कदम जैसा खतरनाक विरोध।

    प्रेम प्रसंग में उठाया फिल्मी कदम

    पहली घटना 23 जनवरी की है। देवसर जियावन थाना क्षेत्र के धनहा गांव में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब रवि कुशवाहा नामक युवक गांव में बने मोबाइल टावर पर चढ़ गया। बताया गया कि युवक प्रेम प्रसंग और अंतरजातीय विवाह को लेकर अपने परिजनों की सहमति चाहता था। परिवार के विरोध से आहत युवक ने परिजनों को मनाने के लिए खतरनाक रास्ता चुना। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवक ने फिल्म शोले की तर्ज पर यह कदम उठाया जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस और परिजन मौके पर पहुंचे। घंटों की समझाइश और भावनात्मक संवाद के बाद युवक

  • भोपाल में युवती से मारपीट का आरोप: मदरसे के सामने स्कूटी खड़ी करने पर विवाद, भाई को सिर में गंभीर चोट

    भोपाल में युवती से मारपीट का आरोप: मदरसे के सामने स्कूटी खड़ी करने पर विवाद, भाई को सिर में गंभीर चोट


    भोपाल । राजधानी भोपाल से सामने आए एक वायरल वीडियो ने सनसनी मचा दी है, जिसमें एक हिंदू युवती अपने साथ हुई मारपीट और अपमान का आरोप लगा रही है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है और घटना को लेकर लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। वीडियो में युवती खुद को भोपाल के कल्पना नगर इलाके की निवासी बता रही है। उसका कहना है कि घर के सामने स्थित एक मदरसे के बाहर स्कूटी खड़ी करने को लेकर विवाद हुआ था।
    युवती के अनुसार, इसी बात को लेकर कुछ लोगों ने पहले बहस की और फिर देखते ही देखते मामला मारपीट में बदल गया। युवती का आरोप है कि उसके साथ न सिर्फ गाली-गलौज की गई, बल्कि उसके बाल भी उखाड़े गए। युवती ने वीडियो में यह भी बताया कि जब उसके भाई और दोस्त ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो उन पर भी हमला किया गया। आरोप है कि युवती के भाई के सिर पर गंभीर चोट आई है, जिससे उसे काफी खून बहा और इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। वहीं, युवती के दोस्त के साथ भी मारपीट किए जाने की बात कही जा रही है। घटना के बाद से पीड़ित परिवार दहशत में है और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है।

    यह पूरा मामला जिस स्थान का बताया जा रहा है, वहां एक मदरसा स्थित है। इसी कारण से सोशल मीडिया पर इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिशें भी देखी जा रही हैं। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। पुलिस दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर रही है और वीडियो व अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। भोपाल पुलिस का कहना है कि यदि जांच में यह सामने आता है कि मामला सांप्रदायिक है या किसी समुदाय विशेष को निशाना बनाकर हिंसा की गई है, तो संबंधित धाराओं में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, यदि यह सामान्य विवाद का मामला पाया जाता है, तो भी मारपीट और चोट पहुंचाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।

    घटना का वीडियो सामने आने के बाद से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ संगठनों ने पीड़ित युवती के समर्थन में कार्रवाई की मांग की है, जबकि प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। पुलिस ने साफ किया है कि सोशल मीडिया पर फैल रहे किसी भी भ्रामक या भड़काऊ संदेश पर भी नजर रखी जा रही है। फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है और पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का भरोसा भी प्रशासन की ओर से दिया गया है।

  • रिटायरमेंट के बाद पुलिस वर्दी: सम्मान या अनुशासन की कसौटी?

    रिटायरमेंट के बाद पुलिस वर्दी: सम्मान या अनुशासन की कसौटी?



    नई दिल्ली। सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी आमतौर पर पूरी यूनिफॉर्म नहीं पहन सकते, क्योंकि वर्दी सक्रिय सेवा का प्रतीक है। केवल विशेष अवसरों जैसे पुलिस स्मृति दिवस, वीरता पुरस्कार वितरण या औपचारिक राज्य स्तर के समारोह में विभाग की अनुमति मिलने पर सीमित समय के लिए पहनना वैध होता है। इसके अलावा, मेडल, बैज और रैंक चिन्ह को नागरिक पोशाक पर प्रदर्शित करना पूरी तरह कानूनी और स्वीकार्य है।
    यह नियम पुलिस सेवा की गरिमा, अनुशासन और पहचान बनाए रखने के लिए लागू किया गया है।

    पुलिस की वर्दी केवल सक्रिय सेवा का प्रतीक होती है और रिटायरमेंट के बाद इसे पहनना आमतौर पर नियमों के खिलाफ माना जाता है। भारत में पुलिस अधिनियम 1861 और इसके बाद के संशोधन स्पष्ट करते हैं कि वर्दी का इस्तेमाल केवल तैनात अधिकारियों के लिए वैध है। रिटायर होने के बाद बिना अनुमति वर्दी पहनना कानूनी उल्लंघन और फोर्स की पहचान का अनुचित उपयोग माना जाता है।

    हालांकि, कुछ विशेष अवसरों पर जैसे पुलिस स्मृति दिवस, वीरता पुरस्कार वितरण, राज्य स्तरीय कार्यक्रम या औपचारिक समारोह में विभाग की अनुमति मिलने पर सीमित समय के लिए वर्दी पहनने की छूट होती है। इसके अलावा, सेवानिवृत्त अधिकारी अपने मेडल, बैज और रैंक चिन्ह को नागरिक पोशाक या औपचारिक ड्रेस पर प्रदर्शित कर सकते हैं। पूरी यूनिफॉर्म पहनने की अनुमति केवल राष्ट्रपति पदक या विशेष सम्मान प्राप्त वरिष्ठ अधिकारियों को ही सीमित अवसरों पर मिलती है।

    सामाजिक दृष्टि से भी मतभेद हैं।

    कुछ लोग मानते हैं कि वर्दी पुलिसकर्मी की आजीवन पहचान है और इसे विशेष अवसरों पर पहनने की आजादी होनी चाहिए, जबकि अन्य मानते हैं कि यह केवल सक्रिय सेवा का प्रतीक है और इसे रिटायरमेंट के बाद पहनना अनुशासन के खिलाफ है। नियमों के अनुसार, वर्दी पहनने का अधिकार केवल सम्मान और समारोह तक सीमित है, जबकि मेडल और बैज को नागरिक पोशाक पर प्रदर्शित करना पूरी तरह वैध हैयह नियम पुलिस सेवा के अनुशासन और पहचान की गरिमा बनाए रखने के लिए लागू किया गया है।