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  • दाऊद की ‘D-कंपनी’ से लॉरेंस की ‘L-कंपनी’ तक: मुंबई अंडरवर्ल्ड का बदला चेहरा, बॉलीवुड फिर निशाने पर

    दाऊद की ‘D-कंपनी’ से लॉरेंस की ‘L-कंपनी’ तक: मुंबई अंडरवर्ल्ड का बदला चेहरा, बॉलीवुड फिर निशाने पर


    नई दिल्ली। एक दौर था, जब मुंबई की फिल्मी दुनिया में किसी बड़े प्रोजेक्ट की चर्चा के साथ अंडरवर्ल्ड का नाम भी जुड़ जाता था। निर्माता हों, बिल्डर हों, कारोबारी हों या बड़े फिल्मी सितारे—गैंगस्टरों की धमकियों और रंगदारी की खबरें लोगों को दहशत में डाल देती थीं। 1980 और 1990 के दशक में करीम लाला, हाजी मस्तान और वरदराजन मुदलियार जैसे नामों के बाद दाऊद इब्राहिम और उसकी डी-कंपनी का दबदबा चर्चा में आया। वक्त बदला, शहर का नाम बॉम्बे से मुंबई हो गया, लेकिन संगठित अपराध की चुनौती खत्म नहीं हुई।

    1990 के दशक में दाऊद का नेटवर्क तस्करी और अवैध कारोबार से आगे बढ़कर रंगदारी, सुपारी लेकर हत्या, जमीनों पर कब्जे और फिल्म इंडस्ट्री में कथित दखल तक पहुंच गया था। 1993 के मुंबई सीरियल बम धमाकों के बाद पुलिस ने अंडरवर्ल्ड के खिलाफ कार्रवाई तेज की। कई गैंगस्टर देश छोड़कर चले गए, कुछ गिरफ्तार हुए और पुराने नेटवर्क कमजोर पड़ने लगे। इसके बावजूद संगठित अपराध पूरी तरह खत्म नहीं हुआ, बल्कि उसके तरीके और नेटवर्क बदलते रहे।

    अब मुंबई में फिल्मी हस्तियों को धमकियां देने, कथित रंगदारी मांगने और गोलीबारी की घटनाओं में लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम सामने आने से एक बार फिर अंडरवर्ल्ड की चर्चा तेज है। सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग, बाबा सिद्दीकी की हत्या और फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के घर के बाहर गोलीबारी जैसी घटनाओं ने बॉलीवुड की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या दाऊद की डी-कंपनी के बाद मुंबई में लॉरेंस बिश्नोई की ‘एल-कंपनी’ का दौर शुरू हो रहा है?

    जब डी-कंपनी के नाम से कांपती थी फिल्म इंडस्ट्री
    1990 के दशक में मुंबई के अंडरवर्ल्ड और बॉलीवुड के रिश्ते लगातार सुर्खियों में रहते थे। दाऊद इब्राहिम और उसके गिरोह पर फिल्म निर्माताओं तथा कारोबारियों को धमकाने, रंगदारी मांगने और फिल्म व्यवसाय में दखल देने के आरोप लगते रहे। उस दौर में छोटा राजन, छोटा शकील और अबू सलेम जैसे नाम भी अंडरवर्ल्ड की चर्चाओं में प्रमुखता से सामने आते थे।

    फिल्म उद्योग में बढ़ते कारोबार और विदेशों में भारतीय फिल्मों की लोकप्रियता के बीच फिल्म फाइनेंस तथा वितरण अधिकार भी गैंगस्टरों की दिलचस्पी का विषय बने। आरोप लगते रहे कि डी-कंपनी से जुड़े लोग फिल्मों में पैसा लगाने के साथ-साथ निर्माताओं पर दबाव बनाते थे। कुछ मामलों में कलाकारों के चयन और फिल्मों के कारोबार को प्रभावित करने की कोशिशों की भी चर्चा हुई।

    हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि उस दौर में हर फिल्म की कास्टिंग, निर्माण या रिलीज पर डी-कंपनी का नियंत्रण था। लेकिन कई चर्चित घटनाओं ने यह जरूर दिखाया कि आपराधिक गिरोह फिल्म इंडस्ट्री के लोगों को निशाना बनाने और उनके कारोबार पर दबाव डालने की कोशिश कर रहे थे।

    1993 के बम धमाकों के बाद दाऊद भारत छोड़ चुका था, लेकिन उसके नेटवर्क और सहयोगियों को लेकर पुलिस की जांच जारी रही। उसके गिरोह पर रंगदारी, धमकियों और फिल्म कारोबार में कथित हस्तक्षेप के आरोप लगते रहे।

    गुलशन कुमार की हत्या से राकेश रोशन पर हमले तक
    बॉलीवुड में अंडरवर्ल्ड के खौफ की चर्चा के बीच कई ऐसी वारदातें हुईं, जिन्होंने फिल्मी दुनिया की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा की।

    12 अगस्त 1997 को टी-सीरीज के संस्थापक और संगीत कारोबारी गुलशन कुमार की मुंबई के अंधेरी इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई। इससे पहले मार्च 1997 में फिल्म निर्माता मुकेश दुग्गल की हत्या हुई थी और जुलाई में निर्देशक राजीव राय पर हमला किया गया था। जनवरी 2000 में फिल्म निर्माता-निर्देशक राकेश रोशन को उनके कार्यालय के बाहर गोली मारी गई, हालांकि वह बच गए।

    इन घटनाओं में अलग-अलग आपराधिक गिरोहों के नाम और उनकी कथित भूमिका चर्चा में आई। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि फिल्म इंडस्ट्री के सामने खतरा केवल एक गिरोह तक सीमित नहीं था। कई आपराधिक नेटवर्क अपने प्रभाव और वसूली के लिए फिल्मी हस्तियों तथा कारोबारियों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे थे।

    1990 के दशक के अंत और उसके बाद पुलिस की कार्रवाई, गिरफ्तारियों तथा कई प्रमुख अपराधियों के देश से बाहर चले जाने या जेल में बंद होने के कारण पुराने गिरोहों के लिए पहले की तरह खुले तौर पर काम करना कठिन हुआ। फिल्म निर्माण और फाइनेंस के औपचारिक ढांचे में भी बदलाव आया। इसके बावजूद संगठित अपराध की गतिविधियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुईं।

    छात्र राजनीति से अपराध की दुनिया तक पहुंचा लॉरेंस बिश्नोई
    पुराने अंडरवर्ल्ड नेटवर्क कमजोर पड़ने के बाद उत्तर भारत में सक्रिय नए गैंगस्टरों के नाम सामने आने लगे। इनमें लॉरेंस बिश्नोई और उसके सहयोगी गोल्डी बराड़ का नेटवर्क प्रमुखता से चर्चा में आया।

    लॉरेंस बिश्नोई ने पंजाब में छात्र राजनीति के दौरान अपनी पहचान बनाई। वह पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्र संगठन एसओपीयू से जुड़ा था। छात्र चुनावों और स्थानीय रंजिशों के बीच उसके खिलाफ मारपीट, धमकी और अन्य आपराधिक मामलों में कार्रवाई हुई। समय के साथ उसके संपर्क दूसरे अपराधियों से बढ़े और उसका नेटवर्क जेलों के भीतर तथा बाहर सक्रिय सहयोगियों तक फैलता गया।

    संपत नेहरा भी उसके नेटवर्क से जुड़ा प्रमुख नाम बना। नेहरा का नाम 2018 में सलमान खान को निशाना बनाने की कथित योजना के सिलसिले में सामने आया था। इससे पहले पंजाब और हरियाणा में स्थानीय चुनावों तथा आपसी रंजिशों से जुड़े हिंसक मामलों में भी उसका नाम चर्चा में रहा।

    लॉरेंस लंबे समय से जेल में बंद रहने के बावजूद अपने सहयोगियों के जरिए नेटवर्क संचालित करने के आरोपों के कारण सुर्खियों में रहा है। गोल्डी बराड़, काला जठेड़ी, रोहित गोदारा और अनमोल बिश्नोई जैसे नाम उसके नेटवर्क से जुड़े मामलों में सामने आते रहे हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क का विस्तार पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली समेत कई राज्यों तक रहा है।

    इस गिरोह पर कारोबारियों और अन्य लोगों से रंगदारी मांगने, धमकियां देने, हथियारों से जुड़े अपराधों तथा हत्या की साजिशों में शामिल होने के आरोप हैं। हालांकि, अलग-अलग मामलों में आरोपों और उनकी कानूनी स्थिति का आकलन संबंधित जांच और अदालत की कार्यवाही के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

    साबरमती जेल में बंद, फिर भी नेटवर्क पर सवाल
    लॉरेंस बिश्नोई अगस्त 2023 से गुजरात की अहमदाबाद स्थित साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है। उसकी जेल से आवाजाही पर प्रतिबंधों और सुरक्षा व्यवस्था के कारण उसे लेकर कई मामलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी की खबरें सामने आती रही हैं।

    जेल में बंद होने के बावजूद उसके नाम से जुड़ी धमकियों और हिंसक वारदातों के मामलों ने जांच एजेंसियों के सामने यह सवाल खड़ा किया है कि उसके सहयोगियों का नेटवर्क किस तरह काम करता है और कथित अपराधों में निर्देश या जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या सबूत उपलब्ध हैं। किसी घटना में गिरोह का नाम सामने आना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि जेल में बंद सरगना ने ही उसका निर्देश दिया था; इसके लिए जांच और न्यायिक प्रक्रिया अहम है।

    सलमान खान के घर पर फायरिंग से बाबा सिद्दीकी की हत्या तक
    लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम बॉलीवुड में खास तौर पर सलमान खान को निशाना बनाए जाने के मामलों के बाद चर्चा में आया। 14 अप्रैल 2024 को मुंबई के बांद्रा इलाके में सलमान खान के घर के बाहर बाइक सवार हमलावरों ने गोलियां चलाई थीं। मुंबई पुलिस ने मामले में गिरोह से कथित संबंध रखने वाले कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की और आरोपपत्र दाखिल किया।

    इसके बाद अक्टूबर 2024 में पूर्व मंत्री और एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या कर दी गई। इस मामले की जांच में सलमान खान से उनकी करीबी को संभावित कारण के तौर पर सामने रखा गया। पुलिस की जांच और आरोपपत्र में इस पहलू का उल्लेख किए जाने की खबरें आईं। हालांकि, किसी भी आरोपी की भूमिका का अंतिम निर्धारण अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।

    इन घटनाओं ने फिल्मी हस्तियों के साथ-साथ उनसे जुड़े लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ाई। इसके बाद सलमान खान और उनके आसपास के लोगों को धमकियों से जुड़े मामलों में सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया।

    रोहित शेट्टी से टाइगर श्रॉफ तक, गोलीबारी की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
    फरवरी 2026 में फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के जुहू स्थित घर के बाहर गोलीबारी की घटना सामने आई। इस मामले में पुलिस ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े होने के आरोप में कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की और आरोपपत्र दाखिल किए जाने की खबरें आईं।

    इसके बाद 18 अक्टूबर 2026 को अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार को मुंबई के जुहू इलाके में निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, कार पर गोलियां चलाई गईं और अभिनेता इस घटना में सुरक्षित रहे। इस वारदात के बाद एक बार फिर सवाल उठा कि क्या फिल्मी हस्तियों को निशाना बनाकर कोई गिरोह मुंबई में अपनी मौजूदगी और दबदबा स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

    इन घटनाओं की जांच में आरोपियों के संबंध, हमले के पीछे संभावित मकसद और कथित जिम्मेदारी जैसे पहलू महत्वपूर्ण हैं। किसी गिरोह के नाम का इस्तेमाल करके डर पैदा करना और वास्तव में पूरे शहर या फिल्म इंडस्ट्री पर नियंत्रण स्थापित करना दो अलग-अलग बातें हैं।

    डी-कंपनी और एल-कंपनी: क्या हैं दोनों के बीच अंतर?
    डी-कंपनी के दौर में अंडरवर्ल्ड के प्रभाव की चर्चा तस्करी, रंगदारी, फिल्म फाइनेंस, विदेशों में वितरण अधिकार और फिल्मी हस्तियों पर दबाव बनाने के संदर्भ में होती थी। दाऊद के नेटवर्क को लेकर कई मामलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जांच हुई।

    इसके मुकाबले लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े हालिया मामलों में धमकी भरे संदेश, कथित वसूली की मांग, गोलीबारी और सोशल मीडिया पर हमलों की जिम्मेदारी लेने जैसे तरीके चर्चा में आए हैं। डिजिटल माध्यमों और अलग-अलग राज्यों में फैले सहयोगियों के कारण ऐसे नेटवर्क की जांच में पुलिस को नए तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

    दोनों दौर में रंगदारी, धमकी और हिंसा जैसे कुछ समान तत्व जरूर दिखाई देते हैं। लेकिन उनके नेटवर्क, वित्तीय ढांचे, काम करने के तरीके और वास्तविक प्रभाव की तुलना करने के लिए ठोस जांच संबंधी आंकड़ों तथा मामलों के दस्तावेजों की जरूरत है। केवल चर्चित घटनाओं के आधार पर दोनों गिरोहों की ताकत या नियंत्रण को एक समान नहीं माना जा सकता।

    क्या मुंबई में सचमुच ‘एल-कंपनी’ का दौर है?
    मुंबई में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े मामलों ने संगठित अपराध और बॉलीवुड की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। फिर भी यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि इस गिरोह ने पूरे मुंबई शहर या फिल्म इंडस्ट्री पर डी-कंपनी जैसी पकड़ बना ली है।

    मुंबई पुलिस के आंकड़ों पर आधारित फरवरी 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शहर में 2025 के दौरान रंगदारी के 314 मामले दर्ज हुए, जबकि 2024 में यह संख्या 199 थी। रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से यह भी कहा गया कि रंगदारी के सभी मामलों को बड़े आपराधिक गिरोहों से जोड़ना सही नहीं होगा; इनमें स्थानीय बदमाशों और अन्य प्रकार की वसूली से जुड़े मामले भी हो सकते हैं।

    इसलिए ‘एल-कंपनी का दौर’ फिलहाल मुंबई में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े मामलों की बढ़ती चर्चा और फिल्मी हस्तियों को मिल रही धमकियों को समझाने वाला एक रूपक है, न कि पूरे शहर पर उसके नियंत्रण का प्रमाण।

    मुंबई के अंडरवर्ल्ड की कहानी में नाम बदले हैं, नेटवर्क बदले हैं और अपराध के तरीके भी बदले हैं। लेकिन किसी गिरोह की वास्तविक ताकत का आकलन सुर्खियों या दावों से नहीं, बल्कि उसके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों, पुलिस की जांच और अदालत में साबित तथ्यों से किया जाना चाहिए।

  • रोहित शेट्टी ने दोस्तों से घर न आने की अपील की, सुरक्षा कड़ी..

    रोहित शेट्टी ने दोस्तों से घर न आने की अपील की, सुरक्षा कड़ी..


    नई दिल्ली: बॉलीवुड के मशहूर फिल्ममेकर रोहित शेट्टी के घर हुई फायरिंग की घटना ने इंडस्ट्री को हिला कर रख दिया है आज सुबह रोहित शेट्टी के घर के बाहर बाइक सवार हमलावर ने चार राउंड फायरिंग की जिससे इलाके में दहशत फैल गई घटना की जानकारी मिलते ही मुंबई पुलिस हरकत में आई और तुरंत जांच शुरू कर दी

    इस मामले में मुंबई पुलिस ने पुणे से पांच संदिग्धों को हिरासत में लिया है जिनकी उम्र अठारह से सत्ताईस साल के बीच बताई जा रही है पुलिस सभी से गहन पूछताछ कर रही है ताकि इस हमले के पीछे की साजिश और नेटवर्क का खुलासा किया जा सकेरोहित शेट्टी इस पूरे मामले में पुलिस के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं उन्होंने अपना बयान दर्ज करवाया है और जांच से जुड़े हर सवाल का जवाब दे रहे हैं फायरिंग की घटना के बाद रोहित शेट्टी के घर के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए गए हैं पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है और हर आने जाने वाले पर नजर रखी जा रही है

    इसी बीच यह जानकारी सामने आई है कि रोहित शेट्टी ने फिल्म इंडस्ट्री के सभी करीबी दोस्तों और जान पहचान वालों से फिलहाल घर न आने की अपील की है उन्होंने कहा कि सुरक्षा और जांच को ध्यान में रखते हुए फिलहाल कोई भी घर पर मिलने न आएं हालांकि रोहित अपने चिंतित दोस्तों से फोन कॉल के जरिए लगातार संपर्क में बने हुए हैंइस घटना के बाद रोहित शेट्टी ने अपने आने वाले कुछ प्लान भी कैंसिल कर दिए हैं फिलहाल उनका पूरा ध्यान परिवार की सुरक्षा और पुलिस जांच पर है अभी तक रोहित शेट्टी या उनके परिवार की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है

    बताया जा रहा है कि इस हमले की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली है सोशल मीडिया के जरिए एक धमकी भरा मैसेज सामने आया है जिसमें अगली बार और भी गंभीर अंजाम की बात कही गई है इस धमकी के बाद पुलिस और ज्यादा सतर्क हो गई है और पूरे मामले की हर एंगल से जांच की जा रही हैमुंबई पुलिस ने घटना स्थल पर सुरक्षा बढ़ा दी है और इलाके में अतिरिक्त पेट्रोलिंग शुरू कर दी गई है रोहित शेट्टी के घर के आसपास कैमरे और सुरक्षा गार्ड की संख्या बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की अनहोनी को रोका जा सके पुलिस इस मामले में लगातार अपडेट साझा कर रही है और जल्द ही मामले का खुलासा करने की पूरी कोशिश कर रही है

  • बिग बॉस 19 विजेता गौरव खन्ना, 50 लाख रुपए का इनाम, सलमान ने धर्मेंद्र को याद कर किया भावुक, पवन सिंह धमकी के बावजूद शामिल

    बिग बॉस 19 विजेता गौरव खन्ना, 50 लाख रुपए का इनाम, सलमान ने धर्मेंद्र को याद कर किया भावुक, पवन सिंह धमकी के बावजूद शामिल

    नई दिल्ली।  रियलिटी शो बिग बॉस 19 का ग्रैंड फिनाले रविवार को मुंबई में संपन्न हुआ। इस सीजन के विजेता बने गौरव खन्ना जिन्हें 50 लाख रुपए का कैश प्राइज और बिग बॉस की ट्रॉफी मिली। रनर-अप रहीं फरहाना भट्ट जबकि तीसरे चौथे और पांचवें स्थान पर क्रमशः प्रणीत मोरे तान्या मित्तल और अमाल मलिक रहे।

    विजेता गौरव खन्ना टीवी के जाना-माना चेहरा हैं और उन्होंने CID और अनुपमा जैसे लोकप्रिय शो में काम किया है। फिनाले में कार्तिक आर्यन अनन्या पांडे अरमान मलिक और करण कुंद्रा सहित कई बॉलीवुड सितारे मौजूद थे। इस सीजन की खास बात रही भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह जिन्हें बिग बॉस के फिनाले से पहले लॉरेंस बिश्नोई गैंग की तरफ से धमकी मिली थी। कॉल करने वाले ने पवन सिंह को चेतावनी दी कि अगर वे सलमान खान के साथ मंच साझा करेंगे तो उन्हें इंडस्ट्री में काम नहीं करने दिया जाएगा। बावजूद इसके पवन सिंह ने हिम्मत दिखाई और शो में शामिल हुए। सुरक्षा के भी विशेष इंतजाम किए गए थे।

    फिनाले के दौरान सलमान खान भावुक हो गए जब उन्होंने धर्मेंद्र को याद किया। शो में धर्मेंद्र के पुराने वीडियो दिखाए गए जिन्हें देखकर सलमान की आंखों से आंसू निकल आए। सलमान ने बताया कि धर्मेंद्र का निधन उनके पिता सलीम खान के जन्मदिन पर हुआ था। उन्होंने यह भी साझा किया कि 8 दिसंबर धर्मेंद्र का जन्मदिन उनकी मां सलमा का जन्मदिन भी है। फिनाले में सनी लियोनी और करण कुंद्रा ने अपने शो स्प्लिट्सविला X6 के प्रमोशन के लिए स्टेज पर मजेदार सेगमेंट किया। सलमान ने तान्या मित्तल की तारीफ करते हुए कहा कि वह बिग बॉस के इतिहास की सबसे वायरल कंटेस्टेंट्स में से हैं। वहीं बसीर अली के शो को लेकर बयानों पर सलमान ने उन्हें चेतावनी दी कि ऐसा प्रोफेशनल करियर को नुकसान पहुंचा सकता है।

    बिग बॉस का इतिहास: इस रियलिटी शो का आइडिया 1997 में नीदरलैंड में शुरू हुए शो बिग ब्रदर से लिया गया। भारत में यह शो 2006 में आया। पहले सीजन के होस्ट थे अरशद वारसी इसके बाद शिल्पा शेट्टी और अमिताभ बच्चन ने होस्ट किया। 2010 से लगातार सलमान खान शो के होस्ट हैं। बिग बॉस आज भारत का सबसे चर्चित और लोकप्रिय रियलिटी शो बन चुका है।