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  • मीडिया विवाद के बीच व्हाइट हाउस का बड़ा कदम, शुरू हुआ 24 घंटे का ‘ट्रंप टीवी’, जानिए क्या होगा प्रसारण

    मीडिया विवाद के बीच व्हाइट हाउस का बड़ा कदम, शुरू हुआ 24 घंटे का ‘ट्रंप टीवी’, जानिए क्या होगा प्रसारण

    नई दिल्ली ।अमेरिका में व्हाइट हाउस और प्रमुख मीडिया संस्थानों के बीच बढ़े विवाद के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 24 घंटे चलने वाली अपनी टीवी सेवा शुरू कर दी है। इस सेवा का नाम ‘ट्रंप टीवी’ रखा गया है। इसके जरिए राष्ट्रपति के भाषण, प्रशासन की घोषणाएं और सरकार से जुड़े प्रमुख फैसलों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने की तैयारी की गई है।

    यह कदम उस समय सामने आया है, जब कई प्रमुख टीवी चैनलों के पत्रकारों की व्हाइट हाउस में प्रवेश संबंधी अनुमति को लेकर विवाद अदालत तक पहुंच गया। संबंधित मीडिया संस्थानों ने संयुक्त रूप से प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। उनका कहना है कि केवल खबरों की सामग्री पसंद नहीं आने के आधार पर पत्रकारों की पहुंच रोकना संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर सवाल है।

    विवाद की शुरुआत पत्रकारों के प्रवेश बैज निष्क्रिय किए जाने के बाद हुई। इसके बाद संबंधित संस्थानों के संवाददाताओं को व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश से रोक दिया गया। मीडिया संस्थानों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना उचित सूचना और प्रक्रिया के उनके पत्रकारों की पहुंच सीमित की।

    मीडिया संस्थानों की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रपति या किसी सरकारी अधिकारी को केवल खबरों की सामग्री से असहमति के कारण प्रेस के संवैधानिक अधिकारों और स्वतंत्रता से जुड़े हितों को खत्म करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने पत्रकारों की व्हाइट हाउस तक पहुंच से जुड़े प्रतिबंधों को चुनौती दी है।

    इसी बीच प्रमुख टीवी नेटवर्कों के बीच राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की साझा कवरेज को लेकर भी बदलाव देखने को मिला। सोमवार को सीएनएन को उस प्रेस पूल व्यवस्था से हटा दिया गया, जिसके तहत प्रमुख समाचार नेटवर्क व्हाइट हाउस की महत्वपूर्ण गतिविधियों की कवरेज आपस में साझा करते हैं।

    विवाद के बीच व्हाइट हाउस ने अपना 24 घंटे चलने वाला टीवी प्लेटफॉर्म शुरू किया। इसका उद्देश्य प्रशासन की महत्वपूर्ण सूचनाओं, घोषणाओं और फैसलों को सीधे दर्शकों तक पहुंचाना बताया गया है। इस सेवा पर राष्ट्रपति ट्रंप के भाषण और प्रशासन से संबंधित वीडियो सामग्री दिखाई जाएगी।

    व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया कि इस माध्यम से ऐसी महत्वपूर्ण जानकारियां और घोषणाएं लोगों तक पहुंचेंगी, जो पहले उनकी नजर से छूट जाती थीं। सेवा को प्रशासन की गतिविधियों और राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की जानकारी सीधे उपलब्ध कराने वाले मंच के रूप में पेश किया गया है।

    दूसरी ओर, प्रतिबंधित मीडिया संस्थानों का कहना है कि सरकारी परिसर में पत्रकारों की पहुंच को केवल खबरों की सामग्री के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता। उनका तर्क है कि प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक अधिकारों की रक्षा जरूरी है और किसी भी प्रतिबंध के लिए उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा है कि व्हाइट हाउस स्वतंत्र प्रेस को निशाना नहीं बना रहा, बल्कि उनके अनुसार गलत खबरों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने ऐसी खबरों को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया और कहा कि इसे रोका जाना चाहिए।

    व्हाइट हाउस का तर्क है कि संविधान में मीडिया के अधिकारों का सम्मान किया गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर मीडिया संस्थान को व्हाइट हाउस, ब्रीफिंग रूम या राष्ट्रपति के प्रेस पूल तक स्वतः पहुंच का अधिकार मिल जाता है।

    अब इस पूरे विवाद में अदालत की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। एक तरफ मीडिया संस्थान पत्रकारों की पहुंच और प्रेस स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों का सवाल उठा रहे हैं, वहीं प्रशासन अपने फैसले को उचित बता रहा है। इसी बीच ‘ट्रंप टीवी’ की शुरुआत ने व्हाइट हाउस और अमेरिकी मीडिया के बीच चल रहे विवाद को एक नया रूप दे दिया है।

  • नोरा फतेही के ‘खिलौना विमान’ कमेंट पर विवाद गहराया, विमानन कंपनी ने 3 करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा किया

    नोरा फतेही के ‘खिलौना विमान’ कमेंट पर विवाद गहराया, विमानन कंपनी ने 3 करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा किया

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री और डांसर नोरा फतेही एक बार फिर विवादों में घिर गई हैं। इस बार मामला पिछले साल दिसंबर में मुंबई से जयपुर की यात्रा के दौरान चार्टर्ड विमान को लेकर की गई उनकी सोशल मीडिया टिप्पणी से जुड़ा है। विमानन कंपनी ड्यून्स एविएशन ने नोरा फतेही के खिलाफ गांधीनगर की अदालत में तीन करोड़ रुपये की मानहानि का सिविल मुकदमा दायर किया है। कंपनी का आरोप है कि अभिनेत्री की टिप्पणियों से उसकी छवि और कारोबार को नुकसान पहुंचा।

    मुकदमे के मुताबिक, दिसंबर में मुंबई से जयपुर की यात्रा के दौरान नोरा फतेही ने सेसना सिटेशन CJ2 विमान के अंदर एक वीडियो रिकॉर्ड किया था। इस वीडियो में उन्होंने विमान को छोटा और खिलौने जैसा बताया था। उन्होंने विमान की तुलना लेगो से भी की थी। बाद में यह वीडियो उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया गया, जिसके बाद उनकी टिप्पणी चर्चा में आ गई।

    ड्यून्स एविएशन का दावा है कि नोरा फतेही के बड़ी संख्या में फॉलोअर्स होने के कारण उनकी टिप्पणी का कंपनी की छवि पर सीधा प्रभाव पड़ा। कंपनी के मुताबिक, अभिनेत्री की टिप्पणियों के बाद लोगों के बीच विमान को लेकर गलत धारणा बनी और इसका असर उसके कारोबार पर भी पड़ा।

    कंपनी ने अदालत में दावा किया है कि उसकी बुकिंग में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक गिरावट आई। इसके साथ ही रद्द होने वाली बुकिंग की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई। ड्यून्स एविएशन ने नोरा की टिप्पणियों को लापरवाह और गैरजिम्मेदार बताते हुए आरोप लगाया कि ये बातें किसी तकनीकी जानकारी, जांच या तथ्यों के आधार पर नहीं कही गई थीं।

    विमान की सुरक्षा को लेकर भी कंपनी ने अपना पक्ष अदालत के सामने रखा है। ड्यून्स एविएशन के मुताबिक जिस विमान पर नोरा ने टिप्पणी की थी, वह असुरक्षित या गैरकानूनी नहीं था। कंपनी का कहना है कि विमान निर्धारित मानकों के अनुरूप है और उड़ान के लिए पूरी तरह उपयुक्त था।

    कंपनी ने यह भी दावा किया है कि विमान नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी डीजीसीए से प्रमाणित था और वैध एनएसओपी के तहत कानूनी रूप से संचालित किया जा रहा था। ड्यून्स एविएशन का कहना है कि नोरा की टिप्पणियों के कारण उसकी प्रतिष्ठा, गुडविल और कारोबार को गंभीर नुकसान पहुंचा।

    इस मामले में कंपनी ने नोरा फतेही से तीन करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है। इसके अलावा अदालत से संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो हटाने का निर्देश देने का अनुरोध भी किया गया है। कंपनी ने अभिनेत्री से सार्वजनिक रूप से सफाई देने की मांग भी की है।

    मामले की सुनवाई गांधीनगर की सीनियर सिविल जज आर. अग्रवाल की अदालत में 25 सितंबर को होगी। फिलहाल यह मामला अदालत में विचाराधीन है और कंपनी की ओर से लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला आना बाकी है। इसलिए नोरा फतेही की टिप्पणी और उससे कंपनी को हुए कथित नुकसान को लेकर कानूनी स्थिति अदालत के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • ह्यूस्टन के फास्ट-फूड आउटलेट पर खराब भोजन और लापरवाही को लेकर 12.5 करोड़ का केस

    ह्यूस्टन के फास्ट-फूड आउटलेट पर खराब भोजन और लापरवाही को लेकर 12.5 करोड़ का केस

    नई दिल्ली ।अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में स्थित प्रसिद्ध फास्ट-फूड चेन पोपेय्स के एक आउटलेट के खिलाफ 12.5 करोड़ रुपये के भारी-भरकम हर्जाने का कानूनी मामला सामने आया है। एक दंपत्ति ने रेस्टोरेंट प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए स्थानीय अदालत का दरवाजा खटखटाया है। दंपत्ति का दावा है कि उन्होंने आउटलेट से जो फ्राइड चिकन खरीदा था, उसके एक टुकड़े के भीतर आपत्तिजनक और दूषित सामग्री मौजूद थी, जिससे उनकी सेहत और मानसिक स्थिति पर बुरा असर पड़ा।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, जस्टिन हॉवर्ड और डेनियल मैककिनन नामक दंपत्ति ने साउथ सैम ह्यूस्टन पार्कवे वेस्ट स्थित पोपेय्स के आउटलेट से चिकन का ऑर्डर दिया था। जब वे घर जाकर भोजन करने लगे, तो जैसे ही एक पीस को काटा गया, उसके भीतर कंडोम जैसी दिखने वाली संदिग्ध वस्तु दिखाई दी। इस अवांछित चीज को देखते ही दंपत्ति का भोजन करने का अनुभव बेहद खौफनाक बन गया और उन्होंने तुरंत खाना रोक दिया।

    इस घटना के बाद दंपत्ति में शारीरिक अस्वस्थता और घबराहट की स्थिति पैदा हो गई। उन्हें लगातार उल्टी महसूस होने लगी और इस बात का गहरा डर सताने लगा कि कहीं उन्होंने कोई संक्रमित या दूषित भोजन तो नहीं खा लिया है। उस समय उनके पास इस बात की जांच या पुष्टि का कोई तत्काल उपाय नहीं था कि चिकन के अंदर मिली सामग्री वास्तव में क्या थी, वह कितने समय से वहां मौजूद थी और क्या पूरे भोजन में उसका जहर या प्रभाव फैल चुका था।

    पीड़ित पक्ष ने इस मामले को लेकर हैरिस काउंटी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में याचिका दायर की है। दायर मुकदमे में पोपेय्स की मूल कंपनी रेस्टोरेंट ब्रांड्स इंटरनेशनल, पोपेय्स लुइसियाना किचन और वहां के फ्रेंचाइजी संचालक आमाना बिजनेसेज को मुख्य रूप से प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में साफ तौर पर लापरवाही बरतने, असुरक्षित तरीके से खाद्य पदार्थों का प्रबंधन करने और टेक्सास राज्य के उपभोक्ता संरक्षण कानून के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं।

    मामले में सबसे चिंताजनक पहलू रेस्टोरेंट के कर्मचारियों का व्यवहार रहा। पीड़ित दंपत्ति का आरोप है कि जब वे इस शिकायत को लेकर तुरंत आउटलेट वापस पहुंचे, तो वहां मौजूद स्टाफ ने उनकी गंभीर समस्या को समझने के बजाय उसका मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। कर्मचारियों ने मामले की गहन जांच करने या खेद व्यक्त करने के बजाय बार-बार चिकन बदलकर नया पैकेट देने का प्रयास किया, जबकि ग्राहक रिफंड और उचित कार्रवाई की मांग कर रहे थे। काफी बहस और दबाव के बाद उन्हें पैसे वापस किए गए।

    इस घटना के उजागर होने के बाद स्थानीय स्तर पर भी विरोध के स्वर उठने लगे हैं। ह्यूस्टन के कुछ प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आउटलेट के प्रबंधन से मुलाकात कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है। उन्होंने यह भी कहा है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और खाद्य सुरक्षा के मानकों की पुष्टि नहीं होती, तब तक उस विशिष्ट आउटलेट पर चिकन की बिक्री को पूरी तरह से निलंबित कर दिया जाना चाहिए।

    कुल मिलाकर, इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम कर रही फास्ट-फूड कंपनियों के गुणवत्ता नियंत्रण और खाद्य सुरक्षा मानकों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह मामला अदालत के विचाराधीन है, जहां लापरवाही और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने के आरोपों पर कानूनी सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।