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  • जुलाई 2026 में करियर की परीक्षा या तरक्की का मौका? ग्रहों की चाल से आईटी, बैंकिंग, स्टार्टअप और कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए बड़े बदलावों के संकेत

    जुलाई 2026 में करियर की परीक्षा या तरक्की का मौका? ग्रहों की चाल से आईटी, बैंकिंग, स्टार्टअप और कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए बड़े बदलावों के संकेत


    नई दिल्ली ।
    जुलाई 2026 का महीना भारतीय कॉर्पोरेट जगत में काम करने वाले लाखों पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की बढ़ती गति के बीच कंपनियां अपने प्रदर्शन, लागत नियंत्रण और कार्यप्रणाली की समीक्षा में जुटी हुई हैं। ज्योतिषीय विश्लेषण के अनुसार इस अवधि में ग्रहों की स्थिति कॉर्पोरेट क्षेत्र में पुनर्मूल्यांकन, रणनीतिक बदलाव और कौशल आधारित प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने वाली मानी जा रही है।

    भारत की स्वतंत्रता कुंडली में वर्तमान समय में मंगल महादशा का प्रभाव माना जा रहा है। द्वितीय भाव में स्थित मंगल वित्तीय संसाधन, राजस्व और आर्थिक निर्णयों से जुड़े विषयों को सक्रिय करता है। इस कारण जुलाई के दौरान कॉर्पोरेट निवेश, वित्तीय नीतियां, लागत प्रबंधन और राजस्व संरचना पर अधिक ध्यान केंद्रित रहने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि कई कंपनियां अपने पुराने सिस्टम, डेटा सुरक्षा और परिचालन खर्चों की व्यापक समीक्षा कर सकती हैं।

    आईटी, एआई और फिनटेक सेक्टर के लिए यह अवधि अपेक्षाकृत अवसरों वाली मानी जा रही है। वैश्विक स्तर पर एआई आधारित सेवाओं और डिजिटल समाधानों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में जो पेशेवर नई तकनीकों को अपनाने, रिस्किलिंग और अपस्किलिंग पर ध्यान दे रहे हैं, उनके लिए नए प्रोजेक्ट, जिम्मेदारियां और करियर अवसर बढ़ सकते हैं। ज्ञान आधारित क्षेत्रों में नवाचार और रणनीतिक सोच को विशेष महत्व मिलने के संकेत बताए गए हैं।

    दूसरी ओर स्टार्टअप और वेंचर कैपिटल इकोसिस्टम में चयनात्मक हायरिंग का रुझान बना रह सकता है। जिन कंपनियों का फोकस लाभप्रदता और स्थिर व्यवसाय मॉडल पर है, उन्हें अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में माना जा रहा है, जबकि उच्च बर्न-रेट वाले स्टार्टअप्स को फंडिंग और विस्तार योजनाओं में सावधानी बरतनी पड़ सकती है।

    मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टर में कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स लागत का दबाव चर्चा का विषय बना रह सकता है। ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों के कारण संचालन दक्षता बढ़ाने की आवश्यकता अधिक महसूस की जा सकती है। इस क्षेत्र में सप्लाई चेन, ऑपरेशंस और प्रोडक्शन से जुड़े पेशेवरों पर प्रदर्शन बनाए रखने का दबाव बढ़ने के संकेत हैं।

    बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में क्रेडिट रिस्क असेसमेंट, ऑडिट और अनुपालन प्रक्रियाएं अधिक सख्त हो सकती हैं। खुदरा और खाद्य महंगाई के दबाव के बीच वित्तीय संस्थानों द्वारा जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना जताई गई है। इससे बैंकिंग पेशेवरों के लिए यह समय समीक्षा, रिपोर्टिंग और प्रदर्शन मूल्यांकन के लिहाज से व्यस्त रह सकता है।

    जुलाई के दूसरे पखवाड़े में सूर्य के कर्क राशि में गोचर को नेतृत्व और प्रबंधन से जुड़े निर्णयों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि किसी कर्मचारी का प्रदर्शन मजबूत रहा है, तो इस अवधि में प्रमोशन, सैलरी हाइक या नई जिम्मेदारियों से जुड़ी फाइलों में तेजी आने की संभावना बताई गई है। हालांकि कार्यस्थल पर संवाद शैली, धैर्य और पेशेवर व्यवहार बनाए रखने की सलाह भी दी गई है, क्योंकि छोटी गलतफहमियां तनाव का कारण बन सकती हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार 7 से 24 जुलाई के बीच वक्री बुध के प्रभाव में डेटा प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और संचार से जुड़े मामलों में अतिरिक्त सावधानी आवश्यक हो सकती है। महत्वपूर्ण ईमेल, वित्तीय लेनदेन और अनुबंधों की दोबारा जांच करने की सलाह दी जा रही है। वहीं 24 जुलाई के बाद अटके हुए इंटरव्यू, जॉब चेंज या कॉर्पोरेट निर्णयों में स्पष्टता आने की संभावना मानी जा रही है।

    समग्र रूप से जुलाई 2026 का संदेश यही माना जा रहा है कि यह समय निष्क्रिय रहने का नहीं, बल्कि स्वयं को लगातार अपडेट करने का है। जो पेशेवर अपस्किलिंग, संयमित संवाद और तकनीकी जागरूकता पर ध्यान देंगे, वे बदलते कॉर्पोरेट माहौल में बेहतर अवसर हासिल कर सकते हैं।

  • AI से बढ़ेगा जॉब संकट, 99% कंपनियों के प्रमुखों ने जताई छंटनी की आशंका, युवा कर्मचारियों पर खतरा

    AI से बढ़ेगा जॉब संकट, 99% कंपनियों के प्रमुखों ने जताई छंटनी की आशंका, युवा कर्मचारियों पर खतरा

    नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल काम को आसान बनाने वाली तकनीक नहीं रह गई है, बल्कि यह रोजगार बाजार की तस्वीर भी तेजी से बदल रही है। एक नई वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, अगले दो वर्षों में AI के बढ़ते उपयोग के कारण नौकरी कटौती का खतरा बढ़ सकता है, जिसका सबसे अधिक असर करियर की शुरुआत कर रहे युवा कर्मचारियों पर पड़ने की आशंका है।

    ग्लोबल HR और कंसल्टिंग फर्म मर्सर (Mercer) की ताजा *ग्लोबल टैलेंट ट्रेंड्स रिपोर्ट* में सामने आया है कि 99 प्रतिशत से अधिक बिजनेस एग्जीक्यूटिव्स का मानना है कि AI के कारण आने वाले दो वर्षों में किसी न किसी स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी हो सकती है। इस रिपोर्ट के लिए दुनिया भर के करीब 12 हजार एग्जीक्यूटिव्स, HR लीडर्स और कर्मचारियों से राय ली गई।

    एंट्री-लेवल कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा असर
    रिपोर्ट के मुताबिक AI का सबसे बड़ा प्रभाव उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है जो अपने करियर की शुरुआत कर रहे हैं। जिन कार्यों के जरिए नए कर्मचारी अनुभव और कौशल हासिल करते थे, उनमें से कई जिम्मेदारियां अब AI आसानी से संभाल सकता है। यही वजह है कि कंपनियां जूनियर स्तर की भर्तियों को लेकर अपनी रणनीति बदल रही हैं।

    पिछले एक वर्ष में उन कंपनियों की संख्या 17 प्रतिशत से बढ़कर 43 प्रतिशत हो गई है, जिन्होंने जूनियर पदों में कटौती की है। विशेषज्ञों के अनुसार 22 से 27 वर्ष आयु वर्ग के युवा प्रोफेशनल्स इस बदलाव से सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं।

    AI अपनाने की दौड़, लेकिन तैयारी अधूरी
    रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कंपनियां तेजी से AI को अपने कामकाज में शामिल कर रही हैं, लेकिन अधिकांश संस्थान इसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं। सर्वे के अनुसार केवल एक-तिहाई कंपनियों को ही विश्वास है कि वे मानव कर्मचारियों और AI के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित कर पाएंगी। इससे संकेत मिलता है कि कई संगठन पहले AI लागू कर रहे हैं और बाद में कर्मचारियों की भूमिका तय कर रहे हैं।

    क्या छंटनी से कंपनियों को मिलेगा फायदा?

    विशेषज्ञों का कहना है कि कर्मचारियों की संख्या घटाने से हमेशा बेहतर परिणाम नहीं मिलते। एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि बड़े पैमाने पर छंटनी करने वाली कंपनियों को जरूरी नहीं कि अधिक मुनाफा या बेहतर उत्पादकता हासिल हुई हो। कई मामलों में AI का सबसे प्रभावी उपयोग तब देखा गया, जब इसे कर्मचारियों की जगह लेने के बजाय उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया गया।

    AI के कारण बढ़ रही नौकरी कटौती

    रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026 में AI का असर रोजगार बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। अकेले अप्रैल 2026 में अमेरिका में करीब 21,500 नौकरियों की कटौती के पीछे AI एक प्रमुख कारण रहा, जो उस महीने हुई कुल छंटनी का लगभग 26 प्रतिशत हिस्सा था।

    वहीं, वर्ष 2026 में अब तक AI से जुड़ी 49 हजार से अधिक नौकरियां समाप्त हो चुकी हैं। यह आंकड़ा वर्ष 2025 के कुल स्तर के लगभग बराबर पहुंच चुका है। Meta, Oracle, Salesforce और Block जैसी प्रमुख टेक कंपनियां भी AI आधारित ऑटोमेशन और री-स्ट्रक्चरिंग के तहत कर्मचारियों की संख्या में कमी कर चुकी हैं।

    भविष्य में किन स्किल्स की होगी मांग?
    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में उन पेशेवरों की मांग बढ़ेगी जो AI के साथ मिलकर काम करने की क्षमता रखते हैं। इसलिए AI से प्रतिस्पर्धा करने के बजाय उसे प्रभावी ढंग से उपयोग करना सीखना अधिक महत्वपूर्ण होगा।

    फिलहाल इतना स्पष्ट है कि AI अब केवल तकनीकी बदलाव का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह भर्ती, रोजगार, करियर और कार्य संस्कृति को प्रभावित करने वाली एक बड़ी शक्ति बन चुका है। अगले दो वर्ष यह तय करेंगे कि AI कर्मचारियों के लिए चुनौती बनता है या नए अवसरों का रास्ता खोलता है।

  • टेक इंडस्ट्री में हलचल, Cloudflare ने एआई बदलाव के बीच बड़े पैमाने पर छंटनी की घोषणा

    टेक इंडस्ट्री में हलचल, Cloudflare ने एआई बदलाव के बीच बड़े पैमाने पर छंटनी की घोषणा

    नई दिल्ली । तकनीक की दुनिया में तेजी से हो रहे बदलाव अब कंपनियों की कार्यशैली को पूरी तरह बदल रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव ने जहां कामकाज को तेज और अधिक प्रभावी बनाया है, वहीं इसका असर रोजगार संरचना पर भी साफ दिखाई देने लगा है। इसी क्रम में Cloudflare ने बड़ा कदम उठाते हुए 1,100 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी का फैसला किया है, जिसे कंपनी ने अपने व्यापक पुनर्गठन का हिस्सा बताया है।

    कंपनी के अनुसार पिछले कुछ समय में एआई आधारित सिस्टम और टूल्स के उपयोग में तेज वृद्धि हुई है। अब इंजीनियरिंग से लेकर वित्त, मानव संसाधन और मार्केटिंग तक कई विभागों में रोजमर्रा के कार्यों के लिए एआई एजेंट्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इस बदलाव ने पारंपरिक कार्य प्रक्रियाओं को काफी हद तक बदल दिया है और कंपनी के संगठनात्मक ढांचे को नए सिरे से तैयार करने की जरूरत पैदा की है।

    Cloudflare ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय केवल लागत घटाने या प्रदर्शन आधारित छंटनी नहीं है। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य कंपनी को एक नए तकनीकी युग के अनुसार ढालना है, जहां एआई आधारित कार्य प्रणाली प्रमुख भूमिका निभाएगी। कंपनी का कहना है कि वह अपने सभी विभागों और भूमिकाओं की समीक्षा कर रही है ताकि उन्हें भविष्य की जरूरतों के अनुसार अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

    छंटनी से प्रभावित कर्मचारियों को लेकर कंपनी ने कहा है कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानकारी दी जाएगी और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाएगा। इसके लिए आधिकारिक संचार के साथ-साथ व्यक्तिगत सूचनाएं भी भेजी जाएंगी।

    कंपनी ने प्रभावित कर्मचारियों के लिए राहत पैकेज की भी घोषणा की है। इसके तहत उन्हें तय अवधि तक वेतन का भुगतान किया जाएगा और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ भी कुछ समय तक जारी रहेगा। इसके अलावा कुछ कर्मचारियों को उनके सेवा काल के अनुसार अतिरिक्त लाभ भी दिए जाएंगे।

    Cloudflare ने यह भी निर्णय लिया है कि यह पूरा पुनर्गठन एक ही चरण में पूरा किया जाएगा, ताकि भविष्य में बार-बार बदलाव और अनिश्चितता की स्थिति न बने। कंपनी का मानना है कि तेज बदलते तकनीकी माहौल में स्पष्ट और स्थिर रणनीति बेहद जरूरी है।

    कंपनी ने यह भी स्वीकार किया है कि एआई अब केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं रहा, बल्कि यह पूरे उद्योग के संचालन मॉडल को बदल रहा है। ऐसे में प्रतिस्पर्धा में बने रहने और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए संगठनात्मक ढांचे में बदलाव आवश्यक हो गया था।

    इसके साथ ही कंपनी ने संकेत दिया है कि वह एआई आधारित सेवाओं और उत्पादों में अपने निवेश को और बढ़ाएगी। इसका उद्देश्य कंपनी को अधिक आधुनिक, तेज और नवाचार आधारित बनाना है, ताकि बदलते तकनीकी दौर में वह अपनी स्थिति मजबूत बनाए रख सके।

    इस फैसले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि एआई जहां एक ओर कार्यक्षमता और गति बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह पारंपरिक नौकरियों के ढांचे को भी तेजी से बदल रहा है।

  • AI के दौर में नौकरियों पर संकट, Global Tech कंपनियों में छंटनी का सिलसिला जारी

    AI के दौर में नौकरियों पर संकट, Global Tech कंपनियों में छंटनी का सिलसिला जारी


    नई दिल्ली।
    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और रोबोटिक्स (Artificial Intelligence (AI) and Robotics) समेत नई तकनीक अपनाने पर जोर के बावजूद दुनियाभर की टेक कंपनियों (Tech Companies) ने 2024 के मुकाबले 2025 में करीब 20 फीसदी कम छंटनी की। इस दौरान अमेरिकी कंपनी इंटेल (American company Intel) ने दो बार में सर्वाधिक 27,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। कंपनी ने पहली बार अप्रैल, 2025 में 22,000 और जुलाई, 2025 में 5,000 छंटनी की थी।

    लेऑफ्स डॉट एफवाईआई के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बीते साल भारत समेत दुनियाभर की 257 टेक कंपनियों ने 1,22,549 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। यह आंकड़ा 2024 में 551 कंपनियों से निकाले गए 1,52,922 कर्मचारियों की तुलना में 19.86 फीसदी कम है। साल 2023 में वैश्विक स्तर पर 1,193 कंपनियों ने 2,64,320 लोगों की छंटनी की थी, जबकि 2022 में 1,064 संस्थाओं ने 1,65,269 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया था।

    विशेषज्ञों का कहना है कि दुनियाभर की टेक कंपनियों में एट्रिशन रेट (कर्मचारियों के कंपनी छोड़ने की दर) काफी ज्यादा है। साथ ही, कुशल पेशेवरों की कमी के बावजूद टेक कंपनियों में लगातार छंटनी चिंता की बात है। 


    कंपनियों की खर्च में कटौती का नतीजा

    विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक एट्रिशन रेट और कुशल पेशेवरों की कमी से जूझ रहीं टेक कंपनियों में छंटनी की कई वजहें हैं। वैश्विक अनिश्चितता और टैरिफ वॉर के बीच मंदी की बढ़ती आशंका ने कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है, जो कमाई के मोर्चे पर जूझ रही हैं। इसके अलावा, कई देशों में तनाव के बाद आपूर्ति शृंखला से जुड़ीं समस्याओं और महंगाई बढ़ने के कारण लागत वृद्धि से जूझ रहीं कंपनियां खर्च में कटौती कर रही हैं, जिसका असर छंटनी के रूप में दिख रहा है।

    इन कंपनियों में सबसे ज्यादा निकाले
    इंटेल…2025 में दो बार में 22,000 कर्मचारियों को बाहर निकाला।
    माइक्रोसॉफ्ट…कुल 15,000 पेशेवरों को बाहर का रास्ता दिखाया।
    अमेजन…वैश्विक स्तर पर 14,000 कर्मचारियों की नौकरी गई।
    एचपी…दो बार में 8,000 लोगों की छंटनी की गई।
    सेल्सफोर्स…4,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया।
    मेटा…खर्च में कटौती का हवाला देकर 3,600 पेशेवरों की छंटनी।


    टीसीएस से लेकर जोमैटो ने भी की छंटनी

    भारत में बीते साल टाटा समूह की कंपनी टीसीएस (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) ने सबसे ज्यादा 12,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था। कंपनी ने रिस्ट्रक्चरिंग और स्किल मिसमैच का हवाला देकर इतनी बड़ी संख्या में छंटनी की थी, जिसे लेकर विरोध भी हुआ था।टीसीएस के अलावा 2025 में 29 छोटी-बड़ी कंपनियों ने भी करीब 6,995 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इनमें सबसे ज्यादा 1,000 लोगों की छंटनी ओला इलेक्ट्रिक ने की थी। जोमैटो में भी 600 और कार्स24 में 520 लोगों की नौकरी गई थी।