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  • बीजेपी ने राज्यों के नए प्रभारी घोषित किए, विनोद तावड़े को यूपी और बैजयंत पांडा को महाराष्ट्र की जिम्मेदारी

    बीजेपी ने राज्यों के नए प्रभारी घोषित किए, विनोद तावड़े को यूपी और बैजयंत पांडा को महाराष्ट्र की जिम्मेदारी

    नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी ने 23 सितंबर 2026 को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए प्रभारी और सह-प्रभारियों की नई नियुक्तियों का ऐलान किया है। संगठन में किए गए इस बदलाव के तहत कई वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कुछ नेताओं को एक से अधिक राज्यों का प्रभार भी दिया गया है।

    उत्तर प्रदेश का प्रभारी विनोद तावड़े को बनाया गया है। उनके साथ जगदीश पटेल, मेघा कुलकर्णी, डॉ. प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। महाराष्ट्र में बैजयंत जय पांडा को प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया गया है। उनके साथ अमित मालवीय, सदानंद शेट तनवाड़े और कमलजीत सहरावत सह-प्रभारी होंगे।

    राम माधव को तमिलनाडु और उत्तराखंड का प्रभारी बनाया गया है। तमिलनाडु में उनके साथ निर्मल कुमार सुराना और डीके अरुणा को सह-प्रभारी बनाया गया है। उत्तराखंड में अरविंद मेनन और बांसुरी स्वराज सह-प्रभारी होंगी।

    स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ और हरियाणा की जिम्मेदारी दी गई है। छत्तीसगढ़ में सिद्धार्थ शंभू और हरियाणा में डॉ. भोला सिंह सह-प्रभारी होंगे। गुजरात का प्रभार तरुण चुघ को मिला है। जम्मू-कश्मीर और पंजाब की जिम्मेदारी सतीश पूनिया को दी गई है। पंजाब में वीरेंद्र सचदेवा और डॉ. अलका गुर्जर सह-प्रभारी होंगे।

    बिहार और कर्नाटक का प्रभार हरीश द्विवेदी को सौंपा गया है। बिहार में संगीता यादव और रोहन गुप्ता सह-प्रभारी होंगे, जबकि कर्नाटक में डॉ. कासम वेंकटेश्वरलू को सह-प्रभारी बनाया गया है। मध्य प्रदेश की जिम्मेदारी बिप्लब कुमार देब को मिली है और रेखा वर्मा सह-प्रभारी होंगी। राजस्थान में संजय भाटिया प्रभारी तथा कविता पाटीदार और कुलजीत चहल सह-प्रभारी बनाए गए हैं।

    दिल्ली में डॉ. विनय सहस्रबुद्धे को प्रभारी नियुक्त किया गया है। जामयांग त्सेरिंग नामग्याल और दर्शनाबेन जरदोश सह-प्रभारी होंगी। झारखंड में गजेंद्र पटेल को प्रभारी बनाया गया है, जबकि सौरभ सिंह और निवेदिता सिंह सह-प्रभारी होंगे।

    पश्चिम बंगाल और तेलंगाना का प्रभार सुनील बंसल को दिया गया है। पश्चिम बंगाल में लाल सिंह आर्य, राजेंद्र सिंह और पिंकी कुशवाहा सह-प्रभारी होंगे। तेलंगाना में अभय पाटिल और रेखा शर्मा को सह-प्रभारी बनाया गया है। असम में मंगल पांडे प्रभारी होंगे और फांगनोन कोन्याक सह-प्रभारी होंगी।

    मणिपुर की जिम्मेदारी डॉ. राजदीप रॉय को दी गई है। मेघालय में कनाद पुरकायस्थ प्रभारी और डॉ. नुमल मोमिन सह-प्रभारी होंगे। मिजोरम में डॉ. भगवत कराड़ और नगालैंड में अनिल एंटनी को प्रभारी बनाया गया है। गोवा में डॉ. भारती प्रवीण पवार प्रभारी और अनिल एंटनी सह-प्रभारी होंगे।

    इसके अलावा आंध्र प्रदेश, केरल, ओडिशा, पुडुचेरी, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और त्रिपुरा समेत अन्य राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों में भी प्रभारी और सह-प्रभारियों की नई जिम्मेदारियां तय की गई हैं। सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू की गई हैं।

  • प्रदर्शन से पहले इमरान की PTI को झटका, CM अफरीदी समेत 25 नेताओं के पासपोर्ट ब्लॉक

    प्रदर्शन से पहले इमरान की PTI को झटका, CM अफरीदी समेत 25 नेताओं के पासपोर्ट ब्लॉक


    इस्लामाबाद। पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तेहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के खिलाफ कानूनी शिकंजा और कस गया है। इस्लामाबाद की आतंकवाद विरोधी अदालत ने खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री मोहम्मद सोहेल अफरीदी समेत 25 PTI नेताओं के पासपोर्ट अगले आदेश तक ब्लॉक रखने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई राजधानी के एक पुलिस थाने में दर्ज मामले से जुड़ी है। फैसला ऐसे समय आया है, जब PTI ने 27 सितंबर को देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन का ऐलान किया है।

    FIA को पासपोर्ट ब्लॉक रखने के निर्देश

    जज अबुल हसनात मुहम्मद जुल्करनैन ने पुलिस की अर्जी स्वीकार करते हुए फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) को सभी 25 नेताओं के पासपोर्ट अगले आदेश तक ब्लॉक रखने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि इन सभी को मामले में आरोपी बनाया गया है।

    जांच अधिकारी ने अदालत में आशंका जताई कि आरोपी कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए देश छोड़कर फरार हो सकते हैं। पुलिस ने नेताओं पर सरकारी संस्थानों पर हमले और आतंकवाद को बढ़ावा देने जैसे गंभीर आरोप होने की बात कही।

    पुलिस की दलीलों पर अदालत ने यह भी गौर किया कि आरोपी अदालत में पेश नहीं हुए हैं। जिन नेताओं को अंतरिम जमानत मिली थी, उनके बारे में भी पुलिस ने बताया कि वे अभी तक जांच में शामिल नहीं हुए हैं। इसके बाद अदालत ने पासपोर्ट ब्लॉक करने की मांग मंजूर कर ली।

    असद कैसर समेत कई बड़े नाम सूची में

    अदालत के आदेश के दायरे में वरिष्ठ PTI नेता और नेशनल असेंबली के पूर्व स्पीकर असद कैसर भी शामिल हैं। इनके अलावा सांसद शहराम खान तरकई, शाह अहमद, शेर अली अरबाब, मुहम्मद इकबाल अफरीदी, डॉ. अमजद अली, जुनैद अकबर, शाहिद खट्टक, जुबैर वजीर, अरशद उमरज़ई, जर आलम, मियां उमर और अख्तर खान के नाम भी सूची में हैं।

    इन सभी के खिलाफ राजधानी के एक पुलिस थाने में दर्ज मामले के सिलसिले में कार्रवाई की गई है। पुलिस की ओर से पेश जांच के आधार पर अदालत ने माना कि आरोपियों की गैरहाजिरी और जांच में सहयोग नहीं करने की स्थिति में उनके देश छोड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

    27 सितंबर के प्रदर्शन के लिए समर्थन जुटा रहे थे अफरीदी

    पासपोर्ट ब्लॉक करने का आदेश उस वक्त आया, जब मुख्यमंत्री मोहम्मद सोहेल अफरीदी 27 सितंबर के देशव्यापी प्रदर्शन के लिए समर्थन जुटाने पंजाब के दौरे पर थे। इसी दौरान उन्होंने पंजाब पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए।

    अफरीदी का आरोप है कि पंजाब पुलिस ने उनका अपहरण करने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया गया और बाद में उन्हें सड़क किनारे छोड़ दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब पुलिस को इस हरकत का जवाब देना होगा और यह कोई मजाक नहीं है।

    पंजाब सरकार से स्पष्टीकरण मांगा

    अफरीदी ने एक प्रांत के मुख्यमंत्री के साथ दूसरे प्रांत की पुलिस के इस कथित व्यवहार को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। उन्होंने पंजाब सरकार से स्पष्टीकरण मांगते हुए सवाल किया कि उनके साथ दुर्व्यवहार क्यों किया गया और उन्हें सड़क किनारे क्यों छोड़ा गया।

    उनके इन आरोपों के बीच PTI की ओर से 27 सितंबर के विरोध-प्रदर्शन की तैयारियां भी जारी हैं। पार्टी के नेताओं और समर्थकों के खिलाफ पहले से ही विरोध-प्रदर्शनों तथा सरकारी संस्थानों के खिलाफ कथित हिंसा से जुड़े कई मामले चल रहे हैं।

    प्रदर्शन से पहले बढ़ा राजनीतिक तनाव

    एक तरफ अदालत ने PTI के 25 नेताओं के पासपोर्ट ब्लॉक करने का आदेश दिया है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल मुख्यमंत्री अफरीदी ने पंजाब पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ऐसे में 27 सितंबर के प्रस्तावित देशव्यापी प्रदर्शन से पहले पाकिस्तान में राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

  • भाजपा में बड़े संगठनात्मक बदलाव की तैयारी, नितिन नवीन की टीम में अनुभवी नेताओं को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी

    भाजपा में बड़े संगठनात्मक बदलाव की तैयारी, नितिन नवीन की टीम में अनुभवी नेताओं को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी


    नई दिल्ली। भाजपा संगठन में जल्द ही बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिल सकता है। पार्टी नेतृत्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम को युवा चेहरों के साथ अनुभवी नेताओं के संतुलन से तैयार करने की कवायद में जुटा है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ केंद्रीय मंत्रियों, पूर्व केंद्रीय मंत्रियों और संगठन में लंबे समय तक काम कर चुके नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।

    भाजपा का फोकस आने वाले चुनावों को देखते हुए संगठन को और मजबूत करने पर है। अगले छह महीने में पार्टी को पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों का सामना करना है, जिनमें चार राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं। ऐसे में नेतृत्व संगठनात्मक ढांचे को अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाने की तैयारी कर रहा है। पार्टी की रणनीति नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने के साथ-साथ अनुभवी नेताओं के मार्गदर्शन में उन्हें तैयार करने की है। इसी दिशा में राज्यों में संगठनात्मक बदलाव के बाद अब राष्ट्रीय स्तर पर नई टीम के गठन की प्रक्रिया चल रही है।

    नितिन नवीन के साथ अनुभवी चेहरों को मिलेगी जगह
    भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन राष्ट्रीय राजनीति में अपेक्षाकृत नए हैं, इसलिए पार्टी उनके साथ संगठन का अनुभव रखने वाले नेताओं को जोड़ना चाहती है। सूत्रों के अनुसार, पूर्व में संगठन में जिम्मेदारी संभाल चुके कई सांसदों को भी राष्ट्रीय टीम में शामिल किया जा सकता है। मौजूदा संगठन में काम कर रहे करीब 4 से 5 नेताओं को पदोन्नति देकर नई जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है। वहीं, लगभग आधा दर्जन ऐसे सांसदों पर भी विचार चल रहा है, जिनका संगठनात्मक अनुभव पार्टी के लिए उपयोगी हो सकता है।

    प्रधानमंत्री और वरिष्ठ नेताओं की नजर
    नई टीम को लेकर पार्टी के शीर्ष स्तर पर मंथन जारी है। सूत्रों के मुताबिक, इस प्रक्रिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं। चूंकि आने वाले समय में सरकार में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है, इसलिए कुछ प्रमुख नेताओं को संगठन की जिम्मेदारी सौंपने की रणनीति पर भी विचार किया जा रहा है।

    महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
    भाजपा के नए संगठन में केंद्रीय पदाधिकारियों के साथ-साथ राज्यों के प्रभारी, मोर्चों के अध्यक्ष और राष्ट्रीय कार्यकारिणी का भी गठन किया जाना है। इसी वजह से नामों को अंतिम रूप देने में समय लग रहा है। भाजपा के संविधान के अनुसार राष्ट्रीय कार्यकारिणी में कम से कम 25 प्रतिशत नए सदस्यों को शामिल करना होता है। हालांकि पार्टी इससे अधिक नए चेहरों को भी मौका दे सकती है।

    महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी पार्टी विशेष ध्यान दे रही है। भाजपा संविधान के अनुसार केंद्रीय पदाधिकारियों में 33 प्रतिशत महिलाओं की हिस्सेदारी का प्रावधान है। हालांकि यदि यह लक्ष्य पूरा नहीं हो पाता है, तब भी इस बार पहले की तुलना में अधिक महिलाओं को जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है। अनुमान है कि संगठन में महिलाओं की भागीदारी 20 से 25 प्रतिशत तक हो सकती है।

    नई टीम के गठन के जरिए भाजपा एक तरफ अनुभवी नेताओं का सहारा लेना चाहती है, वहीं दूसरी ओर भविष्य के नेतृत्व को तैयार करने की रणनीति पर भी काम कर रही है।

  • शिवसेना चुनाव चिन्ह विवाद पर बयानबाजी से भड़का SC…. नेताओं को लगाई फटकार

    शिवसेना चुनाव चिन्ह विवाद पर बयानबाजी से भड़का SC…. नेताओं को लगाई फटकार


    नई दिल्ली।
    शिवसेना (Shiv Sena) के चुनाव चिह्न (Election Symbol Dispute) को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बहुत सख्त रुख अपनाया है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने नेताओं द्वारा कोर्ट के खिलाफ की जा रही बयानबाजी पर गहरी नाराजगी जताई। शुक्रवार को इस अहम मामले की सुनवाई करते हुए जजों ने साफ कहा कि नेता मीडिया में अदालत के खिलाफ कोई भी गैरजिम्मेदार बातें न कहें। अदालत ने सख्त चेतावनी दी है कि इस तरह का व्यवहार बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    असल में, शिवसेना के दोनों गुटों (उद्धव और शिंदे) के बीच चुनाव चिह्न को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत इस बात से बहुत नाराज थी कि नेता अदालत के अंदर तो खुद सुनवाई टालने के लिए नई तारीखें मांगते हैं, लेकिन बाहर जाकर मीडिया में यह गलत बात फैलाते हैं कि सुप्रीम कोर्ट कोई फैसला नहीं कर रहा है। अदालत ने नेताओं के इस काम को बहुत ही गलत आचरण माना है।


    सुप्रीम कोर्ट ने उद्धव ठाकरे गुट के वकील को क्या चेतावनी दी?

    सुनवाई के दौरान अदालत ने सीधे तौर पर उद्धव ठाकरे गुट के वकील को कड़े निर्देश दिए। पीठ ने कहा कि सबसे पहले अपने लोगों को मीडिया में ऐसे गैरजिम्मेदार बयान देने से रोकें। जज ने सख्त लहजे में कहा कि आप लोग अदालत के अंदर हमसे तारीख मांगते हैं और बाहर जाकर कहते हैं कि अदालत सुनवाई नहीं कर रही है। अदालत ने साफ किया कि अगर किसी को लगता है कि जज यहां खाली बैठे हैं, तो यह बात बिल्कुल भी स्वीकार नहीं की जाएगी।


    मुख्य न्यायाधीश और शिंदे गुट के वकील ने क्या कहा?

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कड़े शब्दों में कहा कि हम यहां शाम चार बजे तक बैठकर काम करते हैं, इसलिए नेताओं को अपने शब्दों का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर करना चाहिए। वहीं, एकनाथ शिंदे गुट की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने भी अदालत की बात का पूरा समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अदालत के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी नहीं होनी चाहिए क्योंकि अदालत ने हमेशा सभी पक्षों की बातों को बहुत ही शांति और धैर्य के साथ सुना है।


    मामले की अगली सुनवाई कब होगी और ठाकरे गुट के वकील ने क्या सफाई दी?

    अदालत की इस कड़ी फटकार के बाद उद्धव ठाकरे गुट के वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने अपनी सफाई पेश की। उन्होंने अदालत को बताया कि वकील ऐसे किसी भी बयान का बिल्कुल समर्थन नहीं करते हैं और वे अदालत की सुविधा के अनुसार किसी भी समय बहस करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। इन सभी दलीलों को सुनने के बाद, अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 जुलाई की तारीख तय की गई है।

  • पश्चिम एशिया संकट से निपटने के तरीके पर सरकार के साथ नजर आ रहे ये नेता… बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किल!

    पश्चिम एशिया संकट से निपटने के तरीके पर सरकार के साथ नजर आ रहे ये नेता… बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किल!


    नई दिल्ली।
    कांग्रेस (Congress) के कुछ नेताओं ने पश्चिम एशिया (West Asia) संकट से निपटने के तरीके पर सरकार के साथ खड़े नजर आकर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पहले भी कई मौकों पर कांग्रेस को असहज स्थिति में डाल चुके पार्टी सांसद शशि थरूर (MP Shashi Tharoor) के अलावा मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पूर्व सीएम कमलनाथ (Former CM Kamal Nath) और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा (Anand Sharma) और मनीष तिवारी (Manish Tewari) ने पिछले कुछ दिनों में पार्टी के आधिकारिक रुख से अलग राय जताई है।


    नेताओं की बयानबाजी से कांग्रेस की हुई किरकिरी

    इन प्रमुख नेताओं की बयानबाजी ने कांग्रेस की काफी किरकिरी कराई है। खासकर ऐसे समय जब पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण देश में ऊर्जा संकट उत्पन्न होने को लेकर लगातार नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साध रहे हैं। राहुल ने हाल ही में कहा था कि आने वाले समय में ईंधन एक बड़ी समस्या बनने वाला है, क्योंकि ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो चुकी है। यह स्थिति गलत विदेश नीति के कारण पैदा हुई है।


    आनंद शर्मा, कमलनाथ के बाद सरकार के साथ मनीष तिवारी

    कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने पश्चिम एशिया में जारी जंग पर एक टीवी चैनल पर कहा, सरकार संभवतः सही काम कर रही है। अभी दो दिन पहले कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं आनंद शर्मा और कमलनाथ ने भी मौजूदा स्थिति को संभालने के केंद्र के तरीके की सराहना की थी। आनंद शर्मा ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा था कि भारत का कूटनीतिक तरीका समझदारी भरा रहा है। इससे संभावित मुश्किलों से बचा गया है।

    एलपीजी की कोई कमी नहीं है- कमलनाथ
    मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने छिंदवाड़ा में एक कार्यक्रम के दौरान कहा, एलपीजी की कोई कमी नहीं है। बस ये माहौल बनाया जा रहा है कि कमी है। कुछ लोगों राजनीतिक फायदे के लिए जानबूझकर डर फैला रहे हैं। शशि थरूर ने पिछले महीने एक लेख में पश्चिम एशिया संकट पर भारत सरकार के संयमित रुख का समर्थन करते हुए इसे जिम्मेदारी भरा बताया है। उनके मुताबिक, इस मामले में चुप्पी कायरता नहीं है। हमें समझना होगा कि हमारे राष्ट्रीय हित इस इलाके से जुड़े हैं।

  • कहां हैं मोजतबा खामेनेई? नए सुप्रीम लीडर की गैरमौजूदगी पर CIA-मोसाद सतर्क

    कहां हैं मोजतबा खामेनेई? नए सुप्रीम लीडर की गैरमौजूदगी पर CIA-मोसाद सतर्क


    नई दिल्ली। ईरान के नए सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei की सार्वजनिक अनुपस्थिति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। बताया जा रहा है कि उनके पिता Ali Khamenei की हत्या के बाद 9 मार्च को उन्हें ईरान का तीसरा सुप्रीम लीडर घोषित किया गया था, लेकिन तब से वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। इस स्थिति ने Central Intelligence Agency (CIA) और Mossad जैसी खुफिया एजेंसियों को सतर्क कर दिया है।

    नवरोज पर नहीं आया वीडियो संदेश

    फारसी नववर्ष Nowruz के मौके पर आमतौर पर सुप्रीम लीडर देश को संबोधित करते हैं, लेकिन इस बार केवल लिखित बयान जारी किया गया। उनके आधिकारिक चैनल पर कुछ पुरानी तस्वीरें साझा की गईं, जिससे उनकी मौजूदगी और स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    ‘जीवित होने के संकेत’, लेकिन ठोस प्रमाण नहीं

    अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों के अनुसार, कुछ संकेत मिले हैं कि ईरानी अधिकारी उनसे मुलाकात की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, एक इजरायली अधिकारी ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि वे वास्तव में आदेश दे रहे हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने इस स्थिति को “बेहद अजीब” बताया और कहा कि इतने बड़े पद पर किसी की सक्रियता का कोई स्पष्ट संकेत न मिलना असामान्य है।

    संभावित कारणों पर चर्चा

    रिपोर्टों के अनुसार, एजेंसियां साझा की गई तस्वीरों की जांच कर रही हैं कि वे हाल की हैं या नहीं। इस बीच Masoud Pezeshkian ने नवरोज पर वीडियो संदेश जारी किया, जबकि मोजतबा खामेनेई सामने नहीं आए। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा कारणों से उन्हें सार्वजनिक रूप से सामने नहीं लाया जा रहा हो सकता है।

    तेल अवीव स्थित Institute for National Security Studies से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा युद्ध जैसे हालात में उनकी सार्वजनिक मौजूदगी जोखिम भरी हो सकती है। यह भी संभावना जताई जा रही है कि स्वास्थ्य या चोट से जुड़ी वजहों के कारण वे सामने नहीं आ रहे हों।

    सत्ता संतुलन पर उठे सवाल

    बताया जा रहा है कि Israel ने उन्हें संभावित लक्ष्य सूची में ऊपर रखा है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं। इस बीच सवाल उठ रहे हैं कि क्या वास्तव में सत्ता की कमान उनके हाथ में है या Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) जैसे शक्तिशाली सैन्य संगठन निर्णय ले रहे हैं।

    खुफिया एजेंसियां उनकी गतिविधियों से जुड़े हर संकेत पर नजर बनाए हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई की अनुपस्थिति ईरान की आंतरिक राजनीति और चल रहे संघर्ष की दिशा पर महत्वपूर्ण असर डाल सकती है।

  • ‘कांग्रेस गरीबों की पार्टी, नेता अमीर’ -लखनऊ में राहुल गांधी का बड़ा बयान, BJP पर भी साधा निशाना

    ‘कांग्रेस गरीबों की पार्टी, नेता अमीर’ -लखनऊ में राहुल गांधी का बड़ा बयान, BJP पर भी साधा निशाना


    लखनऊ। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने लखनऊ में आयोजित संविधान सम्मेलन में अपनी ही पार्टी को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक गरीबों की पार्टी है, लेकिन उसके कई बड़े नेता अमीर हैं।

    राहुल गांधी ने कहा, “कांग्रेस गरीब पार्टी है, लेकिन उसके जो बड़े-बड़े नेता हैं वे बहुत अमीर हैं। हम अमीर पार्टी बनना भी नहीं चाहते, क्योंकि जिस दिन कांग्रेस अमीर पार्टी बन जाएगी, वह Bharatiya Janata Party बन जाएगी।”

    उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह ढांचा Mahatma Gandhi के समय से ही तय किया गया था और पार्टी का उद्देश्य हमेशा गरीबों और वंचितों की आवाज बनना रहा है।

    कांशीराम की जयंती पर सम्मेलन

    लखनऊ में Kanshi Ram की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कांग्रेस की कमियों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि पार्टी की कुछ कमजोरियों के कारण ही बहुजन आंदोलन को ताकत मिली और कांशीराम राजनीति में बड़ी सफलता हासिल कर पाए।

    उनका कहना था कि अगर कांग्रेस ने सामाजिक बदलाव की दिशा में तेज़ी से काम किया होता, तो शायद कांशीराम को इतनी बड़ी राजनीतिक सफलता नहीं मिलती।

    केवल इच्छा से नहीं होता बदलाव

    कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि राजनीति में केवल चाहने से कुछ नहीं होता। बदलाव के लिए विचारों के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
    उन्होंने कहा कि जब तक लोग यह तय नहीं करेंगे कि अन्याय को स्वीकार नहीं करना है और उसके खिलाफ खड़ा होना है, तब तक समाज में बदलाव संभव नहीं है।

    संविधान और मौजूदा सरकार पर टिप्पणी

    संविधान पर बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत के संविधान में हजारों साल पुरानी सभ्यता की आवाज़ है और इसकी मूल भावना सामाजिक न्याय और बराबरी की है।

    उन्होंने मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज की सत्ता इस मूल भावना को स्वीकार नहीं करती।

    अंबेडकर और कांशीराम के संघर्ष का जिक्र

    अपने संबोधन में राहुल गांधी ने B. R. Ambedkar और कांशीराम के संघर्ष का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अंबेडकर ने शिक्षा और संगठन के जरिए समाज को नई दिशा दी, जबकि कांशीराम ने बिना समझौता किए अपने सिद्धांतों पर संघर्ष किया।

    ऊर्जा नीति और सरकार पर आरोप

    राहुल गांधी ने देश की ऊर्जा नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण भारत की ऊर्जा नीतियों पर असर पड़ रहा है।

    समाज में असमानता का मुद्दा

    राहुल गांधी ने कहा कि देश का समाज आज 15 प्रतिशत और 85 प्रतिशत में बंट गया है, जहां संसाधनों और अवसरों का लाभ सीमित वर्ग तक ही पहुंच रहा है।

    2027 चुनाव की तैयारी

    कार्यक्रम के अंत में उन्होंने कहा कि राजनीति को बदलने का समय आ गया है और सबकी हिस्सेदारी वाली राजनीति ही देश को आगे ले जा सकती है।
    गौरतलब है कि हालिया लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में बेहतर प्रदर्शन किया था। अब यही गठबंधन 2027 के विधानसभा चुनाव में भी उसी सफलता को दोहराने की रणनीति पर काम कर रहा है।