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  • बिहार की राजनीति में बड़ा सत्ता परिवर्तन तय, नए मुख्यमंत्री के चयन को लेकर तेज हुई हलचल और भाजपा की रणनीतिक भूमिका पर टिकी सबकी नजर

    बिहार की राजनीति में बड़ा सत्ता परिवर्तन तय, नए मुख्यमंत्री के चयन को लेकर तेज हुई हलचल और भाजपा की रणनीतिक भूमिका पर टिकी सबकी नजर


    नई दिल्ली:बिहार की राजनीति इस समय एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है, जहां मुख्यमंत्री पद को लेकर तेज होती हलचल ने सियासी माहौल को पूरी तरह बदल दिया है। राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया जल्द शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं और इसके साथ ही नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए यह माना जा रहा है कि इस बार राज्य की सत्ता भारतीय जनता पार्टी के हाथ में जा सकती है।
    मुख्यमंत्री पद से Nitish Kumar के इस्तीफे के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले हैं और अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के भीतर नए नेतृत्व के चयन की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इस पूरी प्रक्रिया में भारतीय जनता पार्टी की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है, क्योंकि मुख्यमंत्री पद के लिए नाम तय करने की जिम्मेदारी उसी के पास है।

    इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए भाजपा ने केंद्रीय मंत्री Shivraj Singh Chouhan को बिहार में विधायक दल की बैठक के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। उनकी भूमिका पार्टी के विधायकों के बीच समन्वय स्थापित करना और नए नेता के चयन की प्रक्रिया को सुचारु रूप से पूरा करना होगी। इस कदम को पार्टी की रणनीतिक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है, जिससे नेतृत्व परिवर्तन को व्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया जा सके।

    राज्य के वरिष्ठ नेता Vijay Kumar Choudhary ने भी संकेत दिए हैं कि नई सरकार के गठन की प्रक्रिया जल्द ही शुरू हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के नाम को लेकर अंतिम निर्णय भाजपा को लेना है, जिसके बाद गठबंधन के विधायकों की बैठक में नेता का चयन किया जाएगा। इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि पूरी प्रक्रिया का केंद्र भाजपा का निर्णय ही रहेगा।


    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार मुख्यमंत्री का चयन केवल तत्काल राजनीतिक समीकरणों के आधार पर नहीं होगा, बल्कि आगामी चुनावों और व्यापक रणनीति को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। बिहार जैसे राज्य में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, ऐसे में पार्टी नेतृत्व हर पहलू को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की तैयारी में है।

    इस बीच संभावित दावेदारों की सक्रियता और अंदरूनी बैठकों ने यह संकेत दिया है कि नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चा तेज हो चुकी है। हालांकि अंतिम निर्णय विधायक दल की बैठक में ही लिया जाएगा, जहां चुने गए नेता को मुख्यमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाया जाएगा।

    बदलते राजनीतिक घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार जल्द ही एक नए नेतृत्व के साथ आगे बढ़ सकता है। अब सभी की नजर उस फैसले पर टिकी हुई है, जो राज्य की राजनीति की दिशा और भविष्य दोनों को प्रभावित करेगा।

  • ईरान की आखिरी गोली तक लड़ाई की कसम: खतीबजादेह ने ट्रम्प को बताया ‘औपनिवेशिक नजरिया’, कुर्द समुदाय की रक्षा का दिया आश्वासन

    ईरान की आखिरी गोली तक लड़ाई की कसम: खतीबजादेह ने ट्रम्प को बताया ‘औपनिवेशिक नजरिया’, कुर्द समुदाय की रक्षा का दिया आश्वासन



    नई दिल्ली। रायसीना डायलॉग 2026 में ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने शुक्रवार को कहा कि ईरान अमेरिकी-इजराइली हमलों के खिलाफ “आखिरी गोली और आखिरी सैनिक तक” लड़ने को तैयार है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ईरान में नेतृत्व परिवर्तन की कोशिशों को औपनिवेशिक दृष्टिकोण करार दिया।

    खतीबजादेह ने कहा कि ईरान का कुर्द समुदाय देश की पहचान का अहम हिस्सा है और अलगाववाद से जोड़ा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान संघर्ष को अन्य देशों तक फैलाना नहीं चाहता और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए।

    हिंद महासागर में डूबे ईरानी जहाज को लेकर उन्होंने कहा कि यह भारत के आमंत्रण पर अंतरराष्ट्रीय अभ्यास में आया था और उस पर कोई हथियार नहीं थे। ईरान और भारत के रिश्तों को उन्होंने पुराने और महत्वपूर्ण बताया।

    रायसीना डायलॉग का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 मार्च को किया था। इस सम्मेलन में 110 देशों के लगभग 2700 प्रतिनिधि शामिल हैं और इसमें वैश्विक सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आर्थिक सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है।