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  • सीएम पद को लेकर कर्नाटक कांग्रेस में बवाल, डीके शिवकुमार को मिल रहा व्यापक समर्थन

    सीएम पद को लेकर कर्नाटक कांग्रेस में बवाल, डीके शिवकुमार को मिल रहा व्यापक समर्थन


    नई दिल्ली। कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी घमासान खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के विधायक इकबाल हुसैन ने दावा किया कि कांग्रेस के करीब 80 से 90 विधायक उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं। हुसैन ने कहा कि कई विधायक मानते हैं कि शिवकुमार के संघर्ष और मेहनत को सम्मानित करना चाहिए और आने वाले चुनावों की रणनीति के लिहाज से भी यह सही कदम होगा।

    रामनगर में पत्रकारों से बातचीत में हुसैन ने बताया कि सभी 140 विधायक बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं और करीब 80-90 विधायक नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सभी डीके शिवकुमार के समर्थन में हैं और उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें यह नहीं पता कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ कौन खड़ा है और शिवकुमार के साथ कौन।

    विदेश यात्रा ने बढ़ाई हलचल
    सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले कुछ विधायकों की विदेश यात्रा को गंभीरता से लिया है। पार्टी के कर्नाटक प्रभारी और एआईसीसी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने उन विधायकों के नाम मांगे हैं जो इस यात्रा में शामिल थे। यह यात्रा राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अफवाहों को शांत करने के लिए आयोजित की गई मानी जा रही है।

    राज्य पशुपालन मंत्री के. वेंकटेश ने कहा कि कुछ नेताओं ने उन्हें इस यात्रा में शामिल होने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह यात्रा उनके मंत्रालय द्वारा आयोजित नहीं की गई थी। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी कहा कि विधायक और एमएलसी अपने खर्च पर विदेश जा रहे हैं।

    दिल्ली में डीके शिवकुमार की बैठक
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने दिल्ली में सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पर बैठक की, जो नेतृत्व परिवर्तन की अफवाहों को और मजबूत करती है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि समय ही बताएगा कि आगे क्या होगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने प्रियंका गांधी वाड्रा या राहुल गांधी से मुलाकात की, तो शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात की और सभी चर्चा पूरी हो गई।

    शिवकुमार ने यह भी कहा कि वे सड़क पर खड़े होकर राजनीति नहीं कर रहे हैं और सब कुछ पार्टी नेतृत्व के मार्गदर्शन में हो रहा है।

    आगे क्या होगा
    कर्नाटक कांग्रेस में यह घमासान अभी जारी है। 80-90 विधायक डीके शिवकुमार के समर्थन में हैं और पार्टी हाईकमान की बैठकें और विदेश यात्रा इस सियासी समीकरण को और जटिल बना रही हैं। अब नजर यह है कि नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में अगला कदम कब और कैसे उठाया जाएगा और क्या डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह संकट राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

  • सोनिया गांधी को पत्र लिखना पड़ा महंगा ओडिशा के पूर्व विधायक मोहम्मद मुकीम कांग्रेस से निष्कासित

    सोनिया गांधी को पत्र लिखना पड़ा महंगा ओडिशा के पूर्व विधायक मोहम्मद मुकीम कांग्रेस से निष्कासित


    नई दिल्ली । भुवनेश्वर कांग्रेस पार्टी ने ओडिशा के पूर्व विधायक मोहम्मद मुकीम को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है। यह कदम पार्टी की अनुशासन समिति के निर्देश पर लिया गया क्योंकि मुकीम पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप था। यह फैसला पार्टी के भीतर नेतृत्व और कार्यप्रणाली को लेकर बढ़ती असंतोष की स्थितियों के बीच आया है।

    सोनिया गांधी को पत्र लिखकर जताई थी नाराजगी

    मुकीम जो पहले बाराबती-कटक सीट से विधायक रह चुके हैं ने हाल ही में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने पार्टी की स्थिति और नेतृत्व पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की थी। पत्र में उन्होंने कांग्रेस की कमजोर स्थिति का उल्लेख करते हुए सोनिया गांधी से पार्टी के भविष्य के लिए मार्गदर्शन की अपील की थी। मुकीम ने लिखा था कि कांग्रेस वर्तमान में कठिन दौर से गुजर रही है और संगठन जमीनी स्तर पर कमजोर होता जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि सोनिया गांधी का मार्गदर्शन पार्टी के लिए बेहद जरूरी है ताकि पार्टी को इस संकट से उबारा जा सके।

    खड़गे की उम्र और नेतृत्व पर सवाल

    पत्र का सबसे विवादास्पद हिस्सा मल्लिकार्जुन खड़गे की उम्र पर था। मुकीम ने खड़गे की उम्र 83 वर्ष का जिक्र करते हुए यह सवाल उठाया कि विपक्ष के नेता के रूप में इतनी उम्र में सक्रियता दौड़-भाग और जनसंपर्क करना संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने खड़गे को सलाहकार की भूमिका में रखने की सलाह दी और युवा नेतृत्व को आगे लाने की आवश्यकता पर बल दिया। मुकीम ने प्रियंका गांधी वाड्रा को केंद्रीय भूमिका में और राहुल गांधी को लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में प्रभावी बनाए जाने की बात भी की।

    युवा नेताओं को आगे लाने की वकालत

    मुकीम ने अपने पत्र में पार्टी में युवा नेताओं को बढ़ावा देने की वकालत की। उन्होंने सचिन पायलट डीके शिवकुमार ए रेवंत रेड्डी और शशि थरूर जैसे नेताओं को पार्टी की शीर्ष नेतृत्व टीम में शामिल करने की बात की। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को ज्योतिरादित्य सिंधिया मिलिंद देवड़ा और हिमंता बिस्वा सरमा जैसे नेताओं के पार्टी छोड़ने के कारणों को समझना चाहिए और इसे पार्टी की उपेक्षा और अनदेखी का परिणाम बताया।

    राहुल गांधी से मुलाकात न होने की शिकायत

    पत्र में मुकीम ने यह भी शिकायत की थी कि वे पिछले तीन वर्षों से राहुल गांधी से मुलाकात की कोशिश कर रहे थे लेकिन उन्हें कभी समय नहीं मिल सका। उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत पीड़ा नहीं बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं और नेतृत्व के बीच बढ़ती दूरी का प्रतीक बताया।

    कांग्रेस की अनुशासनात्मक कार्रवाई

    कांग्रेस ने मुकीम के इस पत्र को पार्टी अनुशासन के खिलाफ माना और उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अनुशासन बनाए रखना पार्टी की प्राथमिकता है।
    कांग्रेस पार्टी की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन यह कदम संगठन में अनुशासन बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता के लिए कोई स्थान नहीं है।

    संघर्षपूर्ण समय में पार्टी का कदम

    यह घटना उस समय हुई है जब कांग्रेस पार्टी अपने संगठन और नेतृत्व को लेकर आंतरिक असंतोष का सामना कर रही है। मुकीम का पत्र इस असंतोष की गहराई को उजागर करता है और उनकी निष्कासन की कार्रवाई से यह भी साफ हो जाता है कि कांग्रेस नेतृत्व को पार्टी में गहरी अंतर्विरोधों की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।