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  • पुणे पोर्श कांड पर फिर बवाल: आरोपियों की पार्टी का वीडियो वायरल, पीड़ित परिवार में आक्रोश

    पुणे पोर्श कांड पर फिर बवाल: आरोपियों की पार्टी का वीडियो वायरल, पीड़ित परिवार में आक्रोश


     महाराष्ट्र के पुणे शहर में हुए चर्चित पोर्श कार हादसे को लेकर एक बार फिर माहौल गर्म हो गया है। यह मामला मई 2024 का है, जब कल्याणी नगर इलाके में एक तेज रफ्तार लग्जरी पोर्श कार ने दो आईटी इंजीनियरों को टक्कर मार दी थी। इस दर्दनाक हादसे में दोनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जिससे पूरे देश में गुस्सा और आक्रोश फैल गया था।

    अब इस मामले में नया विवाद उस समय खड़ा हो गया जब आरोपी नाबालिग के परिवार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में परिवार को कथित रूप से जश्न मनाते और डांस करते हुए देखा जा रहा है। जैसे ही यह वीडियो सामने आया, पीड़ित परिवार ने इसे बेहद असंवेदनशील और पीड़ा को बढ़ाने वाला कदम बताया।

    मृतकों में शामिल जबलपुर निवासी इंजीनियर अश्विनी कोष्टा के पिता ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जिस परिवार के नाबालिग बेटे की लापरवाही से दो लोगों की जान गई, उसी परिवार का इस तरह जश्न मनाना बेहद दुखद और अस्वीकार्य है। उनके अनुसार यह व्यवहार पीड़ित परिवारों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है।

    उन्होंने आगे कहा कि आरोपी परिवार में न तो संवेदनशीलता बची है और न ही सामाजिक जिम्मेदारी का भाव दिखाई देता है। पिता ने आरोप लगाया कि इस तरह की घटनाएं न्याय व्यवस्था और पीड़ित परिवारों की भावनाओं दोनों का अपमान करती हैं। उन्होंने यह भी मांग की कि आरोपी को दी गई जमानत पर पुनर्विचार किया जाए और मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई हो।

    वहीं दूसरी ओर, आरोपी परिवार ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि वायरल वीडियो हाल का नहीं है। परिवार का दावा है कि यह वीडियो 2 सितंबर 2023 का है, जब उनकी शादी की सालगिरह गोवा के एक होटल में मनाई गई थी। परिवार ने आरोप लगाया कि वीडियो को गलत संदर्भ में पेश कर सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है।

    आरोपी पक्ष ने यह भी कहा है कि यह एक निजी वीडियो है और इसे बिना अनुमति के वायरल किया गया है। उन्होंने वीडियो फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

    फिलहाल यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है और सोशल मीडिया पर लोग दो हिस्सों में बंटे नजर आ रहे हैंएक पक्ष इसे पीड़ित परिवार के प्रति असंवेदनशीलता बता रहा है, जबकि दूसरा इसे पुराना वीडियो बताकर गलत प्रचार का मामला मान रहा है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर पुणे पोर्श हादसे को सुर्खियों में ला दिया है और न्याय प्रक्रिया को लेकर बहस तेज कर दी है।

  • भोजशाला परिसर विवाद पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी, सभी पक्षों को दस्तावेज सौंपने के निर्देश

    भोजशाला परिसर विवाद पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी, सभी पक्षों को दस्तावेज सौंपने के निर्देश


    मध्य प्रदेश/धार: मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर से जुड़े विवाद मामले में इंदौर हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान अदालत ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं, जिनसे मामले की जांच और पारदर्शिता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को आदेश दिया है कि 98 दिनों तक चले सर्वे की पूरी वीडियोग्राफी संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी पक्षों को वीडियो रिकॉर्डिंग सौंप दी जाए, ताकि वे अपने तर्क और दावे इन साक्ष्यों के आधार पर प्रस्तुत कर सकें।

    इस मामले में भोजशाला परिसर के अधिकार को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद जारी है और अदालत में इस विषय पर नियमित सुनवाई हो रही है। याचिका मुस्लिम पक्ष की ओर से कमाल मौला वेलफेयर ट्रस्ट द्वारा दायर की गई है, जिस पर डबल बेंच में सुनवाई की जा रही है। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से अपने कानूनी तर्क और ऐतिहासिक तथ्यों को प्रस्तुत किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न न्यायिक निर्णयों और पूर्व मामलों का उल्लेख भी शामिल है।

    सुनवाई के दौरान कानूनी बहस मुख्य रूप से टाइटल विवाद, साक्ष्यों की स्वीकार्यता और याचिका की वैधता जैसे मुद्दों पर केंद्रित रही। मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुत दलीलों में यह कहा गया कि एएसआई सर्वे की रिपोर्ट और उसकी प्रक्रिया को लेकर पहले भी न्यायालयों द्वारा कुछ मानक निर्धारित किए गए हैं, जिन्हें इस मामले में भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

    मुस्लिम पक्ष की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि सर्वे प्रक्रिया के दौरान कुछ पहलुओं को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। उनका कहना है कि सर्वे के दौरान की गई खुदाई और रिकॉर्डिंग में कुछ अवशेषों को लेकर असमानता देखने को मिली है, जिससे मामले की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि वीडियोग्राफी से वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और अदालत के समक्ष सभी पक्षों के दावों का सही मूल्यांकन संभव हो सकेगा।

    दूसरी ओर, पक्षकारों का कहना है कि सर्वे के दौरान विभिन्न धार्मिक और ऐतिहासिक अवशेषों को रिकॉर्ड किया गया है और इन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत प्रस्तुत किया गया है। इस पूरे मामले में दोनों पक्ष अपने अपने दावों को मजबूत करने के लिए उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों पर आधारित दलीलें पेश कर रहे हैं।

    अदालत के इस आदेश के बाद अब सभी पक्षों को 27 अप्रैल तक संबंधित वीडियो क्लिप्स उपलब्ध कराई जाएंगी, जिसके बाद मामले की आगे की सुनवाई में इन साक्ष्यों के आधार पर तर्क प्रस्तुत किए जाएंगे। यह निर्णय मामले की पारदर्शिता और निष्पक्ष सुनवाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आगे की कानूनी प्रक्रिया और स्पष्ट हो सकेगी।

  • सलमान खान पहुंचे नेशनल कंज्यूमर कमीशन, बोले- जिला कोर्ट ने मेरे साथ अन्याय किया

    सलमान खान पहुंचे नेशनल कंज्यूमर कमीशन, बोले- जिला कोर्ट ने मेरे साथ अन्याय किया

    नई दिल्ली बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान अब नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (NCDRC) में पहुंच गए हैं। मामला राजश्री इलायची के विज्ञापन विवाद से जुड़ा है। सलमान खान का दावा है कि जयपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने उनके साथ अनुचित और कठोर कदम उठाए।

    मामला क्या है?

    मामला जनवरी 2026 का है। अधिवक्ता योगेंद्र बडियाल ने जयपुर के जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कर राजश्री इलायची पर आरोप लगाया कि यह ब्रांड पान मसाला के नाम पर इलायची को प्रमोट कर रहा है।

    इसके बाद 6 जनवरी 2026 को जिला आयोग ने एकतरफा (Ex-parte) अंतरिम आदेश पारित किया। इस आदेश में सलमान खान और अन्य प्रतिवादियों को निर्देश दिया गया कि वे ऐसे विज्ञापन न चलाएं।

    क्या हुआ उसके बाद?

    बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ता योगेंद्र बडियाल ने आरोप लगाया कि जिला आयोग के आदेश के बावजूद सलमान खान से जुड़े होर्डिंग विज्ञापन लगे रहे। इसके बाद 15 जनवरी 2026 को पहली पेशी में ही सलमान खान के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिया गया।

    जिला आयोग ने आदेश की अवमानना (धारा 72) के तहत सलमान की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) भी गठित करने का निर्देश दिया।

    सलमान खान के वकील की दलील

    सलमान खान के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता रवि प्रकाश ने जिला आयोग को बताया कि उन्हें आदेश की कोई सर्टिफाइड कॉपी नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा, “जब आदेश की आधिकारिक कॉपी ही नहीं मिली, तो इसके उल्लंघन का आरोप कैसे लगाया जा सकता है?”

    वकील ने यह भी उठाया कि आदेश की जानकारी पहले मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए उन्हें मिली थी, जबकि उन्हें आधिकारिक नोटिस नहीं दिया गया।

    राजस्थान स्टेट कंज्यूमर कमीशन ने क्या किया?

    सलमान खान ने जिला आयोग के आदेश को राजस्थान स्टेट कंज्यूमर कमीशन में चुनौती दी। लेकिन 16 मार्च 2026 को राज्य आयोग ने उनकी अपील खारिज कर दी और जिला आयोग के आदेश को सही ठहराया।

    अब NCDRC में अपील

    सलमान खान के वकील ने NCDRC में दावा किया कि जयपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने उनके साथ अन्याय किया। उन्होंने कहा कि एक भ्रामक विज्ञापन की शिकायत से जुड़ी कार्यवाही में अनुचित व्यवहार हुआ।

    सलमान के खिलाफ कठोर दंडात्मक कदम उठाए गए और आदेश की प्रमाणित प्रतियां देने से इनकार किया गया। उनके अनुसार, यह पूरे मामले में न्याय और उचित प्रक्रिया का उल्लंघन है।

    सलमान खान अब अपने पक्ष में नेशनल कंज्यूमर कमीशन में लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका कहना है कि जिला आयोग के आदेश और STF गठन में उनके साथ अनुचित और कठोर कदम उठाए गए। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि NCDRC इस मामले में क्या निर्णय लेता है।