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  • पति और ससुर के कानूनी नोटिस पर सेलिना जेटली का जवाब, ‘अपने बच्चों और अधिकारों के लिए आवाज उठाती रहूंगी’

    पति और ससुर के कानूनी नोटिस पर सेलिना जेटली का जवाब, ‘अपने बच्चों और अधिकारों के लिए आवाज उठाती रहूंगी’


    नई दिल्ली ।  अभिनेत्री Celina Jaitly एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं। पति Peter Hag के साथ चल रहे वैवाहिक विवाद और बच्चों की कस्टडी से जुड़े मामले के बीच उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी है। अभिनेत्री ने स्पष्ट कहा है कि वह किसी भी प्रकार की कानूनी धमकी या दबाव के आगे झुकने वाली नहीं हैं और अपने बच्चों तथा न्याय के लिए संघर्ष जारी रखेंगी।

    हाल के दिनों में पति और ससुर की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिसों के बाद सेलिना जेटली ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने कहा कि वर्षों तक उनके परिवार से जुड़ी खबरें, इंटरव्यू और सार्वजनिक प्रस्तुतियां चर्चा का विषय बनी रहीं, लेकिन जब उन्होंने अपने निजी संघर्षों और एक मां के रूप में अपनी चिंताओं को सामने रखा तो उन्हें कानूनी नोटिसों का सामना करना पड़ा। अभिनेत्री का कहना है कि उन्होंने अपने कानूनी प्रतिनिधियों के माध्यम से इन नोटिसों का जवाब भी दे दिया है।

    सेलिना जेटली ने अपने बयान में बच्चों की कस्टडी को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि वह हमेशा संयुक्त अभिरक्षा और आपसी सहमति से समाधान के पक्ष में रही हैं। उनके अनुसार उन्होंने कई बार शांतिपूर्ण तरीके से मामले को सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन परिस्थितियां अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहीं। उन्होंने दावा किया कि अदालत के आदेशों के बावजूद बच्चों से संपर्क स्थापित करने में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

    अभिनेत्री ने यह भी कहा कि एक मां के रूप में बच्चों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर उनकी जिम्मेदारी सर्वोपरि है। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि बच्चों को उनकी जानकारी या सहमति के बिना विभिन्न न्यायिक क्षेत्रों से बाहर ले जाने की कोशिश की जा सकती है। इसी वजह से उन्होंने अपनी चिंताओं को सार्वजनिक रूप से सामने रखने को आवश्यक बताया।

    दूसरी ओर, पति और उनके परिवार की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिसों में आरोप लगाया गया है कि सार्वजनिक मंचों पर लगाए गए कुछ आरोप उनकी प्रतिष्ठा को प्रभावित कर रहे हैं और इसका असर बच्चों पर भी पड़ सकता है। हालांकि सेलिना का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य उन्हें डराना, दबाव बनाना और सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने से रोकना है।

    फिल्मी दुनिया में लंबे समय तक सक्रिय रहीं सेलिना जेटली सामाजिक मुद्दों और पारिवारिक विषयों पर भी अपनी राय रखती रही हैं। मौजूदा विवाद के बीच उनका यह बयान सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर अंतिम निर्णय अदालत की प्रक्रिया के तहत ही होगा, लेकिन फिलहाल दोनों पक्षों के दावों और प्रतिक्रियाओं ने इस पारिवारिक विवाद को सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

    अभिनेत्री ने अपने संदेश में दोहराया कि वह अपने बच्चों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कानूनी और संवैधानिक रास्ता अपनाएंगी। उनके अनुसार यह केवल व्यक्तिगत संघर्ष नहीं बल्कि एक मां के अधिकारों और जिम्मेदारियों से जुड़ा मुद्दा है, जिसके लिए वह अंत तक अपनी आवाज उठाती रहेंगी।

  • दिव्यांगों के 22 हजार खाली पदों पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब अगली सुनवाई 15 अप्रैल

    दिव्यांगों के 22 हजार खाली पदों पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब अगली सुनवाई 15 अप्रैल


    जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दिव्यांगों के रिक्त पदों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस डीडी बंसल की एकल पीठ ने शुक्रवार को सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव संजय शुक्ला और मध्य प्रदेश वेयरहाउस एंड लॉजिस्टिक कार्पोरेशन के प्रबंध निदेशक अनुराग वर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने जवाब 15 अप्रैल तक देने का निर्देश दिया है।

    कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से पूछा कि पूर्व आदेश के बावजूद विभिन्न विभागों में दिव्यांगों के रिक्त पद अब तक क्यों नहीं भरे गए। यह मामला करीब 22 हजार खाली पदों का है। कोर्ट ने 30 जनवरी 2024 को दिए गए आदेशों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

    दरअसल, नरसिंहपुर निवासी दिव्यांग अभ्यर्थी राजेंद्र मेहरा ने याचिका दायर की थी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में दिव्यांगों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इससे पहले भी इसी संबंध में याचिका दायर की गई थी, जिस पर हाईकोर्ट ने रिक्त पद भरने के आदेश दिए थे।

    सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकील शिवम त्रिपाठी ने दावा किया कि संबंधित अधिकारी जानबूझकर अदालत के आदेश की अवहेलना कर रहे हैं। उन्होंने इसे अवमानना का मामला बताया। कोर्ट ने प्रमुख सचिव सहित अन्य अधिकारियों को 15 अप्रैल तक जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।

    अगली सुनवाई में हाईकोर्ट इस बात का जायजा लेगा कि कितने पद भरे गए और किन कारणों से अभी तक रिक्त पदों को भरने में देरी हो रही है। यह मामला दिव्यांगों के अधिकारों और सरकारी जवाबदेही की दिशा में अहम माना जा रहा है।