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  • Xtranet Technologies IPO का अलॉटमेंट आज, 12.24 गुना सब्सक्रिप्शन के बाद 6% प्रीमियम पर लिस्टिंग की उम्मीद, निवेशकों की बढ़ी नजरें

    Xtranet Technologies IPO का अलॉटमेंट आज, 12.24 गुना सब्सक्रिप्शन के बाद 6% प्रीमियम पर लिस्टिंग की उम्मीद, निवेशकों की बढ़ी नजरें

    नई दिल्ली। आईटी सेक्टर की कंपनी Xtranet Technologies के प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) में निवेश करने वाले निवेशकों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। कंपनी के 166.80 करोड़ रुपये के IPO का अलॉटमेंट आज फाइनल होने की उम्मीद है। जिन निवेशकों ने इस इश्यू में आवेदन किया था, वे जल्द ही यह जान सकेंगे कि उन्हें शेयर आवंटित हुए हैं या नहीं। IPO को निवेशकों का मजबूत समर्थन मिला था और सभी श्रेणियों में अच्छी मांग देखने को मिली। अब बाजार की निगाहें अलॉटमेंट प्रक्रिया और आगामी लिस्टिंग पर टिकी हैं।

    कंपनी का IPO 23 जुलाई 2026 को निवेशकों के लिए खुला था और 27 जुलाई तक आवेदन स्वीकार किए गए। यह पूरी तरह फ्रेश इश्यू था, जिसके तहत करीब 1.31 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी किए गए। कंपनी ने किसी भी प्रमोटर या मौजूदा निवेशक के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल नहीं किया। शेयरों का प्राइस बैंड 120 से 127 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था और ऊपरी मूल्य पर कंपनी का प्री-आईपीओ मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 664 करोड़ रुपये रहा।

    इस IPO को कुल 12.24 गुना सब्सक्रिप्शन प्राप्त हुआ, जो निवेशकों की मजबूत रुचि को दर्शाता है। सबसे अधिक उत्साह गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) में देखने को मिला, जहां यह श्रेणी 26.65 गुना सब्सक्राइब हुई। खुदरा निवेशकों का हिस्सा 8.98 गुना और योग्य संस्थागत खरीदारों (QIB) का हिस्सा 7.13 गुना सब्सक्राइब हुआ। मजबूत सब्सक्रिप्शन के बाद अब निवेशकों को अलॉटमेंट और लिस्टिंग से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।

    ग्रे मार्केट में भी कंपनी के शेयर सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शेयर लगभग 8 रुपये के प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं। यदि यही रुझान बना रहता है तो कंपनी के शेयर लगभग 135 रुपये के आसपास सूचीबद्ध हो सकते हैं, जो ऊपरी इश्यू प्राइस 127 रुपये की तुलना में करीब 6 प्रतिशत प्रीमियम दर्शाता है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रे मार्केट प्रीमियम केवल संभावित संकेत होता है और वास्तविक लिस्टिंग बाजार की परिस्थितियों तथा निवेशकों की मांग पर निर्भर करती है।

    कंपनी वर्ष 2002 से आईटी समाधान और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन सेवाओं के क्षेत्र में कार्यरत है। इसके कारोबार में क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी, सिस्टम इंटीग्रेशन, डेटा सेंटर मैनेजमेंट, एप्लीकेशन डेवलपमेंट और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी सेवाएं शामिल हैं। कंपनी सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और निजी संस्थानों को भी तकनीकी सेवाएं प्रदान करती है। इसके प्रमुख उत्पादों में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्लेटफॉर्म और क्लाउड आधारित समाधान शामिल हैं।

    वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत वृद्धि दर्ज की है। इस दौरान कुल आय बढ़कर 366 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो पिछले वित्त वर्ष के 276 करोड़ रुपये से लगभग 32 प्रतिशत अधिक है। वहीं, कंपनी का शुद्ध लाभ 36 प्रतिशत बढ़कर 41 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जो 47 करोड़ रुपये से बढ़कर 63 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी IPO से जुटाई गई राशि का उपयोग मुख्य रूप से कार्यशील पूंजी की जरूरतों, कर्ज चुकाने, सिस्टम और हार्डवेयर अपग्रेड तथा अन्य सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। कंपनी के शेयरों की संभावित लिस्टिंग 30 जुलाई 2026 को बीएसई और एनएसई पर होने की उम्मीद है, जिस पर निवेशकों की खास नजर रहेगी।

  • 'कोई याचिका दाखिल ही नहीं हुई थी', CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया अपना रुख, गलत रिपोर्टिंग पर जताई नाराजगी

    'कोई याचिका दाखिल ही नहीं हुई थी', CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया अपना रुख, गलत रिपोर्टिंग पर जताई नाराजगी

    नई दिल्ली । मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने सीजेपी प्रदर्शन से जुड़े मामले की सुनवाई को लेकर प्रसारित कुछ मीडिया रिपोर्टों पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी मामले की सुनवाई से इनकार नहीं किया था, बल्कि संबंधित मामले में विधिवत याचिका ही दाखिल नहीं की गई थी। सीजेआई ने कहा कि बिना आवश्यक दस्तावेज और औपचारिक याचिका के किसी भी मामले को न्यायालय की सूची में शामिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तथ्यों के विपरीत रिपोर्टिंग पर चिंता भी व्यक्त की।

    सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कुछ समाचारों में यह दावा किया गया कि उन्होंने मामले को सूचीबद्ध करने से मना कर दिया, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग थी। उन्होंने बताया कि अदालत की रजिस्ट्री से जानकारी लेने पर पता चला कि निर्धारित समय तक एक भी याचिका या आवश्यक दस्तावेज दाखिल नहीं किया गया था। ऐसे में किसी मामले को सूचीबद्ध करने का प्रश्न ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि केवल किसी प्रतिनिधित्व या पत्र को रिट याचिका नहीं माना जा सकता।

    सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यदि कोई याचिका विधिसम्मत तरीके से दायर की जाती है तो न्यायालय उस पर कानून के अनुसार विचार करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी मामले की सुनवाई से बचना नहीं था, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करना था। उन्होंने कहा कि न्यायालय में प्रत्येक मामले की सुनवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप ही होती है और बिना औपचारिक याचिका के अदालत कार्रवाई नहीं कर सकती।

    मुख्य न्यायाधीश ने मीडिया की भूमिका पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि तथ्यों की पुष्टि किए बिना खबरों का प्रसारण करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिससे यह संदेश गया कि उन्होंने मामले की सुनवाई से इनकार कर दिया है। जबकि वास्तविकता यह थी कि अदालत के समक्ष उस समय कोई विधिवत याचिका उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने जिम्मेदार और तथ्य आधारित रिपोर्टिंग की आवश्यकता पर जोर दिया।

    यह मामला उस समय सामने आया जब सीजेपी प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा अदालत के समक्ष उठाया गया था। एक अधिवक्ता ने न्यायालय का ध्यान इस विषय की ओर आकर्षित करते हुए तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी मामले पर विचार करने के लिए पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत याचिका दाखिल होना आवश्यक है। इसी प्रक्रिया के अभाव में तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया जा सका।

    सीजेआई सूर्यकांत की इस टिप्पणी के बाद न्यायिक प्रक्रिया और मीडिया रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। उन्होंने दोहराया कि न्यायपालिका का कार्य पूरी तरह स्थापित कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप चलता है और किसी भी मामले में सुनवाई का निर्णय तथ्यों, दस्तावेजों और विधिक प्रक्रिया के आधार पर ही लिया जाता है। उनके स्पष्टीकरण से यह स्पष्ट हुआ कि मामले में सुनवाई से इनकार नहीं किया गया था, बल्कि आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी नहीं होने के कारण उसे सूचीबद्ध नहीं किया जा सका।

  • लिस्टिंग के दूसरे ही दिन दबाव में आया SBI Funds Management का शेयर, 600 रुपये से नीचे फिसलने से निवेशकों की बढ़ी चिंता

    लिस्टिंग के दूसरे ही दिन दबाव में आया SBI Funds Management का शेयर, 600 रुपये से नीचे फिसलने से निवेशकों की बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली । शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के दूसरे ही कारोबारी दिन एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयरों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में मजबूत स्तर पर खुलने के बावजूद पूरे सत्र के दौरान बिकवाली का दबाव बना रहा और अंततः शेयर 600 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बंद हुआ। इस गिरावट ने बाजार सहभागियों और निवेशकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया, क्योंकि कंपनी ने एक दिन पहले ही प्रीमियम पर बाजार में प्रवेश किया था।

    कारोबार की शुरुआत में शेयर सकारात्मक स्तर पर खुला, लेकिन दिन बढ़ने के साथ इसमें लगातार कमजोरी देखने को मिली। सत्र के दौरान शेयर निचले स्तर तक पहुंच गया और अंत में लगभग उसी दायरे में बंद हुआ, जिससे यह संकेत मिला कि बाजार बंद होने तक निवेशकों की ओर से बिकवाली का दबाव बना रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि नई सूचीबद्ध कंपनियों में शुरुआती दिनों में मुनाफावसूली के कारण इस तरह की अस्थिरता सामान्य मानी जाती है।

    कंपनी के शेयरों ने सूचीबद्ध होने के पहले दिन निर्गम मूल्य के मुकाबले प्रीमियम के साथ शुरुआत की थी। सकारात्मक लिस्टिंग के बाद निवेशकों में उत्साह देखा गया, लेकिन दूसरे दिन कुछ निवेशकों ने मुनाफा वसूलना उचित समझा, जिसका असर शेयर की कीमत पर दिखाई दिया। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी नई सूचीबद्ध कंपनी के शेयर में शुरुआती कुछ कारोबारी सत्रों के दौरान मांग और आपूर्ति के आधार पर तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    इस बीच कंपनी के प्रमोटर भारतीय स्टेट बैंक ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कंपनी में अपनी हिस्सेदारी कम करने की कोई योजना नहीं है। बैंक का कहना है कि सार्वजनिक निर्गम का उद्देश्य केवल कंपनी की विकास यात्रा में खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना था, न कि अपनी हिस्सेदारी में कमी करना। इस बयान से यह संकेत मिलता है कि प्रमोटर कंपनी लंबे समय तक अपने निवेश और रणनीतिक भागीदारी को बनाए रखने के पक्ष में है।

    बैंक प्रबंधन ने यह भी कहा कि कंपनी की सूचीबद्धता उसकी दीर्घकालिक विकास रणनीति का हिस्सा है। उनका मानना है कि सार्वजनिक बाजार में आने से कंपनी की पारदर्शिता, जवाबदेही और निवेशकों की भागीदारी में वृद्धि होगी। इसके साथ ही मजबूत कॉरपोरेट गवर्नेंस और पेशेवर प्रबंधन के आधार पर भविष्य में कंपनी के विस्तार की संभावनाएं भी मजबूत मानी जा रही हैं।

    प्रबंधन के अनुसार कंपनी ने सूचीबद्ध होने से पहले ही कॉरपोरेट गवर्नेंस के उच्च मानकों को अपनाया था। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभवी साझेदार के साथ लंबे समय से चल रहा सहयोग कंपनी की कार्यप्रणाली और संचालन व्यवस्था को और मजबूत बनाता है। यही कारण है कि कंपनी भविष्य में अपने कारोबार के विस्तार और निवेशकों के विश्वास को बनाए रखने पर विशेष ध्यान दे रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नई सूचीबद्ध कंपनी के प्रदर्शन का आकलन केवल शुरुआती एक-दो कारोबारी सत्रों के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। लंबी अवधि में कंपनी की वित्तीय स्थिति, प्रबंधन की रणनीति, उद्योग की संभावनाएं और समग्र बाजार परिस्थितियां शेयर के प्रदर्शन को प्रभावित करती हैं। ऐसे में निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव की बजाय कंपनी के मूलभूत पक्षों और दीर्घकालिक विकास क्षमता पर अधिक ध्यान देने की सलाह दी जाती है।

  • जबरदस्त सब्सक्रिप्शन के बावजूद SBI फंड्स मैनेजमेंट IPO की फीकी शुरुआत, निवेशकों को प्रति शेयर 39.30 रुपये का लिस्टिंग लाभ

    जबरदस्त सब्सक्रिप्शन के बावजूद SBI फंड्स मैनेजमेंट IPO की फीकी शुरुआत, निवेशकों को प्रति शेयर 39.30 रुपये का लिस्टिंग लाभ


    नई दिल्ली ।
    एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट लिमिटेड के शेयर मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार में 6.85 प्रतिशत प्रीमियम के साथ सूचीबद्ध हुए। कंपनी का शेयर 574 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले 613.30 रुपये पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर कारोबार के लिए खुला। लिस्टिंग के साथ निवेशकों को प्रति शेयर 39.30 रुपये का लाभ मिला। हालांकि, बाजार में पहले से चल रहे ग्रे मार्केट प्रीमियम के अनुमान की तुलना में यह शुरुआत अपेक्षाकृत कमजोर मानी गई।

    आईपीओ में जिन निवेशकों को शेयर आवंटित हुए थे, उन्हें पहले ही दिन सकारात्मक रिटर्न मिला। प्रति शेयर 39.30 रुपये के लिस्टिंग लाभ के आधार पर एक लॉट पर निवेशकों को लगभग 1,021.80 रुपये का फायदा हुआ। हालांकि, बाजार के कई जानकारों को इससे अधिक प्रीमियम की उम्मीद थी, क्योंकि ग्रे मार्केट में शेयर का प्रीमियम काफी ऊंचे स्तर पर चल रहा था।

    एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का आईपीओ 14 जुलाई से 16 जुलाई के बीच निवेशकों के लिए खुला था। इस सार्वजनिक निर्गम को सभी श्रेणियों के निवेशकों से मजबूत प्रतिक्रिया मिली और कुल मिलाकर यह 41.62 गुना सब्सक्राइब हुआ। सबसे अधिक रुचि क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स ने दिखाई, जिनका हिस्सा 140.11 गुना भरा। इसके अलावा नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशकों का कोटा 22.50 गुना, रिटेल निवेशकों का हिस्सा 3.52 गुना, कर्मचारियों का कोटा 4.62 गुना तथा शेयरधारकों का आरक्षित हिस्सा 9.45 गुना सब्सक्राइब हुआ।

    कंपनी ने इस आईपीओ के लिए 545 रुपये से 574 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया था। कुल 9,812.91 करोड़ रुपये का यह इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल के रूप में लाया गया। इसका मतलब है कि इस निर्गम के तहत कोई नया शेयर जारी नहीं किया गया। मौजूदा प्रमोटर और शेयरधारकों ने अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा निवेशकों को बेचा। इसलिए इस आईपीओ से प्राप्त राशि कंपनी के विस्तार या परिचालन में नहीं जाएगी, बल्कि शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेशकों को प्राप्त होगी।

    लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयरों का प्रीमियम लगभग 104 रुपये तक पहुंच गया था। इसके आधार पर बाजार में अनुमान लगाया जा रहा था कि शेयर करीब 678 रुपये के स्तर पर सूचीबद्ध हो सकता है, जो इश्यू प्राइस से लगभग 18 प्रतिशत अधिक होता। हालांकि वास्तविक लिस्टिंग 613.30 रुपये पर हुई, जिससे स्पष्ट हुआ कि ग्रे मार्केट के संकेत इस बार वास्तविक बाजार प्रदर्शन से मेल नहीं खा सके।

    बाजार विशेषज्ञ लंबे समय से यह सलाह देते रहे हैं कि ग्रे मार्केट प्रीमियम को केवल संभावित संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए, क्योंकि यह किसी भी शेयर की वास्तविक लिस्टिंग का निश्चित पैमाना नहीं होता। शेयर की सूचीबद्धता कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें बाजार की स्थिति, निवेशकों की मांग और लिस्टिंग के दिन का समग्र निवेश माहौल शामिल होता है।

    एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट की लिस्टिंग ने यह जरूर दिखाया कि मजबूत सब्सक्रिप्शन के बावजूद हर आईपीओ ग्रे मार्केट के अनुमान के अनुरूप प्रदर्शन नहीं करता। फिर भी निवेशकों को पहले दिन सकारात्मक रिटर्न मिला और अब बाजार की नजर कंपनी के आगामी कारोबारी प्रदर्शन तथा शेयर की आगे की चाल पर बनी रहेगी।

  • मीशो IPO में GMP के दम पर निवेशकों में जोश कल होगी शेयर बाजार में लिस्टिंग

    मीशो IPO में GMP के दम पर निवेशकों में जोश कल होगी शेयर बाजार में लिस्टिंग


    नई दिल्ली ।
    ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म मीशो का आईपीओ निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रे मार्केट प्रीमियम के दम पर इस आईपीओ ने बाजार में काफी ध्यान आकर्षित किया है। इसके बावजूद GMP में उतार-चढ़ाव के बाद भी लिस्टिंग पर 32 फीसदी तक मुनाफे की उम्मीद जताई जा रही है। आईपीओ 3 से 5 दिसंबर तक खुला था और अब निवेशकों की नजर 10 दिसंबर पर है जब कंपनी शेयर बाजार में लिस्ट होगी।
    लिस्टिंग पर कितना हो सकता है मुनाफा
    लिस्टिंग से एक दिन पहले ग्रे मार्केट में मीशो का GMP 35 रुपये प्रति शेयर पर ट्रेड कर रहा था। इसे आधार मानते हुए मीशो के शेयर 146 रुपये प्रति शेयर पर लिस्ट हो सकते हैं जो इश्यू प्राइस 111 रुपये से करीब 32% ज्यादा है। हालांकि GMP में उतार-चढ़ाव को देखते हुए लिस्टिंग के वक्त प्रीमियम में बदलाव हो सकता है और इस वजह से लिस्टिंग पर वास्तविक मुनाफे का आकलन तभी होगा।

    GMP का ट्रेंडकब कितना प्रीमियम

    पिछले 10 दिनों में मीशो आईपीओ का GMP 31.5 रुपये से 49.5 रुपये के बीच रहा। शुरुआती दिनों में प्रीमियम मजबूत बना रहा लेकिन 9 दिसंबर को इसमें थोड़ी गिरावट देखी गई। 30 नवंबर को GMP 42 रुपये था जो 2 दिसंबर को बढ़कर 49 रुपये तक पहुंच गया लेकिन कुछ ही दिनों में यह घटकर 9 दिसंबर को 31.5 रुपये रह गया। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार में अस्थिरता है और निवेशकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।

    मीशो का आईपीओ और निवेशकों का आकर्षण

    मीशो एक सोशल ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है जो खासकर छोटे और मझोले व्यापारियों को ऑनलाइन बिक्री के लिए एक मंच प्रदान करता है। कंपनी का ब्रांड वैल्यू और मजबूत ग्रे मार्केट प्रीमियम ने इसे निवेशकों के बीच काफी आकर्षक बना दिया है। कंपनी की प्राइस बैंड 105-111 रुपये प्रति शेयर रखी गई है और एक लॉट में 135 शेयर शामिल हैं। इस आईपीओ का कुल इश्यू साइज 488396721 शेयरों का है जो कुल 5421.20 करोड़ रुपये का है। इसमें से 4250 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू और 1171.20 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल है। कंपनी की फेस वैल्यू 1 रुपये रखी गई है।

    निवेशकों के लिए एक मौका

    मीशो के आईपीओ ने निवेशकों को एक अच्छा मौका प्रदान किया है लेकिन इसमें जोखिम भी है। ग्रे मार्केट प्रीमियम के उतार-चढ़ाव को देखते हुए निवेशकों को अपने निर्णय में सतर्क रहना चाहिए। कई बार आईपीओ की लिस्टिंग पर प्रीमियम में बदलाव हो सकता है और इसलिए निवेशकों को लिस्टिंग के समय निवेश के फैसले पर ध्यान देना चाहिए।

     मीशो का आईपीओ निवेशकों के लिए एक आकर्षक मौका हो सकता है खासकर जब लिस्टिंग के समय संभावित मुनाफे की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि बाजार की अस्थिरता को देखते हुए यह महत्वपूर्ण है कि निवेशक अपने निवेश निर्णयों में सतर्क रहें और किसी भी प्रकार की शॉर्ट टर्म अस्थिरता से बचने के लिए उचित रणनीति अपनाएं। 10 दिसंबर को लिस्टिंग के बाद ही इस आईपीओ की असली तस्वीर सामने आएगी।