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  • रायपुर में शब्दों का महाकुंभ: 'आदि से अनादि तक' थीम के साथ रायपुर साहित्य उत्सव 2026 शुरू

    रायपुर में शब्दों का महाकुंभ: 'आदि से अनादि तक' थीम के साथ रायपुर साहित्य उत्सव 2026 शुरू

    रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर आज से देश भर के जाने-माने शब्द-साधकों और बुद्धिजीवियों के जमावड़े का केंद्र बन गई है। शुक्रवार को बसंत पंचमी के पावन और शुभ अवसर पर रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का भव्य आगाज हुआ। आदि से अनादि तक की बेहद गहरी और प्रासंगिक केंद्रीय थीम पर आधारित इस तीन दिवसीय साहित्यिक महाकुंभ का शुभारंभ अतिथियों द्वारा ज्ञान की देवी मां सरस्वती के पूजन और दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।

    नया रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन के खुले और कलात्मक वातावरण में आयोजित यह महोत्सव अपनी ऐतिहासिकता और आधुनिकता के संगम के कारण पहले ही दिन चर्चा में आ गया है। 23 जनवरी से शुरू होकर 25 जनवरी तक चलने वाले इस महोत्सव में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और देश की व्यापक साहित्यिक परंपराओं का अद्भुत मेल देखने को मिल रहा है। आयोजन स्थल की सजावट और साहित्यिक सत्रों की रूपरेखा ने राजधानी के साहित्यिक प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित किया है।

    इस तीन दिवसीय उत्सव की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें देशभर से 120 से अधिक प्रतिष्ठित साहित्यकार दिग्गज कवि, मर्मज्ञ लेखक अनुभवी पत्रकार, प्रखर शिक्षाविद और चिंतक सहभागिता कर रहे हैं। उद्घाटन सत्र के दौरान वक्ताओं ने आदि से अनादि तक विषय की प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए कहा कि साहित्य ही वह सेतु है जो हमारी आदिम जड़ों को अनंत भविष्य से जोड़ता है।

    अगले दो दिनों तक पुरखौती मुक्तांगन के विभिन्न मंचों पर कविता पाठ, कहानी चर्चा, वैचारिक विमर्श छत्तीसगढ़ी साहित्य का भविष्य और पत्रकारिता की चुनौतियों जैसे विषयों पर गहन संवाद होगा। आयोजकों का मानना है कि इस तरह के मंच न केवल स्थापित लेखकों को जगह देते हैं, बल्कि नए उभरते रचनाकारों को भी एक नई दृष्टि प्रदान करते हैं। वसंत की बयार के बीच शुरू हुए इस उत्सव ने रायपुर को साहित्यिक चेतना से सराबोर कर दिया है।

  • दिल्ली में 'शब्दोत्सव 2026' का उद्घाटन हर्ष मल्होत्रा ने कहा- भारत की संस्कृति का लघु रूप देखने को मिला

    दिल्ली में 'शब्दोत्सव 2026' का उद्घाटन हर्ष मल्होत्रा ने कहा- भारत की संस्कृति का लघु रूप देखने को मिला


    नई दिल्ली । दिल्ली में तीन दिवसीय सांस्कृतिक और साहित्यिक उत्सव ‘शब्दोत्सव 2026’ का उद्घाटन मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को किया। उद्घाटन समारोह की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ गीत के साथ हुई। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े प्रमुख नेता मौजूद रहे।केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कार्यक्रम में संबोधित करते हुए कहा कि ‘शब्दोत्सव 2026’ में भारत की विविधता और संस्कृति का लघु रूप देखने को मिला है।
    उन्होंने कहा कि यह भारत की सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत उदाहरण है। मल्होत्रा ने कहा भारत हमेशा से विश्व गुरु था और आज भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई शिक्षा नीति में बदलाव के साथ भारतीय संस्कृति को शिक्षा के साथ जोड़ा गया है।उन्होंने यह भी कहा कि भारत विविधताओं में एकता का देश है। यह देश विश्व में कहीं और नहीं मिलता जहां 340 से अधिक भाषाएं और 1600 से ज्यादा बोलियां जीवित हैं। यह भारत की असली पहचान है।

    वहीं दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ और ‘जय श्रीराम’ के नारों से की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में दिल्ली को वैचारिक आतंकवाद का गढ़ बनाने की कोशिश की गई थी। लेकिन अब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में कला और संस्कृति को फिर से समृद्ध किया जा रहा है। कपिल मिश्रा ने आगे कहा “दिल्ली में पिछले 10 महीनों में कई बड़े और दिव्य कार्यक्रम हुए हैं जो पहले कभी नहीं हुए थे। ‘शब्दोत्सव 2026’ का आयोजन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हम दिल्ली को नक्सली विचारधारा झूठे इतिहास और धर्म विरोधी सोच से मुक्त कर रहे हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में इस तरह का कार्यक्रम आतंकवाद और हिंसा के खिलाफ एक ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ के रूप में है। “जब कोई आतंकवादी या नक्सली कोई हिंसक कदम उठाता है तो वह विचारों से ही शुरू होता है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उन विचारों को बदलने का है।इस कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति साहित्य और कला को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवाओं को प्रेरित करने का प्रयास किया गया। ‘शब्दोत्सव 2026’ ने दिल्ली में सांस्कृतिक पुनर्निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इसके जरिए राजधानी में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हो रही है।