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  • गोल्ड लोन बाजार में बढ़ते जोखिम ने बढ़ाई चिंता, बजाज और पीरामल फाइनेंस ने दिए संकेत, दूसरे कर्ज में फंसे ग्राहकों पर भी नजर

    गोल्ड लोन बाजार में बढ़ते जोखिम ने बढ़ाई चिंता, बजाज और पीरामल फाइनेंस ने दिए संकेत, दूसरे कर्ज में फंसे ग्राहकों पर भी नजर


    नई दिल्ली। देश में सोना गिरवी रखकर कर्ज लेने यानी गोल्ड लोन का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में लोग अपने सोने के बदले बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कर्ज ले रहे हैं। हालांकि गोल्ड लोन को आमतौर पर सुरक्षित कर्ज माना जाता है लेकिन अब इस क्षेत्र में ग्राहकों की भुगतान क्षमता को लेकर चिंताएं सामने आने लगी हैं। देश की प्रमुख गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों बजाज फाइनेंस और पीरामल फाइनेंस ने गोल्ड लोन लेने वाले कुछ ग्राहकों के भुगतान में देरी के संकेत दिए हैं। इससे इस तेजी से बढ़ते कारोबार में संभावित जोखिमों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2026 में बैंकों का गोल्ड लोन सालाना आधार पर 83 प्रतिशत बढ़कर 5.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी एनबीएफसी का गोल्ड लोन 69 प्रतिशत बढ़कर 3.6 लाख करोड़ रुपये हो गया। इन आंकड़ों से साफ है कि सोने के बदले कर्ज लेने का चलन तेजी से बढ़ा है। सोना गिरवी होने के कारण वित्तीय संस्थानों को कर्ज के बदले सुरक्षा मिलती है लेकिन ग्राहकों के समय पर भुगतान नहीं करने की स्थिति में जोखिम बढ़ सकता है।

    बजाज फाइनेंस ने जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही के नतीजों में बताया कि 30 दिनों से अधिक समय से बकाया कर्ज से जुड़ी उसकी स्टेज दो और स्टेज तीन परिसंपत्तियों में पिछली तिमाही के मुकाबले 15 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हुई है। कंपनी के अनुसार इसके पीछे कम अवधि वाले गोल्ड लोन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसी वजह से बजाज फाइनेंस ने अब ऐसे शॉर्ट टर्म गोल्ड लोन देना बंद कर दिया है। कंपनी का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो करीब 24 हजार करोड़ रुपये का है। हालांकि सितंबर तिमाही में कंपनी का समेकित मुनाफा पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 30 प्रतिशत बढ़ा है लेकिन कर्ज की गुणवत्ता पर निगरानी जारी है।

    दूसरी ओर पीरामल फाइनेंस ने भी गोल्ड लोन बाजार में बढ़ते जोखिम को लेकर चिंता जताई है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जयराम श्रीधरन ने विश्लेषकों के साथ बातचीत में कहा कि गोल्ड लोन में तेजी से बढ़ोतरी इस क्षेत्र को जोखिम के लिहाज से महत्वपूर्ण बना रही है। उनके मुताबिक कंपनी के करीब 35 प्रतिशत ग्राहकों के पास किसी दूसरी वित्तीय संस्था से भी गोल्ड लोन है। ऐसे मामलों में ग्राहकों की कुल कर्ज देनदारी और भुगतान क्षमता को समझना जरूरी हो जाता है।

    पीरामल फाइनेंस के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में उद्योग स्तर पर करीब 4.7 लाख करोड़ रुपये के गोल्ड लोन ऐसे ग्राहकों को दिए गए जिनके दूसरे कर्ज 90 दिनों से अधिक समय से बकाया थे। हालांकि कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के पास गोल्ड लोन होना अपने आप में उसे जोखिम वाला कर्जदार साबित नहीं करता। इसके बावजूद कई संस्थानों से कर्ज लेने वाले ग्राहकों की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। पीरामल फाइनेंस ने सितंबर तिमाही में 545 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया जो पिछले साल की समान अवधि से 66 प्रतिशत अधिक है।

    गोल्ड लोन बाजार में बढ़ती गतिविधियों के बीच बजाज फाइनेंस के लिए महंगाई में बढ़ोतरी और नियामकीय बदलाव जैसे दूसरे जोखिमों का भी उल्लेख किया गया है। ऐसे में ग्राहकों को कर्ज लेने से पहले अपनी आर्थिक स्थिति और भुगतान क्षमता का आकलन करना चाहिए। समय पर किस्त या ब्याज नहीं चुकाने की स्थिति में गिरवी रखा सोना भी खतरे में पड़ सकता है। वहीं वित्तीय संस्थानों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे कर्ज देने से पहले ग्राहकों की मौजूदा देनदारियों और भुगतान के रिकॉर्ड का बेहतर आकलन करें।

  • अभिनेता राजपाल यादव की बढ़ीं मुश्किलें, कर्ज वसूली के लिए प्लॉट पर चिपकाया गया नीलामी नोटिस

    अभिनेता राजपाल यादव की बढ़ीं मुश्किलें, कर्ज वसूली के लिए प्लॉट पर चिपकाया गया नीलामी नोटिस


    नई दिल्ली। फिल्म अभिनेता राजपाल यादव एक बार फिर आर्थिक विवाद को लेकर चर्चा में हैं। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने ऋण की बकाया राशि जमा नहीं होने पर उनकी संपत्ति की नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बैंक ने शाहजहांपुर में स्थित अभिनेता के प्लॉट के बाहर नोटिस चस्पा कर स्पष्ट कर दिया है कि तय समय सीमा तक भुगतान नहीं होने पर संपत्ति की नीलामी की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद अभिनेता और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    जानकारी के अनुसार सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के बंडा स्थित शाखा से लिए गए ऋण का भुगतान लंबे समय से नहीं किया गया है। बैंक का दावा है कि अभिनेता राजपाल यादव की पत्नी राधा यादव और उनकी मां गोदावरी यादव पर कुल 16.61 करोड़ रुपये का बकाया है। लगातार नोटिस और कानूनी प्रक्रिया के बावजूद जब राशि जमा नहीं की गई तो बैंक ने ऋण वसूली की दिशा में अगला कदम उठाते हुए संपत्ति कुर्क करने और नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी।

    बैंक की ओर से जिस संपत्ति को नीलामी के लिए चिन्हित किया गया है उसकी अनुमानित कीमत करीब 3.10 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसके अलावा ऋण वसूली की कार्रवाई के तहत शाहजहांपुर कचहरी के पास स्थित अभिनेता के एक अन्य प्लॉट के बाहर भी आधिकारिक नोटिस चस्पा किया गया है ताकि कानूनी प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक रूप से दर्ज हो सके।

    बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले में मुंबई स्थित ऋण वसूली न्यायाधिकरण ने भी बैंक के पक्ष में कार्रवाई की अनुमति दी है। न्यायाधिकरण के आदेश के बाद बैंक ने नीलामी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की औपचारिक तैयारी शुरू कर दी है। यदि निर्धारित अवधि के भीतर बकाया राशि का भुगतान नहीं किया जाता है तो बैंक नियमों के तहत संपत्ति की सार्वजनिक नीलामी करेगा और उससे प्राप्त राशि से ऋण की वसूली की जाएगी।

    बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी वित्तीय संस्था द्वारा ऋण वसूली की प्रक्रिया निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत की जाती है। पहले उधारकर्ता को नोटिस दिया जाता है फिर भुगतान का अवसर प्रदान किया जाता है और उसके बाद भी राशि जमा नहीं होने पर संपत्ति कुर्क कर नीलामी की कार्रवाई की जाती है। यह प्रक्रिया सभी उधारकर्ताओं पर समान रूप से लागू होती है चाहे वह आम नागरिक हो या कोई चर्चित हस्ती।

    राजपाल यादव हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय कलाकारों में गिने जाते हैं और उन्होंने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई यादगार भूमिकाएं निभाई हैं। हालांकि इस समय उनका नाम फिल्मों से ज्यादा आर्थिक विवाद और बैंक की कार्रवाई को लेकर सुर्खियों में है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या अभिनेता और उनका परिवार समय रहते बकाया राशि का भुगतान कर नीलामी की कार्रवाई को रोक पाएगा या फिर बैंक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए संपत्ति की नीलामी करेगा।