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  • लोन दिलाने के नाम पर टीचर से 9 लाख की ठगी, दलाल ने नकद और जेवर लेकर किया फरार

    लोन दिलाने के नाम पर टीचर से 9 लाख की ठगी, दलाल ने नकद और जेवर लेकर किया फरार


    नई दिल्ली । डिंडोरी जिले में लोन दिलाने के नाम पर एक शिक्षक से लाखों की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सिटी कोतवाली क्षेत्र में दलालों के जाल में फंसे शिक्षक से करीब 9 लाख रुपए की धोखाधड़ी कर ली गई। आरोपी ने एक लाख रुपए नकद और करीब 8 लाख रुपए के जेवरात अपने कब्जे में ले लिए। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
    ट्रैक्टर की ईएमआई के चलते फंसे शिक्षक
    मेहदवानी जनपद के कलगी टोला निवासी शिक्षक नारायण पन्द्राम आर्थिक परेशानी से जूझ रहे थे। उनके ट्रैक्टर की ईएमआई लगातार बाउंस हो रही थी। इसी दौरान उनकी मुलाकात गांव के दुर्गेश सोनवानी से हुई, जिसने पहले एक परिचित को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) से लोन दिलवाया था। भरोसे में आकर शिक्षक ने उससे मदद मांगी।
    KCC लोन का झांसा देकर वसूले पैसे
    दुर्गेश ने शिक्षक को केसीसी लोन दिलाने का झांसा दिया और सर्च रिपोर्ट बनवाने के नाम पर 20 हजार रुपए ले लिए। जब लोन नहीं मिला और शिक्षक ने पैसे वापस मांगे, तो दुर्गेश ने उन्हें एक अन्य दलाल ब्रजेश टांडिया से मिलवाया, जो कथित रूप से बड़े बैंक अधिकारियों से संपर्क होने का दावा करता था।
    जेवर गिरवी रखकर लिया गया पैसा
    ब्रजेश ने शिक्षक को बड़ा लोन दिलाने का भरोसा दिलाते हुए बैलेंस ट्रांसफर कराने की बात कही। इसके बाद उसने शिक्षक को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित कैंटीन में बुलाकर उनके जेवरात की जानकारी ली। फिर मंडला बस स्टैंड के पास अपने परिचित जनक राठौर के पास 414 ग्राम सोना और 20 ग्राम चांदी के जेवर अमानत के रूप में रखवा दिए, जिसके बदले में 1.45 लाख रुपए दिलाए गए।
    नकद रकम भी ठगी, फिर बंद किया संपर्क
    इसके बाद आरोपी ने 13 और 14 फरवरी को ट्रैक्टर की ईएमआई भरने के नाम पर शिक्षक से 50-50 हजार रुपए, कुल 1 लाख रुपए नकद भी ले लिए। यह रकम शिक्षक ने उधार लेकर दी थी। कुछ दिनों बाद जब शिक्षक ने संपर्क करना चाहा, तो ब्रजेश ने फोन उठाना बंद कर दिया।
    सच सामने आते ही पहुंचा पुलिस के पास
    जब शिक्षक मंडला जाकर जनक राठौर से मिले, तो उन्हें भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली। इसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश में जुट गई है।
    पुलिस जांच में जुटी, आरोपियों पर शिकंजा कसने की तैयारी
    सिटी कोतवाली पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद क्षेत्र में लोन के नाम पर सक्रिय दलालों को लेकर चिंता बढ़ गई है।

  • सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अनिल अंबानी को नहीं मिली राहत, लोन फ्रॉड केस में बढ़ी मुश्किलें

    सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अनिल अंबानी को नहीं मिली राहत, लोन फ्रॉड केस में बढ़ी मुश्किलें

    नई दिल्ली:रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े ऋण धोखाधड़ी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उद्योगपति अनिल अंबानी को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने उस फैसले में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया, जिसमें उच्च न्यायालय ने पहले दी गई अंतरिम सुरक्षा को समाप्त कर दिया था। इस फैसले के बाद बैंकों द्वारा उनके ऋण खातों को धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत करने की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।

    सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अंबानी की याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि इस स्तर पर हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय की टिप्पणियों का अंतिम फैसले पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि संबंधित मामलों की सुनवाई अभी जारी है। साथ ही अदालत ने लंबित मामलों की शीघ्र सुनवाई का निर्देश दिया और कहा कि कानून के तहत उपलब्ध अन्य विकल्प अंबानी के लिए खुले रहेंगे।

    सुनवाई के दौरान अंबानी की ओर से दलील दी गई कि उनके खातों को धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत करना उनके लिए बेहद गंभीर परिणाम पैदा करेगा और इससे उनकी आर्थिक और व्यावसायिक स्थिति पर गहरा असर पड़ेगा। यह भी कहा गया कि इस तरह का वर्गीकरण किसी व्यक्ति के व्यावसायिक जीवन को लगभग समाप्त करने जैसा हो सकता है।

    दूसरी ओर अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि मामले में सार्वजनिक धन से जुड़े गंभीर आरोपों की जांच चल रही है, इसलिए इस स्तर पर राहत देना उचित नहीं होगा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि ऋणदाता बैंकों द्वारा किए गए निर्णयों को आसानी से बदला नहीं जा सकता, क्योंकि वे अपने संसाधनों और प्रक्रियाओं के आधार पर निर्णय लेते हैं।

    मामले की पृष्ठभूमि में बैंकों द्वारा कराए गए फोरेंसिक ऑडिट की रिपोर्ट शामिल है, जिसके आधार पर ऋण खातों के उपयोग और लेनदेन की जांच की गई थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर बैंकों ने खातों को धोखाधड़ी की श्रेणी में रखने की प्रक्रिया शुरू की थी, जिसे चुनौती दी गई थी।

    इससे पहले उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने इस प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगा दी थी, लेकिन बाद में खंडपीठ ने उस रोक को हटाते हुए बैंकों के पक्ष में फैसला दिया था। इसके बाद मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा, जहां अब राहत से इनकार कर दिया गया है।

    फिलहाल संबंधित दीवानी मुकदमे लंबित हैं और अंतिम निर्णय आना बाकी है। अदालत के निर्देश के अनुसार इन मामलों की सुनवाई को तेज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जिससे पूरे विवाद पर स्पष्ट स्थिति सामने आ सकेगी।