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  • प्रीति जिंटा के 2 करोड़ रुपये के दावे पर ताजदार अमरोही का पलटवार, वर्षों पुराने विवाद में फिर उठे सवाल

    प्रीति जिंटा के 2 करोड़ रुपये के दावे पर ताजदार अमरोही का पलटवार, वर्षों पुराने विवाद में फिर उठे सवाल

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा और दिवंगत फिल्मकार कमाल अमरोही के परिवार के बीच वर्षों से चला आ रहा आर्थिक और संपत्ति विवाद एक बार फिर चर्चा में है। यह मामला मुख्य रूप से प्रीति जिंटा द्वारा कमाल अमरोही के बेटे शानदार अमरोही को दिए गए कथित 2 करोड़ रुपये के कर्ज और बाद में उसकी वापसी को लेकर है।

    प्रीति जिंटा का दावा रहा है कि उन्होंने शानदार अमरोही को आर्थिक मुश्किलों के दौर में 2 करोड़ रुपये उधार दिए थे। उनके अनुसार यह रकम किसी उपहार, चैरिटी या मदद के तौर पर नहीं बल्कि वापस किए जाने वाले कर्ज के रूप में दी गई थी। उनका कहना रहा कि शानदार ने आर्थिक स्थिति सुधरने के बाद रकम लौटाने की बात कही थी।

    शानदार अमरोही का निधन अगस्त 2011 में हुआ था। प्रीति के मुताबिक उनकी मृत्यु के बाद उन्होंने परिवार से अपनी रकम वापस मांगी, लेकिन उन्हें अपेक्षित जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने ब्याज समेत रकम की वापसी की मांग की। उन्होंने 2 करोड़ रुपये की मूल राशि के साथ करीब 80 लाख रुपये ब्याज का दावा भी किया था।

    प्रीति ने वर्ष 2013 में इस मामले को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया था। उनका कहना था कि रकम लंबे समय से बकाया थी और उसे वापस पाने के लिए कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेना पड़ा। इस मामले में उनके दावे और अमरोही परिवार की ओर से रखी गई दलीलों के बीच लंबे समय से विवाद बना हुआ है।

    अब कमाल अमरोही के दूसरे बेटे ताजदार अमरोही ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि प्रीति ने वास्तव में शानदार को 2 करोड़ रुपये दिए थे तो उस लेनदेन का प्रमाण, रसीद या अन्य दस्तावेज सामने होना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि शानदार के जीवित रहते रकम की वापसी को लेकर विवाद क्यों नहीं उठा और उनकी मृत्यु के बाद ही यह मामला सामने क्यों आया।

    ताजदार ने प्रीति और शानदार के संबंधों को लेकर सामने आए कुछ अन्य दावों को भी चुनौती दी है। लंबे समय तक यह चर्चा रही कि शानदार अमरोही ने प्रीति जिंटा को अपनी गोद ली हुई बेटी माना था और अपनी संपत्ति में उनके लिए हिस्सा रखने की योजना बनाई थी। ताजदार ने इस दावे से भी इनकार किया है।

    विवाद का एक हिस्सा करीब 600 करोड़ रुपये की कथित संपत्ति से भी जुड़ा रहा है। ताजदार के अनुसार कमाल स्टूडियो से संबंधित चर्चाओं के दौरान शानदार के हिस्से की कीमत 600 करोड़ रुपये बताए जाने की बातें सामने आई थीं, लेकिन उनके मुताबिक इतनी बड़ी संपत्ति का दावा ही सही नहीं था। इसलिए प्रीति को उस संपत्ति का हिस्सा दिए जाने की बात भी उन्होंने खारिज की।

    ताजदार के मुताबिक शानदार अमरोही प्रीति जिंटा के प्रशंसक थे और उन्हें महंगे सामान उपहार में दिया करते थे। हालांकि, उनके अनुसार इन उपहारों और कथित 2 करोड़ रुपये के कर्ज को अलग-अलग संदर्भों में देखा जाना चाहिए।

    इस पूरे विवाद में एक तरफ प्रीति जिंटा का दावा है कि रकम कर्ज के रूप में दी गई थी और उसे वापस किया जाना चाहिए, जबकि दूसरी तरफ अमरोही परिवार की ओर से लेनदेन के प्रमाण और दावे के समय को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मामला अदालत में लंबित होने के कारण अंतिम स्थिति कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

  • FD की सुरक्षा, EMI का खर्च, SIP की ताकत: 20 साल बाद किसका पलड़ा भारी?

    FD की सुरक्षा, EMI का खर्च, SIP की ताकत: 20 साल बाद किसका पलड़ा भारी?


    नई दिल्ली। आज के समय में निवेश के लिए लोगों के पास तीन बड़े रास्ते हैंFD, EMI और SIP। FD को सुरक्षित माना जाता है, EMI से लोग अपनी जरूरतें पूरी करते हैं, जबकि SIP धीरे-धीरे पैसा बढ़ाने का काम करता है। लेकिन सवाल यह है कि 20 साल बाद कौन आपको अमीर बना सकता है? अगर आप आज अपनी कमाई का एक हिस्सा इन तीनों में से किसी भी रास्ते पर लगाते हैं, तो 20 साल बाद आपकी स्थिति कैसी होगी?
    चलिए एक आसान कैलकुलेशन के जरिए समझते हैं कि FD की सीमा क्या है, EMI का नुकसान कितना भारी है और SIP की कंपाउंडिंग पावर कितनी मजबूत है।

    सबसे पहले FD की बात करें। FD को भारत में भरोसे और सुरक्षा का दूसरा नाम माना जाता है।  20 साल बाद आपका फंड लगभग ₹52 लाख तक पहुंच सकता है। लेकिन अगर आप महंगाई को भी ध्यान में रखें, तो 20 साल बाद उस पैसे की असली वैल्यू लगभग ₹15-20 लाख के आसपास ही रह सकती है।

    इसका मतलब FD आपके पैसे को बचाती है, लेकिन महंगाई के हिसाब से बढ़ा नहीं पाती। FD में रिटर्न कम होने के कारण आपका पैसा “सुरक्षित” जरूर रहता है, लेकिन वह अमीर नहीं बनाता।

    अब EMI की बात करें। EMI आमतौर पर लोगों को तुरंत सुख देती है, लेकिन लंबे समय में यह आपके लिए भारी पड़ सकती है। जब आप किसी पर्सनल लोन या लग्जरी कार के लिए 20 साल तक ₹10,000 EMI भरते हैं, तो आप कुल मिलाकर लगभग ₹24 लाख तो दे ही देते हैं, साथ ही बैंक को ब्याज में लगभग ₹15-20 लाख अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है। 20 साल बाद आपके पास केवल एक पुरानी चीज बचती है जिसकी वैल्यू काफी कम हो चुकी होती है।

    EMI असल में आपकी फ्यूचर की कमाई को आज ही खर्च कर देती है और आपके लिए एक लंबा ब्याज का बोझ छोड़ जाती है। इसलिए EMI आपको अमीर नहीं बनाती, बल्कि बैंक को अमीर बनाती है।

    तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण विकल्प SIP है। SIP में आप छोटे-छोटे निवेश करते हैं और कंपाउंडिंग की ताकत से लंबे समय में बड़ा फंड बनाते हैं। अगर आप हर महीने ₹10,000 की SIP करते हैं और औसतन 12% रिटर्न मानें, तो 20 साल बाद आपका निवेश लगभग ₹24 लाख होकर करीब ₹1 करोड़ से ज्यादा बन सकता है। और अगर रिटर्न 15% रहे तो यह राशि ₹1.5 करोड़ तक भी पहुंच सकती है।

    SIP का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह बाजार के उतार-चढ़ाव को अपने पक्ष में इस्तेमाल करता है। शुरुआती सालों में मार्केट गिरती है तो units ज्यादा मिलते हैं, और बाद में जब मार्केट बढ़ता है तो वही units ज्यादा लाभ देती हैं।

    अब 20 साल की जंग में किसका पलड़ा भारी है? FD सुरक्षित है, लेकिन महंगाई के हिसाब से अमीर नहीं बनाती। EMI आपको तुरंत सुविधा देती है, लेकिन लंबी अवधि में यह आपकी कमाई को खा जाती है और ब्याज के बोझ से आपकी संपत्ति घटती है।

    वहीं SIP में जोखिम जरूर है, लेकिन लंबे समय में यह कंपाउंडिंग के जरिए सबसे ज्यादा फायदा देता है। अगर आपका लक्ष्य 20 साल में “वेल्थ” बनाना है और आप निवेश को समय के साथ बढ़ते देखना चाहते हैं, तो SIP सबसे बेहतर विकल्प माना जा सकता है।
    (नोट: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।)
  • SBI के ग्राहकों के लिए लोन लेना हुआ सस्ता, 15 दिसंबर से लागू होंगी नई दरें

    SBI के ग्राहकों के लिए लोन लेना हुआ सस्ता, 15 दिसंबर से लागू होंगी नई दरें


    नई दिल्ली।
    देश के सबसे बड़े लेंडर स्टेट (India’s largest lender) बैंक ऑफ इंडिया (State Bank of India- SBI) ने अपने ग्राहकों को बड़ा तोहफा दिया है। एसबीआई ने रिजर्व बैंक की पॉलिसी रेट (Reserve Bank’s policy rate) में कटौती के बाद अपनी लेंडिंग रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की कमी की है, जिससे मौजूदा और नए कर्जदारों के लिए लोन सस्ता हो गया है। इस लेटेस्ट कटौती के साथ SBI का एक्सटर्नल बेंचमार्क लिंक्ड रेट (EBLR) 25 बेसिस पॉइंट्स कम होकर 7.90% हो जाएगा। संशोधित दरें 15 दिसंबर, 2025 से लागू होंगी।


    MCLR में भी 5 बेसिस पॉइंट्स की कटौती

    बैंक ने सभी टेन्योर के लिए मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में भी 5 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है। इस संशोधन के साथ, एक साल की मैच्योरिटी वाला MCLR मौजूदा 8.75% से घटकर 8.70% हो जाएगा। इसी तरह, एक साल की मैच्योरिटी दर क्रमशः 5 प्रतिशत सस्ती होकर 8.75% और 8.80% हो जाएगी। बैंक ने कहा कि उसने बेस रेट/BPLR को मौजूदा 10% से घटाकर 9.90% कर दिया है, जो 15 दिसंबर से प्रभावी होगा। इसके अलावा, बैंक ने 15 दिसंबर से प्रभावी दो साल से कम तीन साल की मैच्योरिटी के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट दर में भी 5 बेसिस पॉइंट्स की कटौती करके 6.40% करने का फैसला किया है। हालांकि, बैंक ने दूसरी मैच्योरिटी बकेट पर ब्याज दरें बरकरार रखी हैं। एसबीआई ने ‘444 दिन’ की खास स्कीम अमृत वृष्टि की ब्याज दर में भी कटौती की है। अब ब्याज दर 15 दिसंबर से 6.60 प्रतिशत से घटाकर 6.45 प्रतिशत कर दी गई है।


    इंडियन ओवरसीज बैंक का भी ऐलान

    एक और सरकारी बैंक इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) ने भी 15 दिसंबर, 2025 से अपनी लेंडिंग रेट में कमी की घोषणा की है। IOB ने एक बयान में कहा कि बैंक ने अपने एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट (EBLR) – खासकर रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR) को 25 बेसिस पॉइंट्स घटाकर 8.35% से 8.10% कर दिया है, जिससे पॉलिसी रेट में कटौती का पूरा फायदा ग्राहकों को मिलेगा। इसके अलावा, बैंक की एसेट लायबिलिटी मैनेजमेंट कमेटी (ALCO) ने तीन महीने से लेकर तीन साल तक की सभी टेन्योर के लिए मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में 5 बेसिस पॉइंट की कमी को मंजूरी दी है। बैंक ने कहा कि इन बदलावों से मौजूदा और नए दोनों तरह के कर्जदारों की इक्वेटेड मंथली इंस्टॉलमेंट (EMI) कम हो जाएगी, जिनके लोन इन बेंचमार्क से जुड़े हुए हैं।