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  • राजौरी में नियंत्रण रेखा पर बड़ा हादसा, बारूदी सुरंग फटने से सेना के 4 जवान घायल; इलाके में शुरू हुआ सर्च ऑपरेशन

    राजौरी में नियंत्रण रेखा पर बड़ा हादसा, बारूदी सुरंग फटने से सेना के 4 जवान घायल; इलाके में शुरू हुआ सर्च ऑपरेशन

    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा के निकट मंगलवार को एक लैंडमाइन विस्फोट में भारतीय सेना के एक जूनियर कमीशंड ऑफिसर (जेसीओ) सहित चार जवान घायल हो गए। यह हादसा उस समय हुआ जब सेना की एक टीम नौशेरा सेक्टर के अग्रिम क्षेत्र में नियमित गश्त पर थी। विस्फोट के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता बढ़ा दी गई है तथा घटना के कारणों की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

    जानकारी के अनुसार सेना की टुकड़ी राजौरी जिले के कलाल क्षेत्र में नियमित पेट्रोलिंग कर रही थी। इसी दौरान अचानक एक बारूदी सुरंग सक्रिय हो गई और जोरदार विस्फोट हुआ। धमाके की चपेट में आने से एक जेसीओ समेत चार सैनिक घायल हो गए। विस्फोट की आवाज सुनते ही आसपास तैनात सुरक्षा बलों के जवान तत्काल मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।

    घायल सैनिकों को प्राथमिक उपचार देने के बाद सैन्य अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। अधिकारियों के अनुसार सभी घायलों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। सेना ने अभी तक किसी जवान के गंभीर रूप से घायल होने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन चिकित्सा दल पूरी सतर्कता के साथ उपचार में जुटा हुआ है।

    प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह घटना किसी घुसपैठ या आतंकी गतिविधि से सीधे तौर पर जुड़ी नहीं है, बल्कि पहले से बिछाई गई बारूदी सुरंग के अनजाने में सक्रिय हो जाने के कारण हुई। नियंत्रण रेखा के संवेदनशील इलाकों में घुसपैठ रोकने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने के लिए बड़ी संख्या में लैंडमाइंस बिछाई जाती हैं। कई बार भारी बारिश, भूस्खलन या मिट्टी खिसकने के कारण ये सुरंगें अपनी निर्धारित जगह से हटकर अन्य स्थानों पर पहुंच जाती हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।

    सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि हालिया घटना भी संभवतः इसी प्रकार की परिस्थितियों का परिणाम हो सकती है। आशंका है कि बारिश और प्राकृतिक बदलावों के कारण लैंडमाइन अपनी मूल स्थिति से खिसक गई होगी और गश्त के दौरान किसी जवान का पैर पड़ने से विस्फोट हो गया। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।

    हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। सुरक्षा बलों ने इलाके में व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आसपास कोई अन्य सक्रिय बारूदी सुरंग या सुरक्षा जोखिम मौजूद न हो। गश्ती मार्गों की दोबारा जांच भी की जा रही है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।

    राजौरी और नौशेरा सेक्टर नियंत्रण रेखा के अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों में गिने जाते हैं, जहां सेना नियमित रूप से निगरानी और गश्त करती है। सीमापार घुसपैठ की कोशिशों को रोकने के लिए यहां सुरक्षा उपाय लगातार मजबूत बनाए जाते हैं। ऐसे क्षेत्रों में तैनात सैनिकों को प्राकृतिक और परिचालन संबंधी दोनों तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ता है।

    इस घटना ने एक बार फिर सीमावर्ती इलाकों में तैनात सैनिकों के सामने मौजूद चुनौतियों को उजागर किया है। सेना की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और घायल जवानों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की जा रही है।

  • पाक की नापाक हरकत, LoC पर सर्विलांस कैमरे लगाते समय की गोलीबारी, भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब

    पाक की नापाक हरकत, LoC पर सर्विलांस कैमरे लगाते समय की गोलीबारी, भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब


    जम्मू।
    उत्तरी कश्मीर (North Kashmir) के कुपवाड़ा जिले (Kupwara district) के केरन सेक्टर में 20-21 जनवरी की रात भारत और पाकिस्तानी (India and Pakistan) सैनिकों के बीच गोलीबारी हुई। रक्षा सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी। यह झड़प तब हुई जब 6 राष्ट्रीय राइफल्स के सैनिक केरन बाला इलाके में सीमा सुरक्षा को मजबूत करने और लाइन ऑफ कंट्रोल (Line of Control) के साथ ब्लाइंड स्पॉट को खत्म करने के लिए हाई-टेक सर्विलांस कैमरे लगा रहे थे। पाकिस्तानी सैनिकों की गोलीबारी का भारतीय जवानों ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया।

    पाकिस्तानी सैनिकों ने इंस्टॉलेशन को रोकने के लिए छोटे हथियारों से दो राउंड फायरिंग की, जिसके जवाब में भारतीय पक्ष से एक, सोच-समझकर जवाबी गोली चलाई गई। हालांकि दोनों तरफ से किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन भारतीय सेना ने घने जंगल वाले इलाके में घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया है, क्योंकि उन्हें शक है कि आग का इस्तेमाल घुसपैठ की कोशिश से ध्यान भटकाने के लिए किया गया हो सकता है।

    पूरे सेक्टर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, क्योंकि सेना सर्दियों के महीनों में पारंपरिक घुसपैठ के रास्तों पर नजर रखने के लिए टेक्निकल सर्विलांस को अपग्रेड कर रही है।

    इससे पहले, जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के ऊपरी इलाकों में आतंकवादियों का पता लगाने के लिए अभियान चलाया गया। इसके तीसरे दिन मंगलवार को सुरक्षा बलों ने कई लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। चतरू क्षेत्र के मन्द्राल-सिंहपुरा के पास सोनार गांव में रविवार को अभियान शुरू किया गया था और इस बीच हुई मुठभेड़ में एक ‘पैराट्रूपर’ शहीद हो गया तथा छिपे हुए आतंकवादियों द्वारा अचानक किए गए ग्रेनेड हमले से सात अन्य घायल हो गए।

    आतंकवादी घने जंगल में भाग गए, लेकिन खाने-पीने की चीजें, कंबल और बर्तनों सहित बड़ी मात्रा में सर्दियों के सामान से भरे उनके ठिकाने का भंडाफोड़ किया गया। जम्मू जोन के पुलिस महानिरीक्षक भीम सेन तुती और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जम्मू महानिरीक्षक आर. गोपाल कृष्ण राव सहित वरिष्ठ अधिकारी भी मुठभेड़ स्थल पर पहुंच गए तथा वे अभियान की निगरानी के लिए वर्तमान में कई सेना अधिकारियों के साथ वहीं डेरा डाले हुए हैं।