Tag: Lok Sabha Speaker

  • लोकसभा अध्यक्ष की निष्पक्षता और धैर्य की PM मोदी ने की सराहना, बिरला ने कहा- शुक्रिया

    लोकसभा अध्यक्ष की निष्पक्षता और धैर्य की PM मोदी ने की सराहना, बिरला ने कहा- शुक्रिया


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद उनके धैर्य, संयम और निष्पक्षता की सराहना की। उन्होंने कहा कि सदन के संचालन के दौरान बिरला ने संसदीय मर्यादा और नियमों का पालन करते हुए संतुलित भूमिका निभाई। इस पत्र पर ओम बिरला ने प्रधानमंत्री का धन्यवाद दिया।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भी लिखकर कहा कि सदन ने अविश्वास प्रस्ताव को अस्वीकार करके लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और संसदीय परंपराओं के प्रति स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने बिरला के उस वक्तव्य की भी प्रशंसा की, जिसमें उन्होंने संसदीय इतिहास, अध्यक्ष की जिम्मेदारियों और नियमों की सर्वोच्चता पर जोर दिया था। प्रधानमंत्री ने इसे संतुलित और धैर्यपूर्ण बताया।

    प्रधानमंत्री ने पत्र में कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन असहमति और असम्मान में अंतर होना चाहिए। संसद संवाद, तर्क और विचार-विमर्श का सर्वोच्च मंच है और यहां युवाओं, महिलाओं और सभी वर्गों की आवाज को स्थान मिलना चाहिए।

    प्रधानमंत्री ने बिरला की कार्यशैली और सार्वजनिक जीवन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की भी सराहना की। उन्होंने राजस्थान के कोटा में एयरपोर्ट परियोजना के शिलान्यास में उनकी सक्रिय भूमिका का भी उल्लेख किया और कहा कि वह अपने संसदीय क्षेत्र और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाकर काम कर रहे हैं।

    प्रधानमंत्री के पत्र पर ओम बिरला ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी में संसदीय लोकतंत्र के नियमों, प्रक्रियाओं और परंपराओं के प्रति गहरा सम्मान है। यह पत्र सार्वजनिक जीवन में उच्च नैतिक मूल्यों का उदाहरण है और सभी सांसदों के लिए प्रेरणादायक है।

    उन्होंने कहा कि आपका यह संदेश दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर संसद, राज्य विधानमंडल तथा स्थानीय निकायों के सभी जनप्रतिनिधियों को प्रेरित करेगा और हमारे स्वतंत्रता सेनानियों तथा संविधान सभा के सदस्यों द्वारा स्थापित लोकतंत्र के सशक्त नैतिक आधार को और सुदृढ़ करेगा।

    उल्लेखनीय है कि विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था। प्रस्ताव कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने पेश किया। इसे 50 से अधिक विपक्षी सांसदों का समर्थन प्राप्त था। विपक्ष का आरोप था कि अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही के दौरान पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और विपक्षी सदस्यों को पर्याप्त अवसर नहीं दिया। 11 मार्च को लोकसभा में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। चर्चा के दौरान लोकसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने की। ओम बिरला ने नैतिक आधार पर स्वयं को चर्चा से अलग रखा था। अंत में ध्वनिमत से अविश्वास प्रस्ताव खारिज कर दिया गया और सदन स्थगित कर दिया गया। इसके अगले दिन ओम बिरला ने फिर से अध्यक्ष की कुर्सी संभाली और सदन को संबोधित किया।

  • लोकसभा अध्यक्ष बिरला के खिलाफ आज अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में चर्चा…

    लोकसभा अध्यक्ष बिरला के खिलाफ आज अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में चर्चा…


    नई दिल्ली।
    पूरे 39 वर्षों के बाद सोमवार को फिर संसद में लोकसभा अध्यक्ष (Lok Sabha Speaker) के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। प्रस्ताव पर करीब दस घंटे तक चर्चा होने की उम्मीद है। बहस के लिए सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ने पूरी तैयारी की है। केंद्रीय संसदीय मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने जहां सत्तापक्ष की तरफ से चर्चा में हिस्सा लेने वाली सदस्यों के साथ बैठक की, वहीं कांग्रेस (Congress) ने भी बैठक कर रणनीति पर चर्चा की है।

    संसद के बजट सत्र के दूसरे हिस्से की शुरुआत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Lok Sabha Speaker Om Birla) के खिलाफ विपक्ष की तरफ से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के साथ होगी। लोकसभा में सबसे पहले शिलांग से सांसद डॉ. रिकी एजे सिंगकॉन को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके बाद सदन कुछ देर के लिए स्थगित हो सकता है। कार्यसूची में प्रस्ताव पर चर्चा को शामिल किया है, हालांकि सदन में हंगामे के पूरे आसार हैं।

    सूत्रों का कहना है कि सत्तापक्ष पूरी मजबूती के साथ विपक्ष के आरोपों का खंडन करेगा। सरकार की ओर से भी उन घटनाओं का हवाला दिए जाने की संभावना है जिनमें विपक्षी नेताओं ने कथित तौर पर राष्ट्रपति, राज्यपालों, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसे संवैधानिक अधिकारियों के प्रति अनादर दिखाया है। वहीं, विपक्षी पार्टियां भी सरकार को घेरने में कोई कसर बाकी नहीं रखेंगी।


    TMC ने भी किया समर्थन

    संसदीय सूत्रों के अनुसार, विपक्ष के 118 सांसदों ने प्रस्ताव के समर्थन में नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। नोटिस पर तृणमूल कांग्रेस ने हस्ताक्षर नहीं किए थे, पर नए घटनाक्रम में टीएमसी ने भी प्रस्ताव का समर्थन करने का निर्णय लिया है। एनसीपी (शरद पवार) ने भी अभी तक अपना रुख साफ नहीं किया है, पर माना जा रहा है कि एनसीपी (एसपी) विपक्षी दलों के खिलाफ नहीं जाएगी।


    वैश्विक संघर्ष और उसके प्रभावों को लेकर भी बढ़ सकता है गतिरोध

    लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के साथ दूसरे चरण में वैश्विक संघर्ष और उसके प्रभावों को लेकर भी गतिरोध बढ़ सकता है। कांग्रेस पहले ही विदेश नीति पर चर्चा की मांग कर चुकी है। अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिका के रूस से तेल खरीदनों को लेकर बयानों पर भी विपक्ष सरकार को घेर सकता है।


    अब तक तीन बार आए प्रस्ताव

    लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए अब तक तीन औपचारिक प्रस्ताव पेश किए गए हैं, पर कोई भी प्रस्ताव पारित नहीं हुआ। सबसे पहले 1954 में तत्कालीन अध्यक्ष जीवी मावलंकर के खिलाफ समाजवादी नेता विग्नेश्वर मिश्रा ने पेश किया, पर इस पर सदन में पर्याप्त समर्थन नहीं मिला और प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया है। इसके बाद 1966 में सरदार हुकुम सिंह के खिलाफ समाजवादी नेता मधु लिमये ने पेश किया। इस पर चर्चा हुई और प्रस्ताव गिर गया।

    तीसरी बार 1987 में तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ के खिलाफ वामपंथी नेता सोमनाथ चटर्जी ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। इसको भी जरूरी बहुमत नहीं मिला और यह भी पारित नहीं हो सका। इसके बाद पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने की बात हुई थी, पर बाद में विपक्ष ने नोटिस देने का फैसला छोड़ दिया था।


    बिरला नहीं रहेंगे सदन में मौजूद

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि जब तक उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का निपटारा नहीं हो जाता तब तक वे सदन में मौजूद नहीं रहेंगे।

  • जज यशवंत वर्मा कैश कांड, सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा जांच कमेटी को वैध ठहराया

    जज यशवंत वर्मा कैश कांड, सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा जांच कमेटी को वैध ठहराया


    नई दिल्ली। इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा से जुड़े कैश कांड में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने लोकसभा द्वारा गठित जांच कमेटी की वैधता पर सवाल उठाया था।

    सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोकसभा की कार्रवाई कानूनी है और जजेस इंक्वायरी एक्ट, 1968 के तहत पूरी तरह वैध है। कोर्ट ने कहा कि जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए दोनों सदनों की सहमति जरूरी है, लेकिन जांच कमेटी का गठन सिर्फ लोकसभा की ओर से करना कानून के तहत सही है।

    जांच कमेटी के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार हैं, जबकि सदस्य मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और वरिष्ठ वकील बी.वी. आचार्य हैं।

    जस्टिस वर्मा को 24 जनवरी, 2026 को व्यक्तिगत रूप से कमेटी के सामने पेश होना होगा। इस तारीख के बाद पूरी जांच कमेटी के अधीन आगे बढ़ेगी।
    14 मार्च, 2025 को जस्टिस वर्मा के दिल्ली निवास में आग लगी थी। आग बुझाने के दौरान बड़ी मात्रा में जला हुआ कैश मिला था, जिसके बाद उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया और न्यायिक कार्य से अस्थायी रूप से अलग किया गया।
    सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला साफ करता है कि लोकसभा की जांच कमेटी वैध है और जस्टिस वर्मा की याचिका का कोई असर नहीं होगा।