Tag: Lokayukta Investigation

  • इंदौर के हेड कॉन्स्टेबल की 51 प्रॉपर्टी का खुलासा, कीमत 68 करोड़ रुपये, अब ED की जांच की संभावना

    इंदौर के हेड कॉन्स्टेबल की 51 प्रॉपर्टी का खुलासा, कीमत 68 करोड़ रुपये, अब ED की जांच की संभावना


    इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर में पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल ड्राइवर फिरोज खान से जुड़े आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच का दायरा बढ़ता नजर आ रहा है। लोकायुक्त पुलिस की जांच में अब तक 51 अचल संपत्तियों का पता चला है। इन संपत्तियों का अनुमानित बाजार मूल्य 68.01 करोड़ रुपये बताया गया है। मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की संभावित एंट्री को लेकर भी चर्चा है। हालांकि अभी ईडी की जांच शुरू होने की पुष्टि नहीं है और आगे की कार्रवाई लोकायुक्त की विवेचना तथा कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

    लोकायुक्त पुलिस फिलहाल संपत्तियों के दस्तावेज बैंक खातों निवेश और आय के स्रोतों की पड़ताल कर रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि संबंधित संपत्तियां किस रकम से खरीदी गईं और क्या उनकी खरीद के लिए इस्तेमाल किया गया पैसा फिरोज खान की ज्ञात वैध आय से मेल खाता है। यदि आय और संपत्तियों के बीच अंतर मिलता है तो उसके कारणों की जांच की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि संपत्तियों में किसी अन्य व्यक्ति या कंपनी की भूमिका रही है या नहीं।

    लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद ईडी पर नजर

    14 अक्टूबर को लोकायुक्त की टीम ने इंदौर और देवास सहित कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस कार्रवाई के बाद से मामले में सामने आ रही संपत्तियों और निवेश को लेकर जांच तेज है। अब तक सामने आई 51 अचल संपत्तियों का अनुमानित बाजार मूल्य 68.01 करोड़ रुपये बताया गया है। जांच एजेंसी के सामने यह महत्वपूर्ण सवाल है कि इन संपत्तियों को खरीदने के लिए धन कहां से आया और संबंधित लोगों की घोषित आय कितनी थी।

    ईडी की संभावित जांच का आधार मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए के प्रावधान हो सकते हैं। हालांकि केवल बड़ी संपत्ति का सामने आना या आय से अधिक संपत्ति का आरोप लगना अपने आप में मनी लॉन्ड्रिंग साबित नहीं करता। इसके लिए अपराध से अर्जित रकम और संबंधित संपत्तियों के बीच कानूनी रूप से जरूरी संबंध स्थापित करना होगा।

    परिवार और परिचितों के नाम वाली संपत्तियां भी जांच में

    लोकायुक्त की जांच में परिवार के सदस्यों परिचितों और संबंधित कंपनियों के नाम पर दर्ज संपत्तियों की जानकारी भी सामने आई है। देवास जिले के राजोदा गांव में दो महिलाओं रोशनी वर्मा और रानू कुशवाह के नाम पर 1.15 हेक्टेयर कृषि भूमि दर्ज मिली है। इसका पंजीयन मूल्य करीब 1.65 करोड़ रुपये और अनुमानित बाजार मूल्य 2.30 करोड़ रुपये बताया गया है।

    ऐसी संपत्तियों की जांच में यह पता लगाना जरूरी होगा कि जमीन खरीदने के लिए रकम किसने दी। भुगतान किन बैंक खातों से हुआ और संपत्ति पर वास्तविक नियंत्रण किसका है। केवल किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर संपत्ति दर्ज होने से उसे बेनामी या अपराध से जुड़ी संपत्ति नहीं माना जा सकता। इसके लिए वित्तीय लेनदेन और अन्य साक्ष्यों की पुष्टि जरूरी है।

    पीएमएलए के तहत कब हो सकती है कार्रवाई

    भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत लोकसेवक द्वारा आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने से जुड़ा अपराध पीएमएलए की अनुसूची में शामिल है। यदि जांच में आवश्यक कानूनी शर्तें पूरी होती हैं और अपराध से प्राप्त संपत्ति का संबंध स्थापित होता है तो ईडी मामले की जांच कर सकता है। कानून के अनुसार पर्याप्त आधार मिलने पर संपत्ति की अस्थायी कुर्की और अभियोजन जैसी कार्रवाई भी संभव हो सकती है।

    फिलहाल इस मामले में लोकायुक्त पुलिस की जांच महत्वपूर्ण चरण में है। संपत्तियों की खरीद लागत वैध आय बैंक खातों ऋण और अन्य वित्तीय स्रोतों का सत्यापन किया जाना बाकी है। आगे की जांच में सामने आने वाले साक्ष्य ही तय करेंगे कि मामला पीएमएलए के दायरे में आता है या नहीं। फिलहाल 51 संपत्तियों और 68.01 करोड़ रुपये के अनुमानित बाजार मूल्य का खुलासा जांच का अहम पहलू बना हुआ है।

  • ₹150 करोड़ की जमीन डील में फिरोज खान से जुड़ा नया VIDEO, अस्पताल में भर्ती कस्तूरीबाई से परिजनों को मिलने से रोकने का आरोप

    ₹150 करोड़ की जमीन डील में फिरोज खान से जुड़ा नया VIDEO, अस्पताल में भर्ती कस्तूरीबाई से परिजनों को मिलने से रोकने का आरोप


    इंदौर । इंदौर में करोड़ों रुपये की संपत्ति से जुड़े मामले में हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान को लेकर एक नया वीडियो सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ने की बात कही जा रही है। मामला मगरखेड़ी की कस्तूरीबाई की पारिवारिक जमीन से जुड़ा है जिसका करीब 150 करोड़ रुपये में सौदा होने की बात सामने आई थी। इस सौदे में फिरोज खान को गवाह बताया जा रहा है। अब अस्पताल से जुड़े एक कथित वीडियो ने पूरे मामले में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। दावा किया जा रहा है कि बीमारी के दौरान अस्पताल में भर्ती कस्तूरीबाई से उनके परिवार के लोगों को मिलने से रोकने के लिए लिखित सूचना दी गई थी।

    जानकारी के मुताबिक जमीन के सौदे के कुछ दिन बाद कस्तूरीबाई की तबीयत बिगड़ गई थी जिसके बाद उन्हें इंदौर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसी दौरान कथित तौर पर अस्पताल को सूचना दी गई कि कस्तूरीबाई से किसी को मिलने न दिया जाए। इस घटनाक्रम को जमीन के सौदे से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि मुलाकात पर रोक लगाने का निर्देश किसने दिया था और इसके पीछे क्या कारण था इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    सामने आए वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि अस्पताल में पुलिस सुरक्षा के बीच फिरोज खान का करीबी बताया जा रहा एक व्यक्ति मौजूद था। वीडियो में एक अन्य पुलिसकर्मी के नजर आने की बात भी कही गई है। आरोप है कि फिरोज खान के कहने पर अस्पताल को लिखित सूचना दी गई थी ताकि कस्तूरीबाई से उनके परिजन मुलाकात न कर सकें। लेकिन इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान और उनकी वास्तविक भूमिका को लेकर भी अभी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

    इस घटनाक्रम के बाद कई अहम सवाल उठ रहे हैं। यदि अस्पताल में मुलाकात पर रोक लगाने के लिए लिखित सूचना दी गई थी तो उसे किसने दिया था और उसका आधार क्या था। क्या यह कदम कस्तूरीबाई की चिकित्सा संबंधी जरूरतों के कारण उठाया गया था या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी। क्या इस कथित रोक का जमीन के सौदे से कोई संबंध था। फिलहाल इन सवालों के जवाब सामने आना बाकी है और बिना जांच के किसी व्यक्ति की भूमिका को दोषपूर्ण मानना उचित नहीं होगा।

    मामले में लोकायुक्त पुलिस की जांच जारी होने की जानकारी दी गई है। जांच के दौरान जमीन के सौदे में फिरोज खान की बताई जा रही भूमिका अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान हुए घटनाक्रम और कथित लिखित सूचना जैसे पहलुओं को खंगाला जा सकता है। साइबर सेल की मदद से वीडियो से जुड़े तथ्यों की जांच किए जाने की भी बात कही गई है। जांच में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि वीडियो कब और कहां बनाया गया था उसमें कौन लोग दिखाई दे रहे हैं और क्या उसमें सामने आ रहे दावों की पुष्टि करने वाले दस्तावेज उपलब्ध हैं।

    फिरोज खान के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति को लेकर भी लोकायुक्त की जांच चल रही है। इसी जांच से जुड़े अन्य तथ्यों में देवास के दो प्लॉट खरीदने के लिए उनकी पत्नी मां और बेटी द्वारा ऑनलाइन बोली लगाए जाने की बात सामने आई थी। दोनों प्लॉट की बोली करीब 92 लाख रुपये में तय होने और रजिस्ट्री सहित अन्य खर्च जोड़कर कुल लागत लगभग एक करोड़ रुपये होने का उल्लेख किया गया है। इन सभी मामलों में जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल कस्तूरीबाई से मुलाकात रोकने के कथित निर्देश और जमीन के सौदे के बीच संबंध जांच का अहम पहलू बना हुआ है।

  • 64 करोड़ की संपत्तियों की जांच के बीच हेड कॉन्स्टेबल का नया जमीन सौदा चर्चा में, वृद्धा की मौत से 4 दिन पहले रजिस्ट्री

    64 करोड़ की संपत्तियों की जांच के बीच हेड कॉन्स्टेबल का नया जमीन सौदा चर्चा में, वृद्धा की मौत से 4 दिन पहले रजिस्ट्री

    इंदौर । इंदौर में करोड़ों रुपए की संपत्तियों को लेकर जांच के घेरे में आए पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान का नाम अब 45 बीघा जमीन की रजिस्ट्री से भी जुड़ गया है। इंदौर उज्जैन हाईवे पर मगरखेड़ा गांव में स्थित इस जमीन की रजिस्ट्री में फिरोज खान गवाह के रूप में दर्ज हैं। जमीन को लेकर एक परिवार ने धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं। परिवार का दावा है कि 83 वर्षीय कस्तूरी बाई के अस्पताल की आईसीयू में भर्ती रहने के दौरान पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए जमीन की रजिस्ट्री कराई गई थी। रजिस्ट्री के चार दिन बाद ही वृद्धा की मौत हो गई। अब परिवार ने रजिस्ट्री को शून्य घोषित कराने के लिए अदालत का रुख किया है। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि होना बाकी है।

    दस्तावेजों के मुताबिक मगरखेड़ा गांव में कस्तूरी बाई के नाम दर्ज करीब 11.403 हेक्टेयर यानी 45 बीघा जमीन की रजिस्ट्री 27 अगस्त 2024 को श्याम इंफ्रा के सुमित जिंदल के नाम की गई थी। दस्तावेजों में जमीन का सरकारी मूल्यांकन करीब 8.97 करोड़ रुपए और बिक्री मूल्य 9 करोड़ रुपए दर्ज है। कस्तूरी बाई के पोते दीपक शर्मा का कहना है कि यह परिवार की पुश्तैनी संपत्ति है। परिवार के मुताबिक कस्तूरी बाई की तबीयत खराब होने पर उन्हें रतलाम से इंदौर के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसी दौरान जमीन से जुड़े दस्तावेजों और पावर ऑफ अटॉर्नी को लेकर विवाद हुआ। परिवार का आरोप है कि वृद्धा के आईसीयू में भर्ती रहने के दौरान ही जमीन की रजिस्ट्री करा दी गई। इसके बाद 2 सितंबर 2024 को कस्तूरी बाई की अस्पताल में मौत हो गई।

    इस जमीन की कीमत को लेकर भी बड़ा अंतर सामने आया है। परिवार और स्थानीय जानकारों का दावा है कि इंदौर उज्जैन रोड पर स्थित जमीन का मौजूदा बाजार मूल्य करीब 150 करोड़ रुपए है। वहीं 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन के हिसाब से इस जमीन का मूल्य करीब 45 करोड़ 61 लाख रुपए बैठता है। स्थानीय लोगों और प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक आसपास सैटेलाइट टाउनशिप विकसित होने के कारण जमीन की बाजार कीमत सरकारी गाइडलाइन से कई गुना अधिक हो सकती है। हालांकि 150 करोड़ रुपए का आंकड़ा परिवार और स्थानीय जानकारों का अनुमान है।

    रजिस्ट्री के दस्तावेजों में फिरोज खान का नाम गवाह के तौर पर दर्ज है। दस्तावेजों के पेज 12 और 25 पर उनका नाम पता फोटो और हस्ताक्षर होने की बात सामने आई है। इस सौदे को लेकर एक और कारोबारी संबंध चर्चा में है। पावर ऑफ अटॉर्नी धारक रविकांत पंवार के बेटे युवराज पंवार स्पार्कवेव रियलिटी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में डायरेक्टर हैं। इसी कंपनी में फिरोज खान की पत्नी हिना खान भी डायरेक्टर बताई गई हैं। कंपनी का नाम लोकायुक्त की जांच में जमीनों की खरीद फरोख्त के मामलों में सामने आया है। इन संबंधों के कारण सौदे में फिरोज खान की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं लेकिन उनकी भूमिका और किसी कथित अनियमितता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    जमीन के नामांतरण को लेकर भी कानूनी विवाद सामने आया है। परिवार की अपील के बाद एसडीएम कोर्ट ने नामांतरण निरस्त कर दिया। आदेश में कहा गया कि नामांतरण की प्रक्रिया में गंभीर कमियां थीं। इनमें सिविल कोर्ट के यथास्थिति बनाए रखने और जमीन नहीं बेचने के अंतरिम आदेश के बाद नामांतरण किया जाना तथा संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलना शामिल है। हालांकि नामांतरण निरस्त होने से रजिस्ट्री अपने आप अमान्य नहीं होती। इसी कारण परिवार ने अब सिविल कोर्ट में रजिस्ट्री को शून्य घोषित करने की मांग की है।

    लोकायुक्त पुलिस पहले से फिरोज खान और उनसे जुड़े लोगों की संपत्तियों की जांच कर रही है। जांच में 64 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की 48 संपत्तियों का पता चलने की बात सामने आई है। लोकायुक्त डीएसपी सुनील तालान के मुताबिक मगरखेड़ा की जमीन के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि फिरोज खान और उनसे जुड़ी कंपनियों की इस सौदे में क्या भूमिका रही। दूसरी ओर पावर ऑफ अटॉर्नी कराने वाले रविकांत पंवार ने कहा कि वह कस्तूरी बाई के कानूनी सलाहकार थे। उन्होंने दावा किया कि कस्तूरी बाई अपनी जमीन परिवार को नहीं देना चाहती थीं। अब इस पूरे मामले में अदालत और जांच एजेंसियों की पड़ताल से ही विवादित रजिस्ट्री की वैधता और संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।