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  • अद्वितीय है महर्षि सांदीपनि आश्रम, भगवान श्रीकृष्ण ने 5100 वर्ष पूर्व इसी पावन स्थल पर ग्रहण की थी विद्या

    अद्वितीय है महर्षि सांदीपनि आश्रम, भगवान श्रीकृष्ण ने 5100 वर्ष पूर्व इसी पावन स्थल पर ग्रहण की थी विद्या


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम अत्यंत गौरवशाली और अद्वितीय है। लगभग 5100 वर्ष पूर्व स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने इसी पावन स्थल पर महर्षि सांदीपनि से विद्या ग्रहण की थी। भगवान श्रीकृष्ण से शिक्षा प्राप्त कर जगद्गुरु की उपाधि से विभूषित हुए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार देर शाम उज्जैन स्थित ऐतिहासिक महर्षि सांदीपनि आश्रम में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर उज्जैन के प्रमुख देवस्थानों के विकास कार्यों का शुभारंभ हो रहा है, जिसमें शहर को गीता भवन की बड़ी सौगात भी मिल रही है। उन्होंने कहा कि आज गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर हम सभी गुरुओं का सम्मान कर अपने जीवन को धन्य करें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर उज्जैन स्थित ऐतिहासिक महर्षि सांदीपनि आश्रम पहुंचे और यहां पूजन-अर्चन और आरती की। पूजा-अर्चना पं. कीर्ति रूपम व्यास एवं राहुल व्यास के द्वारा संपन्न कराई गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अपनी स्वरचित पुस्तक ‘महर्षि सांदीपनि: भारतीय गुरुकुल परंपरा के शिल्पी’ की प्रति महर्षि सांदीपनि की प्रतिमा के समक्ष अर्पित की।

    मुख्यमंत्री ने आश्रम परिसर में स्थित अति प्राचीन श्री कुंडेश्वर महादेव और श्री सर्वेश्वर महादेव मंदिर में भी दर्शन-पूजन किया। आश्रम के मुख्य पुजारी परिवार द्वारा मुख्यमंत्री का अंगवस्त्रम् ओढ़ाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत-सम्मान किया गया।

    आश्रम में हुआ पंचामृत अभिषेक और स्लेट पूजन

    महर्षि सांदीपनि व्यास के वंशज एवं मंदिर के मुख्य पुजारी पं. कीर्ति रुपम व्यास ने बताया कि गुरु पूर्णिमा पर आश्रम में प्रतिवर्षानुसार विशेष अनुष्ठान आयोजित किए गए। प्रात:काल भगवान श्रीकृष्ण, भगवान श्री बलराम और गुरु सांदीपनि का पंचामृत अभिषेक एवं विशेष पूजन किया गया। परंपरा अनुसार, प्रथम बार शिक्षा प्रारंभ करने वाले छोटे बच्चों द्वारा ‘स्लेट पूजन’ का आयोजन भी हुआ।

    गुरु गादी परिसर को भव्य और दिव्य स्वरूप प्रदान किया जाएगा

    गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन स्थित वृंदावन पूरा में संत शिरोमणि रविदास महाराज की चरण पादुका और गुरु गादी स्थल पहुंचकर श्रद्धापूर्वक नमन किया एवं श्रद्धापूर्वक चादर चढ़ाई। राज्य के सभी नागरिकों के सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थल के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि संत रविदास जी महाराज के इस चरण पादुका एवं गुरु गादी परिसर को भव्य और दिव्य स्वरूप प्रदान किया जाएगा, जिसके लिए जल्द ही आवश्यक विकास कार्य शुरू किए जाएंगे। उन्होंने कहा शिरोमणि रविदास महाराज के आदर्श, उपदेश और विचार आज भी समाज में समानता, सद्भाव और मानवता की भावना का संचार करते हैं। उनका जीवन पूरी मानव जाति के लिए एक मार्गदर्शक है।

    इस गरिमामय आयोजन में जन प्रतिनिधियों और रविदास समाज के प्रमुख लोगों की बड़ी संख्या में मौजूदगी रही। कार्यक्रम में नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल, महापौर मुकेश टटवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रवि सोलंकी और उपाध्यक्ष मुकेश यादव, पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यनारायण जटिया सहित रविदास समाज के संभागीय अध्यक्ष मनोहर सुरेश कुसुमारिया, विजेंद्र चौहान, कमल हनोतिया, कमलकांत राजोरिया, विक्रम परमार, रितेश जटिया, अंबाराम चौहान, प्रशासनिक अधिकारी एवं भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

  • पाकिस्तान में हिंदू विरासत पर फिर हमला, कराची में भगवान कृष्ण की मूर्तियां तोड़ी गईं

    पाकिस्तान में हिंदू विरासत पर फिर हमला, कराची में भगवान कृष्ण की मूर्तियां तोड़ी गईं


    लाहौर। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को निशाना बनाए जाने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला कराची से सामने आया है, जहां एक ऐतिहासिक इमारत में भगवान कृष्ण और गोपियों की मूर्तियों को कथित रूप से खंडित कर दिया गया।

    इस घटना की जानकारी पाकिस्तान दरवार इत्तेहाद के अध्यक्ष शिव कच्छी ने दी। उन्होंने बताया कि कराची स्थित ऐतिहासिक सगन मेसन भवन में रखी धार्मिक मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया गया, जिसे उन्होंने बेहद निंदनीय बताया।

    शिव कच्छी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक इमारत को नुकसान पहुंचाने की घटना नहीं है, बल्कि पाकिस्तान की बहुसांस्कृतिक विरासत, धार्मिक सद्भाव और अल्पसंख्यक समुदायों की भावनाओं पर सीधा हमला है। उन्होंने सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

    उन्होंने कहा कि हिंदू समुदाय इस घटना से आहत है और जिम्मेदार लोगों की जल्द गिरफ्तारी जरूरी है।

    साथ ही, ऐतिहासिक इमारत के तत्काल जीर्णोद्धार और संरक्षण की मांग भी उठाई गई है।

    बताया जा रहा है कि यह भवन स्वतंत्रता-पूर्व काल में 1937 में निर्मित हुआ था और यहां हिंदू समुदाय की कई धार्मिक मूर्तियां व प्रतीक सुरक्षित रखे गए थे। इससे पहले भी पाकिस्तान में मंदिरों और हिंदू स्थलों पर हमलों की कई घटनाएं सामने आती रही हैं, जिन पर भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों, जिनमें संयुक्त राष्ट्र भी शामिल है, पर चिंता जता चुका है।