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  • Sawan 2026: भोलेनाथ के 3 चमत्कारी मंत्र, सावन में जाप से मानसिक शांति और सुख-समृद्धि की मान्यता

    Sawan 2026: भोलेनाथ के 3 चमत्कारी मंत्र, सावन में जाप से मानसिक शांति और सुख-समृद्धि की मान्यता


    नई दिल्ली। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। हिंदू धर्म में सावन को भगवान भोलेनाथ का प्रिय महीना बताया गया है और इस दौरान शिवलिंग पर जल चढ़ाने से लेकर मंत्र जाप तक विशेष पूजा का महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में भगवान शिव की विधि विधान से पूजा करने और नियमित रूप से शिव मंत्रों का जाप करने से व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे लोग भी इस दौरान कुछ विशेष शिव मंत्रों का जाप श्रद्धा और नियम के साथ कर सकते हैं। हालांकि इन मंत्रों से आर्थिक लाभ होने की बातें धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं।
    सावन में सबसे पहले रुद्र गायत्री मंत्र का जाप किया जा सकता है। यह भगवान शिव को समर्पित महत्वपूर्ण मंत्रों में माना जाता है। मंत्र है ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्। धार्मिक मान्यता के अनुसार नियमित रूप से इस मंत्र का जाप करने से मन को एकाग्र करने और नकारात्मक विचारों से दूर रहने में सहायता मिल सकती है। इसे आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप परिवार में सकारात्मक वातावरण बनाने और जीवन में स्थिरता लाने में सहायक हो सकता है।

    दूसरा महत्वपूर्ण मंत्र महामृत्युंजय मंत्र है। भगवान शिव के इस मंत्र को अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। मंत्र है ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्। धार्मिक परंपरा में महामृत्युंजय मंत्र का जाप भय से मुक्ति और मानसिक दृढ़ता के लिए किया जाता है। सावन में सुबह के समय स्नान करने के बाद स्वच्छ स्थान पर दीपक जलाकर श्रद्धा के साथ मंत्र जाप करने की परंपरा है। नियमित जाप के दौरान मन को शांत रखकर भगवान शिव का ध्यान करने पर पूजा का आध्यात्मिक अनुभव और गहरा हो सकता है।

    तीसरा मंत्र ऋण मुक्तेश्वर मंत्र है जिसे विशेष रूप से आर्थिक परेशानियों और कर्ज से मुक्ति की धार्मिक मान्यता से जोड़ा जाता है। इसका मंत्र है ॐ ऋण मुक्तेश्वराय नमः शिवाय। मान्यता है कि सावन के दौरान इस मंत्र का नियमित जाप श्रद्धा और सकारात्मक भाव से करने पर व्यक्ति को आर्थिक संकट से निकलने का मानसिक संबल मिलता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार भगवान शिव की कृपा से कर्ज से राहत और आर्थिक स्थिति में सुधार के नए रास्ते खुल सकते हैं।

    सावन में शिव मंत्रों का जाप करते समय नियमितता और श्रद्धा को महत्वपूर्ण माना गया है। सुबह का समय मंत्र जाप के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान भगवान शिव का ध्यान करते हुए जल अर्पित किया जा सकता है और अपनी क्षमता के अनुसार पूजा सामग्री का उपयोग किया जा सकता है। मंत्र जाप को किसी चमत्कारी आर्थिक उपाय के बजाय आध्यात्मिक साधना के रूप में लेना बेहतर है। सावन में शिव आराधना व्यक्ति को अनुशासन मानसिक शांति और सकारात्मक सोच से जोड़ने का माध्यम बन सकती है।

  • सोमवार के दिन ऐसे करें शिव पूजा भोलेनाथ की कृपा से दूर होंगे संकट खुलेगा सुख समृद्धि और सफलता का मार्ग

    सोमवार के दिन ऐसे करें शिव पूजा भोलेनाथ की कृपा से दूर होंगे संकट खुलेगा सुख समृद्धि और सफलता का मार्ग


    नई दिल्ली। सनातन धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। विशेष रूप से सावन के सोमवार का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और विधि विधान से भगवान भोलेनाथ की पूजा करने से जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं और सुख समृद्धि आरोग्य तथा मनचाही सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई शिव आराधना से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की सभी उचित मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

    सोमवार की पूजा की शुरुआत प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने से करनी चाहिए। स्नान के बाद साफ और हल्के रंग के वस्त्र धारण करें तथा पूजा स्थान की सफाई कर भगवान शिव का ध्यान करें। यदि संभव हो तो शिव मंदिर जाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करें। घर में पूजा करने वाले श्रद्धालु भी तांबे के पात्र में जल भरकर उसमें गंगाजल मिलाएं और श्रद्धा के साथ शिवलिंग पर अर्पित करें।

    जलाभिषेक के बाद भगवान शिव को दूध दही शहद घी और शक्कर से पंचामृत अर्पित किया जा सकता है। इसके बाद पुनः स्वच्छ जल से अभिषेक करें। पूजा के दौरान बेलपत्र धतूरा आक के फूल सफेद पुष्प भस्म चंदन और मौसमी फल अर्पित करना शुभ माना जाता है। बेलपत्र चढ़ाते समय यह ध्यान रखें कि पत्तियां साफ और खंडित न हों तथा उनका चिकना भाग शिवलिंग की ओर रहे।

    पूजा के समय भगवान शिव के साथ माता पार्वती गणेश जी और नंदी महाराज का भी स्मरण करना चाहिए। इसके बाद धूप दीप जलाकर शिव चालीसा रुद्राष्टक शिव तांडव स्तोत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। ओम नमः शिवाय मंत्र का कम से कम 108 बार जप करना अत्यंत फलदायी माना गया है। श्रद्धा और एकाग्रता के साथ किया गया मंत्र जाप मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

    यदि सोमवार का व्रत रखा गया है तो दिनभर सात्विक आहार ग्रहण करें या फलाहार करें। क्रोध असत्य और नकारात्मक विचारों से दूर रहना भी इस दिन विशेष महत्व रखता है। जरूरतमंद लोगों को भोजन वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने से पुण्य फल प्राप्त होता है। गाय को हरा चारा खिलाना और गरीबों की सहायता करना भी भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ उपाय माना गया है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख शांति आती है। अविवाहित युवक युवतियों को योग्य जीवनसाथी मिलने की कामना पूरी होती है। नौकरी व्यापार और करियर में आ रही बाधाएं दूर होने के साथ आर्थिक स्थिति में भी सुधार होने के संकेत मिलते हैं। परिवार में खुशहाली बनी रहती है और मानसिक तनाव कम होता है।

    पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें और परिवार के सभी सदस्यों को प्रसाद वितरित करें। पूरे दिन शिव नाम का स्मरण करते हुए सदाचार और संयम का पालन करें। ऐसा माना जाता है कि भगवान भोलेनाथ केवल भक्ति और सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न होते हैं इसलिए पूजा में दिखावे से अधिक मन की पवित्रता और विश्वास का महत्व होता है। सोमवार के दिन विधि विधान से की गई शिव आराधना जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाली मानी जाती है।

  • सवान में हर सोमवार विशेष योग और पर्व का संयोग, भगवान शिव की कृपा पाने करें ये आसान उपाय

    सवान में हर सोमवार विशेष योग और पर्व का संयोग, भगवान शिव की कृपा पाने करें ये आसान उपाय


    नई दिल्ली। श्रावण मास की शुरुआत 30 जुलाई से हो चुकी है और यह 28 अगस्त 2026 तक रहेगा। सनातन परंपरा में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान विधि-विधान से शिव पूजन, जलाभिषेक और व्रत करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं तथा जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

    इस वर्ष सावन के चारों सोमवार विशेष योग और पर्वों के साथ पड़ रहे हैं, जिससे इनका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। आइए जानते हैं इन चारों सोमवार की विशेषता और उनसे जुड़े पारंपरिक उपाय।

    सावन के चार सोमवार और शुभ संयोग
    3 अगस्त 2026 (पहला सोमवार): सुकर्मा योग और सर्वार्थ सिद्धि योग।
    10 अगस्त 2026 (दूसरा सोमवार): सोम प्रदोष व्रत का विशेष संयोग।
    17 अगस्त 2026 (तीसरा सोमवार): नाग पंचमी के पावन पर्व के साथ।
    24 अगस्त 2026 (चौथा सोमवार): सर्वार्थ सिद्धि योग का प्रभाव।

    पहला सोमवार: आर्थिक उन्नति के लिए
    धन संबंधी परेशानियों या कर्ज से मुक्ति की कामना करने वाले श्रद्धालु पहले सोमवार भगवान शिव का जलाभिषेक करें। तांबे या चांदी के पात्र में जल लेकर उसमें थोड़ा कच्चा दूध और काले तिल मिलाएं तथा श्रद्धा के साथ शिवलिंग पर अर्पित करें।

    दूसरा सोमवार: विवाह में आ रही बाधाएं दूर करने के लिए
    यदि विवाह में विलंब हो रहा हो या मनचाहा जीवनसाथी पाने की इच्छा हो, तो दूसरे सोमवार 108 साबुत बेलपत्र लेकर प्रत्येक पर पीले चंदन से ‘ॐ’ या ‘राम’ लिखें। इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए एक-एक बेलपत्र शिवलिंग पर अर्पित करें।

    तीसरा सोमवार: स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए
    नाग पंचमी के साथ पड़ रहे तीसरे सोमवार भगवान शिव को जल अर्पित करने के बाद शमी के पत्ते और दूर्वा चढ़ाएं। इसके पश्चात श्रद्धापूर्वक महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें। पारंपरिक मान्यता के अनुसार यह उपाय आरोग्य और मानसिक शांति की कामना के लिए किया जाता है।

    चौथा सोमवार: सुखी दांपत्य जीवन के लिए
    सावन के अंतिम सोमवार भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन शिवलिंग का अभिषेक गन्ने के रस या केसर मिले दूध से करें। इसके बाद माता पार्वती को लाल चुनरी और सुहाग सामग्री अर्पित कर सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करें।

  • सावन में शिवभक्ति का महासंगम: 31 जुलाई से निकलेगी भव्य कांवड़ यात्रा भोपाल से नर्मदापुरम तक गूंजेगा हर हर महादेव

    सावन में शिवभक्ति का महासंगम: 31 जुलाई से निकलेगी भव्य कांवड़ यात्रा भोपाल से नर्मदापुरम तक गूंजेगा हर हर महादेव


    भोपाल। सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही राजधानी भोपाल शिवभक्ति के रंग में रंगने जा रही है। भगवान भोलेनाथ की आराधना को समर्पित चार दिवसीय विशाल कांवड़ यात्रा 31 जुलाई से प्रारंभ होगी। ॐ शिव सेवा भक्त मंडल के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक यात्रा में बड़ी संख्या में शिवभक्त भोपाल से नर्मदापुरम पहुंचकर मां नर्मदा का पवित्र जल लेकर पदयात्रा के माध्यम से वापस राजधानी आएंगे और भगवान शिव का विधिवत जलाभिषेक करेंगे। पूरे आयोजन के दौरान हर हर महादेव और बोल बम के जयघोष से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहेगा।

    मंडल के पदाधिकारियों के अनुसार श्रद्धालुओं का जत्था 31 जुलाई शुक्रवार को दोपहर दो बजे भोपाल से नर्मदापुरम के लिए रवाना होगा। वहां मां नर्मदा के पावन तट से जल भरने के बाद श्रद्धालु कांवड़ लेकर पैदल यात्रा करते हुए भोपाल लौटेंगे। यह यात्रा केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन नहीं बल्कि आस्था अनुशासन और सेवा भावना का भी प्रतीक मानी जाती है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होकर भगवान शिव के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

    चार दिनों तक चलने वाली इस यात्रा में श्रद्धालु भजन कीर्तन मंत्रोच्चार और शिव नाम के संकीर्तन के साथ आगे बढ़ेंगे। पूरे मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारियां भी की गई हैं। जगह जगह पेयजल चिकित्सा और विश्राम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि कांवड़ियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। सामाजिक और धार्मिक संगठनों द्वारा भी यात्रा के दौरान सेवा कार्य किए जाएंगे।

    यात्रा का सबसे प्रमुख आयोजन 3 अगस्त सोमवार को होगा। इस दिन प्राचीन श्री पिपलेश्वर महादेव मंदिर पात्रा पुल से भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए परम पूज्य बाबा बटेश्वर महादेव मंदिर पहुंचेगी जहां मां नर्मदा के पवित्र जल से भगवान शिव का महाजलाभिषेक किया जाएगा। इसके बाद यात्रा का समापन बड़े वाले महादेव मंदिर कायस्थपुरा में धार्मिक अनुष्ठानों और आरती के साथ होगा।

    आयोजकों ने बताया कि पूरे आयोजन के दौरान महाआरती शिव भजन रुद्राभिषेक और ॐ नमः शिवाय के मंत्रों की गूंज श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देगी। सावन में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व माना जाता है क्योंकि इस दौरान भगवान शिव को नर्मदा और गंगा जैसे पवित्र जल से अभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होने की धार्मिक मान्यता है।

    मंडल ने राजधानी और आसपास के क्षेत्रों के सभी शिवभक्तों से इस पावन यात्रा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक एकता सेवा और भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा का भी प्रतीक है। सावन के इस पावन अवसर पर निकलेगी यह विशाल कांवड़ यात्रा निश्चित रूप से भोपाल को शिवमय बना देगी और हर ओर हर हर महादेव के जयघोष से भक्तिमय वातावरण देखने को मिलेगा।

  • 30 जुलाई से होगी सावन की शुरुआत, जानें शिव पूजा, उपवास और सोमवार व्रत के जरूरी नियम

    30 जुलाई से होगी सावन की शुरुआत, जानें शिव पूजा, उपवास और सोमवार व्रत के जरूरी नियम


    नई दिल्ली। भगवान शिव को समर्पित पवित्र श्रावण मास का शुभारंभ 30 जुलाई, गुरुवार से आयुष्मान योग और श्रवण नक्षत्र में होगा। इस दिन चंद्रमा मकर राशि और सूर्य कर्क राशि में रहेंगे। श्रावण कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि रात 9:30 बजे तक रहेगी। इस वर्ष सावन 31 दिनों का होगा और इसका समापन 28 अगस्त को होगा। पूरे माह में श्रद्धालु शिव कृपा प्राप्त करने के लिए सोमवार व्रत, प्रदोष व्रत, सावन शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत का पालन करेंगे।

    पहली बार व्रत रखने वालों के लिए शुरुआत कैसे करें?
    जो श्रद्धालु पहली बार सावन का व्रत रखना चाहते हैं, वे 3 अगस्त से पहले सावन सोमवार व्रत का संकल्प ले सकते हैं। इस वर्ष कुल चार सावन सोमवार और चार मंगला गौरी व्रत पड़ेंगे।

    सावन सोमवार की तिथियां
    3 अगस्त – पहला सोमवार
    10 अगस्त – दूसरा सोमवार
    17 अगस्त – तीसरा सोमवार
    24 अगस्त – चौथा सोमवार

    मंगला गौरी व्रत
    4 अगस्त
    11 अगस्त
    18 अगस्त
    25 अगस्त

    अन्य प्रमुख व्रत
    10 अगस्त – प्रदोष व्रत
    11 अगस्त – सावन शिवरात्रि
    25 अगस्त – प्रदोष व्रत

    व्रत का संकल्प और उद्यापन जरूरी
    यदि आप सावन सोमवार व्रत शुरू कर रहे हैं तो 3 अगस्त से संकल्प लेकर चारों सोमवार व्रत करें और 24 अगस्त को विधि-विधान से उद्यापन करें। कुछ परंपराओं में भाद्रपद के पहले सोमवार को पांचवां व्रत रखकर उद्यापन करने की भी मान्यता है। वहीं 16 सोमवार व्रत करने वाले श्रद्धालु भी इसकी शुरुआत पहले सावन सोमवार से करते हैं।

    व्रत के दौरान रखें इन नियमों का ध्यान
    सावन शुरू होने से पहले ही यह संकल्प लें कि पूरे महीने मांस, मदिरा, धूम्रपान और अन्य तामसिक पदार्थों से दूरी बनाए रखेंगे। इस दौरान ब्रह्मचर्य और संयम का पालन करना भी शुभ माना गया है। व्रत वाले दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और जल हाथ में लेकर भगवान शिव की पूजा तथा व्रत का संकल्प लें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत तभी फलदायी होता है जब व्यक्ति मन, वचन और कर्म से पवित्र रहे। छल, कपट, क्रोध और घृणा जैसे भावों से दूर रहकर शिव भक्ति करना अधिक महत्वपूर्ण माना गया है।

    ऐसे करें भगवान शिव की पूजा
    हर सोमवार या व्रत वाले दिन शिवलिंग का जलाभिषेक करें। पूजन में बेलपत्र, अक्षत, कच्चा दूध, शहद, चंदन, पुष्प, भांग, धतूरा और शमी के पत्ते अर्पित किए जा सकते हैं। पुरुष श्रद्धालु ‘ॐ नमः शिवाय’ तथा महिलाएं ‘नमः शिवाय’ मंत्र का जप करें। इसके साथ शिव चालीसा का पाठ और आरती करें। शाम के समय शिवलिंग के समीप दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है।

    पूरे सावन में करें शिव आराधना
    जिन दिनों व्रत न हो, उन दिनों भी भगवान शिव का जलाभिषेक और नियमित पूजा करना शुभ माना गया है। यदि संभव हो तो किसी एक व्रत के दिन रुद्राभिषेक भी कराया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई शिव उपासना से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

  • उज्जैन में भोर होते ही गूंजा हर हर महादेव पंचामृत अभिषेक के बाद राजाधिराज स्वरूप में सजे बाबा महाकाल ने दिए दिव्य दर्शन

    उज्जैन में भोर होते ही गूंजा हर हर महादेव पंचामृत अभिषेक के बाद राजाधिराज स्वरूप में सजे बाबा महाकाल ने दिए दिव्य दर्शन


    मध्यप्रदेश । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के आयोजित होने वाली भस्म आरती के दौरान आध्यात्मिक आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त में सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पूरा मंदिर परिसर हर हर महादेव और वैदिक मंत्रोच्चार से गूंज उठा। गर्भगृह में विराजमान भगवान महाकाल सहित सभी देवी देवताओं का विधि विधान से पूजन संपन्न हुआ। इसके बाद बाबा महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया और दूध दही घी शक्कर तथा फलों के रस से तैयार पंचामृत से विशेष स्नान कराया गया। इस दिव्य अनुष्ठान के बाद भगवान महाकाल को राजाधिराज स्वरूप में अलंकृत कर भक्तों को दिव्य दर्शन कराए गए।

    भस्म आरती की शुरुआत प्रथम घंटानाद के साथ हुई। मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच भगवान महाकाल का ध्यान कर हरिओम का पवित्र जल अर्पित किया। इसके पश्चात कपूर आरती संपन्न हुई और भगवान के मस्तक पर भांग चंदन तथा त्रिपुंड का तिलक लगाया गया। जटाधारी बाबा महाकाल का श्रृंगार अत्यंत आकर्षक और भव्य स्वरूप में किया गया जिसने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

    श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को परंपरा के अनुसार वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से संपन्न इस विशेष अनुष्ठान का सनातन परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं और उन पर विशेष कृपा बरसाते हैं।

    भस्म अर्पित करने के बाद बाबा महाकाल को रजत निर्मित शेषनाग का मुकुट रजत की मुंडमाला रुद्राक्ष की मालाएं और आकर्षक आभूषणों से सजाया गया। इसके साथ ही मोगरा और गुलाब के सुगंधित पुष्पों की मालाओं से भगवान का अलौकिक श्रृंगार किया गया। अंत में फल और मिष्ठान का भोग अर्पित कर विश्व कल्याण और सुख समृद्धि की कामना की गई।

    भस्म आरती के दौरान देश और विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं और पूरा वातावरण शिव भक्ति में डूबा दिखाई दिया। भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन कर परिवार की सुख समृद्धि उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में मंगल की कामना की।

    महाकाल मंदिर की भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सनातन आस्था की जीवंत परंपरा है। प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली यह आरती भगवान शिव के महाकाल स्वरूप की महिमा का अद्भुत प्रतीक मानी जाती है। यही कारण है कि इस दिव्य आरती के दर्शन करने के लिए देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से बाबा महाकाल के दर्शन और भस्म आरती में शामिल होने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उनके जीवन में सुख शांति तथा समृद्धि का वास होता है।

  • महाकाल की भोर हुई दिव्य आराधना से आलोकित भस्म आरती में जटाधारी स्वरूप ने मोहा मन भांग चंदन और पुष्पों से हुआ राजसी श्रृंगार

    महाकाल की भोर हुई दिव्य आराधना से आलोकित भस्म आरती में जटाधारी स्वरूप ने मोहा मन भांग चंदन और पुष्पों से हुआ राजसी श्रृंगार


    मध्य प्रदेश । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का दिव्य और भव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना। ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर के पट खुलते ही वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक परंपराओं के बीच पूजन की शुरुआत हुई। सबसे पहले गर्भगृह में विराजमान सभी देवी देवताओं का विधि विधान से पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया और दूध दही घी शक्कर तथा फलों के रस से तैयार पंचामृत अर्पित कर विशेष स्नान कराया गया। प्रथम घंटाल बजने के साथ हरि ओम का जल अर्पित किया गया और पूरे मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण छा गया।

    कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को जटाधारी स्वरूप में अलंकृत किया गया। उनके मस्तक पर रजत चंद्र सुशोभित किया गया तथा भांग और चंदन अर्पित कर दिव्य तिलक लगाया गया। गुलाब की सुगंधित मालाओं से भगवान का श्रृंगार किया गया। रजत मुकुट और त्रिपुंड से सजे बाबा महाकाल का स्वरूप भक्तों को मंत्रमुग्ध करता रहा। इसके बाद परंपरा के अनुसार ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से संपन्न होने वाली यह प्राचीन परंपरा महाकाल मंदिर की सबसे विशेष धार्मिक विधियों में मानी जाती है।

    भस्म अर्पित करने के उपरांत भगवान महाकाल का राजा स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया। उन्हें भांग ड्रायफ्रूट सुगंधित पुष्प और आकर्षक आभूषण अर्पित किए गए। शेषनाग का रजत मुकुट रजत की मुंडमाला रुद्राक्ष की मालाएं और रंग बिरंगी पुष्पमालाओं से बाबा महाकाल का अलौकिक स्वरूप सजाया गया। अंत में फल और मिष्ठान का भोग अर्पित कर आरती संपन्न हुई।

    भस्म आरती में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालु तड़के ही मंदिर पहुंच गए थे। जैसे ही आरती शुरू हुई पूरा मंदिर हर हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोष से गूंज उठा। भक्तों ने श्रद्धा और भक्ति के साथ बाबा महाकाल के दर्शन कर सुख समृद्धि और मंगल की कामना की। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

    उज्जैन का श्री महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में विशेष स्थान रखता है और यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। सोमवार की इस दिव्य आराधना ने एक बार फिर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति से सराबोर कर दिया।

  • भगवान शिव को कैसे करें प्रसन्न जानिए पूजा के सही नियम अभिषेक की विधि और वे उपाय जिनसे दूर होती हैं जीवन की हर बाधाएं

    भगवान शिव को कैसे करें प्रसन्न जानिए पूजा के सही नियम अभिषेक की विधि और वे उपाय जिनसे दूर होती हैं जीवन की हर बाधाएं


    नई दिल्ली । भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है क्योंकि वे अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा और निष्कपट भक्ति से बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति पूरे विश्वास और पवित्र मन से भगवान शिव की आराधना करता है उसके जीवन से दुख संकट और बाधाएं धीरे धीरे दूर होने लगती हैं। विशेष रूप से श्रावण मास सोमवार प्रदोष व्रत और महाशिवरात्रि के दिन शिव पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इन दिनों विधि विधान से की गई पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने का आशीर्वाद मिलता है।

    शिव जी को प्रसन्न करने के लिए सबसे पहले मन और तन दोनों की शुद्धता आवश्यक मानी गई है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को साफ रखें। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए शिवलिंग पर सबसे पहले शुद्ध जल और गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद दूध दही घी शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करना शुभ माना जाता है। अंत में पुनः स्वच्छ जल चढ़ाकर भगवान शिव का श्रृंगार करें और दीपक तथा धूप जलाकर पूजा आरंभ करें।

    भगवान शिव को बेलपत्र सबसे अधिक प्रिय हैं। पूजा में तीन पत्तियों वाले ताजे और साफ बेलपत्र अर्पित करें। इसके साथ धतूरा भांग आक के फूल सफेद पुष्प चंदन और मौसमी फल भी अर्पित किए जा सकते हैं। मान्यता है कि बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। शिव पूजा के दौरान ओम नमः शिवाय मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जाप अत्यंत शुभ माना गया है। शिव चालीसा रुद्राष्टक और शिव तांडव स्तोत्र का पाठ भी विशेष पुण्य प्रदान करता है।

    भगवान शिव की पूजा करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते केतकी का फूल और हल्दी अर्पित नहीं करनी चाहिए। पूजा के दौरान क्रोध अहंकार ईर्ष्या और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए क्योंकि भगवान शिव भाव और भक्ति के प्रतीक हैं। केवल दिखावे के लिए की गई पूजा से अधिक महत्व सच्ची श्रद्धा और निष्कपट मन का होता है।

    महादेव को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय जरूरतमंद लोगों की सहायता करना भी माना जाता है। गरीबों को अन्न वस्त्र और आवश्यक सामग्री का दान करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। गौ सेवा वृक्षारोपण और जल संरक्षण जैसे पुण्य कार्य भी शिव आराधना का महत्वपूर्ण हिस्सा माने गए हैं। यदि संभव हो तो सोमवार का व्रत रखें और शाम के समय शिव मंदिर में दीप प्रज्ज्वलित कर भगवान शिव की आरती करें। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा सुख शांति और समृद्धि का वास होता है।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भगवान शिव की नियमित पूजा करने से चंद्रमा शनि राहु और केतु से जुड़े दोषों का प्रभाव भी कम हो सकता है। मानसिक तनाव भय रोग आर्थिक कठिनाइयों और पारिवारिक समस्याओं से राहत पाने के लिए भी शिव उपासना को अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि जो भक्त सच्चे मन से महादेव का स्मरण करता है उस पर भगवान शिव अपनी असीम कृपा बरसाते हैं और उसके जीवन को सुख समृद्धि सफलता तथा आध्यात्मिक उन्नति से भर देते हैं। इसलिए पूजा में सबसे बड़ा नियम केवल एक है सच्ची आस्था पवित्र मन और भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास।

  • भगवान शिव की पूजा में भूलकर भी न करें ये गलतियां सही नियमों से करें आराधना और पाएं सुख समृद्धि व मनचाहा आशीर्वाद

    भगवान शिव की पूजा में भूलकर भी न करें ये गलतियां सही नियमों से करें आराधना और पाएं सुख समृद्धि व मनचाहा आशीर्वाद


    नई दिल्ली । भगवान शिव को देवों के देव महादेव कहा जाता है। मान्यता है कि वे अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा और सरल भक्ति से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। विशेष रूप से श्रावण मास सोमवार प्रदोष व्रत और शिवरात्रि के अवसर पर शिव पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि भगवान शिव की पूजा विधि विधान और नियमों के साथ की जाए तो जीवन की अनेक परेशानियां दूर हो सकती हैं तथा सुख शांति समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    शिव पूजा की शुरुआत प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने से करनी चाहिए। पूजा स्थल को साफ और पवित्र रखें तथा भगवान शिव का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प लें। शिवलिंग पर सबसे पहले शुद्ध जल और फिर गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद दूध दही शहद घी और शक्कर से पंचामृत अभिषेक किया जा सकता है। अंत में पुनः स्वच्छ जल से अभिषेक करना शुभ माना जाता है।

    भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय हैं। पूजा के दौरान तीन पत्तियों वाले ताजे और साफ बेलपत्र अर्पित करें। बेलपत्र पर किसी प्रकार का कीड़ा या कटाव नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही धतूरा भांग आक के फूल सफेद चंदन सफेद पुष्प अक्षत और मौसमी फल भी अर्पित किए जा सकते हैं। पूजा के दौरान ओम नमः शिवाय और महामृत्युंजय मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। शिव चालीसा रुद्राष्टक और शिव तांडव स्तोत्र का पाठ भी विशेष पुण्य प्रदान करता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिव पूजा में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। भगवान शिव को तुलसी के पत्ते केतकी का फूल और हल्दी अर्पित नहीं करनी चाहिए। शिवलिंग पर चढ़ाए गए जल को पैरों से स्पर्श नहीं करना चाहिए और पूजा के समय मन में किसी प्रकार का क्रोध अहंकार या नकारात्मक विचार नहीं रखना चाहिए। पूजा पूरी श्रद्धा और शांत मन से करनी चाहिए क्योंकि भगवान शिव भाव के भूखे माने जाते हैं।

    यदि संभव हो तो सोमवार का व्रत रखें और जरूरतमंद लोगों को अन्न वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करें। दान और सेवा को भी शिव भक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। शाम के समय शिव मंदिर में दीपक जलाकर आरती करने से घर में सुख शांति और सकारात्मक वातावरण बना रहता है। परिवार के साथ सामूहिक रूप से भगवान शिव का स्मरण करने से आपसी प्रेम और विश्वास भी मजबूत होता है।

    ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिव पूजा करने से ग्रह दोषों का प्रभाव कम हो सकता है। विशेष रूप से चंद्रमा राहु केतु और शनि से जुड़ी समस्याओं में भगवान शिव की आराधना लाभकारी मानी जाती है। साथ ही मानसिक तनाव भय रोग और जीवन की बाधाओं से मुक्ति पाने के लिए भी शिव उपासना को अत्यंत प्रभावी बताया गया है।

    भगवान शिव की पूजा में सबसे महत्वपूर्ण नियम सच्ची श्रद्धा और निष्कपट भक्ति है। यदि भक्त पूरी आस्था और विश्वास के साथ महादेव का स्मरण करता है तो वे उसकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं और जीवन में सुख समृद्धि सफलता तथा आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

  • सावन में शिवमय होगी काशी, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, नेपाल समेत कई देशों से आएंगे श्रद्धालु

    सावन में शिवमय होगी काशी, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, नेपाल समेत कई देशों से आएंगे श्रद्धालु


    वाराणसी। सावन मास की शुरुआत के साथ ही बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी पूरी तरह शिवभक्ति में डूब जाएगी। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक और विशेष अनुष्ठानों के लिए देश ही नहीं, बल्कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, दुबई और नेपाल सहित कई देशों से भी श्रद्धालुओं के आने की तैयारी है। इस वर्ष सावन 30 जुलाई से प्रारंभ हो रहा है।

    सावन के दौरान श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के अलावा महामृत्युंजय महादेव, मार्कंडेय महादेव, गौरी केदारेश्वर, तिलभांडेश्वर, ओंकारेश्वर, शूलटंकेश्वर और रामेश्वर महादेव सहित प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महारुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र जाप जैसे धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहले से तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

    आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और नेपाल से पांच-पांच परिवार विशेष रूप से काशी पहुंचेंगे। ये श्रद्धालु जलाभिषेक, महारुद्राभिषेक और धार्मिक कथाओं का श्रवण कर भगवान शिव की आराधना करेंगे।

    अनुष्ठानों के संचालन के लिए पूर्वांचल के जिलों के साथ-साथ मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों से वैदिक ब्राह्मणों को आमंत्रित किया जा रहा है। वहीं काशी के कई विद्वान ब्राह्मण भी मध्य प्रदेश के अमरकंटक और महाराष्ट्र सहित अन्य स्थानों पर सावन के धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने जाएंगे।

    सावन को देखते हुए प्रमुख शिव मंदिरों में सुरक्षा और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मंदिरों के आसपास बैरिकेडिंग की जा रही है, जबकि पूजन सामग्री और रुद्राभिषेक की बुकिंग भी शुरू हो चुकी है। यजमान अपने-अपने वैदिक ब्राह्मणों से अनुष्ठानों की तिथियां तय कर रहे हैं।

    सावन भर शहर में श्रीशिव महापुराण, श्रीमद्भागवत, श्रीविष्णु पुराण और रामचरितमानस कथा जैसे धार्मिक आयोजनों की भी धूम रहेगी। विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं इन कार्यक्रमों का आयोजन करेंगी। मारवाड़ी समाज की ओर से 17 अगस्त से सप्ताहभर चलने वाली श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन भी प्रस्तावित है, जिसमें प्रख्यात भागवत वक्ता श्रीकांत बालव्यास काशी प्रवचन देंगे।

    पूरे सावन मास में शिवालयों में रुद्राभिषेक, महारुद्र, सप्तचंडी यज्ञ, रुद्रचंडी अनुष्ठान और महामृत्युंजय मंत्र जाप जैसे धार्मिक कार्यक्रम होंगे। श्रद्धालु सोमवार व्रत, कांवड़ यात्रा, भगवान शिव का जलाभिषेक तथा घरों में ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप और लेखन कर भगवान भोलेनाथ की आराधना करेंगे।