Tag: Lord Vishnu Puja

  • गुरुवार पूजा के खास नियम: पीले रंग से लेकर प्रसाद तक जानें क्या करें और किन बातों का रखें विशेष ध्यान

    गुरुवार पूजा के खास नियम: पीले रंग से लेकर प्रसाद तक जानें क्या करें और किन बातों का रखें विशेष ध्यान


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी देवता को समर्पित माना जाता है। गुरुवार का दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि विधान से पूजा और व्रत करने पर जीवन में सुख समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है। गुरुवार को ज्ञान बुद्धि धर्म और वैभव से भी जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु की कृपा मिलने से परिवार में खुशहाली बनी रहती है और जीवन की कई परेशानियों से मुक्ति मिल सकती है।

    गुरुवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ और स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए। इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व माना जाता है इसलिए संभव हो तो पीले वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। पूजा स्थल को साफ करने के बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर उन्हें श्रद्धा से प्रणाम करना चाहिए। इसके बाद पीले फूल पीला चंदन हल्दी और पीले रंग के प्रसाद से भगवान विष्णु की पूजा की जा सकती है।

    पूजा के दौरान भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है। हालांकि तुलसी के पत्ते तोड़ने से जुड़े नियमों का भी ध्यान रखना चाहिए। पूजा के समय दीपक जलाकर भगवान विष्णु का स्मरण करना चाहिए और विष्णु मंत्रों का जाप किया जा सकता है। कई श्रद्धालु गुरुवार के दिन विष्णु सहस्रनाम या भगवान विष्णु की कथा का पाठ भी करते हैं।

    गुरुवार का व्रत रखने वाले लोगों के लिए सात्विक भोजन का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन मन और विचारों को शांत रखते हुए किसी के प्रति कटु शब्दों का प्रयोग करने से बचना चाहिए। मान्यता है कि पूजा केवल धार्मिक क्रिया नहीं बल्कि अच्छे व्यवहार और सकारात्मक विचारों से भी जुड़ी होती है। जरूरतमंद लोगों की सहायता करना और दान पुण्य करना भी इस दिन शुभ माना जाता है।

    देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान और धर्म का कारक माना जाता है। इसलिए गुरुवार के दिन विद्यार्थियों और ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए विशेष पूजा और प्रार्थना का महत्व बताया गया है। इस दिन पीली वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है। श्रद्धा के अनुसार चने की दाल हल्दी पीले वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान किया जा सकता है।

    गुरुवार की पूजा में स्वच्छता और श्रद्धा को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। पूजा करते समय मन को एकाग्र रखने और दिखावे से दूर रहकर सच्चे भाव से भगवान का स्मरण करने की परंपरा है। परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर भगवान विष्णु की आरती करने से घर का वातावरण भी सकारात्मक और भक्तिमय बनता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार के दिन किए गए अच्छे कार्यों का विशेष महत्व होता है। इसलिए इस दिन पूजा पाठ के साथ जरूरतमंदों की मदद और बड़ों का सम्मान करना भी जीवन में सकारात्मकता बढ़ाने वाला माना जाता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान विष्णु तथा देवगुरु बृहस्पति की आराधना करने से मन को शांति और जीवन को नई सकारात्मक ऊर्जा मिल सकती है।

  • गुरुवार पूजा के खास नियम: पीले रंग से लेकर प्रसाद तक जानें क्या करें और किन बातों का रखें विशेष ध्यान

    गुरुवार पूजा के खास नियम: पीले रंग से लेकर प्रसाद तक जानें क्या करें और किन बातों का रखें विशेष ध्यान


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी देवता को समर्पित माना जाता है। गुरुवार का दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि विधान से पूजा और व्रत करने पर जीवन में सुख समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है। गुरुवार को ज्ञान बुद्धि धर्म और वैभव से भी जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु की कृपा मिलने से परिवार में खुशहाली बनी रहती है और जीवन की कई परेशानियों से मुक्ति मिल सकती है।

    गुरुवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ और स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए। इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व माना जाता है इसलिए संभव हो तो पीले वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। पूजा स्थल को साफ करने के बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर उन्हें श्रद्धा से प्रणाम करना चाहिए। इसके बाद पीले फूल पीला चंदन हल्दी और पीले रंग के प्रसाद से भगवान विष्णु की पूजा की जा सकती है।

    पूजा के दौरान भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है। हालांकि तुलसी के पत्ते तोड़ने से जुड़े नियमों का भी ध्यान रखना चाहिए। पूजा के समय दीपक जलाकर भगवान विष्णु का स्मरण करना चाहिए और विष्णु मंत्रों का जाप किया जा सकता है। कई श्रद्धालु गुरुवार के दिन विष्णु सहस्रनाम या भगवान विष्णु की कथा का पाठ भी करते हैं।

    गुरुवार का व्रत रखने वाले लोगों के लिए सात्विक भोजन का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन मन और विचारों को शांत रखते हुए किसी के प्रति कटु शब्दों का प्रयोग करने से बचना चाहिए। मान्यता है कि पूजा केवल धार्मिक क्रिया नहीं बल्कि अच्छे व्यवहार और सकारात्मक विचारों से भी जुड़ी होती है। जरूरतमंद लोगों की सहायता करना और दान पुण्य करना भी इस दिन शुभ माना जाता है।

    देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान और धर्म का कारक माना जाता है। इसलिए गुरुवार के दिन विद्यार्थियों और ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए विशेष पूजा और प्रार्थना का महत्व बताया गया है। इस दिन पीली वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है। श्रद्धा के अनुसार चने की दाल हल्दी पीले वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान किया जा सकता है।

    गुरुवार की पूजा में स्वच्छता और श्रद्धा को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। पूजा करते समय मन को एकाग्र रखने और दिखावे से दूर रहकर सच्चे भाव से भगवान का स्मरण करने की परंपरा है। परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर भगवान विष्णु की आरती करने से घर का वातावरण भी सकारात्मक और भक्तिमय बनता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार के दिन किए गए अच्छे कार्यों का विशेष महत्व होता है। इसलिए इस दिन पूजा पाठ के साथ जरूरतमंदों की मदद और बड़ों का सम्मान करना भी जीवन में सकारात्मकता बढ़ाने वाला माना जाता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान विष्णु तथा देवगुरु बृहस्पति की आराधना करने से मन को शांति और जीवन को नई सकारात्मक ऊर्जा मिल सकती है।

  • गुरुवार का व्रत बदल सकता है जीवन की दिशा श्रद्धा से करें पूजा जानें सही विधि पूजा सामग्री और जरूरी नियम

    गुरुवार का व्रत बदल सकता है जीवन की दिशा श्रद्धा से करें पूजा जानें सही विधि पूजा सामग्री और जरूरी नियम


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार के दिन व्रत और विधि विधान से पूजा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख समृद्धि बनी रहती है। बृहस्पति ग्रह को ज्ञान विवाह संतान धन और सौभाग्य का कारक माना जाता है। यही वजह है कि कई लोग विवाह में आ रही बाधा दूर करने आर्थिक स्थिति मजबूत करने और परिवार में सुख शांति बनाए रखने के लिए गुरुवार का व्रत रखते हैं। हालांकि व्रत और पूजा से जुड़े ये नियम धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं।

    गुरुवार का व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और साफ पीले या हल्के रंग के वस्त्र पहनने की परंपरा है। इसके बाद पूजा स्थल की साफ सफाई करके भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करनी चाहिए। पूजा के दौरान भगवान विष्णु के साथ देवगुरु बृहस्पति का ध्यान किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु को पीला रंग प्रिय माना जाता है इसलिए पूजा में पीले फूल पीले फल चने की दाल और हल्दी जैसी वस्तुओं का इस्तेमाल किया जाता है।

    पूजा शुरू करने से पहले श्रद्धालु को भगवान विष्णु और बृहस्पति देव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु को जल अर्पित करके पीले फूल चंदन अक्षत और नैवेद्य अर्पित किया जा सकता है। कई जगहों पर केले के पेड़ की भी पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि केले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास माना जाता है। यदि घर में पूजा की जा रही हो तो केले के पेड़ की उपलब्धता के अनुसार पूजा की जा सकती है।

    गुरुवार व्रत में भगवान विष्णु की पूजा के दौरान विष्णु सहस्रनाम या विष्णु मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा बृहस्पति देव की कथा सुनना या पढ़ना भी व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पूजा के बाद भगवान की आरती करनी चाहिए और परिवार की सुख शांति तथा समृद्धि के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को पीले रंग की वस्तु भोजन चने की दाल या अन्य उपयोगी सामग्री का दान भी कर सकते हैं।

    गुरुवार के व्रत में खानपान को लेकर भी कई धार्मिक मान्यताएं हैं। कुछ लोग पूरे दिन फलाहार करते हैं जबकि कुछ लोग दिन में एक बार सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी स्वास्थ्य स्थिति और क्षमता के अनुसार ही उपवास करना चाहिए। पूजा और व्रत का उद्देश्य श्रद्धा और संयम माना जाता है इसलिए किसी भी तरह की शारीरिक परेशानी होने पर कठोर उपवास करने से बचना उचित है।

    गुरुवार के दिन कुछ कार्यों को लेकर भी धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। कई परंपराओं में इस दिन बाल और नाखून काटने तथा कुछ विशेष घरेलू कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि अलग अलग क्षेत्रों और परिवारों में इन नियमों को लेकर मान्यताएं अलग हो सकती हैं। इसलिए व्रत करने वाले व्यक्ति को अपने परिवार की परंपरा और धार्मिक आस्था के अनुसार नियमों का पालन करना चाहिए।

    शाम के समय भगवान विष्णु की दोबारा पूजा करके आरती की जा सकती है। इसके बाद व्रत रखने वाला व्यक्ति फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण कर सकता है। कई श्रद्धालु लगातार कई गुरुवार तक व्रत रखने का संकल्प लेते हैं और निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद उद्यापन करते हैं। उद्यापन की विधि भी अलग अलग परंपराओं में अलग हो सकती है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार गुरुवार का व्रत श्रद्धा संयम और सकारात्मक सोच के साथ किया जाए तो मन को शांति मिलती है। भगवान विष्णु की भक्ति के साथ जरूरतमंदों की सहायता और दान को भी इस दिन विशेष महत्व दिया जाता है। यही वजह है कि गुरुवार का व्रत केवल पूजा पाठ तक सीमित नहीं माना जाता बल्कि सेवा दान और सद्भाव की भावना से जोड़कर भी देखा जाता है।

  • गुरुवार पूजा का महत्व इस आसान विधि से करें भगवान विष्णु की आराधना धन वैभव और सौभाग्य का मिलेगा आशीर्वाद

    गुरुवार पूजा का महत्व इस आसान विधि से करें भगवान विष्णु की आराधना धन वैभव और सौभाग्य का मिलेगा आशीर्वाद


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। यह दिन ज्ञान समृद्धि सुख शांति और वैवाहिक जीवन में खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस दिन पूरी श्रद्धा और नियम के साथ भगवान विष्णु की पूजा करते हैं उनके जीवन की अनेक परेशानियां दूर होती हैं और परिवार में सुख समृद्धि का वास होता है। गुरु ग्रह को मजबूत करने के लिए भी गुरुवार का व्रत और पूजा अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।

    गुरुवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद पीले या साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें और भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। भगवान को पीले रंग के फूल अर्पित करें और हल्दी चंदन का तिलक लगाएं। पूजा में पीले फल केले चने की दाल बेसन के लड्डू केसर युक्त मिठाई और तुलसी दल का विशेष महत्व माना गया है। भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है इसलिए बिना तुलसी के पूजा अधूरी मानी जाती है।

    पूजा के दौरान घी का दीपक जलाएं और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें। विष्णु सहस्रनाम अथवा श्री विष्णु चालीसा का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो देवगुरु बृहस्पति के बीज मंत्र का जाप भी करें। पूजा के बाद भगवान से परिवार की सुख समृद्धि अच्छे स्वास्थ्य और सफलता की प्रार्थना करें।

    गुरुवार के दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु सामान्यतः केवल एक समय सात्विक भोजन करते हैं। इस दिन पीले रंग के भोजन का विशेष महत्व माना गया है। केले चने की दाल बेसन से बने व्यंजन और केसर युक्त प्रसाद का सेवन शुभ माना जाता है। कई लोग इस दिन नमक का सेवन भी नहीं करते और पूरी श्रद्धा के साथ व्रत का पालन करते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार के दिन कुछ कार्यों से बचना चाहिए। इस दिन बाल और नाखून नहीं काटने चाहिए। महिलाओं को बाल धोने से भी परहेज करने की सलाह दी जाती है। किसी का अपमान करना झूठ बोलना या क्रोध करना भी अशुभ माना जाता है। गरीबों और जरूरतमंदों को पीले वस्त्र चने की दाल हल्दी या केले का दान करने से भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

    मान्यता है कि गुरुवार के दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु की आराधना करने वाले भक्तों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। आर्थिक परेशानियां धीरे धीरे समाप्त होती हैं और विवाह शिक्षा करियर तथा पारिवारिक जीवन में शुभ परिणाम प्राप्त होने लगते हैं। श्रद्धा विश्वास और नियम के साथ की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में सुख शांति समृद्धि और सौभाग्य का मार्ग प्रशस्त करती है।

  • भगवान विष्णु का गुरुवार व्रत कैसे रखें जानिए संपूर्ण व्रत विधि पूजा के नियम और सुख समृद्धि पाने के अचूक उपाय

    भगवान विष्णु का गुरुवार व्रत कैसे रखें जानिए संपूर्ण व्रत विधि पूजा के नियम और सुख समृद्धि पाने के अचूक उपाय


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में भगवान विष्णु को सृष्टि के पालनहार और जगत के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित होता है। इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत तथा पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि धन वैभव और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ऐसी मान्यता है कि श्रीहरि की कृपा से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं परिवार में खुशहाली आती है और करियर तथा व्यापार में सफलता के नए मार्ग खुलते हैं। जिन लोगों की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर होता है उनके लिए भी यह व्रत अत्यंत लाभकारी माना गया है।

    व्रत की शुरुआत प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने से करनी चाहिए। स्नान के बाद स्वच्छ और संभव हो तो पीले रंग के वस्त्र धारण करें। घर के पूजा स्थल की साफ सफाई कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद जल गंगाजल अक्षत हल्दी चंदन पीले पुष्प तुलसी दल और पीले फल अर्पित करें। भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय मानी जाती है इसलिए पूजा में तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं। घी का दीपक जलाकर धूप अर्पित करें और श्रद्धा के साथ विष्णु सहस्रनाम विष्णु चालीसा या ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। पूजा के अंत में आरती कर परिवार की सुख समृद्धि और मंगल की कामना करें।

    व्रत के दौरान सात्विक आहार का विशेष महत्व होता है। कई श्रद्धालु पूरे दिन निर्जल या फलाहार व्रत रखते हैं जबकि कुछ लोग केवल एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। भोजन में चने की दाल बेसन से बने व्यंजन पीले चावल केला केसर युक्त खीर या अन्य सात्विक पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। इस दिन मांस मदिरा लहसुन प्याज और तामसिक भोजन का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है। साथ ही क्रोध झूठ और कटु वचन से भी बचने की सलाह दी जाती है क्योंकि भगवान विष्णु शांत और सरल स्वभाव के प्रतीक माने जाते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार के दिन दान का भी विशेष महत्व है। इस दिन पीले वस्त्र हल्दी चने की दाल केला केसर या पीली मिठाई का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना और गौ सेवा करना भी पुण्यदायी माना गया है। कहा जाता है कि दान और सेवा से भगवान विष्णु शीघ्र प्रसन्न होते हैं और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होने लगती हैं।

    व्रत के दौरान कुछ नियमों का पालन करना भी आवश्यक माना गया है। इस दिन बाल कटवाने नाखून काटने और अनावश्यक विवाद से बचना चाहिए। घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखें और किसी का अपमान न करें। यदि संभव हो तो धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें और अधिक से अधिक समय भगवान के स्मरण में बिताएं। विवाहित दंपति यदि श्रद्धापूर्वक यह व्रत करते हैं तो दांपत्य जीवन में मधुरता बढ़ती है और परिवार में सुख शांति बनी रहती है।

    मान्यता है कि जो श्रद्धालु लगातार श्रद्धा विश्वास और नियमों के साथ भगवान विष्णु का गुरुवार व्रत करते हैं उन्हें श्रीहरि की विशेष कृपा प्राप्त होती है। उनके जीवन से आर्थिक संकट दूर होते हैं मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और घर में सुख समृद्धि तथा वैभव का स्थायी वास होता है। इसलिए यदि आप अपने जीवन में सफलता शांति और समृद्धि चाहते हैं तो भगवान विष्णु के व्रत को पूरी श्रद्धा और विधि विधान के साथ अवश्य करें।

  • गुरुवार उपाय: केले के पेड़ में चढ़ाएं ये खास चीज, बदल सकती है किस्मत

    गुरुवार उपाय: केले के पेड़ में चढ़ाएं ये खास चीज, बदल सकती है किस्मत


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन बेहद खास माना जाता है। यह दिन Lord Vishnu और देवगुरु Brihaspati को समर्पित होता है। मान्यता है कि यदि कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर हो या जीवन में बार-बार बाधाएं आ रही हों, तो गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा करना बेहद फलदायी होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, केले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास माना जाता है। इसलिए इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर न केवल गुरु ग्रह मजबूत होता है, बल्कि घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।

    गुरुवार को केले के पेड़ में क्या चढ़ाएं?
    अगर आप किस्मत का साथ पाना चाहते हैं, तो गुरुवार के दिन केले के पेड़ में जल के साथ गुड़ और चने की दाल जरूर चढ़ाएं। माना जाता है कि यह दोनों चीजें भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं।
    इसके साथ ही हल्दी मिला जल केले के पेड़ की जड़ में अर्पित करने से घर में धन-धान्य और खुशहाली का आगमन होता है। यह उपाय सोई हुई किस्मत को जगाने वाला माना जाता है।

     पूजा की सही विध
    सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ (पीले) वस्त्र धारण करें
    तांबे या पीतल के लोटे में जल लें
    उसमें हल्दी, चने की दाल और गुड़ मिलाएं
    केले के पेड़ की जड़ में यह जल अर्पित करें
    जल चढ़ाते समय “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का जाप करें
    पेड़ के पास घी का दीपक जलाएं और परिक्रमा करें

    क्यों है यह उपाय खास?
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह उपाय गुरु ग्रह को मजबूत करता है, जिससे व्यक्ति को भाग्य का साथ मिलने लगता है। साथ ही, आर्थिक स्थिति में सुधार, करियर में तरक्की और पारिवारिक सुख-शांति के योग बनते हैं।

     अगर आप जीवन में रुकावटों से परेशान हैं, तो इस सरल गुरुवार उपाय को अपनाकर सकारात्मक बदलाव महसूस कर सकते हैं।

  • Vijaya Ekadashi 2026: इस व्रत से मिलती है शत्रुओं पर जीत और सफलता, फरवरी में जानें शुभ मुहूर्त व पारण का सही समय

    Vijaya Ekadashi 2026: इस व्रत से मिलती है शत्रुओं पर जीत और सफलता, फरवरी में जानें शुभ मुहूर्त व पारण का सही समय

    नई दिल्ली। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘विजया एकादशी’ के नाम से जाना जाता है। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, यह एकादशी साधक को कठिन परिस्थितियों, शत्रुओं और मानसिक बाधाओं पर विजय दिलाने वाली मानी गई है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन भगवान विष्णु की पूरी श्रद्धा के साथ उपासना करता है, उसे कार्यों में सिद्धि और अटके हुए कामों में सफलता प्राप्त होती है।

    विजया एकादशी का महत्व स्वयं भगवान श्रीराम से जुड़ा है। कहा जाता है कि जब प्रभु श्रीराम माता सीता की खोज में समुद्र तट पर पहुँचे और लंका पर चढ़ाई की चुनौती सामने थी, तब मुनि वकदालभ्य के निर्देश पर उन्होंने अपनी सेना सहित विजया एकादशी का व्रत किया था। इस व्रत के पुण्य प्रताप से ही उन्हें समुद्र पार करने और रावण पर विजय पाने में सफलता मिली। तभी से इसे ‘जीत’ का आशीर्वाद देने वाली एकादशी कहा जाता है।

    विजया एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
    पंचांग के अनुसार, इस वर्ष एकादशी तिथि दो दिनों तक व्याप्त रहेगी, लेकिन उदयातिथि की प्रधानता के कारण व्रत 13 फरवरी 2026 को रखा जाएगा।

    एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 फरवरी 2026, दोपहर 12:22 बजे।

    एकादशी तिथि समाप्त: 13 फरवरी 2026, दोपहर 02:25 बजे।

    व्रत की तारीख: 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार)।

    पूजा के विशेष मुहूर्त:

    ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:18 से 06:10 बजे तक।

    अमृत काल (सर्वोत्तम): सुबह 09:08 से 10:54 बजे तक।

    विजय मुहूर्त: दोपहर 02:27 से 03:11 बजे तक।

    पारण का समय और नियम
    एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब इसका पारण (व्रत खोलना) शुभ समय और विधि के साथ किया जाए। विजया एकादशी का पारण 14 फरवरी 2026 को होगा।

    पारण समय: सुबह 07:00 बजे से 09:14 बजे तक।

    विशेष सावधानी: चूंकि हरि वासर सुबह 08:20 बजे समाप्त हो रहा है, इसलिए पारण के लिए सुबह 08:21 से 09:14 के बीच का समय सबसे उत्तम रहेगा।

    इस दिन साधक को पीले वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु को पीले फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करना चाहिए। व्रत के दौरान सात्विकता बनाए रखें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का निरंतर जाप करें।

    विजया एकादशी 2026 का व्रत 13 फरवरी को रखा जाएगा। यह व्रत शत्रुओं पर विजय और कार्यों में सफलता दिलाने वाला माना जाता है। भगवान राम ने भी लंका विजय के लिए यह व्रत किया था। 14 फरवरी की सुबह 07:00 से 09:14 के बीच व्रत का पारण करना शुभ रहेगा।

  • 31 दिसंबर को पुत्रदा एकादशी का विशेष व्रत; अर्धरात्रि के बाद द्वादशी का आगमन, वृषभ राशि में चंद्रमा देंगे शुभ फल

    31 दिसंबर को पुत्रदा एकादशी का विशेष व्रत; अर्धरात्रि के बाद द्वादशी का आगमन, वृषभ राशि में चंद्रमा देंगे शुभ फल


    नई दिल्ली/काशी: वर्ष 2025 का समापन एक अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक संयोग के साथ हो रहा है। आज, बुधवार 31 दिसंबर 2025 को पौष मास के शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व है, क्योंकि इसे संतान प्राप्ति, संतान की उन्नति और पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए अमोघ माना जाता है। वैष्णव परंपरा के अनुयायी आज पूरी निष्ठा के साथ भगवान विष्णु की आराधना कर रहे हैं।

    तिथि और नक्षत्रों की अनूठी गणना

    पंचांग के अनुसार, इस वर्ष की अंतिम एकादशी कई मायनों में खास है। आज एकादशी तिथि का क्षय हो रहा है, जिसके परिणामस्वरूप अर्धरात्रि के बाद द्वादशी तिथि का आरंभ हो जाएगा। ज्योतिषविदों के अनुसार, तिथि का यह परिवर्तन आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि करने वाला होता है।तिथि विवरण: एकादशी तिथि आज दिन भर व्याप्त रहेगी। रात 1 बजकर 48 मिनट पर द्वादशी तिथि का आगमन होगा, जो अगले दिन तक प्रभावी रहेगी।नक्षत्र और योग: आज रात 1 बजकर 30 मिनट तक कृतिका नक्षत्र रहेगा, जिसके बाद चंद्रमा के प्रिय रोहिणी नक्षत्र का आरंभ होगा। वहीं, योग की बात करें तो रात 9 बजकर 13 मिनट तक साध्य योग रहेगा, जो शुभ कार्यों की सिद्धि के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इसके उपरांत शुभ योग प्रारंभ होगा।

    चंद्रमा का गोचर: वृषभ राशि में उच्च के होंगे चंद्र

    आज ज्योतिषीय दृष्टि से एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। सुबह 9 बजकर 23 मिनट तक चंद्रमा मेष राशि में रहेंगे, लेकिन इसके तुरंत बाद वे अपनी उच्च राशि वृषभ में प्रवेश कर जाएंगे। चंद्रमा का अपनी उच्च राशि में होना मन की एकाग्रता, मानसिक शांति और भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि का कारक बनता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह स्थिति संकल्प शक्ति को मजबूत करने वाली होगी।

    आज के शुभ और अशुभ मुहूर्त Time Table

    किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या नए कार्य की शुरुआत के लिए सही समय का चयन करना अनिवार्य है।
    शुभ मुहूर्त Auspicious Timings:ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:24 से 6:19 तक ईश्वर चिंतन के लिए सर्वश्रेष्ठ
    विजय मुहूर्त: दोपहर 2:08 से 2:49 तक किसी भी कार्य में सफलता हेतु निशिथ काल: रात 11:57 से 12:52 तक तांत्रिक पूजा और विशेष जप हेतु  गोधूलि बेला: शाम 5:32 से 6:00 तक आरती और दीपदान हेतु  अशुभ मुहूर्त Inauspicious Timings: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल जैसे समय में महत्वपूर्ण निर्णय लेने या नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए:राहुकाल: दोपहर 12:00 से 1:30 तक  गुलिक काल: सुबह 10:30 से 12:00 तक  यमगंड: सुबह 7:30 से 9:00 तक

    पुत्रदा एकादशी का महत्व और उपाय

    पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत विशेष रूप से उन दंपत्तियों के लिए फलदायी माना गया है जो संतान सुख की कामना रखते हैं। भगवान विष्णु के ‘नारायण’ स्वरूप की पूजा आज के दिन की जाती है।विशेष उपाय: आज बुधवार का दिन है इसलिए भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान गणेश की पूजा का भी विधान है। आज ‘श्री गणेश अथर्वशीर्ष’ का पाठ करना अत्यंत लाभकारी रहेगा। यह उपाय न केवल विघ्नों को दूर करता है बल्कि साल के अंतिम दिन भविष्य के लिए मानसिक स्पष्टता और कार्यों में सफलता सुनिश्चित करता है।सावधानी: पंचांग की गणना स्थान के अनुसार कुछ मिनटों के अंतर पर आधारित हो सकती है।अतः किसी भी बड़े अनुष्ठान से पूर्व अपने स्थानीय पंडित या पंचांग का परामर्श अवश्य लें।