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  • गुरुवार उपाय: केले के पेड़ में चढ़ाएं ये खास चीज, बदल सकती है किस्मत

    गुरुवार उपाय: केले के पेड़ में चढ़ाएं ये खास चीज, बदल सकती है किस्मत


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन बेहद खास माना जाता है। यह दिन Lord Vishnu और देवगुरु Brihaspati को समर्पित होता है। मान्यता है कि यदि कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर हो या जीवन में बार-बार बाधाएं आ रही हों, तो गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा करना बेहद फलदायी होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, केले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास माना जाता है। इसलिए इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर न केवल गुरु ग्रह मजबूत होता है, बल्कि घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।

    गुरुवार को केले के पेड़ में क्या चढ़ाएं?
    अगर आप किस्मत का साथ पाना चाहते हैं, तो गुरुवार के दिन केले के पेड़ में जल के साथ गुड़ और चने की दाल जरूर चढ़ाएं। माना जाता है कि यह दोनों चीजें भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं।
    इसके साथ ही हल्दी मिला जल केले के पेड़ की जड़ में अर्पित करने से घर में धन-धान्य और खुशहाली का आगमन होता है। यह उपाय सोई हुई किस्मत को जगाने वाला माना जाता है।

     पूजा की सही विध
    सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ (पीले) वस्त्र धारण करें
    तांबे या पीतल के लोटे में जल लें
    उसमें हल्दी, चने की दाल और गुड़ मिलाएं
    केले के पेड़ की जड़ में यह जल अर्पित करें
    जल चढ़ाते समय “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का जाप करें
    पेड़ के पास घी का दीपक जलाएं और परिक्रमा करें

    क्यों है यह उपाय खास?
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह उपाय गुरु ग्रह को मजबूत करता है, जिससे व्यक्ति को भाग्य का साथ मिलने लगता है। साथ ही, आर्थिक स्थिति में सुधार, करियर में तरक्की और पारिवारिक सुख-शांति के योग बनते हैं।

     अगर आप जीवन में रुकावटों से परेशान हैं, तो इस सरल गुरुवार उपाय को अपनाकर सकारात्मक बदलाव महसूस कर सकते हैं।

  • Vijaya Ekadashi 2026: इस व्रत से मिलती है शत्रुओं पर जीत और सफलता, फरवरी में जानें शुभ मुहूर्त व पारण का सही समय

    Vijaya Ekadashi 2026: इस व्रत से मिलती है शत्रुओं पर जीत और सफलता, फरवरी में जानें शुभ मुहूर्त व पारण का सही समय

    नई दिल्ली। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘विजया एकादशी’ के नाम से जाना जाता है। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, यह एकादशी साधक को कठिन परिस्थितियों, शत्रुओं और मानसिक बाधाओं पर विजय दिलाने वाली मानी गई है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन भगवान विष्णु की पूरी श्रद्धा के साथ उपासना करता है, उसे कार्यों में सिद्धि और अटके हुए कामों में सफलता प्राप्त होती है।

    विजया एकादशी का महत्व स्वयं भगवान श्रीराम से जुड़ा है। कहा जाता है कि जब प्रभु श्रीराम माता सीता की खोज में समुद्र तट पर पहुँचे और लंका पर चढ़ाई की चुनौती सामने थी, तब मुनि वकदालभ्य के निर्देश पर उन्होंने अपनी सेना सहित विजया एकादशी का व्रत किया था। इस व्रत के पुण्य प्रताप से ही उन्हें समुद्र पार करने और रावण पर विजय पाने में सफलता मिली। तभी से इसे ‘जीत’ का आशीर्वाद देने वाली एकादशी कहा जाता है।

    विजया एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
    पंचांग के अनुसार, इस वर्ष एकादशी तिथि दो दिनों तक व्याप्त रहेगी, लेकिन उदयातिथि की प्रधानता के कारण व्रत 13 फरवरी 2026 को रखा जाएगा।

    एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 फरवरी 2026, दोपहर 12:22 बजे।

    एकादशी तिथि समाप्त: 13 फरवरी 2026, दोपहर 02:25 बजे।

    व्रत की तारीख: 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार)।

    पूजा के विशेष मुहूर्त:

    ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:18 से 06:10 बजे तक।

    अमृत काल (सर्वोत्तम): सुबह 09:08 से 10:54 बजे तक।

    विजय मुहूर्त: दोपहर 02:27 से 03:11 बजे तक।

    पारण का समय और नियम
    एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब इसका पारण (व्रत खोलना) शुभ समय और विधि के साथ किया जाए। विजया एकादशी का पारण 14 फरवरी 2026 को होगा।

    पारण समय: सुबह 07:00 बजे से 09:14 बजे तक।

    विशेष सावधानी: चूंकि हरि वासर सुबह 08:20 बजे समाप्त हो रहा है, इसलिए पारण के लिए सुबह 08:21 से 09:14 के बीच का समय सबसे उत्तम रहेगा।

    इस दिन साधक को पीले वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु को पीले फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करना चाहिए। व्रत के दौरान सात्विकता बनाए रखें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का निरंतर जाप करें।

    विजया एकादशी 2026 का व्रत 13 फरवरी को रखा जाएगा। यह व्रत शत्रुओं पर विजय और कार्यों में सफलता दिलाने वाला माना जाता है। भगवान राम ने भी लंका विजय के लिए यह व्रत किया था। 14 फरवरी की सुबह 07:00 से 09:14 के बीच व्रत का पारण करना शुभ रहेगा।

  • 31 दिसंबर को पुत्रदा एकादशी का विशेष व्रत; अर्धरात्रि के बाद द्वादशी का आगमन, वृषभ राशि में चंद्रमा देंगे शुभ फल

    31 दिसंबर को पुत्रदा एकादशी का विशेष व्रत; अर्धरात्रि के बाद द्वादशी का आगमन, वृषभ राशि में चंद्रमा देंगे शुभ फल


    नई दिल्ली/काशी: वर्ष 2025 का समापन एक अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक संयोग के साथ हो रहा है। आज, बुधवार 31 दिसंबर 2025 को पौष मास के शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व है, क्योंकि इसे संतान प्राप्ति, संतान की उन्नति और पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए अमोघ माना जाता है। वैष्णव परंपरा के अनुयायी आज पूरी निष्ठा के साथ भगवान विष्णु की आराधना कर रहे हैं।

    तिथि और नक्षत्रों की अनूठी गणना

    पंचांग के अनुसार, इस वर्ष की अंतिम एकादशी कई मायनों में खास है। आज एकादशी तिथि का क्षय हो रहा है, जिसके परिणामस्वरूप अर्धरात्रि के बाद द्वादशी तिथि का आरंभ हो जाएगा। ज्योतिषविदों के अनुसार, तिथि का यह परिवर्तन आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि करने वाला होता है।तिथि विवरण: एकादशी तिथि आज दिन भर व्याप्त रहेगी। रात 1 बजकर 48 मिनट पर द्वादशी तिथि का आगमन होगा, जो अगले दिन तक प्रभावी रहेगी।नक्षत्र और योग: आज रात 1 बजकर 30 मिनट तक कृतिका नक्षत्र रहेगा, जिसके बाद चंद्रमा के प्रिय रोहिणी नक्षत्र का आरंभ होगा। वहीं, योग की बात करें तो रात 9 बजकर 13 मिनट तक साध्य योग रहेगा, जो शुभ कार्यों की सिद्धि के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इसके उपरांत शुभ योग प्रारंभ होगा।

    चंद्रमा का गोचर: वृषभ राशि में उच्च के होंगे चंद्र

    आज ज्योतिषीय दृष्टि से एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। सुबह 9 बजकर 23 मिनट तक चंद्रमा मेष राशि में रहेंगे, लेकिन इसके तुरंत बाद वे अपनी उच्च राशि वृषभ में प्रवेश कर जाएंगे। चंद्रमा का अपनी उच्च राशि में होना मन की एकाग्रता, मानसिक शांति और भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि का कारक बनता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह स्थिति संकल्प शक्ति को मजबूत करने वाली होगी।

    आज के शुभ और अशुभ मुहूर्त Time Table

    किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या नए कार्य की शुरुआत के लिए सही समय का चयन करना अनिवार्य है।
    शुभ मुहूर्त Auspicious Timings:ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:24 से 6:19 तक ईश्वर चिंतन के लिए सर्वश्रेष्ठ
    विजय मुहूर्त: दोपहर 2:08 से 2:49 तक किसी भी कार्य में सफलता हेतु निशिथ काल: रात 11:57 से 12:52 तक तांत्रिक पूजा और विशेष जप हेतु  गोधूलि बेला: शाम 5:32 से 6:00 तक आरती और दीपदान हेतु  अशुभ मुहूर्त Inauspicious Timings: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल जैसे समय में महत्वपूर्ण निर्णय लेने या नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए:राहुकाल: दोपहर 12:00 से 1:30 तक  गुलिक काल: सुबह 10:30 से 12:00 तक  यमगंड: सुबह 7:30 से 9:00 तक

    पुत्रदा एकादशी का महत्व और उपाय

    पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत विशेष रूप से उन दंपत्तियों के लिए फलदायी माना गया है जो संतान सुख की कामना रखते हैं। भगवान विष्णु के ‘नारायण’ स्वरूप की पूजा आज के दिन की जाती है।विशेष उपाय: आज बुधवार का दिन है इसलिए भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान गणेश की पूजा का भी विधान है। आज ‘श्री गणेश अथर्वशीर्ष’ का पाठ करना अत्यंत लाभकारी रहेगा। यह उपाय न केवल विघ्नों को दूर करता है बल्कि साल के अंतिम दिन भविष्य के लिए मानसिक स्पष्टता और कार्यों में सफलता सुनिश्चित करता है।सावधानी: पंचांग की गणना स्थान के अनुसार कुछ मिनटों के अंतर पर आधारित हो सकती है।अतः किसी भी बड़े अनुष्ठान से पूर्व अपने स्थानीय पंडित या पंचांग का परामर्श अवश्य लें।