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  • रामायण में भगवान राम बनने से पहले घबराए थे रणबीर कपूर, बोले- प्रभु राम जैसा बनना संभव नहीं, उनसे सीखना बड़ी बात

    रामायण में भगवान राम बनने से पहले घबराए थे रणबीर कपूर, बोले- प्रभु राम जैसा बनना संभव नहीं, उनसे सीखना बड़ी बात

    नई दिल्ली । अभिनेता रणबीर कपूर इन दिनों अपनी आगामी फिल्म रामायण को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म में वह भगवान राम की भूमिका निभाते नजर आएंगे। हाल ही में उन्होंने इस किरदार को निभाने से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। रणबीर ने बताया कि जब उन्हें भगवान राम का किरदार निभाने का प्रस्ताव मिला, तो उनके मन में खुशी से पहले डर और जिम्मेदारी का एहसास आया। उन्हें मालूम था कि भगवान राम के प्रति करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है, इसलिए इस भूमिका को निभाना उनके लिए किसी सामान्य फिल्मी किरदार जैसा नहीं था।

    अमिताभ बच्चन के शो कौन बनेगा करोड़पति 18 में बातचीत के दौरान रणबीर ने बताया कि शुरुआत में उनके मन में सवाल था कि क्या वह इस जिम्मेदारी को सही तरीके से निभा पाएंगे। उन्होंने कहा कि भगवान राम का किरदार केवल अभिनय का अवसर नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। लोगों की धार्मिक भावनाओं और आस्था को ध्यान में रखते हुए इस भूमिका को प्रस्तुत करना उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

    रणबीर के मुताबिक, शुरुआत में महसूस हुआ डर धीरे-धीरे आभार में बदल गया। उन्होंने कहा कि जीवन के इस पड़ाव और इस उम्र में उन्हें ऐसा महत्वपूर्ण किरदार निभाने का अवसर मिला, इसके लिए वह खुद को भाग्यशाली मानते हैं। उनके अनुसार, इस भूमिका ने उन्हें केवल एक बेहतर अभिनेता बनने का ही नहीं, बल्कि एक बेहतर इंसान बनने की दिशा में भी सोचने का अवसर दिया।

    बेटी राहा के जन्म को बताया खास अनुभव

    रणबीर कपूर ने बातचीत में अपनी बेटी राहा के जन्म का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इसी दौरान वह पहली बार पिता बने थे। उनके जीवन में यह एक महत्वपूर्ण बदलाव था। रणबीर ने कहा कि वह रामायण का हिस्सा बनने के अवसर को भगवान का तोहफा मानते हैं। उनके लिए यह अनुभव व्यक्तिगत जीवन और पेशेवर सफर, दोनों लिहाज से खास है।

    अभिनेता ने यह भी कहा कि भगवान राम जैसा बन पाना संभव नहीं है, लेकिन उनके दृष्टिकोण से जीवन को समझना और उनसे सीखने की कोशिश करना अपने आप में बड़ी बात है। उनके इस बयान से स्पष्ट होता है कि वह इस भूमिका को केवल पर्दे पर निभाए जाने वाले चरित्र के रूप में नहीं, बल्कि जीवन से जुड़ी सीख के अवसर के रूप में भी देखते हैं।

    रवि दुबे ने भी साझा किया अपना अनुभव

    कार्यक्रम के दौरान अभिनेता रवि दुबे से भी लक्ष्मण की भूमिका निभाने को लेकर सवाल किया गया। फिल्म में लक्ष्मण का किरदार निभा रहे रवि ने कहा कि वह इस अवसर को लेकर हैरान हैं और उन्हें अब भी इस बात पर विश्वास करना मुश्किल लगता है। उन्होंने बताया कि वह और उनकी पत्नी सरगुन मेहता मानते हैं कि जीवन में होने वाली कुछ घटनाओं के पीछे दैवीय भूमिका होती है। रवि का यह बयान भी फिल्म से जुड़े कलाकारों के भावनात्मक अनुभव को सामने लाता है।

    रामायण में नजर आएंगे कई बड़े कलाकार

    निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म रामायण में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता, रवि दुबे लक्ष्मण, यश रावण और सनी देओल हनुमान की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म में अरुण गोविल, रकुल प्रीत सिंह, काजल अग्रवाल, लारा दत्ता और कुणाल कपूर सहित कई अन्य कलाकार भी शामिल हैं।

    फिल्म का निर्माण नमित मल्होत्रा कर रहे हैं। इसे दो भागों में बनाने की योजना है। दोनों भागों का कुल बजट लगभग 4000 करोड़ रुपये बताया गया है। फिल्म का पहला भाग 5 नवंबर 2026 को दिवाली के अवसर पर रिलीज होने वाला है। बड़े बजट, चर्चित कलाकारों और रामायण जैसे महाकाव्य पर आधारित कहानी के कारण इस फिल्म को लेकर दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई है।

  • भगवान नहीं ओरछा के असली राजा हैं श्रीराम जानिए क्यों इस अनोखे मंदिर में हर दिन पुलिस देती है गार्ड ऑफ ऑनर

    भगवान नहीं ओरछा के असली राजा हैं श्रीराम जानिए क्यों इस अनोखे मंदिर में हर दिन पुलिस देती है गार्ड ऑफ ऑनर


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में स्थित ऐतिहासिक नगरी ओरछा अपनी भव्य विरासत और धार्मिक आस्था के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां स्थित राम राजा सरकार मंदिर भारत का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां भगवान श्रीराम को केवल ईश्वर नहीं बल्कि ओरछा के वास्तविक राजा के रूप में पूजा जाता है। यही वजह है कि यहां आज भी मध्य प्रदेश पुलिस प्रतिदिन भगवान श्रीराम को गार्ड ऑफ ऑनर देकर राजकीय सम्मान प्रदान करती है। यह अनूठी परंपरा सदियों से चली आ रही है और देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

    राम राजा सरकार का मंदिर किसी पारंपरिक मंदिर की तरह नहीं बल्कि एक राजमहल जैसा दिखाई देता है। यहां भगवान श्रीराम राजा की तरह सिंहासन पर विराजमान रहते हैं। सुबह की मंगला आरती से लेकर रात्रि के शयन तक सभी धार्मिक अनुष्ठान राजशाही परंपरा के अनुसार संपन्न होते हैं। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु भी भगवान के दर्शन किसी देवालय में नहीं बल्कि अपने राजा के दरबार में उपस्थित होने की भावना से करते हैं।

    इस मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा रोजाना होने वाला गार्ड ऑफ ऑनर है। मध्य प्रदेश पुलिस के जवान निर्धारित समय पर मंदिर परिसर में पहुंचकर शस्त्रों के साथ भगवान श्रीराम को सलामी देते हैं। यह सम्मान उसी प्रकार दिया जाता है जैसा किसी राष्ट्राध्यक्ष या राज्य के सर्वोच्च पद पर आसीन व्यक्ति को दिया जाता है। इस अद्भुत परंपरा को देखने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक मंदिर पहुंचते हैं।

    राम राजा सरकार मंदिर की स्थापना के पीछे एक प्रसिद्ध धार्मिक कथा भी जुड़ी हुई है। मान्यता के अनुसार ओरछा की महारानी कुंवरि गणेश भगवान श्रीराम की परम भक्त थीं। उन्होंने अयोध्या जाकर सरयू नदी के तट पर कठोर तपस्या की और भगवान श्रीराम से ओरछा चलने की प्रार्थना की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्रीराम बाल स्वरूप में उनके साथ ओरछा आने के लिए तैयार हो गए।

    कहा जाता है कि ओरछा आने से पहले भगवान श्रीराम ने महारानी के सामने दो शर्तें रखीं। पहली यह कि ओरछा में वे राजा के रूप में ही विराजमान रहेंगे और दूसरी यह कि जहां पहली बार उन्हें स्थापित किया जाएगा वहां से वे कभी दूसरी जगह नहीं जाएंगे। महारानी ने दोनों शर्तें स्वीकार कर लीं।

    ओरछा पहुंचने पर महारानी ने भगवान श्रीराम को सबसे पहले अपने राजमहल के रसोईघर में विराजमान कराया। भगवान श्रीराम वहीं स्थायी रूप से स्थापित हो गए और समय के साथ वही स्थान विश्व प्रसिद्ध राम राजा सरकार मंदिर बन गया। तभी से ओरछा में भगवान श्रीराम को राजा का दर्जा प्राप्त है और आज भी पूरा नगर उन्हें अपना वास्तविक शासक मानता है।

    राम राजा सरकार मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का भी अद्भुत प्रतीक है। यहां निभाई जाने वाली राजशाही परंपराएं और भगवान श्रीराम को दिया जाने वाला राजकीय सम्मान इस मंदिर को देश के अन्य सभी राम मंदिरों से अलग पहचान दिलाता है।

  • क्यों हनुमान जी थे लक्ष्मण से भी प्रिय प्रभु श्री राम के लिए? पढ़ें यह भावुक प्रसंग

    क्यों हनुमान जी थे लक्ष्मण से भी प्रिय प्रभु श्री राम के लिए? पढ़ें यह भावुक प्रसंग


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में मंगलवार का दिन विशेष रूप से शक्ति भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। यह दिन प्रभु श्री राम के परम भक्त हनुमान जी को समर्पित है। गोस्वामी तुलसीदास की काव्य कृति श्रीरामचरितमानस के किष्किंधा कांड में एक ऐसा भावुक प्रसंग मिलता हैजो श्री राम और हनुमान जी के अटूट प्रेम को दर्शाता है। इस प्रसंग में श्री राम ने हनुमान जी को अपने छोटे भाई लक्ष्मण से भी दोगुना प्रिय बताया है। आइए जानेंआखिर क्यों हनुमान जी थे श्री राम के लिए लक्ष्मण से भी अधिक प्रिय।

    ऋष्यमूक पर्वत पर हनुमान जी से पहली मुलाकात

    जब श्री राम और लक्ष्मण माता सीता की खोज में वन-वन भटक रहे थेतो वे किष्किंधा के ऋष्यमूक पर्वत के पास पहुंचे। वहां वानरराज सुग्रीवजो पहले ही बाली से भयभीत थेउन्हें देखकर डर गए। उन्हें संदेह हुआ कि कहीं ये दोनों प्रभु श्री राम के विरोधी तो नहीं हैं। इस कारण सुग्रीव ने हनुमान जी को ब्राह्मण का रूप धारण कर भेजाताकि वह यह पता कर सकें कि ये दोनों व्यक्ति कौन हैं।हनुमान जी ने ब्राह्मण का रूप अपनाया और श्री राम से उनका परिचय पूछा। जब श्री राम ने कहा कि वे दशरथ के पुत्र हैं और माता सीता की खोज में निकले हैंतब हनुमान जी ने तुरंत अपना असली रूप प्रकट किया और श्री राम के चरणों में गिर पड़े। इस घटना ने श्री राम और हनुमान जी के बीच के अटूट प्रेम की शुरुआत की।

    मम प्रिय लक्ष्मण ते दूना – जब श्री राम भावुक हुए

    हनुमान जीजो अपने प्रभु से मिलकर अत्यधिक भावुक हो गए थेउन्होंने अपनी भूल के लिए श्री राम से क्षमा मांगी। हनुमान जी ने कहाहे भगवान! मैं मूर्ख हूंलेकिन आपने मुझे क्यों नहीं पहचाना? इस पर श्री राम ने हनुमान जी को गले से लगा लिया और कहा:सुनु कपि जियँ मानसि जनि ऊना। तैं मम प्रिय लछिमन ते दूना॥ समदरसी मोहि कह सब कोऊ। सेवक प्रिय अनन्य गति सोऊ॥अर्थ: श्री राम ने कहाहे हनुमान! अपने मन में कोई ग्लानि मत लाओ। तुम मुझे लक्ष्मण से भी दो गुने प्रिय हो। भले ही दुनिया मुझे समदर्शी कहेलेकिन मुझे वह सेवक सबसे प्रिय है जो पूरी तरह से मेरे शरण में रहता है और अनन्य भाव से समर्पित होता है।

    हनुमान जी क्यों थे श्री राम के लिए इतने प्रिय

    लक्ष्मण जीश्री राम के छोटे भाई थे और वे हमेशा उनके साथ रहते थेलेकिन हनुमान जी ने स्वयं को एक सेवक के रूप में पूरी तरह से समर्पित कर दिया था। शास्त्रों के अनुसारजो भक्त अपना अहंकार त्यागकर पूरी तरह से ईश्वर के शरण में रहता हैवह उनके लिए परिवार से भी बढ़कर होता है। यही कारण है कि हनुमान जी को श्री राम ने भरत सम भाई और लक्ष्मण से दूना प्रिय कहा।

    मंगलवार और हनुमान जी का विशेष संबंध

    यह मान्यता है कि हनुमान जी और श्री राम की पहली मुलाकात मंगलवार के दिन हुई थीइसलिए यह दिन हनुमान जी के साथ-साथ श्री राम की पूजा के लिए भी विशेष माना जाता है। बड़ा मंगल और बुढ़वा मंगल जैसे पर्व भी इसी दिन के साथ जुड़ी हुई हैंजो दर्शाते हैं कि प्रभु और भक्त का यह मिलन उसी समय हुआ था। इस प्रसंग से यह साफ होता है कि हनुमान जी का श्री राम के प्रति समर्पण और प्रेम अत्यधिक गहरा थाऔर इसीलिए श्री राम ने उन्हें अपने हृदय से लगाया और उन्हें लक्ष्मण से भी प्रिय माना।