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  • राष्ट्रपति मुर्मु ने बढ़ाया भारतीय खिलाड़ियों का हौसला, लवप्रीत और सीमा को दी शानदार जीत की बधाई

    राष्ट्रपति मुर्मु ने बढ़ाया भारतीय खिलाड़ियों का हौसला, लवप्रीत और सीमा को दी शानदार जीत की बधाई


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन का सिलसिला लगातार जारी है। आठवें दिन भारत के खाते में दो अहम पदक जुड़े, जब वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह ने पुरुषों के 110 प्लस किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता और सीमा कालीरमन ने महिला डिस्कस थ्रो स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम किया। दोनों खिलाड़ियों की इस उपलब्धि पर देशभर में खुशी की लहर दौड़ गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु समेत कई शीर्ष नेताओं ने उन्हें बधाई देते हुए उनके प्रदर्शन को देश के लिए गर्व का क्षण बताया।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लवप्रीत सिंह को बधाई देते हुए कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीतना उनकी मेहनत, दृढ़ संकल्प और शानदार प्रदर्शन का परिणाम है। उन्होंने लिखा कि लवप्रीत की इस सफलता पर हर भारतीय को गर्व है और उन्हें उम्मीद है कि वह आने वाले वर्षों में भी देश के लिए नई उपलब्धियां हासिल करेंगे।

    राष्ट्रपति ने सीमा कालीरमन की भी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि महिला डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक जीतना सीमा की कड़ी मेहनत, समर्पण और संघर्ष का प्रमाण है। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि सीमा की उपलब्धि देश की युवा महिलाओं को खेलों में आगे बढ़ने और बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करेगी।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी दोनों खिलाड़ियों को बधाई देते हुए उनके प्रदर्शन को भारतीय खेलों के लिए गौरवपूर्ण बताया। उन्होंने लवप्रीत सिंह की ताकत, मेहनत और आत्मविश्वास की सराहना करते हुए कहा कि यह पदक उनकी निरंतर मेहनत का परिणाम है। वहीं सीमा कालीरमन के लिए उन्होंने कहा कि महिलाओं के डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने साहस, दृढ़ निश्चय और संघर्ष की शानदार मिसाल पेश की है।

    केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भी दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धि पर खुशी जताई। उन्होंने लवप्रीत को 388 किलोग्राम कुल भार उठाकर रजत पदक जीतने पर बधाई दी और कहा कि उनका प्रदर्शन भारतीय वेटलिफ्टिंग के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। वहीं सीमा कालीरमन के लिए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) पटियाला की इस एथलीट ने कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है।

    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी सीमा कालीरमन को विशेष रूप से बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उनकी मेहनत, अनुशासन और मजबूत इरादों का परिणाम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सीमा भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन करती रहेंगी और देश को कई यादगार पल देंगी।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में लवप्रीत सिंह और सीमा कालीरमन की सफलता केवल दो पदकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन हजारों युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद देश के लिए कुछ बड़ा करने का सपना देखते हैं। दोनों खिलाड़ियों की मेहनत और समर्पण ने एक बार फिर साबित कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और लगातार प्रयास से अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता हासिल की जा सकती है।

  • आर्थिक तंगी से कॉमनवेल्थ पोडियम तक, लवप्रीत सिंह ने सिल्वर जीतकर बढ़ाया भारत का मान

    आर्थिक तंगी से कॉमनवेल्थ पोडियम तक, लवप्रीत सिंह ने सिल्वर जीतकर बढ़ाया भारत का मान


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह ने अपने शानदार प्रदर्शन से पूरे देश को गौरवान्वित कर दिया। पुरुषों के 110+ किलोग्राम भार वर्ग में उन्होंने कुल 388 किलोग्राम वजन उठाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। गोल्ड मेडल उनसे केवल एक किलोग्राम दूर रह गया, लेकिन उनकी मेहनत, संघर्ष और जज्बे ने करोड़ों भारतीयों का दिल जीत लिया। लवप्रीत ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने आर्थिक अभाव भी कभी बड़ी बाधा नहीं बनते।

    पंजाब के अमृतसर जिले के बाल सचंदर गांव में जन्मे लवप्रीत का बचपन बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता। उनके पिता दर्जी का काम करते हैं, जबकि दादा सब्जियां बेचकर परिवार का गुजारा करते थे। सीमित आय के बावजूद परिवार ने बेटे के सपनों पर कभी समझौता नहीं किया। पिता ने सिलाई मशीन की आवाज के बीच बेटे के लिए मेडल जीतने का सपना संजोया और हर मुश्किल परिस्थिति में उसका साथ दिया। परिवार ने अपनी जरूरतों में कटौती की, लेकिन लवप्रीत की ट्रेनिंग और खानपान में कोई कमी नहीं आने दी।

    महज 13 वर्ष की उम्र में लवप्रीत ने वेटलिफ्टिंग की दुनिया में कदम रखा। स्थानीय कोचों के मार्गदर्शन में शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा। उनकी प्रतिभा और अनुशासन ने जल्द ही उन्हें पहचान दिलाई। वर्ष 2015 में भारतीय नौसेना में नौकरी मिलने के बाद उनके करियर को नई दिशा मिली। इसके बाद उन्हें पटियाला स्थित राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में अभ्यास का अवसर मिला, जहां उनकी प्रतिभा और अधिक निखरी।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लवप्रीत ने लगातार अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। उन्होंने कॉमनवेल्थ जूनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण और एशियाई जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर भारतीय वेटलिफ्टिंग में अपनी मजबूत पहचान बनाई। बाद में 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य और कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने खुद को देश के भरोसेमंद वेटलिफ्टरों में शामिल कर लिया।

    ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में लवप्रीत का प्रदर्शन यादगार रहा। स्नैच राउंड में उन्होंने 176 किलोग्राम वजन उठाकर नया कॉमनवेल्थ रिकॉर्ड बनाया और प्रतियोगिता में बढ़त हासिल की। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में उन्होंने 212 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। अंतिम प्रयास में उन्होंने 217 किलोग्राम वजन उठाकर गोल्ड पर कब्जा जमाने की कोशिश की, लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो सका। इसी कारण वह कुल 388 किलोग्राम के साथ सिल्वर पर रहे, जबकि न्यूजीलैंड के डेविड लिटी ने 389 किलोग्राम उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

    हालांकि गोल्ड मेडल उनसे सिर्फ एक किलोग्राम दूर रह गया, लेकिन उनके संघर्ष और प्रदर्शन ने उन्हें देश का हीरो बना दिया। साधारण परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर रिकॉर्ड बनाना और भारत के लिए पदक जीतना किसी प्रेरक कहानी से कम नहीं है। लवप्रीत की सफलता यह संदेश देती है कि मेहनत, अनुशासन और परिवार का विश्वास किसी भी सपने को हकीकत में बदल सकता है। उनका यह सिल्वर मेडल केवल एक खिलाड़ी की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।

  • भारत की झोली में एक और मेडल, लवप्रीत सिंह ने वेटलिफ्टिंग में किया कमाल

    भारत की झोली में एक और मेडल, लवप्रीत सिंह ने वेटलिफ्टिंग में किया कमाल

    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश की झोली में एक और रजत पदक डाल दिया। स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित पुरुषों के 110+ किलोग्राम भार वर्ग मुकाबले में लवप्रीत ने कुल 388 किलोग्राम वजन उठाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। वह स्वर्ण पदक से केवल एक किलोग्राम के मामूली अंतर से चूक गए। न्यूजीलैंड के डेविड लिटी ने 389 किलोग्राम वजन उठाकर गोल्ड मेडल जीता, जबकि इंग्लैंड के एंड्रयू ग्रिफिथ्स 356 किलोग्राम के साथ कांस्य पदक हासिल करने में सफल रहे।

    मुकाबले की शुरुआत से ही लवप्रीत सिंह शानदार लय में नजर आए। स्नैच स्पर्धा में उन्होंने अपने पहले प्रयास में 168 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। इसके बाद दूसरे प्रयास में 173 किलोग्राम का वजन भी आसानी से उठाकर अपनी दावेदारी मजबूत कर दी। तीसरे और अंतिम प्रयास में उन्होंने 176 किलोग्राम वजन उठाकर प्रतियोगिता में बढ़त बना ली। इस प्रदर्शन के दम पर वह स्नैच में शीर्ष स्थान पर रहे और न्यूजीलैंड के डेविड लिटी पर 10 किलोग्राम की बढ़त हासिल कर चुके थे।

    हालांकि असली मुकाबला क्लीन एंड जर्क में देखने को मिला। लवप्रीत ने पहले 205 किलोग्राम और फिर 212 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। इसके बाद उन्होंने स्वर्ण पदक पक्का करने के इरादे से 217 किलोग्राम की चुनौती ली, लेकिन अंतिम प्रयास सफल नहीं हो सका। दूसरी ओर डेविड लिटी ने शानदार वापसी करते हुए क्लीन एंड जर्क में 223 किलोग्राम वजन उठाया और कुल 389 किलोग्राम के साथ महज एक किलोग्राम की बढ़त बनाकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। लवप्रीत का कुल स्कोर 388 किलोग्राम रहा, जिसने उन्हें रजत पदक दिलाया।

    पंजाब के अमृतसर जिले के बाल सचंदर गांव में 6 सितंबर 1997 को जन्मे लवप्रीत सिंह की सफलता संघर्ष और मेहनत की प्रेरक कहानी है। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने वर्ष 2010 में महज 13 वर्ष की उम्र में वेटलिफ्टिंग शुरू की। स्थानीय कोचों के मार्गदर्शन में लगातार अभ्यास करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पंजाब का प्रतिनिधित्व किया और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

    साल 2017 में उन्हें पटियाला स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में जगह मिली, जहां उनकी प्रतिभा को और निखार मिला। शुरुआत में उन्होंने 105 किलोग्राम वर्ग में खेलते हुए जूनियर कॉमनवेल्थ और एशियाई जूनियर प्रतियोगिताओं में पदक जीते। बाद में अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग महासंघ द्वारा नई भार श्रेणियां लागू होने के बाद वह 109 किलोग्राम वर्ग में पहुंचे और वहां भी शानदार प्रदर्शन जारी रखा।

    लवप्रीत इससे पहले 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीत चुके हैं। इसके अलावा 2022 कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक भी अपने नाम किया था। अब कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में रजत पदक जीतकर उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह भारत के सबसे भरोसेमंद वेटलिफ्टरों में शामिल हैं। भले ही इस बार गोल्ड उनसे सिर्फ एक किलोग्राम दूर रह गया, लेकिन उनका प्रदर्शन भारतीय खेल प्रेमियों के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बन गया।