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  • कॉमनवेल्थ में रजत जीतकर दिखाई संवेदनशीलता, लवलीना ने असम के बाढ़ पीड़ितों को समर्पित किया पदक

    कॉमनवेल्थ में रजत जीतकर दिखाई संवेदनशीलता, लवलीना ने असम के बाढ़ पीड़ितों को समर्पित किया पदक


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय महिला मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने भले ही स्वर्ण पदक से मामूली दूरी पर रुककर रजत पदक जीता हो, लेकिन उन्होंने अपनी संवेदनशील सोच और मानवीय भावना से पूरे देश का दिल जीत लिया। ग्लासगो में शानदार प्रदर्शन के बाद लवलीना ने अपना पहला कॉमनवेल्थ पदक असम के बाढ़ पीड़ितों को समर्पित कर दिया। उनकी इस भावनात्मक पहल पर उनके पिता टिकेन बोरगोहेन ने गर्व जताते हुए कहा कि बेटी ने खेल के साथ-साथ इंसानियत का भी बेहतरीन उदाहरण पेश किया है।

    महिलाओं की 75 किलोग्राम बॉक्सिंग स्पर्धा के फाइनल में लवलीना का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया की अमासो ग्रीनटी से हुआ, जिसमें उन्हें 1-4 से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि हार के बावजूद उन्होंने अपने करियर का पहला कॉमनवेल्थ गेम्स पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। मुकाबले के बाद उन्होंने इस उपलब्धि को असम में बाढ़ से प्रभावित लोगों को समर्पित करने का फैसला किया, जिसने उनकी जीत को और भी खास बना दिया।

    लवलीना के पिता टिकेन बोरगोहेन ने बताया कि बेटी प्रतियोगिता के दौरान भी लगातार असम के बाढ़ पीड़ितों की चिंता कर रही थी। उन्होंने कहा कि लवलीना ने उनसे फोन पर बातचीत के दौरान आग्रह किया था कि जितना संभव हो सके बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद की जाए। इसी सोच के साथ लवलीना अकादमी की ओर से लगातार राहत कार्यों में सहयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बेटी द्वारा अपना पदक बाढ़ पीड़ितों को समर्पित करना पूरे परिवार के लिए गर्व का विषय है।

    उन्होंने कहा कि फाइनल में हार का थोड़ा दुख जरूर है, लेकिन सिल्वर मेडल भी किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। यह लवलीना का कॉमनवेल्थ गेम्स में पहला पदक है और पूरे परिवार के लिए बेहद खुशी का क्षण है। उनके अनुसार पदक जीतने से भी बड़ी बात यह है कि लवलीना ने अपनी सफलता को जरूरतमंद लोगों के नाम कर दिया।

    लवलीना की इस उपलब्धि पर देशभर से उन्हें बधाइयां मिलीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने उन्हें शानदार प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दीं। टिकेन बोरगोहेन ने इन सभी नेताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि खिलाड़ियों को मिलने वाला यह सम्मान उनके मनोबल को और मजबूत करता है। उन्होंने बताया कि मुकाबले के बाद लवलीना से उनकी संक्षिप्त बातचीत हुई थी और वह रजत पदक जीतने से संतुष्ट होने के साथ-साथ आगे और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए भी उत्साहित हैं।

    मुकाबले के बाद लवलीना ने भी स्वीकार किया कि स्वर्ण पदक नहीं जीत पाने का थोड़ा अफसोस जरूर है, लेकिन भारतीय टीम के शानदार प्रदर्शन ने उनकी खुशी बढ़ा दी। उन्होंने कहा कि यह उनका पहला कॉमनवेल्थ गेम्स पदक है, इसलिए इसकी अहमियत उनके लिए बेहद खास है। उनका मानना है कि यदि वह देश के लिए स्वर्ण जीत पातीं तो खुशी और अधिक होती, लेकिन अब उनका पूरा ध्यान आगामी एशियाई खेलों पर है, जहां वह स्वर्ण पदक जीतने के लक्ष्य के साथ उतरेंगी।

    लवलीना बोरगोहेन ने अपने प्रदर्शन से यह साबित किया कि एक सच्चा खिलाड़ी केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं रहता बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभाता है। खेल के मैदान में संघर्ष और मैदान के बाहर संवेदनशीलता का यह अनूठा उदाहरण उन्हें देश के करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा बनाता है। उनकी उपलब्धि और मानवीय सोच आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों को भी समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देती है।

  • भारतीय मुक्केबाजों का गोल्डन पंच, अंकुश पंघाल बोले- विश्वास नहीं खोया, इसलिए मिली जीत

    भारतीय मुक्केबाजों का गोल्डन पंच, अंकुश पंघाल बोले- विश्वास नहीं खोया, इसलिए मिली जीत


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का 10वां दिन भारतीय मुक्केबाजी के लिए यादगार साबित हुआ। भारतीय बॉक्सरों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 10 पदक अपने नाम किए, जिनमें सात स्वर्ण पदक शामिल रहे। इस दमदार प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय मुक्केबाजी विश्व स्तर पर लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। स्वर्ण पदक जीतने वाले मुक्केबाज अंकुश पंघाल ने अपनी सफलता का सबसे बड़ा राज आत्मविश्वास को बताया और कहा कि कठिन समय में खुद पर भरोसा बनाए रखना ही उनकी जीत की सबसे बड़ी वजह बना।

    फाइनल मुकाबले के बाद अंकुश पंघाल ने कहा कि शुरुआत उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं रही। पहले बाउट में वह 0-5 से पीछे हो गए थे, जिससे उन पर काफी दबाव बन गया था। हालांकि उन्होंने घबराने के बजाय अपने खेल और खुद की क्षमता पर भरोसा बनाए रखा। यही आत्मविश्वास अंत तक उनके साथ रहा और आखिरकार उन्होंने मुकाबला पलटते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। अंकुश ने कहा कि परिवार और कोच का विश्वास हमेशा उनके साथ रहा और यही वजह है कि वह दबाव के बावजूद अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सके। उन्होंने अपना स्वर्ण पदक अपने परिवार और कोच को समर्पित किया तथा कहा कि अब उनका अगला लक्ष्य एशियाई खेलों में भी स्वर्ण पदक जीतना है।

    महिला मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन को फाइनल में हार का सामना करना पड़ा और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। मुकाबले के बाद उन्होंने स्वीकार किया कि स्वर्ण पदक नहीं जीत पाने का थोड़ा अफसोस जरूर है लेकिन टीम इंडिया के शानदार प्रदर्शन ने उनकी खुशी बढ़ा दी। उन्होंने कहा कि यह उनका पहला कॉमनवेल्थ गेम्स पदक है और इसलिए इसकी अहमियत उनके लिए बेहद खास है। लवलीना ने कहा कि अब वह एशियाई खेलों की तैयारी में पूरी ताकत झोंकेंगी और वहां स्वर्ण पदक जीतने की कोशिश करेंगी। उन्होंने अपना यह पदक असम में बाढ़ से प्रभावित लोगों को समर्पित करते हुए उनके जल्द सामान्य जीवन में लौटने की कामना भी की।

    पुरुषों की 90 प्लस किलोग्राम स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले नरेंद्र ने भी अपने प्रदर्शन का ईमानदारी से आकलन किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की लेकिन विरोधी मुक्केबाज की रणनीति उनके अनुमान से अलग थी। उनके अनुसार प्रतिद्वंद्वी लगातार मूवमेंट करता रहा जिससे उसे प्रभावी ढंग से पकड़ पाना मुश्किल साबित हुआ। नरेंद्र ने कहा कि वह अपनी कमियों पर काम करेंगे और एशियाई खेलों में इस हार की भरपाई करने का प्रयास करेंगे।

    स्वर्ण पदक विजेता सचिन सिवाच ने भी अपने फाइनल मुकाबले की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि शुरुआती दो राउंड में वह 2-3 से पीछे थे और उनके पास आखिरी राउंड में सब कुछ दांव पर लगाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। इसी सोच के साथ उन्होंने लगातार आक्रामक अंदाज अपनाया और विरोधी पर दबाव बनाया। सचिन ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास था कि वह मुकाबला पलट सकते हैं और आखिरकार उनका विश्वास सही साबित हुआ। उनके अनुसार खेल में तकनीक जितनी जरूरी है उतना ही जरूरी मानसिक मजबूती और जीत का विश्वास भी होता है।

    भारतीय मुक्केबाजों का यह प्रदर्शन केवल पदकों तक सीमित नहीं रहा बल्कि उसने यह भी दिखाया कि मेहनत, आत्मविश्वास और मजबूत मानसिकता के दम पर किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। अब सभी खिलाड़ियों की नजरें एशियाई खेलों और आने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर हैं, जहां वे इसी शानदार लय को बरकरार रखते हुए भारत के लिए और अधिक पदक जीतने का लक्ष्य लेकर उतरेंगे।

  • ग्लासगो में खेलों का महासंग्राम शुरू, मीराबाई-लवलीना बनीं भारत की शान, कॉमनवेल्थ गेम्स का शानदार शुभारंभ

    ग्लासगो में खेलों का महासंग्राम शुरू, मीराबाई-लवलीना बनीं भारत की शान, कॉमनवेल्थ गेम्स का शानदार शुभारंभ


    नई दिल्ली । स्कॉटलैंड के ऐतिहासिक शहर ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का शानदार आगाज हो गया। रंगों रोशनी संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजी भव्य उद्घाटन समारोह ने दुनिया भर से पहुंचे खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया। ओवीओ हाइड्रो एरिना में आयोजित इस समारोह में स्कॉटलैंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक खेल भावना का अद्भुत संगम देखने को मिला। इसी के साथ अगले 11 दिनों तक चलने वाले खेलों के इस महाकुंभ का औपचारिक शुभारंभ हुआ जहां दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी पदकों के लिए अपनी दावेदारी पेश करेंगे।

    कॉमनवेल्थ की परंपरा के अनुरूप ब्रिटेन के सम्राट किंग चार्ल्स तृतीय ने आधिकारिक रूप से खेलों का उद्घाटन किया। वर्ष 2014 के बाद एक बार फिर ग्लासगो को इन प्रतिष्ठित खेलों की मेजबानी का अवसर मिला है। उद्घाटन समारोह में स्कॉटलैंड की संस्कृति लोक परंपराओं और आधुनिक कला का अनूठा प्रदर्शन हुआ। प्रसिद्ध कलाकारों केटी टुनस्टॉल नाथन इवांस और सेंट फीनिक्स की शानदार प्रस्तुतियों ने समारोह को और भी यादगार बना दिया। संगीत नृत्य और रोशनी के शानदार संयोजन ने पूरे माहौल को उत्साह से भर दिया।

    भारत के लिए उद्घाटन समारोह बेहद गर्व का क्षण साबित हुआ जब ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन ने भारतीय दल का नेतृत्व करते हुए परेड ऑफ नेशंस में तिरंगा थामा। जैसे ही भारतीय दल एरिना में पहुंचा पूरा स्टेडियम तालियों और उत्साह से गूंज उठा। टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई चानू ने राष्ट्रीय ध्वज को गर्व के साथ थामा जबकि टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने कॉमनवेल्थ बैटन के साथ भारत की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व किया। दोनों खिलाड़ियों की मौजूदगी ने भारतीय दल का उत्साह कई गुना बढ़ा दिया।

    इस बार भारत ने 125 सदस्यीय मजबूत दल ग्लासगो भेजा है जो पैरा खेलों सहित 13 विभिन्न खेलों में अपनी चुनौती पेश करेगा। हालांकि इस संस्करण में प्रतियोगिताओं की संख्या पिछले संस्करणों की तुलना में कम रखी गई है लेकिन भारतीय दल में कई ओलंपिक और विश्व स्तरीय पदक विजेता खिलाड़ियों की मौजूदगी देश की पदक उम्मीदों को मजबूत बनाती है। भारत का लक्ष्य एक बार फिर कॉमनवेल्थ खेलों में अपनी खेल शक्ति का दम दिखाना और पदक तालिका में मजबूत स्थान हासिल करना है।

    दिलचस्प बात यह रही कि उद्घाटन समारोह से पहले ही भारत का अभियान शुरू हो चुका था। भारतीय लॉन बॉल्स टीम सबसे पहले मैदान पर उतरी और उससे बर्मिंघम 2022 जैसे ऐतिहासिक प्रदर्शन को दोहराने की उम्मीद की जा रही है। पिछली बार लॉन बॉल्स में भारत ने ऐतिहासिक सफलता हासिल कर पूरे देश को गौरवान्वित किया था और इस बार भी खिलाड़ियों से वैसी ही उम्मीदें हैं।

    कॉमनवेल्थ गेम्स के 23वें संस्करण में 74 देशों और क्षेत्रों के हजारों खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। प्रतियोगिताएं 10 खेलों में आयोजित की जाएंगी जिनके मुकाबले स्कॉटिश इवेंट कैंपस स्कॉटस्टाउन स्टेडियम टोलक्रॉस इंटरनेशनल स्विमिंग सेंटर और ग्लासगो एरिना जैसे विश्वस्तरीय मैदानों पर खेले जाएंगे। आयोजन का दायरा भले ही पहले की तुलना में थोड़ा छोटा हो लेकिन प्रतियोगिता का स्तर पहले की तरह बेहद रोमांचक और चुनौतीपूर्ण रहने की उम्मीद है।

    भारत की नजरें इस बार कई बड़े सितारों पर टिकी होंगी। ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा एथलेटिक्स में देश की सबसे बड़ी उम्मीद होंगे जबकि मीराबाई चानू वेटलिफ्टिंग में और लवलीना बोरगोहेन बॉक्सिंग में स्वर्ण पदक की मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं। इसके अलावा भारतीय मुक्केबाजी दल भी शानदार प्रदर्शन करने की क्षमता रखता है। उद्घाटन समारोह के साथ अब नजरें मैदान पर होने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा पर टिक गई हैं जहां पदकों रिकॉर्ड और नए इतिहास का इंतजार पूरी दुनिया को रहेगा।