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  • एलपीजी संकट से टाइल्स उद्योग पर असर, फैक्ट्रियां बंद; कीमतों में 20% तक उछाल

    एलपीजी संकट से टाइल्स उद्योग पर असर, फैक्ट्रियां बंद; कीमतों में 20% तक उछाल



    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय तनाव और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े असर का प्रभाव अब निर्माण सामग्री के बाजार में भी दिखाई देने लगा है। एलपीजी गैस की कमी के कारण देश के प्रमुख टाइल्स उत्पादन केंद्र गुजरात की कई फैक्ट्रियों में उत्पादन प्रभावित हो गया है। गैस आपूर्ति बाधित होने से कुछ इकाइयों को अस्थायी रूप से बंद भी करना पड़ा है, जिससे बाजार में टाइल्स की उपलब्धता घटने लगी है और कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    दरअसल टाइल्स उद्योग में भट्टियों को चलाने के लिए बड़े पैमाने पर एलपीजी गैस का उपयोग किया जाता है। लेकिन हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़े तनाव और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति में आई बाधा के कारण गैस की उपलब्धता कम हो गई है। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है और कई फैक्ट्रियों को सीमित क्षमता पर काम करना पड़ रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर
    विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति प्रभावित हुई है। इसका असर पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की उपलब्धता पर पड़ा है, जिससे उद्योगों के संचालन में दिक्कतें आने लगी हैं।

    बाजार में घट रही उपलब्धता
    गैस संकट के कारण फैक्ट्रियों का उत्पादन कम होने से टाइल्स की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। कंपनियों द्वारा अब माल की आपूर्ति करीब 40 दिन की वेटिंग के बाद की जा रही है। पहले जहां दुकानदारों को कुछ ही दिनों में माल मिल जाता था, वहीं अब उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है।

    कीमतों में तेज उछाल
    आपूर्ति घटने के कारण बाजार में टाइल्स की कीमतों में अचानक तेजी आ गई है। दुकानदारों के अनुसार पहले जो टाइल्स की पेटी करीब 450 रुपये में मिलती थी, उसका दाम बढ़कर 550 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं सामान्य रूप से 160 रुपये में मिलने वाली पेटी अब लगभग 230 रुपये तक बिक रही है।

    स्थानीय बाजार में करीब 15 दुकानें टाइल्स का कारोबार कर रही हैं, जबकि पूरे जिले में 100 से अधिक व्यापारी इस व्यापार से जुड़े हुए हैं। इन दुकानों में बिकने वाला अधिकांश माल गुजरात की फैक्ट्रियों से आता है, इसलिए वहां उत्पादन प्रभावित होने का असर सीधे स्थानीय बाजारों में दिखाई दे रहा है।

    निर्माण कार्य पर बढ़ा दबाव
    टाइल्स की कीमतों में आई इस बढ़ोतरी से ठेकेदारों, मकान बनवा रहे लोगों और उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है। निर्माण कार्य की लागत बढ़ने से कई परियोजनाओं का बजट प्रभावित हो सकता है। व्यापारियों का कहना है कि यदि गैस आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले समय में टाइल्स की कीमतों में और भी वृद्धि हो सकती है।

    टाइल्स विक्रेता विपुल रस्तोगी के अनुसार, एलपीजी गैस की कमी के कारण फैक्ट्रियों का उत्पादन प्रभावित हुआ है और इसका असर सीधे बाजार पर पड़ा है। पहले जो माल आसानी से उपलब्ध हो जाता था, अब उसके लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है और कंपनियों ने भी कीमतें बढ़ा दी हैं।

    एलपीजी गैस की कमी के कारण गुजरात की कई टाइल्स फैक्ट्रियों में उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे बाजार में सप्लाई घट गई है। इसका असर कीमतों पर पड़ा है और टाइल्स के दाम 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं

  • कई राज्यों में कॉमर्शियल गैस संकट: होटल-रेस्टोरेंट बंद, सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया

    कई राज्यों में कॉमर्शियल गैस संकट: होटल-रेस्टोरेंट बंद, सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया


    नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल के ईरान पर सैन्य कार्रवाई के कारण हॉर्मुज जलमार्ग पर गैस सप्लाई ठप होने से देश में कॉमर्शियल गैस की किल्लत पैदा हो गई है। दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में होटल और रेस्टोरेंट बंद होने की स्थिति बन गई है।

    केंद्र सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 लागू किया है ताकि गैस की जमाखोरी और सप्लाई में असमानता रोकी जा सके।

    गैस सप्लाई की चार श्रेणियां
    पूरा स्टॉक: घरेलू रसोई गैस (PNG) और CNG वाहन गैस को पूरी तरह उपलब्ध कराया जाएगा।

    खाद उद्योग: खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों को 70% गैस उपलब्ध होगी।

    बड़े उद्योग: नेशनल ग्रिड से जुड़े बड़े उद्योगों को 80% गैस मिलेगी।

    छोटे होटल और व्यवसाय: छोटे होटल, रेस्टोरेंट और उद्योगों को उनकी पुरानी खपत के अनुसार 80% गैस मिलेगी।

    राज्यों में सप्लाई की स्थिति
    उत्तर प्रदेश: लखनऊ, कानपुर और वाराणसी में बुकिंग के 4-5 दिन बाद भी गैस नहीं मिल रही।

    महाराष्ट्र: मुंबई, पुणे और नागपुर में करीब 20% होटल और रेस्टोरेंट बंद। पुणे में गैस की कमी के कारण नगर निगम ने शवदाह गृह अस्थायी रूप से बंद किए।

    मध्य प्रदेश: भोपाल में 2000 से अधिक होटल और रेस्टोरेंट प्रभावित, सिलेंडर की उपलब्धता कम।

    राजस्थान: होटल, रेस्टोरेंट और मैरिज गार्डन संचालकों को परेशानी।

    कर्नाटक: बेंगलुरु में होटल बंद होने का खतरा, बुजुर्ग और छात्र प्रभावित।

    सरकार ने संकट निपटाने के लिए उठाए कदम
    हाई-लेवल कमेटी: पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल कंपनियों के कार्यकारी निदेशकों की कमेटी बनाई।

    एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लागू: जमाखोरी रोकने के लिए लागू।

    बुकिंग नियम बदलाव: एक सिलेंडर मिलने के बाद अगला 25 दिन बाद बुक हो सकेगा।

    OTP और बायोमेट्रिक: जमाखोरी रोकने के लिए डिलीवरी पर कड़ी निगरानी।

    LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश: अतिरिक्त उत्पादन घरेलू गैस के लिए।

    गैस संकट की मुख्य वजहें
    हॉर्मुज जलमार्ग पर बंदी: फारस की खाड़ी से अरब सागर तक फैले 167 किमी लंबे मार्ग से गैस और तेल का बड़ा हिस्सा आता है। ईरान युद्ध के कारण यह मार्ग असुरक्षित।

    एलएनजी उत्पादन में रुकावट: ईरान के ड्रोन हमले के बाद कतर के LNG प्लांट की सप्लाई प्रभावित, जिससे भारत की 40% LNG आयात प्रभावित।

    हालात कब सुधरेंगे?
    इंडियन ऑयल के के.एम. ठाकुर ने ग्राहकों को आश्वस्त किया कि घबराने की जरूरत नहीं है और पैनिक बुकिंग से बचें। सरकार वैकल्पिक सप्लाई विकल्पों पर काम कर रही है, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर G7 देश इमरजेंसी तेल भंडार से सप्लाई जारी करने पर विचार कर रहे हैं।

    घरेलू गैस की कीमतें बढ़ीं
    सरकार ने डोमेस्टिक LPG सिलेंडर की कीमत ₹60 बढ़ा दी है। अब 14.2 किलोग्राम का सिलेंडर दिल्ली में ₹913 में उपलब्ध है। 19 किलोग्राम कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत अब ₹1,883 है।