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    LPG Price Today: घरेलू गैस सिलेंडर के दाम स्थिर, जानिए आपके शहर में क्या है आज का रेट


    नई दिल्ली। घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात है कि 27 जून 2026 को गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू और 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम फिलहाल स्थिर बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बावजूद घरेलू बाजार में फिलहाल कीमतों में कटौती नहीं की गई है।

    इससे पहले 7 जून को घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। वहीं, 1 जून को 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 42 रुपये का इजाफा हुआ था। इसके बाद से अब तक किसी नई कीमत की घोषणा नहीं की गई है।

    प्रमुख शहरों में घरेलू LPG सिलेंडर के ताजा रेट

    देश के अलग-अलग शहरों में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतें स्थानीय करों और परिवहन लागत के कारण अलग-अलग हैं।

    नई दिल्ली: ₹942

    मुंबई: ₹941.50

    कोलकाता: ₹968

    चेन्नई: ₹957.50

    नोएडा: ₹939.50

    गुरुग्राम: ₹950.50

    चंडीगढ़: ₹951.50

    जयपुर: ₹945.50

    बेंगलुरु: ₹944.50

    भुवनेश्वर: ₹968

    लखनऊ: ₹979.50

    तिरुवनंतपुरम: ₹951

    पटना: ₹1,031.50

    इनमें नोएडा सबसे सस्ते शहरों में शामिल है, जबकि पटना में घरेलू गैस सिलेंडर सबसे महंगा बिक रहा है।

    कमर्शियल उपभोक्ताओं को मिली राहत

    केंद्र सरकार ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई पर पिछले दो महीनों से लागू सभी प्रतिबंध समाप्त कर दिए हैं। साथ ही बल्क एलपीजी की आपूर्ति पर लगी रोक भी हटा दी गई है। सरकार का मानना है कि पश्चिम एशिया में हालात सामान्य होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से एलपीजी की आपूर्ति अब पहले की तरह सुचारु हो गई है। इससे होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।

    कब सस्ता होगा घरेलू गैस सिलेंडर? 

    विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में आई गिरावट का असर भारतीय बाजार में दिखने में आमतौर पर 3 से 6 महीने का समय लग सकता है।

    फिलहाल एक 14.2 किलोग्राम घरेलू एलपीजी सिलेंडर की वास्तविक लागत करीब 1,600 रुपये बताई जा रही है, जबकि दिल्ली में उपभोक्ताओं को यह 942 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है। वास्तविक लागत और उपभोक्ता मूल्य के बीच का अंतर तेल विपणन कंपनियां वहन कर रही हैं।

    इसी वजह से चालू वित्त वर्ष में सरकारी तेल विपणन कंपनियों को लगभग 60,000 करोड़ रुपये तक के घाटे का अनुमान है। ऐसे में जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लगातार नीचे नहीं रहतीं और कंपनियों की लागत कम नहीं होती, तब तक घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बड़ी राहत मिलने की संभावना कम मानी जा रही है।

  • ईंधन कीमतों पर लगाम की तैयारी, सरकार ला सकती है प्राइस स्टेबिलाइजेशन मैकेनिज्म

    ईंधन कीमतों पर लगाम की तैयारी, सरकार ला सकती है प्राइस स्टेबिलाइजेशन मैकेनिज्म


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार अब एक बड़े कदम की तैयारी में है। पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी से आम लोगों को राहत देने के लिए सरकार ‘ईंधन मूल्य स्थिरीकरण तंत्र’ (Fuel Price Stabilization Mechanism) पर गंभीरता से विचार कर रही है।

     क्यों उठी इस तंत्र की जरूरत?
    पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनावों के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ता है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ते ही घरेलू बाजार में ईंधन महंगा हो जाता है, जिससे महंगाई और बढ़ती है।
    इसी समस्या से निपटने के लिए Government of India एक ऐसा तंत्र तैयार कर रही है, जो कीमतों में अचानक उछाल को नियंत्रित कर सके।

    कैसे काम करेगा यह तंत्र?
    रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था एक “बफर फंड” या रिजर्व सिस्टम पर आधारित होगी। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ेंगी, तब इस फंड के जरिए हस्तक्षेप कर उपभोक्ताओं पर सीधा बोझ कम किया जाएगा।
    यह मॉडल कुछ हद तक कृषि उत्पादों के मूल्य स्थिरीकरण तंत्र जैसा होगा, जहां जरूरत पड़ने पर बफर स्टॉक बाजार में उतारा जाता है।

    पेट्रोल-डीजल और LPG होंगे शामिल
    इस प्रस्तावित योजना में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी तीनों ईंधनों को शामिल किया जाएगा। इसके लिए एक अलग “ईंधन बफर फंड” बनाने की तैयारी है, जिससे कीमतों के तेज उतार-चढ़ाव को संतुलित किया जा सके।

     रणनीतिक भंडार से अलग होगा यह सिस्टम
    यह तंत्र भारत के मौजूदा रणनीतिक कच्चे तेल भंडार से अलग होगा। जहां रणनीतिक भंडार का मकसद आपूर्ति सुनिश्चित करना है, वहीं यह नया सिस्टम कीमतों को स्थिर रखने पर फोकस करेगा।

     कब होगा हस्तक्षेप? तय होंगे खास मानदंड
    सरकार इस बात पर भी काम कर रही है कि कब और कैसे हस्तक्षेप किया जाए। इसके लिए कुछ तय सीमाएं (थ्रेशहोल्ड) बनाई जा सकती हैं, जैस

    कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत

    वैश्विक बाजार में अस्थिरता का स्तर
    जब ये सीमाएं पार होंगी, तब सरकार बफर फंड का इस्तेमाल कर कीमतों को काबू में रखने की कोशिश करेगी।

     स्थायी सब्सिडी नहीं, सिर्फ अस्थायी राहत
    सरकार का मकसद स्थायी सब्सिडी देना नहीं है, बल्कि सिर्फ अत्यधिक उतार-चढ़ाव के समय अस्थायी राहत देना है। जब हालात सामान्य हो जाएंगे, तब बफर को फिर से भर दिया जाएगा।

     आम लोगों को क्या फायदा?
    इस तंत्र के लागू होने से
    पेट्रोल-डीजल के अचानक महंगे होने का झटका कम लगेगा
    महंगाई पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी
    घरेलू बजट पर दबाव घटेगा

  • ईरान-इजराइल युद्ध का असर रसोई तक: LPG सिलेंडर 60 रुपये महंगा, कमर्शियल गैस में भी बड़ी बढ़ोतरी

    ईरान-इजराइल युद्ध का असर रसोई तक: LPG सिलेंडर 60 रुपये महंगा, कमर्शियल गैस में भी बड़ी बढ़ोतरी


    जबलपुर । मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और Iran–Israel conflict का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय हालात और कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव के बीच देश में रसोई गैस के दामों में बढ़ोतरी कर दी गई है। तेल कंपनियों ने घरेलू Liquefied Petroleum Gas (LPG) cylinder की कीमतों में 60 रुपये का इजाफा किया है, जबकि कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 115 रुपये तक बढ़ा दिए गए हैं। नई कीमतें तुरंत प्रभाव से लागू कर दी गई हैं और तेल कंपनियों की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपडेट कर दी गई हैं।

    इस बढ़ोतरी के बाद आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है। खासकर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी बड़ी चिंता बन सकती है, क्योंकि रसोई गैस पहले ही घरेलू बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने से घरों का मासिक खर्च बढ़ना तय है।

    मध्यप्रदेश की बात करें तो यहां गैस सिलेंडर की कीमतें देश के कई बड़े शहरों से ज्यादा हो गई हैं। प्रदेश के शहरों में घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में 60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद अब इसकी कीमत करीब 920 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 114 रुपये का इजाफा हुआ है, जिसके बाद इसकी कीमत 2100 रुपये से भी ज्यादा हो गई है।

    दिलचस्प बात यह है कि कई मामलों में मध्यप्रदेश के उपभोक्ताओं को देश के बड़े महानगरों से भी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। उदाहरण के तौर पर New Delhi और Mumbai जैसे महानगरों की तुलना में मध्यप्रदेश के कई शहरों में गैस सिलेंडर महंगा मिल रहा है। परिवहन लागत और टैक्स संरचना के कारण अक्सर राज्यों में गैस के दामों में अंतर देखने को मिलता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो आने वाले समय में ईंधन और ऊर्जा से जुड़ी अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं। इसका असर परिवहन, खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरतों पर भी देखने को मिल सकता है।

    कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने का असर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसायों पर भी पड़ने की संभावना है। इससे खाने पीने की चीजों की कीमतों में भी धीरे धीरे बढ़ोतरी हो सकती है। यानी गैस सिलेंडर की कीमतों में हुई यह बढ़ोतरी सिर्फ घर की रसोई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बाजार में भी महंगाई का दबाव बढ़ा सकती है।

    फिलहाल नई दरें लागू हो चुकी हैं और उपभोक्ताओं को अब बढ़ी हुई कीमतों पर ही गैस सिलेंडर खरीदना होगा। ऐसे में मिडिल ईस्ट की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है, क्योंकि वहां के हालात का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है।