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  • गैस संकट पर फूटा छात्रों का गुस्सा नर्मदापुरम में कलेक्ट्रेट के बाहर चूल्हा जलाकर किया विरोध

    गैस संकट पर फूटा छात्रों का गुस्सा नर्मदापुरम में कलेक्ट्रेट के बाहर चूल्हा जलाकर किया विरोध

    नर्मदापुरम । मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में रसोई गैस की किल्लत और कथित कालाबाजारी को लेकर छात्रों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बड़ी संख्या में छात्र सोमवार रात करीब 10 बजे अचानक कलेक्ट्रेट गेट पर पहुंच गए और वहां अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। छात्र अपने साथ सब्जी पोहा और चूल्हा लेकर आए थे और उन्होंने मौके पर ही खाना बनाना शुरू कर दिया जिससे प्रशासन भी हैरान रह गया।

    छात्रों का आरोप है कि शहर में एलपीजी सिलेंडर की भारी कमी है और इसका फायदा उठाकर कुछ लोग खुलेआम कालाबाजारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि जो सिलेंडर सामान्य रूप से करीब 900 रुपये में मिलता है उसे 3500 से 4000 रुपये तक में बेचा जा रहा है। इस वजह से किराए के कमरों में रहने वाले और सीमित संसाधनों में पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए रोजमर्रा का जीवन बेहद कठिन हो गया है।

    प्रदर्शन की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और तहसीलदार सरिता मालवीय तथा शक्ति तोमर मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्रों को समझाने की कोशिश की और तत्काल राहत के तौर पर दीनदयाल रसोई योजना के तहत भोजन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी रखा लेकिन छात्रों ने इसे साफ तौर पर ठुकरा दिया। उनका कहना था कि उन्हें मुफ्त भोजन नहीं बल्कि उचित कीमत पर गैस सिलेंडर चाहिए ताकि वे खुद अपना खाना बना सकें और सम्मानजनक तरीके से रह सकें।

    प्रदर्शन के दौरान यह बात भी सामने आई कि अधिकांश छात्र बाहरी जिलों से आकर यहां रह रहे हैं और उनके पास स्थानीय गैस एजेंसियों के कनेक्शन नहीं हैं। यही वजह है कि वे नियमित आपूर्ति से वंचित हैं और मजबूरी में महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने को मजबूर हो रहे हैं।

    करीब एक घंटे तक चले इस विरोध के दौरान प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत हुई। तहसीलदार ने आश्वासन दिया कि जिन छात्रों के पास जिले के गैस कनेक्शन हैं वे अगले दिन अपनी बुक और डीएससी नंबर के साथ आएं उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा।इसी बीच स्थानीय कांग्रेस नेता Faizan ने आगे आकर छात्रों के भोजन की निजी व्यवस्था करने की बात कही जिसके बाद माहौल थोड़ा शांत हुआ और छात्रों ने प्रदर्शन समाप्त करने का फैसला लिया।

    हालांकि छात्रों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गैस की किल्लत दूर नहीं की गई और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो वे और बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। यह घटना न केवल प्रशासन के लिए चुनौती बन गई है बल्कि शहर में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

  • LPG की किल्लत के बीच बढ़ी स्टोव की डिमांड… केरोसिन नहीं मिलने से मजदूर पलायन को मजबूर

    LPG की किल्लत के बीच बढ़ी स्टोव की डिमांड… केरोसिन नहीं मिलने से मजदूर पलायन को मजबूर


    नई दिल्ली।
    एलपीजी किल्लत (Gas Crisis) के कारण आम लोग खासकर मजदूर वर्ग खासे परेशान हैं। आसानी से सिलिंडर (Gas Cylinder) नहीं मिलने के कारण हालात ऐसे हो गए हैं कि साल पहले घरों से गायब केरोसिन स्टोव (Kerosene Stove) विकल्प के रूप में एक बार फिर जरूरत बनकर उभर रहा है।

    केंद्र सरकार ने आपात परिस्थितियों को देखते हुए केरोसिन तेल की बिक्री की अनुमति तो दे दी है, लेकिन बाजार में तेल उपलब्ध नहीं होने से लोग परेशान हैं। इस कारण मजदूर वर्ग पलायन करने को भी मजबूर हैं।

    सदर बाजार और चांदनी चौक जैसे थोक बाजारों में केरोसिन स्टोव की कमी देखी जा रही है। कभी इन बाजारों में स्टोव की भरमार होती थी, लेकिन बदलते समय के साथ इनकी मांग लगभग समाप्त हो गई थी। पहले सिलिंडर उसके बाद इंडक्शन उपयोग के कारण व्यापारियों ने धीरे-धीरे इसे बेचना छोड़ दिया। अब गैस संकट के चलते स्टोव की मांग अचानक बढ़ी है तो बाजार इसकी आपूर्ति करने में असमर्थ दिखाई दे रहा है।


    केरोसिन-डीजल स्टोव के दाम बढ़े

    जो साधारण स्टोव पहले 400 से 600 रुपये में आसानी से मिल जाते थे, उनकी कीमत अब 1500 से 1800 रुपये तक पहुंच गई है। बड़े स्तर पर उपयोग होने वाली केरोसिन-डीजल भट्टियों के दाम 30 हजार रुपये तक पहुंच गया है। बावजूद बाजार में आसानी से नहीं मिल रहा है। सदर बाजार के व्यापारी सुरेश ने बताया कि उनके परिवार का पुराना व्यवसाय स्टोव बेचना था, लेकिन केरोसिन के उपयोग में कमी आने के कारण उन्होंने यह काम छोड़ दिया।


    नई पीढ़ी के लिए केरोसिन स्टोव बना चुनौती

    नई पीढ़ी के अधिकांश लोग केरोसिन स्टोव का उपयोग करना नहीं जानते हैं। मुनिरका में काम करने वाली घरेलू सहायिका मीना ने बताया कि उनका सिलिंडर खत्म हो चुका है। वह कई बाजारों में स्टोव की तलाश कर चुकी हैं, लेकिन उन्हें कहीं नहीं मिला। वहीं, आरके पुरम में रहने वाली गृहिणी प्रेरणा ने बताया कि उनके घर में पिछले तीन दशकों से केवल गैस चूल्हे का उपयोग हो रहा है। उन्होंने कभी स्टोव पर खाना नहीं बनाया, अब यह स्थिति उनके लिए नई और चुनौतीपूर्ण बन गई है।


    बढ़ रहा पलायन, बस अड्डों-स्टेशनों पर लोगों की भीड़

    रोजी रोटी की तलाश में घर से हजारों किलोमीटर दूर पहुंचे मजदूर वर्ग के लिए एलपीजी संकट से पेट भरना भी मुश्किल हो गया है। इन संकटों से जूझ रहे खासकर मजदूर वर्ग के लोग अपने घर लौटने को मजबूर हो रहे हैं।

    इस कारण बड़ी संख्या में पलायन कर रहे लोगों की भीड़ इन दिनों बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों पर देखी जा रही है। सिलेंडर न मिलने, बाहर खाने की महंगाई और काम की कमी के कारण बड़ी संख्या में लोग घर जाना ही मुनासिक समझ रहे हैं। आनंद विहार बस अड्डा और रेलवे स्टेशन पर सुबह से ही यात्रियों की भीड़ देखने को मिली।

    कई लोग बैग और सामान के साथ बसों और ट्रेनों का इंतजार करते नजर आए। उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाली बसों में भीड़ अधिक रही। यात्रियों का कहना है कि पिछले कई दिनों से गैस नहीं मिलने के कारण खाना बनाना मुश्किल हो गया है।

  • गैस सिलेंडर की कमी, कतारों में खड़े उपभोक्ता, रविवार को बंद रहेंगे बाटलिंग प्लांट

    गैस सिलेंडर की कमी, कतारों में खड़े उपभोक्ता, रविवार को बंद रहेंगे बाटलिंग प्लांट

    नई दिल्ली: रायपुर समेत छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में एलपीजी गैस सिलेंडरों की किल्लत बढ़ती जा रही है। तेल कंपनियों ने इस संकट के बीच गैस एजेंसियों को आपूर्ति पर 20 से 25 प्रतिशत तक का कोटा निर्धारित कर दिया है। इसका मतलब यह है कि अब सिलेंडर की आपूर्ति मांग के अनुसार नहीं होगी बल्कि तय कोटे के आधार पर ही होगी। इस स्थिति का असर आम आदमी की रसोई तक सीधे पहुंच रहा है और घरेलू बजट पर दबाव बढ़ गया है।

    सूत्रों के अनुसार, जिन एजेंसियों की मासिक बिक्री औसतन 10,000 सिलेंडर होती थी, उन्हें अब केवल 7,500 सिलेंडर ही उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वहीं, कई वितरण केंद्रों पर जहां रोजाना लगभग 2,500 सिलेंडरों की मांग होती है, वहां अब आपूर्ति घटकर महज 500 सिलेंडर तक रह गई है। इस भारी अंतर के कारण उपभोक्ताओं को रिफिल के लिए पांच से सात दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है।

    राजधानी रायपुर में एलपीजी एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें बन गई हैं। लोग सिलेंडरों के लिए कई घंटों तक इंतजार कर रहे हैं, जिससे रोजमर्रा की घरेलू गतिविधियों पर असर पड़ा है। इस संकट का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थिति है, जिसका सीधा असर तेल कीमतों और गैस आपूर्ति पर पड़ा है।

    इस बीच स्थिति और गंभीर हो सकती है क्योंकि रविवार को बाटलिंग प्लांट बंद रहेंगे। इससे सिलेंडरों की आपूर्ति और कम हो जाएगी और दबाव और बढ़ने की संभावना है। तेल कंपनियां उपभोक्ताओं को यह सलाह दे रही हैं कि आपात स्थिति के लिए बचत सिलेंडर का उपयोग करें और गैर-जरूरी सिलेंडर का उपयोग टालें।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक राजनीतिक तनाव के कारण पैदा हुआ है। घरेलू स्तर पर तेल कंपनियां कोटा प्रणाली लागू कर रही हैं ताकि सीमित आपूर्ति को अधिकतम संख्या में उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा सके।

    गृहिणियों और आम नागरिकों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई है। रसोई के रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं और सिलेंडर रिफिल के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि सिलेंडर के लिए किसी एक वितरण केंद्र पर लगातार न रहें और अपने नजदीकी एजेंसी से समय-समय पर जानकारी लेते रहें।

    इस संकट से निपटने के लिए प्रशासन और तेल कंपनियां लगातार उपाय कर रही हैं। बैकअप आपूर्ति सुनिश्चित करने और आपूर्ति श्रृंखला को दुरुस्त करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन रविवार को बाटलिंग प्लांट बंद रहने से स्थिति अस्थायी रूप से और गंभीर हो जाएगी।

     रायपुर में एलपीजी सिलेंडर संकट उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बन गया है। तेल कंपनियों द्वारा कोटा लागू करने के बाद भी सिलेंडरों की उपलब्धता सीमित है और घरेलू रसोई के बजट पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। उपभोक्ताओं को सतर्क रहने और आपूर्ति की स्थिति के अनुसार योजना बनाने की आवश्यकता है।

  • देशभर में LPG की किल्लत, सिलेंडर की कालाबाजारी और इंडक्शन की मांग में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

    देशभर में LPG की किल्लत, सिलेंडर की कालाबाजारी और इंडक्शन की मांग में रिकॉर्ड बढ़ोतरी


    नई दिल्ली। देशभर में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच एलपीजी (LPG) की किल्लत ने आम जनता और व्यापारियों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही हैं, वहीं घरेलू और कॉमर्शियल सिलेंडरों की कालाबाजारी ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है।

    बिहार के कई शहरों में 1000 रुपए वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत अब1800 तक पहुँच गई है। मध्य प्रदेश में स्थिति और गंभीर है, यहाँ 1900 रुपए वाले कॉमर्शियल सिलेंडर को4000 में बेचा जा रहा है। इस बढ़ती कीमत और आपूर्ति संकट के कारण लोगों को गैस सिलेंडर पाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    सप्लाई की कमी के चलते कई होटलों और रेस्टोरेंट्स ने इंडक्शन पर खाना बनाने की ओर रुख किया है। इसके परिणामस्वरूप बाजार में इंडक्शन की मांग में करीब 50% की बढ़ोतरी हुई है। गैस की कमी और कालाबाजारी ने ऊर्जा सुरक्षा और रोजमर्रा की जरूरतों पर गंभीर प्रभाव डाला है।

    सरकारी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, आम जनता से अपील की गई है कि वे एलपीजी के सही उपयोग और अनुचित मूल्य वृद्धि से बचने के लिए सतर्क रहें।

    विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक ऊर्जा संकट और संघर्ष की वजह से एलपीजी की उपलब्धता अस्थायी रूप से प्रभावित हुई है, लेकिन सरकार उत्पादन बढ़ाकर और आपूर्ति चैन को सुचारू बनाए रखकर समस्या का समाधान कर रही है।

    इस संकट के बीच जनता और व्यवसायिक प्रतिष्ठान ऊर्जा विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं, जैसे कि इंडक्शन, पीएनजी, और अन्य वैकल्पिक ईंधन, ताकि खाना बनाने और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी की जा सकें।
    घरेलू सिलेंडर के दाम 1000 से 1800 तक बढ़े, कॉमर्शियल सिलेंडर1900 से4000 पर।इंडक्शन की मांग 50% बढ़ी।सरकार ने कालाबाजारी रोकने और आपूर्ति बढ़ाने के निर्देश दिए।ऊर्जा संकट के बीच वैकल्पिक ईंधनों पर ध्यान केंद्रित।

  • 18 दिन का क्रूड, 21 दिन का पेट्रोल-डीजल, 12 दिन की गैस भारत पर पड़ सकता है गंभीर संकट..

    18 दिन का क्रूड, 21 दिन का पेट्रोल-डीजल, 12 दिन की गैस भारत पर पड़ सकता है गंभीर संकट..


    नई दिल्ली :पश्चिम एशिया में बढ़ता युद्ध ईरान और इजरायल/अमेरिका टकराव भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। ईरान ने आधिकारिक रूप से होर्मुज की खाड़ी बंद करने की चेतावनी दी है। अगर यह संघर्ष लंबे समय तक चलता है तो भारत को तेल, गैस और पेट्रोल-डीजल की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

    इंडस्ट्री और सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत के पास केवल 17-18 दिन की डिमांड के बराबर क्रूड स्टॉक है। वहीं पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति 20-21 दिन के लिए पर्याप्त है जबकि एलएनजी केवल 10-12 दिन का भंडार बचा है। भारत अपनी एलएनजी की करीब 90 फीसदी आपूर्ति खाड़ी देशों से करता है।

    आपात स्थिति से निपटने के लिए भारत सरकार ने कई उपायों पर काम शुरू कर दिया है। इनमें पेट्रोल और डीजल का एक्सपोर्ट रोकना, रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाना और एलपीजी की राशनिंग शामिल है। इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल ने कुछ चुनिंदा रिफाइनरीज में एलपीजी उत्पादन बढ़ाने की योजना बनाई है।

    पश्चिम एशिया संकट के चलते वैश्विक तेल और गैस कीमतों में उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड करीब 10 फीसदी बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया जबकि यूरोप में गैस वायदा की कीमत 40 फीसदी से अधिक उछली। सऊदी अरब की रास तानुरा रिफाइनरी और कतर के एनएनजी प्लांट पर हमलों के कारण उत्पादन अस्थायी रूप से बंद हो गया। होर्मुज की खाड़ी में टैंकरों की आवाजाही भी प्रभावित हुई।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईरान ज्यादा समय तक खाड़ी बंद रखता है तो भारत को तत्काल कदम उठाने होंगे। सबसे पहले पेट्रोल और डीजल का एक्सपोर्ट रोका जा सकता है। इसके अलावा एलपीजी की खपत सीमित करने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा। भारत ने हाल के महीनों में रूस से तेल की खरीद कम की है, लेकिन अगर वैश्विक सप्लाई संकट बढ़ता है तो रूस से आयात बढ़ाया जा सकता है।

    सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत की आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए इंडस्ट्री और पेट्रोलियम मंत्रालय लगातार आपूर्ति और डिमांड की समीक्षा कर रहे हैं। हालाँकि कुछ एनालिस्ट मानते हैं कि ईरान ज्यादा समय तक खाड़ी को बंद नहीं रख पाएगा और स्थिति जल्दी सामान्य हो सकती है।

    अगर संकट लंबा खिंचता है, तो भारत की रणनीति में बड़ा बदलाव होगा। पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए एक्सपोर्ट रोके जाएंगे, घरेलू उत्पादन बढ़ाया जाएगा और रूस से तेल की सप्लाई तेज़ी से बढ़ाई जाएगी। यह संकट यह भी दर्शाता है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा वैश्विक राजनीतिक घटनाओं से कितनी प्रभावित होती है और देश को आपात योजना हमेशा तैयार रखनी होगी।