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नई दिल्ली में एलपीजी व्यवस्था को लेकर न्यायिक टिप्पणी, नीति निर्धारण को कार्यपालिका का विषय बताया गया
नई दिल्ली :में एलपीजी सिलेंडर की कमी और कथित कालाबाजारी से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने इस याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस प्रकार के मामलों का समाधान न्यायपालिका के बजाय कार्यपालिका के स्तर पर किया जाना चाहिए। इस फैसले के बाद एलपीजी आपूर्ति और उससे जुड़े मुद्दों को लेकर चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है।याचिका में यह दावा किया गया था कि राजधानी में एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति में कमी के कारण आम लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और कई स्थानों पर कालाबाजारी के चलते उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। याचिकाकर्ता ने सरकार पर पर्याप्त कदम न उठाने का आरोप लगाते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की थी।सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि एलपीजी जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति, वितरण और मूल्य निर्धारण से जुड़े निर्णय सरकार और प्रशासनिक तंत्र के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि नीति निर्धारण और संसाधन प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर न्यायिक आदेश देना उचित नहीं होगा, क्योंकि यह कार्यपालिका की जिम्मेदारी है।न्यायालय ने यह टिप्पणी भी की कि सामाजिक और आर्थिक समस्याओं जैसे गरीबी, शिक्षा और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता से जुड़े विषयों का समाधान सरकार की नीतियों और योजनाओं के माध्यम से किया जाता है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि वह ऐसे मामलों में प्रशासनिक निर्णयों की जगह नहीं ले सकती, चाहे परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों।एलपीजी आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर हाल के समय में कुछ क्षेत्रों में अस्थायी बाधाएं और वितरण संबंधी शिकायतें सामने आई थीं, जिससे उपभोक्ताओं में असंतोष देखा गया। कुछ स्थानों पर कीमतों में अनियमितता और जमाखोरी की शिकायतें भी दर्ज की गई थीं, जिसके बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की गई थी। संबंधित एजेंसियों ने ऐसे मामलों में जांच और छापेमारी की प्रक्रिया भी अपनाई थी।अदालत के इस निर्णय के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि एलपीजी आपूर्ति और वितरण से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान सरकार और संबंधित विभागों द्वारा ही किया जाएगा। न्यायालय ने संकेत दिया कि ऐसे मामलों में नीति सुधार और प्रशासनिक दक्षता ही मुख्य समाधान का आधार हैं।यह फैसला इस बात को भी रेखांकित करता है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति जैसे विषयों में संतुलन बनाए रखना प्रशासनिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। इससे यह संदेश भी जाता है कि न्यायपालिका और कार्यपालिका की भूमिकाएं स्पष्ट रूप से अलग हैं और दोनों अपने अपने दायरे में कार्य करते हैं। -

देश में एलपीजी आपूर्ति स्थिर, डिजिटल सिस्टम से वितरण में बढ़ी पारदर्शिता..
नई दिल्ली:देश में रसोई गैस और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सामान्य बनी हुई है और किसी भी हिस्से से गैस की कमी की कोई आधिकारिक रिपोर्ट सामने नहीं आई है। सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार आपूर्ति श्रृंखला सुचारू रूप से काम कर रही है और उपभोक्ताओं को निर्बाध सेवा मिल रही है। इसके साथ ही गैस वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक लगभग 4.05 लाख पीएनजी कनेक्शन सक्रिय किए जा चुके हैं, जबकि करीब 4.41 लाख नए उपभोक्ताओं ने पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन किया है। यह आंकड़ा देश में स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ते रुझान को दर्शाता है, जहां नागरिक धीरे धीरे पाइप्ड गैस प्रणाली को अपनाने की ओर अग्रसर हैं। इससे एलपीजी सिलेंडर पर निर्भरता कम होने की उम्मीद भी जताई जा रही है।
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक रूप से ईंधन या गैस का भंडारण न करें। लोगों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक और सत्यापित जानकारी पर ही भरोसा करें तथा एलपीजी बुकिंग के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग करें, जिससे वितरण व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनी रहे।
डिजिटल प्रणाली के विस्तार के साथ ऑनलाइन एलपीजी बुकिंग का उपयोग अब लगभग 98 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि उपभोक्ता तेजी से तकनीक आधारित सेवाओं को अपना रहे हैं। इसके साथ ही डिलीवरी प्रक्रिया में सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड आधारित व्यवस्था का उपयोग भी व्यापक स्तर पर किया जा रहा है, जिससे गैस की वास्तविक डिलीवरी सुनिश्चित हो सके।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मौजूदा भू राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद घरेलू आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। विशेष रूप से अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और आवश्यक सेवाओं के लिए गैस आपूर्ति को बिना किसी बाधा के सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा उत्पन्न न हो।
एलपीजी की जमाखोरी और अवैध भंडारण पर रोक लगाने के लिए देशभर में सघन अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान हजारों स्थानों पर निरीक्षण किए गए हैं और बड़ी संख्या में अवैध सिलेंडर जब्त किए गए हैं। कई मामलों में कानूनी कार्रवाई की गई है, जिसमें एफआईआर दर्ज होना और संबंधित व्यक्तियों की गिरफ्तारी भी शामिल है।
वितरण व्यवस्था की निगरानी के तहत कई एलपीजी वितरकों पर कार्रवाई की गई है। नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना लगाया गया है, कुछ मामलों में चेतावनी दी गई है और गंभीर मामलों में लाइसेंस निलंबन जैसी कार्रवाई भी की गई है, ताकि उपभोक्ताओं को सुचारू और सुरक्षित सेवा मिलती रहे।
सरकारी रिफाइनरियों की स्थिति को लेकर भी यह स्पष्ट किया गया है कि सभी प्रमुख इकाइयां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं और देश में कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। इसके अलावा घरेलू मांग को पूरा करने के लिए एलपीजी उत्पादन भी बढ़ाया गया है, जिससे आपूर्ति प्रणाली मजबूत बनी रहे।
देश में ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था स्थिर है और सरकार का फोकस डिजिटल वितरण, पारदर्शिता और अवैध गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण के माध्यम से उपभोक्ताओं को सुरक्षित और निर्बाध सेवा देने पर केंद्रित है।
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सरकार का बयान: भारत के पास 60 दिन का कच्चे तेल भंडार, एलपीजी की एक महीने की पूरी व्यवस्था
नई दिल्ली: सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट कर दिया कि भारत में पेट्रोल, डीजल और ऑटोमोबाइल की दुकानें पूरी तरह से सुरक्षित और नियंत्रण में हैं। कोयला एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि देश में कहीं भी पौधों की कमी नहीं है और हर नागरिक के लिए लगभग दो महीने तक का अवशेष सुरक्षित है। मिनिस्ट्री ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर अफवाहों से नफरत न करें, क्योंकि उनका मकसद सिर्फ डर और भ्रम फैलाना है।कच्चे तेल का भंडार और प्रमुख तैयारी
मंत्रालय के अनुसार, भारत के पास कुल 74 दिनों के चिप्स और कच्चे तेल के भंडार की क्षमता है, जिसमें लगभग 60 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है। इसमें कच्चा तेल, पेट्रोल-डीजल और भंडारगृह शामिल हैं। मंत्रालय ने बताया कि देश अब 27वें दिन भी मध्य पूर्व तनाव के बावजूद पूरी तरह सुरक्षित है। इसके अलावा बाकी दो महीने के लिए कच्चे तेल की खरीद पहले से तय कर दी गई है, ताकि किसी भी समय वैश्विक संकट का असर न हो।क्वांटम नेटवर्क में पर्याप्त स्टॉक
सरकार ने कहा कि देश के सभी पेट्रोल पंपों में पर्याप्त मात्रा में कोयला मौजूद है। ऑयल कंपनी ने क्रेडिट अवधि मिलाकर तीन दिन कर दी है, जिससे किसी भी पंप पर काम करने वाले की कमी के कारण जंगल की कमी न हो। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बावजूद भारत अब 41 से अधिक देशों से कच्चा तेल मंगा रहा है और सभी रिफाइनरी 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं।लाभ की स्थिति और घरेलू उत्पाद
ईसाई धर्म का इतिहास भी पूरी तरह से सुरक्षित है। घरेलू उत्पादन में प्रतिदिन 40 प्रतिशत की वृद्धि कर 50 टी का उत्पादन किया जा रहा है, जबकि कुल आवश्यकता लगभग 80 टी की है। इसके अलावा, अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से 800 टिकट पहले ही भारत के 22 तीर्थ टर्मिनलों पर पहुंच चुके हैं। सरकार ने निर्देश दिया है कि कम से कम एक महीने की कीमत पर स्टॉक पूरी तरह से सुनिश्चित है और वितरण स्थिर है।ब्लैक मार्केटिंग निषेध का उपाय
तेल उद्योग प्रतिदिन 50 लाख से अधिक की कमाई कर रहे हैं। साथ ही, 50 प्रतिशत तक की कमाई के साथ अर्नेस्ट गैस स्टूडियो की मार्केटिंग ब्लैक को छोड़ी जा रही है। सरकारी पाइप्ड सिलिकॉन गैस (पीएनजी) को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो सस्ता, सुरक्षित और पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प है। देश में वीडियो नेटवर्क तेजी से बढ़ा है, और घरेलू कनेक्शन 25 लाख से बढ़कर 1.5 करोड़ हो गया है।सरकारी आधिकारिक संपत्ति पर भरोसा करें
मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे जल और गैस से जुड़ी जानकारी के लिए केवल सरकारी और आधिकारिक संपत्ति पर भरोसा करें। अफवाहों और सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही हंसी-मजाक वाली खबरों से डरने की कोई जरूरत नहीं है। भारत आने वाले कई महीनों तक पूरी तरह से सुरक्षित है, और हर नागरिक को पेट्रोल, डीजल और सुपरमार्केट की निरंतरता सुनिश्चित है। -

ईंधन की कीमतें स्थिर, LPG की आपूर्ति बनाए रखने के लिए सरकार के सभी प्रयास जारी
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने शुक्रवार को साफ किया कि आम आदमी के लिए इस्तेमाल होने वाले आम पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की गई है। सिर्फ प्रीमियम पेट्रोल के दाम बढ़ाए गए हैं, जो कुल बिक्री का सिर्फ 3-4 परसेंट हिस्सा बनता है।सरकार की ब्रीफिंग
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने डेली ब्रीफिंग में बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें कंट्रोल फ्री (डीरेगुलेटेड) हैं और इन्हें तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) द्वारा तय किया जाता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल के दाम 2 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा बढ़ा दिए हैं।एलपीजी सप्लाई बनी रहेगी
सुश्री शर्मा ने कहा कि देश में एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और कहीं भी गैस खत्म होने की स्थिति नहीं है। उत्पादन बढ़ाया गया है ताकि सप्लाई बेकार बनी रहे। हालांकि, उन्होंने माना कि भारत पूरी तरह ऊर्जा आत्मनिर्भर नहीं है और अभी भी आयात पर निर्भर है।स्थिति संभालने के लिए 13,700 से ज़्यादा पन्नों के कनेक्शन दिए गए हैं, ताकि एलपीजी पर दबाव कम हो सके। पिछले एक हफ़्ते में 11,300 टन कोयले की सप्लाई एलपीजी की सप्लाई की गई है। इसके अलावा, करीब 7,500 कंज्यूमर एलपीजी से पन्नों की ओर शिफ्ट हो चुके हैं।
उन्होंने बताया कि घबराहट में गैस बुकिंग में कमी आई है और एक दिन में लगभग 55 लाख रीफिल बुकिंग हुई हैं। सरकार लगातार सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए नए सोर्स तलाश रही है और राज्यों से सख्त निगरानी और डिस्ट्रीब्यूशन में बाधा न आने की अपील की गई है।
ईरान से तेल खरीद और समुद्री सुरक्षा
सुश्री शर्मा ने ईरान से तेल खरीदने के सवाल पर कहा कि इस पर इंतज़ार कुछ भी कहना मुश्किल है। वहीं, पट्टन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि पिछले 24 घंटे में कोई समुद्री घटना नहीं हुई है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के आसपास मौजूद 22 भारतीय जहाज और सभी नाविक सुरक्षित हैं।अंतरराष्ट्रीय तनाव और घरेलू स्थिति
पश्चिम एशिया में तनाव और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच सरकार ने यह संदेश दिया है कि साधारण पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रखीं। वहीं, प्रीमियम पेट्रोल पर हुई मामूली बढ़ोतरी केवल उच्च ऑक्टेन वाले महंगाई पर असर डाल सकती है। सरकार के प्रयास यह सुनिश्चित करने के लिए हैं कि ऊर्जा आपूर्ति लगातार बनी रहे और घरेलू बाजार में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी न आए। -

भारत ने अमेरिका समेत कई देशों से बढ़ाया LPG आयात, सप्लाई पूरी तरह सामान्य
नई दिल्ली। केंद्र सरकार की ओर से मंगलवार को कहा गया कि भारत ने अमेरिका सहित कई देशों से एलपीजी को आयात करना शुरू कर दिया है। साथ ही बताया कि देश में आपूर्ति सामान्य बनी हुई है और किसी भी एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर से गैस खत्म होने की रिपोर्ट नहीं मिली है।पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की विपणन एवं तेल रिफाइनरी संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बताया कि अधिकांश एलपीजी खाड़ी देशों से आ रही है। शर्मा ने कहा, “हमारी तेल कंपनियों ने अमेरिका से एलपीजी लेना शुरू कर दिया है। सरकार एलपीजी के स्रोतों में विविधता लाने के लिए भी हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने आगे कहा, “विविधीकरण बढ़ने के कारण आज हमें अधिक कच्चा तेल मिल रहा है।
राज्यों द्वारा वितरण कार्य फिर से शुरू करने के साथ ही वाणिज्यिक एलपीजी आपूर्ति भी आंशिक रूप से बहाल हो गई है। घरेलू एलपीजी की मांग पर दबाव कम करने के लिए केरोसिन और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग भी शुरू कर दिया गया है।
शर्मा ने बताया कि घबराहट के कारण बढ़ी मांग में कमी आ रही है और बुकिंग में गिरावट देखी जा रही है। 13 मार्च को 89 लाख बुकिंग दर्ज की गई थीं, जो आज घटकर 70 लाख रह गई हैं।
उन्होंने कहा कि एलपीजी रिफिल वितरण दर संघर्ष से पहले जैसी ही है और उन्होंने उपभोक्ताओं से जमाखोरी और कालाबाजारी से खरीददारी से बचने का आग्रह किया।
मंत्रालय के अनुसार, ईंधन की उपलब्धता स्थिर बनी हुई है, रिफाइनरियां पूरी क्षमता से चल रही हैं और पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार है।शर्मा ने कहा, “किसी भी एलपीजी वितरक के पास ईंधन की कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को आपूर्ति सुचारू रूप से जारी है। साथ ही, डिजिटल प्लेटफॉर्मों की ओर बढ़ते रुझान से बुकिंग में सुधार हुआ है।
इस बीच, भारतीय ध्वज वाला एलपीजी टैंकर ‘नंदा देवी’ मंगलवार को गुजरात के वडीनार बंदरगाह पर पहुंचा, जो इस सप्ताह पश्चिमी तट पर पहुंचने वाला दूसरा एलपीजी वाहक बन गया। इससे एक दिन पहले ‘शिवालिक’ मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचा था।
दोनों जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर बेहद जोखिम भरे मार्ग से गुजरने के बाद भारत को महत्वपूर्ण एलपीजी आपूर्ति पहुंचा रहे थे। होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान- अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष के कारण समुद्री यातायात बाधित है।
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एलपीजी आपूर्ति को लेकर राहत, छापेमारी के बीच सिलेंडर बुकिंग घटी और ऑनलाइन बुकिंग बढ़ी
नई दिल्ली: देश में एलपीजी की उपलब्धता को लेकर बनी आशंकाओं के कम होने और सरकार द्वारा जमाखोरी तथा ब्लैक मार्केटिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई के बाद गैस सिलेंडर की बुकिंग में गिरावट दर्ज की गई है। सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।सरकारी सूचना एजेंसी पीआईबी इंडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि 14 मार्च को एलपीजी सिलेंडर की कुल 77 लाख बुकिंग दर्ज की गई। इससे एक दिन पहले यानी 13 मार्च को यह आंकड़ा 88.8 लाख था। इससे स्पष्ट है कि घबराहट में की जा रही बुकिंग अब कम हो रही है।
बयान में यह भी बताया गया कि एलपीजी बुकिंग में ऑनलाइन माध्यम की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। अब कुल बुकिंग का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा डिजिटल माध्यम से किया जा रहा है, जबकि इससे पहले यह 84 प्रतिशत था। साथ ही किसी भी एलपीजी वितरक के पास गैस खत्म होने की कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए कई राज्यों में छापेमारी अभियान चलाया है। इसके साथ ही 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थिति की निगरानी के लिए नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किए गए हैं ताकि गैस आपूर्ति व्यवस्था पर नजर रखी जा सके।
सरकार ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे घबराकर सिलेंडर की बुकिंग न करें और अधिकतर मामलों में डिजिटल बुकिंग प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करें। साथ ही एलपीजी वितरकों के पास अनावश्यक रूप से जाने से भी बचने की सलाह दी गई है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि सरकार घरेलू उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता दे रही है और एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। खास तौर पर घरों के अलावा अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए गैस आपूर्ति को बनाए रखा जा रहा है।
एलपीजी की मांग को पूरा करने के लिए आयात और आपूर्ति व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। इसी क्रम में भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी वाहक जहाज शिवालिक और नंदा देवी लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं और भारत की ओर बढ़ रहे हैं। इनमें से एक जहाज सोमवार को मुंद्रा बंदरगाह और दूसरा मंगलवार को कांडला बंदरगाह पहुंचने की संभावना है।
सरकार का कहना है कि देश में एलपीजी की पर्याप्त आपूर्ति मौजूद है और उपभोक्ताओं को किसी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
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ऊर्जा आपूर्ति को राहत: होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर गया एलपीजी लेकर आ रहा ‘नंदा देवी’ जहाज
नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई हैभारत आने वाला जहाज ‘नंदा देवी’ भी दुनिया का सबसे पवित्र समुद्री जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित बाहर निकल गया है। इससे पहले क्रूज़ लेकर आने वाला जहाज ‘शिवालिक’ भी इसी जलडमरूमध्य को मजबूती से पार कर चुका है।सरकारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, क्षेत्र में जारी संघर्ष और सुरक्षा के बावजूद दोनों पार्टिसिपेंट्स के सीक्वल पर नजर रखी जा रही थी। ईरान की ओर से प्रामाणिक बैठक के बाद इन साथियों को सुरक्षित मार्ग दिया गया, ताकि वे इस नामित समुद्री मार्ग को पार कर सकें।
46 हजार टन से अधिक वजन लेकर आ रही हैं ‘नंदा देवी’
आधिकारिक तौर पर जहाज ‘नंदा देवी’ भारत के लिए 46,000 मक्के टन से अधिक कोयला लेकर आ रहा है। यह घरेलू गैस और औद्योगिक इंजीनियरों के लिए बेहद अहम मानी जाती है। ऐसे समय में जब मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा है, इस जहाज का सुरक्षित नेतृत्व भारत की ऊर्जा सुरक्षा के महत्व से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।दूसरी ओर भारतीय नौसेना की सुरक्षा में जहाज ‘शिवालिक’ को भारत लाया जा रहा है। फर्जी का कहना है कि अगले दो दिन में आप किसी भी भारतीय पोर्ट पर पहुंच सकते हैं। संभावना है कि यह जहाज मुंबई या कांडला पोर्ट पर स्थित होगा। समुद्री जहाज खुले समुद्र में पहुंच चुका है और नौसेना की दिशा में सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ रहा है।
मोदी और ईरानी राष्ट्रपति के बीच हुई अहम बातचीत
इन खिलाड़ियों की सुरक्षित छुट्टियों के पीछे उच्च सरकारी छात्रवृत्ति का प्रयास भी अहम रहे हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान के बीच माल और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अहम बातचीत हुई। इसके बाद बच्चों को सुरक्षित मार्ग मिलने का रास्ता साफ हो गया।ईरान ने भारतीय खिलाड़ियों को संकेत के संकेत दिए थे सुरक्षित मार्ग
इस बीच भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने भी संकेत दिया कि बढ़ते तनाव के बावजूद भारतीय छात्रों को जल्द ही होर्मुज जल्दरूमध्य से सुरक्षित मार्ग मिल सकता है। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के इस क्षेत्र में साझा हित हैं और दोनों देशों के बीच सहयोग जारी है। राजदूत ने यह भी कहा कि भारत ने युद्ध के बाद की स्थिति में विभिन्न क्षेत्रों में ईरान की मदद की है, इसलिए दोनों देशों के संबंध मजबूत बने हैं।इससे एक दिन पहले ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रावंची ने भी कहा था कि तेहरान ने कुछ देशों के सहयोगियों को इस समुद्री मार्ग से यात्रा की अनुमति दे दी है।
दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा समुद्री मार्ग
होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री परिवहन परिवहन में से एक माना जाता है। वैश्विक स्तर पर करीब 20 फीसदी तेल और गैस के सहयोगियों का इसी रास्ते से दबदबा है। यही कारण है कि यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और व्यापार को प्रभावित कर सकता है।फारस की खाड़ी में 28 भारतीय खिलाड़ियों की निगरानी
इस बीच बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने बताया कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में इस समय भारतीय ध्वज वाले 28 जहाज मौजूद हैं। इन कर्मचारियों और उनके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है।जानकारी के अनुसार इन खिलाड़ियों में से 24 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में मौजूद हैं, जिन पर 677 भारतीय नाविक सवार हैं। वहीं 4 जहाज जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्सों में हैं, जिनमें 101 भारतीय नाविक इंजीनियर शामिल हैं।
विशेषज्ञ का मानना है कि भारत की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिर स्थिति में भारत की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति शामिल है। ऐसे में ‘नंदा देवी’ और ‘शिवालिक’ का सुरक्षित बाहर जाना भारत के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
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ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का फोकस, वैकल्पिक मार्गों से LPG-LNG की आपूर्ति सुनिश्चित
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के बीच भारत ने एलपीजी और एलएनजी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं। देश में कुकिंग गैस की संभावित कमी को लेकर सामने आई रिपोर्ट्स के बीच सरकार ने वैकल्पिक आयात मार्गों और नए स्रोतों से गैस आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, विभिन्न देशों और वैकल्पिक समुद्री मार्गों से प्राप्त की गई एलपीजी और एलएनजी की खेप जल्द ही भारत पहुंचने वाली है, जिससे घरेलू बाजार में आपूर्ति संतुलित बनी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बावजूद भारत की यह रणनीति घरेलू उपभोक्ताओं और उद्योगों दोनों के लिए राहत देने वाली साबित हो सकती है।घरेलू रिफाइनरियों ने बढ़ाया एलपीजी उत्पादन
सरकार द्वारा तेल कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए जाने के बाद देश की रिफाइनरियों ने एलपीजी उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की है। अधिकारियों के अनुसार भारतीय रिफाइनरियों ने कुकिंग गैस के घरेलू उत्पादन में करीब 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है। इसका उद्देश्य संभावित आयात बाधाओं के बावजूद देश में गैस की उपलब्धता बनाए रखना है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ाने से आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है और बाजार में कीमतों पर भी नियंत्रण बनाए रखने में सहूलियत होती है।जामनगर रिफाइनरी में उत्पादन बढ़ाने पर जोर
देश की सबसे बड़ी निजी ऊर्जा कंपनी Reliance Industries Limited ने भी इस दिशा में अहम कदम उठाए हैं। कंपनी का Jamnagar Refinery परिसर कुकिंग गैस एलपीजी के उत्पादन को अधिकतम स्तर तक पहुंचाने के लिए काम कर रहा है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों में जारी अस्थिरता के बीच भारतीय घरों के लिए जरूरी ईंधनों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। कंपनी के अनुसार जामनगर स्थित रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल्स कॉम्प्लेक्स में उत्पादन बढ़ाने के लिए संचालन को लगातार अनुकूलित किया जा रहा है और टीमें चौबीसों घंटे काम कर रही हैं।केजी-डी6 गैस से भी मिलेगी मदद
कंपनी ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय ऊर्जा प्राथमिकताओं और सरकारी दिशानिर्देशों के अनुरूप KG‑D6 Basin से उत्पादित प्राकृतिक गैस को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की आपूर्ति के लिए डायवर्ट किया जाएगा। इससे घरेलू गैस वितरण नेटवर्क को मजबूती मिलेगी और शहरों में पाइप्ड गैस और सीएनजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू गैस उत्पादन का बेहतर उपयोग देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।सरकार ने नागरिकों को किया आश्वस्त
इस बीच केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात स्रोतों में विविधता ला रहा है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद देश विभिन्न देशों और मार्गों से ऊर्जा आयात प्राप्त कर रहा है। इससे देश में ईंधन की उपलब्धता स्थिर बनी हुई है और आम नागरिकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।सीएनजी और पीएनजी आपूर्ति भी सामान्य
सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को सीएनजी और पीएनजी की आपूर्ति बिना किसी बाधा के जारी रहे। अधिकारियों के अनुसार शहरों में गैस वितरण कंपनियों को पर्याप्त मात्रा में गैस उपलब्ध कराई जा रही है ताकि वाहनों के लिए सीएनजी और घरों में पीएनजी की आपूर्ति प्रभावित न हो। इसके साथ ही आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए गैस वितरण का प्रबंधन किया जा रहा है।उद्योगों को भी मिल रही पर्याप्त गैस
भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद उद्योगों को भी गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा मिल रहा है। सरकार के अनुसार उद्योगों को उनकी कुल गैस आवश्यकताओं का लगभग 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे उत्पादन गतिविधियों पर अधिक असर नहीं पड़ने की संभावना है। सरकार का कहना है कि देश भर में ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का फोकस
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार देश के हर घर तक सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। वैकल्पिक आयात स्रोतों की तलाश, घरेलू उत्पादन में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने जैसे कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम साबित होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार इन उपायों से वैश्विक संकट के बावजूद भारत में गैस आपूर्ति स्थिर रहने की उम्मीद है। -

कुकिंग गैस पर सरकार का बड़ा फैसला, PNG और LPG की निर्बाध सप्लाई के आदेश
नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति में संभावित बाधाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने Essential Commodities Act (ईसीए) के तहत अहम आदेश जारी किए हैं। इस आदेश के तहत घरेलू रसोई के लिए Piped Natural Gas (PNG), परिवहन के लिए Liquefied Petroleum Gas (LPG) और Compressed Natural Gas (CNG) की आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है।होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा से बढ़ी चिंता
सरकार के आकलन के अनुसार मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण Strait of Hormuz के रास्ते आने वाले Liquefied Natural Gas (LNG) के शिपमेंट में बाधा आई है। कुछ आपूर्तिकर्ताओं ने फोर्स मेज्योर की घोषणा भी की है, जिसके तहत सीमित आपूर्ति को पहले प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में भेजा जा रहा है।रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश
सरकार ने रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत प्रमुख हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम को भी एलपीजी पूल में भेजने के लिए कहा गया है, ताकि घरेलू जरूरतों को पूरा किया जा सके।उर्वरक संयंत्रों के लिए गैस आपूर्ति तय
आदेश के अनुसार प्राथमिकता क्षेत्र-2 में आने वाले उर्वरक संयंत्रों को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति उनके पिछले छह महीनों की औसत खपत के 70 प्रतिशत तक सुनिश्चित की जाएगी।साथ ही यह भी कहा गया है कि इन संयंत्रों को गैस का इस्तेमाल केवल उर्वरक उत्पादन के लिए ही करना होगा। इसके लिए उन्हें प्रमाण पत्र Petroleum Planning and Analysis Cell (PPAC) को जमा करना होगा।
उद्योगों को भी सीमित आपूर्ति जारी रहेगी
गैस मार्केटिंग कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि प्राथमिकता क्षेत्र-1 में आने वाले चाय उद्योग, विनिर्माण इकाइयों और अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को राष्ट्रीय गैस ग्रिड के माध्यम से गैस की आपूर्ति जारी रखी जाए।इन उपभोक्ताओं को परिचालन उपलब्धता के आधार पर पिछले छह महीनों की औसत गैस खपत के 80 प्रतिशत तक गैस आपूर्ति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
सिटी गैस नेटवर्क को भी निर्देश
आदेश में यह भी कहा गया है कि City Gas Distribution (CGD) नेटवर्क संचालित करने वाली कंपनियां अपने नेटवर्क से जुड़े औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को भी औसत खपत का लगभग 80 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराएं।सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य ऊर्जा आपूर्ति में संभावित संकट के बीच घरेलू और आवश्यक क्षेत्रों में गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, ताकि आम लोगों की रसोई और जरूरी उद्योगों पर इसका असर कम से कम पड़े।